# दुर्गा पूजा के बाजार में तसर कटवर्क सिल्क साड़ियों की भारी मांग, भागलपुर से मुंबई और दक्षिण भारत तक पहुंचे ऑर्डर

> सिल्क सिटी भागलपुर में बुनकरों द्वारा तैयार तसर कटवर्क साड़ियां दुर्गा पूजा के फेस्टिव सीजन में खूब पसंद की जा रही हैं, जिनकी शुरुआती कीमत 4 हजार रुपये है।

**Type:** article · **Category:** फैशन · **Published:** 2026-10-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/fashion/durga-puja-ke-bajara-men-tussar-cutwork-silk-sariyon-ki-bhari-manga-bhagalpur-se-mumbai-aura-south-india-taka-pahunche-rdara-47372 · **Language:** Hindi
**Tags:** भागलपुर सिल्क, तसर कटवर्क, सिल्क साड़ी, दुर्गा पूजा फैशन, हथकरघा उद्योग, बिहार हैंडलूम

त्योहारी सीजन में पारंपरिक परिधानों की मांग तेजी से बढ़ने लगी है, और इसमें बिहार के भागलपुर का प्रसिद्ध सिल्क उद्योग सबसे आगे नजर आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिल्क सिटी के रूप में मशहूर इस शहर में तैयार होने वाली नई-नई डिजाइनों की साड़ियों ने एक बार फिर फैशन बाजार में खास जगह बनाई है। स्थानीय उद्योग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां के पारंपरिक बुनकर ही खुद कपड़ों के मुख्य डिजाइनर भी होते हैं। कारीगरों की इसी मौलिक सोच और समझ की वजह से यहां बनने वाली साड़ियों के पैटर्न बाजार के बाकी वस्त्रों से पूरी तरह अलग और विशिष्ट दिखाई देते हैं।

## तसर और शहतूत सिल्क में नया प्रयोग
क्षेत्रीय सिल्क उद्योग के भीतर जब भी किसी कपड़े की सबसे अधिक मांग होती है, तो उसमें तसर और शहतूत सिल्क का नाम सबसे पहले आता है। इन किस्मों पर अलग-अलग स्वरूप की अनगिनत साड़ियां लगातार बुनी जाती हैं। वर्तमान में सबसे ताजा और चर्चित ट्रेंड की बात करें तो तसर कटवर्क की साड़ियां ग्राहकों के बीच बेहद लोकप्रिय हो रही हैं। इस नए चलन के संदर्भ में स्थानीय बुनकर हेमंत कुमार ने बताया, "यहां पुराने डिजाइन को नए वर्जन में लाया जाता है।" पारंपरिक शिल्पकला को आधुनिक मांग के हिसाब से ढालने की इसी कला से साड़ियों को नया रूप मिल रहा है।

## कटवर्क की बुनावट और निर्माण प्रक्रिया
तसर के कपड़ों पर वैसे तो कई पारंपरिक डिजाइन पहले से ही मौजूद हैं, लेकिन वर्तमान समय में तसर कटवर्क का पैटर्न फिर से बड़े चलन में लौट आया है। इस विशेष शैली में मुख्य रूप से साड़ी के बॉर्डर पर विभिन्न प्रकार की सुंदर नक्काशी और डिजाइन तैयार की जाती है। इस काम को पूरा करने के लिए कुछ हिस्सों में हाथों की बारीक कारीगरी का सहारा लिया जाता है, जबकि कुछ पैटर्न विशेष मशीनों से उकेरे जाते हैं। क्षेत्र में कटवर्क की खास मशीनें लगाई गई हैं, जिन पर यह आकर्षक डिजाइन काफी सफाई के साथ बुनी जाती है। दुर्गा पूजा जैसे बड़े उत्सवों में पारंपरिक और शालीन लुक चाहने वाली महिलाओं के लिए यह एक बेहतर और फैशनेबल विकल्प बनकर उभरा है।

## कीमत और बड़े शहरों से आ रहे ऑर्डर
बाजार की अन्य सामान्य साड़ियों की तुलना में शुद्ध सिल्क के परिधान अधिक मूल्यवान होते हैं। इसके बावजूद तसर कटवर्क साड़ियों को उचित मूल्य सीमा के भीतर उपलब्ध कराया जा रहा है। इस श्रृंखला की साड़ियों की शुरुआती कीमत 4 हजार रुपये रखी गई है, जो विभिन्न वैरायटी और कारीगरी के आधार पर 6 हजार रुपये तक जाती है। त्योहारी मांग का आलम यह है कि हाल के दिनों में दक्षिण भारत और मुंबई जैसे बड़े व्यापारिक केंद्रों से इन साड़ियों के बड़े ऑर्डर प्राप्त हुए हैं। मुंबई के आर्डरों की खेप भेजी भी जा चुकी है, जहां से महिलाओं की ओर से इस परिधान को काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।

## इसका आप पर असर
पारंपरिक सिल्क साड़ियों की बढ़ती मांग से त्योहारी खरीदारी करने वाले ग्राहकों और हथकरघा बुनकरों दोनों को सीधा लाभ मिल रहा है।

- **खरीदारों के लिए:** दुर्गा पूजा और त्योहारी सीजन के लिए तसर कटवर्क साड़ी 4,000 से 6,000 रुपये के बजट में एक किफायती और आकर्षक सिल्क विकल्प प्रस्तुत करती है। इसमें पारंपरिक लुक के साथ आधुनिक बॉर्डर डिजाइन का मेल मिलता है।
- **भागलपुर के बुनकरों के लिए:** मुंबई और दक्षिण भारत से आने वाले बड़े ऑर्डरों से स्थानीय कारीगरों को सीधा रोजगार और बेहतर आय मिल रही है। तैयार माल की त्वरित आपूर्ति से स्थानीय सिल्क बाजार की तरलता में सुधार हो रहा है।
- **शहरी उपभोक्ताओं के लिए:** मेट्रो शहरों के खरीदारों को सीधे उत्पादन केंद्र से तैयार प्रामाणिक सिल्क परिधान उपलब्ध हो रहे हैं। इससे त्योहारों के दौरान पारंपरिक भारतीय हथकरघा उत्पादों को बढ़ावा मिल रहा है।
- **कपड़ा व्यापारियों के लिए:** थोक और खुदरा कपड़ा विक्रेताओं को त्योहारी सीजन के लिए नया और ट्रेंडी स्टॉक मिल रहा है। कटवर्क साड़ियों की उच्च मांग से बिक्री की गति में तेजी आने की संभावना है।

## ऐसा क्यों हुआ
पारंपरिक सिल्क साड़ियों के डिजाइन में आधुनिकीकरण और आगामी दुर्गा पूजा उत्सव के कारण तसर कटवर्क की मांग में अचानक तेजी दर्ज की गई है।

- **त्योहारी मांग और पारंपरिक आकर्षण:** दुर्गा पूजा के अवसर पर महिलाएं पारंपरिक परिधानों को प्राथमिकता देती हैं, जिससे सिल्क आधारित साड़ियों की मौसमी मांग बहुत बढ़ जाती है। तसर कटवर्क का पारंपरिक और सुरुचिपूर्ण स्वरूप इस जरूरत को पूरा करता है।
- **पुरानी डिजाइनों का आधुनिक रूपांतरण:** स्थानीय कारीगरों ने पुरानी पारंपरिक शैलियों को नए जमाने के कटवर्क पैटर्न के साथ जोड़कर एक नया उत्पाद पेश किया। इस प्रयोग ने युवा और शहरी ग्राहकों का ध्यान तेजी से आकर्षित किया है।
- **मशीन और हाथ की कारीगरी का संयोजन:** कार्यशालाओं में कटवर्क मशीनों की उपलब्धता से काम की गति और फिनिशिंग दोनों बेहतर हुई हैं। इसने कारीगरों को बड़े ऑर्डरों को समय पर पूरा करने की क्षमता प्रदान की है।
- **बाहरी बाजारों से जुड़ाव:** दक्षिण भारत और मुंबई के थोक खरीदारों द्वारा समय पर ऑर्डर दिए जाने से उत्पाद को व्यापक बाजार मिला। इससे यह क्षेत्रीय उत्पाद राष्ट्रीय स्तर पर बिकने लगा।

## सवाल-जवाब

### 1. तसर कटवर्क साड़ियों की शुरुआती कीमत क्या है?
भागलपुर में तैयार होने वाली तसर कटवर्क साड़ियों की शुरुआती कीमत 4,000 रुपये है, जो 6,000 रुपये तक जाती है।

### 2. भागलपुर की सिल्क साड़ियों की क्या विशेषता है?
भागलपुर में बुनकर स्वयं कपड़ों के मुख्य डिजाइनर होते हैं, जिससे यहां की साड़ियों की डिजाइन बिल्कुल अनोखी और अलग होती है।

### 3. तसर कटवर्क साड़ी पर डिजाइन किस तरह तैयार की जाती है?
यह डिजाइन साड़ी के बॉर्डर पर बनाई जाती है, जिसे कुछ हाथ की कारीगरी से और कुछ विशेष मशीनों की मदद से पूरा किया जाता है।

### 4. हाल ही में इन साड़ियों के ऑर्डर किन क्षेत्रों से मिले हैं?
इन साड़ियों के लिए दक्षिण भारत और मुंबई से बड़े ऑर्डर मिले हैं, जिनमें से मुंबई का ऑर्डर भेजा भी जा चुका है।

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