4 सितंबर को मनाया जाएगा जन्माष्टमी का पावन पर्व, रोहिणी नक्षत्र में पूजा और व्रत के लिए पंडित हरिमोहन शर्मा ने दिए खास नियम 4 सितंबर 2026 को भाद्रपद कृष्ण अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र के दुर्लभ संयोग में जन्माष्टमी मनाई जाएगी। इस पावन अवसर पर करौली के पंडित हरिमोहन शर्मा ने व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए मन, वाणी और आचरण से जुड़े जरूरी नियम साझा किए हैं। भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर आने वाला जन्माष्टमी पर्व इस बार 4 सितंबर 2026, दिन शुक्रवार को बेहद ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य दिवस के रूप में प्रसिद्ध इस पावन पर्व को लेकर कृष्ण भक्तों में विशेष उमंग देखी जा रही है। इस पावन दिन पर देश भर के प्रसिद्ध मंदिरों से लेकर घर-घर तक लड्डू गोपाल और भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना, श्रृंगार और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। मध्य रात्रि के समय यानी ठीक रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की मुख्य पूजा संपन्न होगी और महाआरती के साथ प्रसाद वितरित किया जाएगा। पंचांग की गणनाओं के अनुसार, इस वर्ष जन्माष्टमी के दिन रोहिणी नक्षत्र का भी बेहद शुभ और विशेष संयोग निर्मित हो रहा है, जिससे इस व्रत का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है। अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के शुभ संयोग में पूजा का विधान सनातन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जन्माष्टमी का दिन भगवान श्रीकृष्ण के इस धरा पर अवतरण का महापर्व है। यही वजह है कि लाखों श्रद्धालु इस पूरे दिन अन्न-जल त्यागकर अथवा फलाहार लेकर व्रत का पालन करते हैं और दिन भर भगवान की भक्ति में लीन रहते हैं। इस बार 4 सितंबर 2026 की रात तक अष्टमी तिथि विद्यमान रहेगी, और साथ ही रोहिणी नक्षत्र का भी शुभ योग बना रहेगा। श्रद्धालु पूरे दिन भजन, कीर्तन और श्रीकृष्ण नाम का निरंतर जप करते हैं। रात को मध्य रात्रि में कान्हा के जन्म के समय शंखनाद, घड़ियाल और आरती के साथ जन्मोत्सव मनाया जाता है। इसके पश्चात अनेक श्रद्धालु भगवान की आरती उतारकर और पंचामृत तथा पंजीरी का भोग लगाकर अपना उपवास खोलते हैं। हालांकि शास्त्र कहते हैं कि उपवास के साथ-साथ व्यवहार की पवित्रता और आत्मिक शुद्धि ही व्रत का वास्तविक फल प्रदान करती है। केवल भोजन छोड़ना व्रत नहीं: पंडित हरिमोहन शर्मा का आध्यात्मिक संदेश करौली के जाने-माने आध्यात्मिक गुरु पंडित हरिमोहन शर्मा ने जन्माष्टमी के व्रत के नियम समझाते हुए बताया है कि उपवास का अर्थ केवल पेट खाली रखना या भोजन न करना नहीं होता है। उनके अनुसार वास्तविक व्रत तब पूरा होता है जब व्यक्ति अपने मन, अपनी वाणी और अपने विचारों पर पूर्ण संयम रखे। पंडित हरिमोहन शर्मा ने स्पष्ट किया कि यदि कोई भक्त श्रीकृष्ण की प्रसन्नता के लिए जन्माष्टमी का उपवास रख रहा है, तो उसे उस पूरे दिन किसी भी व्यक्ति की निंदा करने, पीठ पीछे बुराई करने अथवा किसी का अपमान करने से पूरी तरह बचना चाहिए। सामान्य दिनचर्या में जाने-अनजाने मनुष्य से दूसरों की आलोचना या कड़वे शब्द निकल जाते हैं, लेकिन जन्माष्टमी जैसे पवित्र और आध्यात्मिक अवसर पर ऐसे अनुचित व्यवहार से दूरी बनाना अत्यंत आवश्यक है। भक्त को चाहिए कि वह अपने चित्त को शांत रखे और निर्मल मन से केवल कान्हा के स्वरूप का ध्यान करे। दिन भर श्रीकृष्ण नाम का जप और क्रोध से दूरी बनाए रखने की सलाह पंडित हरिमोहन शर्मा ने श्रद्धालुओं को सलाह दी है कि जन्माष्टमी के पावन अवसर पर सुबह से लेकर रात के पूजन तक अपना ध्यान पूरी तरह भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में लगाए रखें। दिन में जब भी खाली समय मिले, शांत बैठकर श्रीकृष्ण के पावन नाम का जप करें, मधुर भजन सुनें या कीर्तन में भाग लें। उनका कहना है कि भगवान की सच्ची भक्ति केवल पूजा सामग्री एकत्र करने या कठिन उपवास रखने तक सीमित नहीं होती। भगवान भाव के भूखे हैं, इसलिए स्वच्छ मन, पवित्र भावना और अनुशासित आचरण के साथ प्रभु का स्मरण करना ही सच्ची भक्ति है। जन्माष्टमी के दिन किसी के प्रति मन में ईर्ष्या, द्वेष या गलत भावना न लाएं, और विशेष रूप से क्रोध करने से बचें। अपने व्यवहार को संयमित रखकर जब पूजा की जाएगी, तभी जन्माष्टमी व्रत का पूर्ण पुण्य फल प्राप्त होगा। इसका आप पर असर यह धार्मिक समाचार जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए पूजा विधि और आचरण सुधार के व्यावहारिक निर्देश प्रदान करता है। • श्रद्धालुओं के लिए: व्रत रखने वाले भक्त केवल फलाहार या निर्जला उपवास पर निर्भर न रहें, बल्कि मानसिक संयम भी बरतें। इससे व्रत का पूर्ण धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ मिलता है। • दैनिक व्यवहार पर प्रभाव: जन्माष्टमी के दिन निंदा, बुराई और क्रोध से दूर रहने की सलाह से पारिवारिक और सामाजिक माहौल में शांति बनी रहती है। लोग अपने आचरण पर ध्यान देते हैं। • पूजा समय योजना: 4 सितंबर 2026 की रात को मध्य रात्रि 12 बजे भगवान कृष्ण के जन्म की मुख्य पूजा का समय तय कर श्रद्धालु अपने उपवास और पारण का शेड्यूल सही तरीके से बना सकते हैं। • धार्मिक आयोजनों के लिए: मंदिरों और घरों में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के शुभ योग को ध्यान में रखकर भजन-कीर्तन का समय पहले से नियोजित किया जा सकता है। सवाल-जवाब 1. 2026 में जन्माष्टमी का त्योहार किस तारीख को मनाया जाएगा? जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। 2. जन्माष्टमी पर इस बार कौन सा विशेष संयोग बन रहा है? इस बार जन्माष्टमी पर भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का विशेष शुभ संयोग बन रहा है। 3. भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की मुख्य पूजा का समय क्या रहेगा? जन्माष्टमी की मुख्य पूजा और जन्मोत्सव 4 सितंबर 2026 की मध्य रात्रि यानी रात 12 बजे आयोजित किया जाएगा। 4. करौली के पंडित हरिमोहन शर्मा के अनुसार व्रत में कौन सी गलती नहीं करनी चाहिए? व्रत के दौरान केवल भोजन छोड़ना ही काफी नहीं है; किसी की निंदा, बुराई, अपमान या क्रोध करने से बचना चाहिए। 5. जन्माष्टमी व्रत के दौरान दिनभर श्रद्धालुओं को क्या करना चाहिए? श्रद्धालुओं को दिनभर शांत मन से भगवान श्रीकृष्ण के नाम का जप, भजन और कीर्तन करना चाहिए। प्रेरणा और सबक जन्माष्टमी के व्रत से मिलने वाले आत्म-नियंत्रण और शुद्ध आचरण के प्रेरणादायक सबक जीवन में अपनाए जा सकते हैं। • वाणी पर संयम: किसी की निंदा या बुराई न करने का संकल्प दैनिक जीवन में रिश्तों को मजबूत और सकारात्मक बनाता है। • क्रोध और द्वेष का त्याग: मन से गुस्सा और नकारात्मकता निकालने से आंतरिक शांति और मानसिक स्पष्टता प्राप्त होती है। • सच्ची भक्ति का भाव: दिखावे या केवल कर्मकांड की जगह पवित्र भावना और अच्छे आचरण को प्राथमिकता देना ही असली सफलता है। • निरंतर ध्यान और एकाग्रता: दिन भर नाम जप करने से मन की चंचलता दूर होती है और कार्यक्षमता में सुधार आता है। https://trendkia.com/festivals/4-sitnbara-ko-manaya-jaega-janmashtami-ka-pavana-parva-rohini-nakshatra-men-puja-aura-vrata-ke-lie-pandit-harimohan-sharma-ne-die--26435 TrendKia — Har trend, sabse pehle.