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  "title": "अजा एकादशी व्रत को लेकर कन्फ्यूजन दूर, 7 सितंबर को बनेंगे कई शुभ योग",
  "summary": "भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि दो दिनों में बंटने से अजा एकादशी की तारीख को लेकर कन्फ्यूजन बना हुआ है, लेकिन उदयातिथि के हिसाब से व्रत 7 सितंबर को ही रखा जाएगा और इस दिन कई दुर्लभ शुभ योग भी बन रहे हैं।",
  "content": "हिंदू पंचांग में भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अजा एकादशी कहा जाता है, और साल 2026 में सितंबर की तारीखों को लेकर व्रती लोगों के मन में असमंजस बना हुआ है। दरअसल एकादशी तिथि दो दिनों में बंट रही है, जिसके चलते कुछ लोग इसे 6 सितंबर तो कुछ 7 सितंबर से जोड़कर देख रहे हैं। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा-अर्चना करने के साथ निर्जल या फलाहार व्रत रखने की परंपरा है, और मान्यता है कि इससे न सिर्फ मनचाहा आशीर्वाद मिलता है बल्कि व्रती की आत्मशुद्धि भी होती है।\n\nअजा एकादशी की सही तारीख\nपंचांग के हिसाब से एकादशी तिथि 6 सितंबर की रात 7 बजकर 31 मिनट पर शुरू हो जाएगी और अगले दिन यानी 7 सितंबर की सुबह 5 बजकर 6 मिनट तक चलेगी। चूंकि हिंदू धर्म में व्रत की तारीख उदयातिथि के आधार पर तय होती है, यानी सूर्योदय के वक्त जो तिथि लगी हो उसे ही मान्य माना जाता है, इसलिए 7 सितंबर को उदयातिथि में एकादशी होने के चलते अजा एकादशी का व्रत भी इसी दिन रखा जाएगा। जो लोग व्रत रखेंगे, उन्हें पारण यानी व्रत खोलने के लिए 8 सितंबर की सुबह 6 बजे के बाद तक इंतजार करना होगा।\n\nपूजा के लिए शुभ मुहूर्त\n7 सितंबर को पूजा और व्रत के संकल्प के लिए दिनभर कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। सुबह जल्दी उठने वालों के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 52 मिनट से 5 बजकर 38 मिनट तक रहेगा, वहीं प्रातः सन्ध्या का समय सुबह 5 बजकर 15 मिनट से 6 बजकर 25 मिनट के बीच है। दोपहर में पूजा करने वालों के लिए अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 1 बजकर 1 मिनट तक शुभ रहेगा। शाम को गोधूलि मुहूर्त 6 बजकर 48 मिनट से 7 बजकर 11 मिनट तक और सायाह्न सन्ध्या 6 बजकर 48 मिनट से 7 बजकर 58 मिनट तक रहेगी। इसके अलावा अमृत काल दोपहर 3 बजकर 59 मिनट से शाम 5 बजकर 29 मिनट तक बताया गया है, जिसे किसी भी शुभ काम के लिए बेहद अनुकूल समय माना जाता है।\n\nदिनभर बनने वाले शुभ योग\n2026 की अजा एकादशी सिर्फ तारीख की वजह से ही नहीं बल्कि उस दिन बनने वाले दुर्लभ खगोलीय संयोगों की वजह से भी खास मानी जा रही है। सुबह के वक्त आकाश में पुनर्वसु नक्षत्र रहेगा, जो रात होते-होते पुष्य नक्षत्र में बदल जाएगा। इसी दौरान चंद्रमा और गुरु की युति से गजकेसरी योग बनेगा, जिसे समृद्धि और सफलता से जोड़कर देखा जाता है। इसके अलावा शुक्र ग्रह के अपनी ही राशि यानी स्वराशि में मौजूद होने से पंचमहापुरुष योग में शामिल मालव्य योग का निर्माण होगा, जबकि बुध ग्रह अपनी उच्च राशि में रहते हुए भद्र योग बनाएंगे। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इतने सारे शुभ योगों का एक साथ बनना दुर्लभ है, और इस दिन व्रत रखने के साथ तुलसी से जुड़े धार्मिक उपाय करने पर भक्तों को विशेष लाभ मिल सकता है। जो लोग किसी वजह से व्रत नहीं रख पाते, उनके लिए भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना भी शुभ फलदायी बताया गया है।\n\nइसका आप पर असर\nअगर आप अजा एकादशी का व्रत रखने की सोच रहे हैं, तो सबसे पहले सही तारीख और समय नोट कर लेना जरूरी है ताकि पूजा-पाठ और व्रत का पूरा फल मिल सके।\n\n• व्रत की तारीख: उदयातिथि के हिसाब से व्रत 7 सितंबर को ही रखा जाना चाहिए, 6 सितंबर को व्रत रखने से पारंपरिक नियमों के अनुसार पूरा फल नहीं मिलता।\n• पारण का समय: व्रत खोलने यानी पारण के लिए 8 सितंबर की सुबह 6 बजे तक इंतजार करें, इससे पहले पारण करने से व्रत अधूरा माना जाता है।\n• पूजा का सही समय: ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:52-5:38) या अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:12-1:01) में पूजा करने से बेहतर परिणाम की मान्यता है, इनमें से कोई एक समय चुन सकते हैं।\n• जो व्रत नहीं रख सकते उनके लिए: बीमार, बुजुर्ग या यात्रा में होने पर व्रत रखना मुश्किल हो सकता है, ऐसे लोग भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करके भी शुभ फल पा सकते हैं।\n• तुलसी से जुड़े उपाय: इस दिन तुलसी के पौधे से जुड़े धार्मिक उपाय करने से शुभ योगों का अतिरिक्त लाभ मिल सकता है, ऐसे में घर में तुलसी पूजन जरूर करें।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अजा एकादशी 2026 में किस दिन रखी जाएगी?\nउदयातिथि के हिसाब से अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर को रखा जाएगा।\n\n2. एकादशी तिथि कब शुरू होगी और कब खत्म होगी?\nतिथि 6 सितंबर रात 7 बजकर 31 मिनट से शुरू होकर 7 सितंबर सुबह 5 बजकर 6 मिनट पर समाप्त होगी।\n\n3. व्रत का पारण कब किया जाएगा?\nव्रत का पारण 8 सितंबर को सुबह 6 बजे के बाद किया जाएगा।\n\n4. पूजा के लिए सबसे शुभ समय कौन सा है?\nब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:52 से 5:38) और अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:12 से 1:01) को विशेष शुभ माना जा रहा है।\n\n5. इस दिन कौन-कौन से शुभ योग बन रहे हैं?\nइस दिन गजकेसरी योग, मालव्य योग और भद्र योग के साथ पुनर्वसु व पुष्य नक्षत्र भी रहेंगे।\n\n6. जो लोग व्रत नहीं रख पाते, उनके लिए क्या उपाय है?\nऐसे लोग भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करके भी शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं।",
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  "category": "त्योहार",
  "publishedAt": "2026-09-05",
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    "एकादशी व्रत 2026",
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    "भगवान विष्णु पूजा"
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