# अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी: 18 जुलाई के व्रत में पूजा मुहूर्त और चांद न देखने के समय का रखें खास ध्यान

> आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के अनिरुद्ध स्वरूप की पूजा होती है, जो इस बार 18 जुलाई 2026 को पड़ रही है। जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, चतुर्थी तिथि की शुरुआत और समापन, और वर्जित चंद्र दर्शन का समय।

**Type:** article · **Category:** त्योहार · **Published:** 2026-07-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/festivals/aniruddha-vinayaka-chaturthi-18-julai-ke-vrata-men-puja-muhurta-aura-chanda-na-dekhane-ke-samaya-ka-rakhen-khasa-dhyana-7926 · **Language:** Hindi
**Tags:** विनायक चतुर्थी, अनिरुद्ध गणेश, गणेश पूजा विधि, चतुर्थी व्रत 2026, चंद्र दर्शन निषेध, आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी

गणेश भक्तों के लिए जुलाई का यह हफ्ता खास होने जा रहा है क्योंकि 18 जुलाई 2026 को अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। दरअसल हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष, दोनों की चतुर्थी तिथि गणेश जी की पूजा के लिए समर्पित मानी जाती है। कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली चतुर्थी को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी कहा जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी विनायक चतुर्थी कहलाती है। धार्मिक मान्यता है कि इन दोनों तिथियों पर विधिपूर्वक गणेश पूजन करने से घर में सुख, समृद्धि और संपन्नता बनी रहती है। आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष चतुर्थी की खासियत यह है कि इस दिन भगवान गणेश के अनिरुद्ध स्वरूप की आराधना की जाती है, और इसी वजह से इस दिन को अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है।

## अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी 2026 का शुभ मुहूर्त
पंचांग के हिसाब से आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी तिथि 17 जुलाई को सुबह 6 बजकर 27 मिनट पर शुरू होगी और 18 जुलाई 2026 को सुबह 4 बजकर 42 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि पूजा के लिए मध्याह्न काल को सबसे उपयुक्त माना गया है, इसलिए व्रत और पूजन के लिए 18 जुलाई की तारीख तय की गई है। पूजा का मध्याह्न मुहूर्त सुबह 11 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर दोपहर 1 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। यही वह समय है जब भक्तों को गणेश जी की विधिवत पूजा-अर्चना करने की सलाह दी जाती है, ताकि व्रत का पूरा फल मिल सके।

## वर्जित चंद्र दर्शन के समय का रखें खास ध्यान
विनायक चतुर्थी से एक पुरानी परंपरा भी जुड़ी है, जिसके तहत इस दिन चांद देखना वर्जित माना जाता है। पंचांग के मुताबिक, 18 जुलाई को सुबह 9 बजकर 4 मिनट से लेकर रात 9 बजकर 45 मिनट तक चंद्र दर्शन नहीं करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस अवधि में भूलवश भी चांद दिखाई दे जाए तो इसे अशुभ माना जाता है, इसलिए भक्तों को इस पूरी समय सीमा में आसमान की ओर देखने से बचने के लिए कहा जाता है।

## क्यों खास है अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी व्रत
हिन्दू धर्मग्रन्थों में आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी व्रत का विशेष महात्म्य बताया गया है। यह व्रत मुख्य रूप से भगवान श्रीगणेश की आराधना को समर्पित है, और शास्त्रों में चतुर्थी तिथि को गणपति की सबसे प्रिय तिथि माना गया है। मान्यता के अनुसार, चतुर्थी के दिन मध्याह्न काल में गणेश जी का पूजन कर व्रत रखने से बुद्धि, स्मृति, विद्या और वाणी में तीव्रता आती है। इस व्रत की एक अलग परंपरा यह भी है कि इसमें सन्यासियों को तुंबी दान करने का विधान बताया गया है, जो इस पूजा को बाकी गणेश व्रतों से अलग बनाता है।

धार्मिक मान्यता है कि विनायक गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी के निमित व्रत और पूजा करने से जीवन खुशियों से भर जाता है और किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। साथ ही यह भी कहा जाता है कि इससे घर और व्यापार दोनों में सुख-समृद्धि, सौभाग्य, धन-संपदा, ज्ञान और हर तरह के भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।

## विनायक चतुर्थी पर गणेश जी की पूजा कैसे करें
धार्मिक परंपरा के अनुसार विनायक चतुर्थी की पूजा विधि में कुछ खास बातों का ध्यान रखा जाता है, जिन्हें व्रत करने वाले हर भक्त को जरूर जानना चाहिए

- विनायक चतुर्थी के दिन स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनने चाहिए। अगर संभव हो तो इस दिन लाल रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है।
- इसके बाद मंदिर या घर के पूजा स्थान पर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए।
- मूर्ति को साफ कपड़े से पोंछकर उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछाया जाता है।
- इसके बाद श्री गणेश का षोडशोपचार विधि से पूजन करके सिंदूर चढ़ाया जाता है और आरती की जाती है।
- पूजा का पूरा फल पाने के लिए विनायक चतुर्थी की व्रत कथा का पाठ करना भी जरूरी बताया गया है।
- पूजा पूरी होने के बाद श्री गणेश को उनके प्रिय लड्डूओं का भोग लगाया जाता है, और बाद में यह प्रसाद सभी में बांट दिया जाता है।
- एक जरूरी बात यह भी ध्यान रखनी चाहिए कि गणेश पूजा में तुलसी पत्र का इस्तेमाल कभी नहीं करना चाहिए।
- इस दिन व्रत रखने की भी परंपरा है, लेकिन अगर किसी वजह से व्रत रखना संभव न हो, तो गणपति जी की विधिवत पूजा जरूर करनी चाहिए, तभी पूजा का फल मिलता है।

कुल मिलाकर, अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी का यह व्रत गणेश भक्तों के लिए साल भर में आने वाले खास मौकों में से एक माना जाता है, जिसमें सही मुहूर्त और वर्जित चंद्र दर्शन के समय का ध्यान रखकर विधिपूर्वक पूजा करने की सलाह दी जाती है।

## इसका आप पर असर
यह व्रत खासतौर पर उन घरों के लिए मायने रखता है जो नियमित रूप से गणेश जी की पूजा-अर्चना करते हैं।

- **व्रत रखने वालों के लिए:** 18 जुलाई 2026 को सही पूजा मुहूर्त और वर्जित चंद्र दर्शन के समय की जानकारी होने से व्रत और पूजा दोनों विधिपूर्वक पूरे किए जा सकेंगे।

## सवाल-जवाब

### 1. अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी का व्रत कब रखा जाएगा?
यह व्रत 18 जुलाई 2026 को रखा जाएगा।

### 2. आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी तिथि कब शुरू और कब समाप्त होगी?
यह तिथि 17 जुलाई को सुबह 6 बजकर 27 मिनट पर शुरू होगी और 18 जुलाई 2026 को सुबह 4 बजकर 42 मिनट पर समाप्त होगी।

### 3. पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
पूजा का मध्याह्न मुहूर्त सुबह 11 बजकर 20 मिनट से दोपहर 1 बजकर 29 मिनट तक रहेगा।

### 4. वर्जित चंद्र दर्शन का समय क्या है?
18 जुलाई को सुबह 9 बजकर 4 मिनट से रात 9 बजकर 45 मिनट तक चंद्र दर्शन वर्जित माना गया है।

### 5. गणेश पूजा में किस चीज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए?
गणेश पूजा में तुलसी पत्र का इस्तेमाल कभी नहीं करना चाहिए।

### 6. इस व्रत में दान करने का क्या विधान बताया गया है?
इस व्रत में सन्यासियों को तुंबी दान करने का विधान बताया गया है।

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