# अशून्य शयन द्वितीया पर पति-पत्नी के रिश्ते में बढ़ाई जा सकती है प्रगाढ़ता, जानिए ये खास उपाय

> 28 सितंबर 2026 को अशून्य शयन द्वितीया का व्रत रखा जाएगा। इस दिन विवाहित जोड़े वैवाहिक जीवन की मजबूती और सुख-समृद्धि के लिए विशेष अनुष्ठान और उपाय कर सकते हैं।

**Type:** article · **Category:** त्योहार · **Published:** 2026-09-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/festivals/ashunya-shayana-dwitiya-par-pati-patni-ke-rishte-mein-badhai-ja-sakti-hai-pragadhata-39555 · **Language:** Hindi
**Tags:** अशून्य शयन द्वितीया, दांपत्य जीवन, वैवाहिक सुख, पति-पत्नी उपाय, पूजा विधि, ज्योतिष उपाय

वैवाहिक जीवन में आ रही दूरियों को मिटाने और आपसी प्रेम को गहरा करने का विशेष अवसर 28 सितंबर 2026 को आ रहा है। इस तिथि पर अशून्य शयन द्वितीया का व्रत करने का विधान है, जो चातुर्मास के दौरान हर महीने के कृष्ण पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत के प्रभाव से दंपती का साथ जीवनभर बना रहता है और रिश्तों में किसी प्रकार की दरार नहीं आती है। इस दिन का मुख्य महत्व यही है कि पति-पत्नी को कभी अकेले न सोना पड़े और दोनों का संबंध अटूट रहे।

 इस पावन दिन पर मुख्य रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना की जाती है। श्रद्धालु पूरे दिन उपवास रखकर शाम के समय चंद्रोदय होने के पश्चात चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करते हैं और उसके बाद अपना व्रत खोलते हैं। इस बार चंद्रमा के दर्शन शाम को 7 बजकर 1 मिनट पर होंगे। इस विशेष अवसर पर आचार्य इंदु प्रकाश द्वारा बताए गए कुछ असरदार उपाय करने से दांपत्य जीवन के साथ-साथ परिवार में भी सुख-शांति का वास होता है।

 

## वैवाहिक सुख और संबंधों को मजबूत करने के उपाय
 यदि आप अपने जीवनसाथी के साथ संबंधों को अधिक प्रगाढ़ बनाना चाहते हैं, तो स्नान के पश्चात थोड़ा सा घिसा हुआ पीला चंदन एक कटोरी में लें। इसके बाद माता लक्ष्मी और श्री विष्णु का विधि-विधान से तिलक करें। फिर उसी कटोरी से चंदन लेकर अपने और अपने जीवनसाथी के मस्तक पर भी लगाएं।

 परिवार के भीतर सुख और सौभाग्य की वृद्धि के लिए एक सौभाग्य पोटली तैयार करें। इस पोटली में एक 5 मुखी रुद्राक्ष, एक साबुत हल्दी, गोमती चक्र, एक कौड़ी और कुछ गुंजाफल के दाने रखें। श्री विष्णु की पूजा के समय इसे भगवान के पास रखें और अनुष्ठान संपन्न होने के बाद इसे घर के पूजा स्थल पर सुरक्षित रख दें।

 पति-पत्नी के बीच आपसी स्नेह बढ़ाने के लिए सात तुलसी के पत्तों पर थोड़ा सा चीनी का बताशा रखकर भगवान विष्णु को अर्पित करें। इससे रिश्तों में मिठास और आपसी समझ बढ़ती है।

 मान-सम्मान और वैभव में बढ़ोतरी की कामना है तो स्नान के उपरांत मीठी पूड़ियों का चूरमा तैयार करके पक्षियों के लिए डालें। इसके साथ ही किसी मिट्टी के बर्तन में उनके पीने का पानी भी रखें। इस दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखें कि यह चूरमा और जल कबूतरों को नहीं डालना चाहिए।

 

## परस्पर मधुरता और सामंजस्य के लिए अचूक प्रयोग
 यदि आप चाहते हैं कि आपका जीवनसाथी आपके प्रति अधिक नरम रवैया रखे, तो पूजा के वक्त एक मौली को भगवान विष्णु की तस्वीर के समीप रख दें। इसके बाद आसन पर बैठकर लक्ष्मी नारायण के मंत्र **'ऊँ नमो भगवते लक्ष्मी नारायणाय।'** का 21 बार जप करें। जप पूरा होने के बाद उस मौली से दो धागे अलग कर लें। एक धागा अपने दाएं हाथ की अनामिका उंगली में बांध लें और दूसरा धागा अपने जीवनसाथी के बाएं हाथ की इसी उंगली में बांध दें। इस मौली को पूरे दिन बंधा रहने दें और अगले दिन इसे उतारकर तुलसी के पौधे के नीचे रख आएं।

 किसी बात को लेकर यदि आपसी अनबन चल रही है, तो भगवान के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें और अपने रिश्ते को संवारने की प्रार्थना करें। जिन जोड़ों के विवाह को कुछ ही वर्ष हुए हैं और बंधन कमजोर पड़ते महसूस हो रहे हैं, वे दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर श्री विष्णु का अभिषेक करें।

 आपसी विश्वास को कायम रखने के लिए दोनों को मिलकर तुलसी के पौधे में जल चढ़ाना चाहिए। इसके साथ ही माता लक्ष्मी को खोये की मिठाई का भोग लगाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। रिश्ते में मिठास घोलने के लिए इत्र की एक शीशी को कुछ देर के लिए भगवान विष्णु के चरणों के पास रख दें। पूजा के बाद उस शीशी को अपने पास रख लें और रोज स्नान के पश्चात उसका नियमित उपयोग करें।

 

## परिवार की शांति और व्यापार में सहयोग के उपाय
 घर-परिवार में होने वाले कलह से मुक्ति पाने और सभी सदस्यों के बीच सामंजस्य स्थापित करने के लिए एक उपाय रात के समय किया जा सकता है। सोते समय अपने सिरहाने के नीचे कपूर की दो टिकिया रख लें और अगले दिन सुबह स्नान के बाद उन्हें घर की दक्षिण दिशा में जला दें।

 यदि आप अपने व्यावसायिक सफर में अपने जीवनसाथी का सहयोग चाहते हैं, तो इस दिन घर पर दूध और चावल की खीर तैयार करें। संभव हो तो इसमें थोड़ा सा केसर और इलायची भी मिलाएं। भगवान को इसका भोग लगाने के बाद इस प्रसाद को अपने जीवनसाथी को खिलाएं और स्वयं भी ग्रहण करें।

 बाहरी लोगों की वजह से यदि रिश्ते में गलतफहमियां आ गई हैं, तो स्नान के पश्चात विष्णु मंदिर जाकर रोली, चंदन और पुष्प से भगवान की पूजा करें। इस दौरान उन्हें एक एकाक्षी नारियल भी अर्पित करें, जिससे आपसी दूरियां समाप्त होती हैं।

## इसका आप पर असर
यह व्रत मुख्य रूप से विवाहित जोड़ों के आपसी संबंधों में मधुरता बढ़ाने और पारिवारिक जीवन को सुखमय बनाने के लिए किया जाता है।

- **भारत में:** देश भर के विवाहित दंपती अपने आपसी तालमेल को बेहतर बनाने और रिश्तों की दूरियों को मिटाने के लिए इस दिन विशेष अनुष्ठान करते हैं। इस व्रत से पारिवारिक जीवन में स्थिरता और आपसी विश्वास मजबूत होता है।

- **दंपतियों के लिए:** इस दिन बताए गए छोटे-छोटे ज्योतिषीय उपाय करने से जीवनसाथी का सहयोग और प्रेम दोनों प्राप्त होते हैं। इससे घर-परिवार में होने वाले छोटे-मोटे मतभेद भी दूर होते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
अशून्य शयन द्वितीया का व्रत हिंदू पंचांग के अनुसार चातुर्मास के दौरान आने वाले प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को किया जाता है। इस व्रत का मुख्य उद्देश्य पति-पत्नी के बीच दीर्घकालिक साथ और अटूट प्रेम सुनिश्चित करना है।

- **धार्मिक महत्व:** पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने से वैवाहिक बंधन मजबूत होते हैं।

- **मानसिक शांति:** अनुष्ठान और उपायों के माध्यम से पारिवारिक कलह को दूर कर आपसी सामंजस्य स्थापित किया जाता है।

- **परंपरागत विश्वास:** इस व्रत का पालन करने से जीवनसाथी के साथ लंबे समय तक मधुर और अटूट संबंध बने रहने की मान्यता है।

## सवाल-जवाब

### 1. अशून्य शयन द्वितीया का व्रत कब रखा जाएगा?
यह व्रत 28 सितंबर 2026 को रखा जाएगा।

### 2. इस व्रत में किन देवी-देवताओं की पूजा की जाती है?
इस दिन माता लक्ष्मी और श्री विष्णु की पूजा का विधान है।

### 3. व्रत का पारण कब और कैसे किया जाता है?
पूरे दिन व्रत रखने के बाद शाम को चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।

### 4. इस दिन चंद्रोदय का समय क्या रहेगा?
इस दिन शाम 7 बजकर 1 मिनट पर चंद्रोदय होगा।

### 5. अशून्य शयन द्वितीया का मुख्य अर्थ क्या है?
इस व्रत का अर्थ है कि पति-पत्नी को कभी अकेले न सोना पड़े और दोनों का साथ लंबे समय तक बना रहे।

### 6. यह व्रत किस अवधि के दौरान पड़ता है?
यह व्रत चातुर्मास के दौरान पड़ने वाले प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को आता है।

### 7. रिश्तों में अनबन दूर करने के लिए क्या करना चाहिए?
भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी के सामने घी का दीपक जलाकर रिश्ते को बेहतर बनाने की प्रार्थना करनी चाहिए।

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