# अश्विन माह में कब है पहला प्रदोष व्रत? जानें 8 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त और संपूर्ण विधि

> अश्विन कृष्ण त्रयोदशी पर पड़ने वाला अक्टूबर 2026 का पहला प्रदोष व्रत 8 अक्टूबर को रखा जाएगा। इस दिन शाम 5:59 से रात 8:27 तक प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना का विशेष मुहूर्त रहेगा।

**Type:** article · **Category:** त्योहार · **Published:** 2026-09-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/festivals/ashvina-maha-men-kaba-hai-pahala-pradosh-vrat-janen-8-october-ka-shubha-muhurta-aura-snpurna-vidhi-40655 · **Language:** Hindi
**Tags:** प्रदोष व्रत, अक्टूबर 2026, अश्विन माह, भगवान शिव, पूजा मुहूर्त, त्रयोदशी तिथि, शिव पूजा विधि

सनातन परंपरा में देवों के देव महादेव की आराधना के लिए त्रयोदशी तिथि का विशेष महत्व माना गया है। हर हिंदू महीने के दोनों पक्षों, कृष्ण और शुक्ल पक्ष में त्रयोदशी के दिन प्रदोष व्रत का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के आसपास के समय में भगवान शिव की विधिवत उपासना करने से साधक के जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और परिवार में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है। अश्विन महीने के आगमन के साथ ही श्रद्धालु अक्टूबर माह के पहले प्रदोष व्रत की तिथि और अनुष्ठान के नियमों को लेकर तैयारी कर रहे हैं।

## तिथि और व्रत का दिन
पंचांग गणना के मुताबिक अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 7 अक्टूबर की रात 11 बजकर 16 मिनट पर होगी। यह तिथि अगले दिन यानी 8 अक्टूबर की रात 10 बजकर 15 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। चूंकि शास्त्रों में प्रदोष व्रत के निर्धारण के लिए शाम के समय त्रयोदशी तिथि का होना अनिवार्य माना गया है, इसलिए यह उपवास 8 अक्टूबर, गुरुवार को ही रखा जाएगा।

## प्रदोष काल में पूजा का शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत में मुख्य अनुष्ठान शाम के समय प्रदोष काल के दौरान ही संपन्न किए जाते हैं। 8 अक्टूबर को भगवान शिव के पूजन के लिए सबसे शुभ और उपयुक्त समय शाम 5 बजकर 59 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 27 मिनट तक उपलब्ध रहेगा। श्रद्धालुओं को शिव आराधना के लिए लगभग ढाई घंटे का यह पावन समय मिलेगा, जिसमें पंचोपचार या षोडशोपचार विधि से भोलेनाथ की पूजा की जा सकती है।

## सुबह की पूजा और संकल्प की तैयारी
व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर दिनचर्या की शुरुआत करें। स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए पूरे दिन निराहार अथवा फलाहार व्रत का संकल्प लें। इसके उपरांत घर के मंदिर में या शिवालय जाकर शिवलिंग का विधिवत अभिषेक करें। अभिषेक के लिए दूध, दही, शुद्ध घी, शहद और गंगाजल का उपयोग करना चाहिए, जिससे पंचामृत स्नान पूर्ण होता है।

## शिवलिंग पर अर्पित की जाने वाली सामग्री
अभिषेक संपन्न करने के बाद शिवलिंग पर 11 या 21 साबुत बेलपत्र अर्पित करने का विधान है। इसके साथ ही महादेव के अत्यंत प्रिय आक के फूल और धतूरा भी अवश्य चढ़ाना चाहिए। पूजन सामग्री में ऋतु फल, साबुत सुपारी, लौंग, छोटी इलायची, सुगंधित फूल, धूप, घी का दीपक, चंदन या गंध और अक्षत यानी बिना टूटे चावल शामिल करें। नैवेद्य के रूप में शुद्ध घी और शक्कर से बनी पारंपरिक मिठाइयों का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

## संध्याकालीन विशेष अनुष्ठान और आरती
दिनभर शांत भाव से शिव नाम का स्मरण करने के पश्चात शाम के समय दोबारा स्नान करें अथवा हाथ-पैर धोकर शुद्ध हों। प्रदोष काल के शुभ समय में भगवान शिव के सम्मुख आसन ग्रहण करें। पूजा आरंभ करते हुए शिव पंचाक्षर मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जप करें और श्रद्धापूर्वक शिव चालीसा का पाठ करें। इसके बाद प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा का श्रवण अथवा पठन करना चाहिए। अनुष्ठान के अंत में गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाकर भगवान शिव की भावपूर्ण आरती करें और उपस्थित परिजनों में प्रसाद वितरित करें।

## इसका आप पर असर
यह धार्मिक पंचांग विवरण उन श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है जो प्रदोष व्रत के आधार पर अपने अनुष्ठान और उपवास की योजना बनाते हैं।

- **पूजा का समय:** शाम की विशेष शिव पूजा के लिए 8 अक्टूबर को शाम 5:59 से रात 8:27 बजे तक का समय निर्धारित है। भक्त इस ढाई घंटे की अवधि में अपने अनुष्ठान और आरती पूरी करने की योजना पहले से बना सकते हैं।
- **उपवास का नियम:** व्रत 8 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा क्योंकि त्रयोदशी तिथि का प्रदोष काल इसी शाम पड़ रहा है। जो लोग व्रत रखते हैं, वे सुबह संकल्प लेकर पूरे दिन फलाहार या निराहार रहकर शाम की पूजा के बाद ही व्रत के नियमों का पालन कर सकते हैं।
- **पूजा सामग्री की व्यवस्था:** पूजा के लिए दूध, दही, शहद, घी, गंगाजल और 11 या 21 बेलपत्र की आवश्यकता होगी। इन सामग्रियों और ताजे धतूरे व आक के फूलों की व्यवस्था सुबह ही कर लेने से शाम का पूजन सुगम हो जाएगा।
- **दैनिक दिनचर्या:** शाम को दोबारा स्नान और पूजा का विधान होने के कारण कामकाजी भक्तों को समय का प्रबंधन करना होगा। प्रदोष काल शाम 5:59 बजे शुरू होने से पहले ही स्नान और मंदिर की तैयारी पूरी कर लेना सुविधाजनक रहेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
हिंदू पंचांग में प्रदोष व्रत का निर्धारण त्रयोदशी तिथि और सूर्यास्त के समय यानी प्रदोष काल के संयोग के आधार पर किया जाता है।

- **तिथि का आरंभ और अंत:** अश्विन कृष्ण त्रयोदशी तिथि 7 अक्टूबर की रात 11:16 बजे शुरू होकर 8 अक्टूबर की रात 10:15 बजे तक रहेगी। इस समय चक्र के कारण प्रदोष काल केवल 8 अक्टूबर की शाम को ही मिलता है।
- **प्रदोष काल का शास्त्र सम्मत नियम:** धर्मग्रंथों के अनुसार यदि त्रयोदशी तिथि सूर्यास्त के समय मौजूद हो, तभी उस दिन प्रदोष व्रत मान्य होता है। 7 अक्टूबर की शाम को त्रयोदशी तिथि शुरू नहीं हुई होगी, इसलिए व्रत 8 अक्टूबर को रखा जाएगा।
- **गुरुवार का संयोग:** 8 अक्टूबर को गुरुवार पड़ने के कारण इसे गुरु प्रदोष व्रत के रूप में जाना जाएगा। धार्मिक मान्यताओं में विभिन्न दिनों पर पड़ने वाले प्रदोष का अलग-अलग आध्यात्मिक महत्व बताया गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. अक्टूबर 2026 का पहला प्रदोष व्रत किस तारीख को रखा जाएगा?
अक्टूबर माह का पहला प्रदोष व्रत 8 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा।

### 2. 8 अक्टूबर को पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा?
भगवान शिव की पूजा के लिए प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 59 मिनट से रात 8 बजकर 27 मिनट तक रहेगा।

### 3. अश्विन कृष्ण त्रयोदशी तिथि कब से कब तक रहेगी?
यह तिथि 7 अक्टूबर की रात 11 बजकर 16 मिनट पर शुरू होगी और 8 अक्टूबर की रात 10 बजकर 15 मिनट पर समाप्त होगी।

### 4. शिवलिंग पर अभिषेक के लिए किन चीजों का प्रयोग करना चाहिए?
शिवलिंग के अभिषेक के लिए दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल का उपयोग किया जाता है।

### 5. प्रदोष व्रत में भगवान शिव को कितने बेलपत्र अर्पित करने का विधान है?
इस दिन भगवान शिव को 11 या 21 बेलपत्र अर्पित करने का विधान बताया गया है।

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