# भाद्रपद शुक्ल अष्टमी पर राधा रानी जन्मोत्सव का उल्लास, जानें 20 सितंबर को व्रत खोलने का शुभ मुहूर्त और विधि विधान

> बरसाना सहित देशभर में राधा रानी का प्राकट्य उत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। जानिए रविवार 20 सितंबर को सुबह 6:08 बजे के बाद व्रत पारण की पूरी धार्मिक विधि और मंत्र।

**Type:** article · **Category:** त्योहार · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/festivals/bhadrapada-shukla-ashtami-para-radha-rani-janmotsava-ka-ullasa-janen-20-sitnbara-ko-vrata-kholane-ka-shubha-muhurta-aura-vidhi-vid-33491 · **Language:** Hindi
**Tags:** राधाष्टमी, बरसाना, राधा रानी, लाड़लीजी मंदिर, पारण समय, भाद्रपद शुक्ल अष्टमी, राधा कृष्ण पूजा

बरसाना के प्रसिद्ध लाड़लीजी मंदिर में सुबह के पहर से ही श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ रहा है। समूचे देश में भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा रानी के प्राकट्य दिवस के रूप में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। भक्तजन इस पावन अवसर पर उपवास रखकर युगल सरकार यानी राधा और कृष्ण की विशेष आराधना में लीन हैं। आमतौर पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपवास का समापन मध्यरात्रि की अर्चना के तुरंत बाद हो जाता है, किंतु राधाष्टमी के उपवास को पूरा करने की व्यवस्था उससे भिन्न मानी जाती है।

## पारण का सटीक समय और पंचांगीय नियम
राधाष्टमी के उपवास समापन की व्यवस्था विभिन्न संप्रदायों और क्षेत्रीय रीति-रिवाजों के अनुसार थोड़ी अलग देखने को मिलती है। सनातन परंपरा के अधिकांश मतों में यह विधान है कि भक्त पूरे दिन निराहार या फलाहार रहकर अगले दिन नवमी तिथि के सूर्योदय पर ही अन्न ग्रहण करें। इस शास्त्रीय मान्यता के आधार पर वर्ष 2026 में 20 सितंबर, रविवार की सुबह 6 बजकर 8 मिनट के पश्चात व्रत खोलना सर्वाधिक फलदायी और उत्तम माना गया है।

इसके विपरीत कई वैष्णव कुलों तथा गृहस्थ परिवारों में एक अन्य परंपरा भी निभाई जाती है। इस व्यवस्था के तहत अष्टमी के दिन दोपहर की मुख्य पूजा संपन्न होने के उपरांत सात्विक फलाहार ग्रहण कर संकल्प को विराम दिया जाता है। इस प्रकार भक्त अपनी पारिवारिक परंपरा और शारीरिक सामर्थ्य के अनुसार सही समय का चयन कर सकते हैं।

## उपवास समाप्त करते समय ध्यान रखने योग्य बातें
पारण के दिन सवेरे जल्दी उठकर नित्यकर्म और स्नान से शुद्ध हो जाना चाहिए। इसके बाद धुले हुए स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा स्थल को सजाएं। राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण की विधिवत अर्चना करें और उन्हें भोग अर्पित करें। प्रभु को अर्पित किए जाने वाले सात्विक पकवानों या मिष्ठान में तुलसी का पत्ता डालना अनिवार्य माना जाता है। ठाकुरजी को भोग लगाने के पश्चात उसी दिव्य प्रसाद को सबसे पहले ग्रहण करके अपना उपवास खोलना चाहिए।

धार्मिक ग्रंथों में यह निर्देश मिलता है कि पारण के पूरे दिन भोजन सर्वथा सात्विक होना चाहिए। वैष्णव मर्यादा के अनुसार इस दिन के भोजन में प्याज, लहसुन और तामसिक द्रव्यों का प्रयोग पूरी तरह वर्जित रहता है। उपवास संपन्न करने के उपरांत अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार निर्धन अथवा जरूरतमंद लोगों को फल, अनाज अथवा वस्त्र दान करना बहुत पुण्यकारी माना गया है।

## जप के लिए प्रमुख मंत्र और साधना विधि
उपवास का पारण करने से ठीक पूर्व साधक को तुलसी की माला लेकर कम से कम 108 बार राधा रानी के विशिष्ट मंत्रों का जाप करना चाहिए। शास्त्रों में वर्णित प्रमुख मंत्र इस प्रकार हैं

- **मूल महामंत्र:** ॐ ह्रीं श्रीराधायै स्वाहा
- **बीज मंत्र:** ॐ ह्रीं श्रीं राधिकायै नमः
- **प्रिया मंत्र:** ॐ ऐं ह्रीं श्रीं नमो भगवते राधाप्रियाय
- **श्री राधा गायत्री मंत्र:** ॐ ह्रीं श्रीराधिकायै विद्महे गान्धर्विकायै विधीमहि तन्नो राधा प्रचोदयात्

## राधाष्टमी का आध्यात्मिक महत्व और ब्रज की छटा
सनातन धर्म की आस्था में राधा रानी को भगवान श्रीकृष्ण की आह्लादिनी शक्ति और परम भक्ति का साक्षात स्वरूप स्वीकार किया गया है। मान्यता है कि श्रीकृष्ण की साधना तब तक अपूर्ण रहती है जब तक उसमें राधारानी की कृपा सम्मिलित न हो। वे विशुद्ध प्रेम, करुणा, ममता और पूर्ण आत्मसमर्पण की अधिष्ठात्री देवी हैं।

इस पुण्य तिथि पर समूचे ब्रजमंडल में अलौकिक दृश्य उपस्थित होता है। मथुरा, वृंदावन और विशेषकर बरसाना के देवालयों में विग्रहों का मनमोहक श्रृंगार किया जाता है। दिनभर संकीर्तन मंडलियों के मधुर भजनों की गूंज वातावरण को भक्तिमय बनाए रखती है और दूर-दराज से आए श्रद्धालु राधा नाम के जयकारों के साथ कृतार्थ होते हैं।

## इसका आप पर असर
राधाष्टमी व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए पूजा, साधना और पारण के नियमों का सही पालन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

- **पारण मुहूर्त:** मुख्य पंचांगीय नियम के अनुसार व्रत का समापन रविवार, 20 सितंबर 2026 को प्रातः 6:08 बजे के बाद ही करें। समय से पहले अन्न ग्रहण करने से व्रत का पूर्ण पुण्य फल प्रभावित हो सकता है।
- **आहार शुद्धि:** पारण वाले दिन भोजन पूरी तरह सात्विक होना चाहिए जिसमें लहसुन-प्याज का प्रयोग न हो। भगवान को अर्पित किए गए तुलसीदल युक्त नैवेद्य या फल से ही उपवास समाप्त करें।
- **मंत्र जप:** व्रत खोलने से पूर्व तुलसी माला से कम से कम 108 बार बताए गए राधा मंत्रों का उच्चारण करें। यह मानसिक शांति और भक्तिभाव को दृढ़ करने में सहायक होता है।
- **दान पुण्य:** पारण के पश्चात निर्धन और जरूरतमंद व्यक्तियों को सामर्थ्यानुसार अनाज, फल या उपयोगी वस्तुएं भेंट करें। शास्त्रों में व्रत की पूर्णता के लिए दान को आवश्यक घटक माना गया है।

## ऐसा क्यों हुआ
राधाष्टमी का पर्व भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को राधा रानी के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जहां पारण के समय को लेकर विभिन्न परंपराएं विद्यमान हैं।

- **उत्सव का मूल कारण:** धार्मिक आस्था के अनुसार इस दिन परम प्रेम स्वरूपा राधा रानी का प्राकट्य हुआ था। भगवान श्रीकृष्ण की संपूर्ण भक्ति और कृपा पाने के लिए श्रद्धालु इस तिथि पर उपवास रखते हैं।
- **पारण समय में भिन्नता:** जन्माष्टमी में मध्यरात्रि पूजन के बाद व्रत खुलता है, जबकि राधाष्टमी में कई परंपराएं अगले दिन सूर्योदय की नवमी तिथि तक उपवास की अनिवार्यता मानती हैं। यही कारण है कि 20 सितंबर की सुबह 6:08 बजे के बाद पारण का मुख्य मुहूर्त निर्धारित किया गया है।
- **वैष्णव गृहस्थ मत:** कुछ वैष्णव संप्रदायों और पारिवारिक रीतियों में मध्याह्न पूजा के तुरंत बाद फलाहार से उपवास समाप्त करने का प्रचलन रहा है। इन दोनों पद्धतियों के अस्तित्व के कारण भक्तों को अपनी कुल परंपरा के अनुसार समय तय करना पड़ता है।

## सवाल-जवाब

### 1. वर्ष 2026 में राधाष्टमी व्रत का पारण किस समय करना चाहिए?
धार्मिक मान्यता के अनुसार 20 सितंबर 2026, रविवार को सुबह 6 बजकर 8 मिनट के बाद व्रत का पारण करना सबसे उत्तम समय है।

### 2. क्या दोपहर की पूजा के बाद भी राधाष्टमी का व्रत खोला जा सकता है?
हां, कुछ पारिवारिक और वैष्णव परंपराओं में दोपहर की पूजा संपन्न होने के बाद फलाहार लेकर व्रत खोलने की भी रीति है।

### 3. व्रत का पारण करते समय किस तरह का भोजन करना चाहिए?
पारण के समय प्याज और लहसुन से रहित सात्विक भोजन करना चाहिए, जिसे भगवान को तुलसी दल अर्पित करके भोग लगाया गया हो।

### 4. राधाष्टमी व्रत खोलने से पहले कौन सी साधना करनी चाहिए?
व्रत का पारण करने से पहले तुलसी की माला से कम से कम 108 बार राधा रानी के नाम अथवा उनके पवित्र मंत्रों का जाप करना चाहिए।

### 5. राधा रानी का प्राकट्य उत्सव किस तिथि को मनाया जाता है?
यह पावन पर्व प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है।

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