# भाद्रपद तृतीया पर हरतालिका तीज का पावन व्रत, जानें उदया तिथि का मुहूर्त और पूजा नियम

> भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर रखे जाने वाले हरतालिका तीज व्रत का पर्व 14 सितंबर को उदया तिथि के अनुसार मनाया जाएगा। जानिए इस निर्जला व्रत के दौरान पूजा की सही विधि, शुभ मुहूर्त और वे महत्वपूर्ण नियम जिन्हें ध्यान में रखना आवश्यक है।

**Type:** article · **Category:** त्योहार · **Published:** 2026-09-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/festivals/bhadrapada-tritiya-para-hartalika-teej-ka-pavana-vrata-janen-udaya-tithi-ka-muhurta-aura-puja-niyama-30054 · **Language:** Hindi
**Tags:** हरतालिका तीज, व्रत के नियम, उदया तिथि, शिव पार्वती पूजा, भाद्रपद शुक्ल तृतीया, पूजा मुहूर्त

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को सुहागिन महिलाओं द्वारा अत्यंत श्रद्धा और समर्पण के साथ हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है। यह पावन व्रत केवल अन्न और जल का त्याग करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके अंतर्गत आध्यात्मिक अनुशासन, व्यवहारिक शुद्धता और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व माना गया है। इस शुभ अवसर पर महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त आराधना करती हैं, जिससे उनके दांपत्य जीवन में सुख, शांति और अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है। हालांकि, शास्त्रों एवं लोक परंपराओं के अनुसार इस कठिन व्रत के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है, अन्यथा छोटी सी चूक भी व्रत के पूर्ण फल को प्रभावित कर सकती है।

 

## शुभ तिथि और उदया तिथि का सटीक मुहूर्त

धार्मिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का आरंभ 13 सितंबर की सुबह 7 बजकर 8 मिनट पर हो रहा है। यह तृतीया तिथि अगले दिन यानी 14 सितंबर की सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक विस्तारित रहेगी। शास्त्र संमत मान्यताओं के अनुसार, जिस तिथि में सूर्योदय होता है, उसी उदया तिथि को व्रत एवं पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इसी आधार पर इस वर्ष हरतालिका तीज का मुख्य व्रत 14 सितंबर को ही रखा जाएगा। महिलाओं को सूर्योदय के समय से ही इस निर्जला व्रत के नियमों का पालन शुरू कर देना चाहिए।

 

## पूजा और शृंगार में रंगों का सही चयन

हरतालिका तीज के पावन अवसर पर सुहागिनों के 16 शृंगार और परिधान का अत्यंत विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। मान्यताओं के अनुसार, इस पूजन के दौरान महिलाओं को काले रंग के वस्त्र पहनने अथवा काली चूड़ियां धारण करने से बचना चाहिए, क्योंकि काला रंग शुभ कार्यों में वर्जित माना जाता है। इसके स्थान पर लाल, हरे या पीले रंग के परिधानों और आभूषणों को प्राथमिकता देनी चाहिए। शास्त्रों में लाल, हरा और पीला रंग सुहाग, समृद्धि, उल्लास और पवित्रता का प्रतीक माना गया है, जो पूजा वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

 

## मानसिक शांति और क्रोध से दूरी

शारीरिक रूप से निर्जला रहने के साथ-साथ व्रत के दिन मानसिक पवित्रता बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। इस पावन दिन पर व्रती महिला को अपने पति, परिवारजनों अथवा किसी भी अन्य व्यक्ति के साथ किसी प्रकार के वाद-विवाद, बहस या क्रोध से बचना चाहिए। धार्मिक दृष्टिकोण से, किसी के प्रति कटु वचन बोलना या मन में नकारात्मक भाव लाना व्रत के पुण्य प्रभाव को कम कर सकता है। इसलिए पूरे दिन ईश्वर के ध्यान, प्रार्थना और सात्विक विचारों में ही अपना मन लगाना चाहिए।

 

## दिन में सोने से परहेज और रात्रि जागरण

हरतालिका तीज का व्रत अन्य सामान्य व्रतों से भिन्न माना गया है। लोक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रती महिला को दिन के समय सोने से सख्त परहेज करना चाहिए। खाली समय में विश्राम करने के बजाय शिव-पार्वती के मंत्रों का जाप, धार्मिक भजनों का गायन और शिव कथा का श्रवण करना शुभ फलदायी होता है। इसके साथ ही, तीज की रात में जागरण करने और शिव-पार्वती का स्मरण करते रहने की प्राचीन परंपरा है, जिससे वातावरण भक्तिमय बना रहता है।

 

## सहनशक्ति का आकलन और वार्षिक निरंतरता

धार्मिक परंपरा के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत एक बार प्रारंभ करने के बाद प्रत्येक वर्ष निरंतर रखने का विधान है। इस व्रत में संकल्प शक्ति का विशेष महत्व होता है। हालांकि, महिलाओं को व्रत धारण करने से पूर्व अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य स्थिति का सही आकलन अवश्य कर लेना चाहिए। यदि कोई महिला अस्वस्थ है या शारीरिक रूप से कठिन निर्जला व्रत रखने में सक्षम नहीं है, तो उसे अपने स्वास्थ्य को प्राथमिक ध्यान में रखकर ही उचित निर्णय लेना चाहिए।

 

## प्रथम पूज्य श्री गणेश की आराधना से पूजा की शुरुआत

हरतालिका तीज की पूजन विधि में भगवान श्री गणेश जी की प्रथम आराधना का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। सनातन परंपरा के अनुसार, किसी भी मांगलिक कार्य अथवा पूजा की शुरुआत प्रथम पूज्य गणेश जी के स्मरण और पूजन से ही की जाती है। इसके पश्चात ही भगवान शिव और माता पार्वती की पार्थिव प्रतिमाओं का विधिवत पूजन, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। अंत में आरती करके अपने वैवाहिक जीवन की खुशहाली, समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना की जाती है।

## इसका आप पर असर
हरतालिका तीज का व्रत रखने वाली महिलाओं और श्रद्धालुओं के लिए इस पर्व की तिथियों, समय और नियमों की स्पष्ट जानकारी होना आवश्यक है:

- **व्रत की तिथि पर:** 13 सितंबर को सुबह 7:08 बजे तृतीया तिथि शुरू होगी, लेकिन उदया तिथि के मान के अनुसार मुख्य निर्जला व्रत 14 सितंबर को ही रखा जाएगा। श्रद्धालुओं को 14 सितंबर के सूर्योदय से ही व्रत नियमों का पालन शुरू करना होगा।
- **पूजा व शृंगार की तैयारी में:** पूजा के परिधान और शृंगार सामग्री में काले रंग के उपयोग से बचें। लाल, हरे या पीले रंग के कपड़ों और चूड़ियों को पहले से तैयार रखें ताकि पूजन शुभता के साथ संपन्न हो सके।
- **स्वास्थ्य व नियमों के संतुलन पर:** कठिन निर्जला व्रत शुरू करने से पहले अपनी सेहत का ध्यान रखें। अस्वस्थता की स्थिति में चिकित्सक की सलाह और अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देकर ही व्रत का संकल्प लें।
- **दिनचर्या के प्रबंधन में:** व्रत के दिन दोपहर में सोने के बजाय भक्ति और मंत्र जाप में समय बिताएं। रात में जागरण की परंपरा का पालन करने के लिए अपनी दिनचर्या को उसी अनुसार व्यवस्थित करें।

## ऐसा क्यों हुआ
हरतालिका तीज व्रत के नियम और तिथियों की गणना शास्त्र संमत परंपराओं और पंचांगीय गणनाओं पर आधारित है:

- **उदया तिथि का नियम:** तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह 7:08 बजे शुरू होकर 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे समाप्त हो रही है। सनातन परंपरा में सूर्योदय कालीन तिथि (उदया तिथि) को ही पूरा दिन मान्यता दी जाती है, इसलिए व्रत 14 सितंबर को रखा जा रहा है।
- **गणेश पूजन की प्राथमिकता:** किसी भी पूजन कार्य में विघ्नहर्ता श्री गणेश को प्रथम पूज्य माना गया है, इसीलिए शिव-पार्वती की मुख्य पूजा से पूर्व गणेश जी का आह्वान और स्मरण करने का नियम है।
- **रंगों और आचरण का महत्व:** धार्मिक मान्यताओं में काला रंग नकारात्मकता और शोक का प्रतीक माना गया है, जबकि लाल, पीला और हरा रंग सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं, इसीलिए पूजा में शुभ रंगों के चयन पर बल दिया जाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. हरतालिका तीज का व्रत वर्ष 2026 में किस दिन रखा जाएगा?
उदया तिथि के आधार पर हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर 2026 को रखा जाएगा।

### 2. भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि कब से कब तक रहेगी?
तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह 7 बजकर 8 मिनट से प्रारंभ होकर 14 सितंबर की सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगी।

### 3. हरतालिका तीज पर किस रंग के कपड़े और चूड़ियां पहनने से बचना चाहिए?
हरतालिका तीज की पूजा और शृंगार में काले रंग के कपड़े या काली चूड़ियां पहनने से बचना चाहिए।

### 4. तीज की पूजा में किन रंगों को शुभ माना गया है?
पूजा के लिए लाल, हरे और पीले रंग को सुहाग और शुभता का प्रतीक मानकर प्राथमिकता दी जाती है।

### 5. पूजा की शुरुआत में सबसे पहले किन देव की आराधना करनी चाहिए?
पूजा की शुरुआत प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश के स्मरण और पूजन से करनी चाहिए, जिसके बाद शिव-पार्वती की पूजा की जाती है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._