छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में अनोखी मिसाल, स्वप्ना 6 साल पुराने रिश्ते को निभाते हुए तोते हिरांश को बांधेंगी सोने की राखी अंबिकापुर की रहने वाली स्वप्ना पिछले 6 वर्षों से अपने पालतू तोते हिरांश को राखी बांध रही हैं और इस बार उन्होंने उसके लिए सोने की विशेष राखी तैयार कराई है। बचपन से साथ रह रहे इस पक्षी के प्रति उनका अनोखा स्नेह पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। अंबिकापुर के जोड़ा पीपल इलाके की रहने वाली स्वप्ना और उनके पालतू तोते हिरांश का रिश्ता आम इंसान और पक्षी के जुड़ाव से कहीं आगे निकल चुका है। स्वप्ना बीते 6 साल से हर रक्षाबंधन पर अपने इस तोते की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती आ रही हैं। इस बार इस पावन पर्व को और भी यादगार बनाने के लिए उन्होंने हिरांश के लिए सोने की विशेष राखी तैयार कराई है। स्वप्ना अपने इस पक्षी को सिर्फ एक बेज़ुबान जीव नहीं मानतीं, बल्कि अपने सगे भाई का दर्जा देती हैं और पूरा परिवार भी उसे घर के अभिन्न सदस्य की तरह ही प्यार देता है। मासूमियत से शुरू हुआ भाई-बहन का अटूट स्नेह दोनों के बीच इस अनोखे संबंध की शुरुआत तब हुई थी, जब हिरांश बेहद छोटा था। उस समय उसकी आंखें भी ठीक से नहीं खुली थीं। स्वप्ना ने उसे अपने हाथों से संभाला और दाना-पानी दिया। धीरे-धीरे हिरांश घर के माहौल में ढलता गया और स्वप्ना के साथ ही खाने, सोने और रहने लगा। इस निरंतर देखभाल और साथ ने दोनों के बीच भाई-बहन जैसा गहरा और निस्वार्थ भावनात्मक रिश्ता कायम कर दिया। परिवार के सभी लोग अब उसे एक इंसान की तरह ही समझते हैं और उसके साथ वैसा ही व्यवहार करते हैं। बीमारी में खाना छोड़ देता है हिरांश स्वप्ना बताती हैं कि हिरांश उनके हर इशारे और बात को भली-भांति समझता है। दोनों के बीच समझ का स्तर इतना गहरा है कि जब भी स्वप्ना बीमार पड़ती हैं, तो हिरांश दुखी होकर भोजन तक त्याग देता है। इसके अलावा, जब भी स्वप्ना किसी काम से घर से बाहर जाती हैं, तो वह उनकी मां के संरक्षण में रहता है, लेकिन लगातार घर के मुख्य दरवाजे की ओर टकटकी लगाए स्वप्ना के लौटने का बेताबी से इंतजार करता रहता है। पुरानी यादें और बेज़ुबान जीवों के प्रति निस्वार्थ प्रेम हिरांश से पहले स्वप्ना के पास हीर नाम का एक तोता था। हीर के जाने के बाद हिरांश उनकी जिंदगी में आया, जिसकी शक्ल-सूरत काफी हद तक हीर से मिलती-जुलती है। स्वप्ना का मानना है कि हिरांश के साथ इस बंधन ने उन्हें समाज में एक अलग पहचान दी है। इस रिश्ते में किसी तरह का स्वार्थ या लालच नहीं है, केवल सच्चा प्रेम और एक-दूसरे की रक्षा का संकल्प शामिल है। पक्षियों की आज़ादी और जीव-जंतुओं से भरा परिवार स्वप्ना के घर में इस समय कुल चार तोते और एक कुत्ता मौजूद हैं, जबकि इससे पहले वे चार खरगोश भी पाल चुकी हैं। स्वप्ना इन सभी पालतू जीव-जंतुओं को ही अपना असली परिवार और अपनी दुनिया मानती हैं। वे पक्षियों को पिंजरे में कैद करके रखने की प्रथा के सख्त खिलाफ हैं और उनका मानना है कि हर पक्षी को खुला आसमान और प्रेमपूर्वक वातावरण मिलना चाहिए। इसका आप पर असर यह कहानी समाज में पालतू जीवों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने के साथ-साथ पक्षियों के संरक्षण और कानून की समझ का महत्वपूर्ण संदेश देती है। • भारत में: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत तोतों की भारतीय प्रजातियों को पिंजरे में पालना कानूनन अपराध है। इसलिए यदि आप तोता पालना चाहते हैं तो केवल विदेशी नस्ल के वैध पक्षी ही अपनाएं। • अंबिकापुर में: स्थानीय निवासियों के बीच बेज़ुबान पक्षियों के प्रति दयालुता और पारिवारिक स्नेह का भाव सुदृढ़ होता है। इससे शहर में पशु-पक्षी क्रूरता के मामलों में कमी आने की उम्मीद है। • त्योहारों के संदर्भ में: पारंपरिक उत्सवों को बेज़ुबान जानवरों के साथ प्रेम बांटकर मनाने की नई प्रेरणा मिलती है। लोग महंगे उपहारों के बजाय निस्वार्थ जुड़ाव को प्राथमिकता देने लगते हैं। • पालतू जानवरों की देखभाल: पक्षियों की उचित देखभाल के लिए उनके व्यवहार और खान-पान का गहरा अध्ययन आवश्यक होता है। सही समय पर उपचार और पोषण देने से जीव लंबा और स्वस्थ जीवन जीते हैं। सवाल-जवाब 1. स्वप्ना अंबिकापुर में किस इलाके की निवासी हैं? स्वप्ना छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित जोड़ा पीपल इलाके की रहने वाली हैं। 2. स्वप्ना अपने तोते हिरांश के साथ कितने सालों से रक्षाबंधन मना रही हैं? वह पिछले 6 सालों से अपने तोते हिरांश को राखी बांधकर रक्षाबंधन मना रही हैं। 3. इस साल रक्षाबंधन पर स्वप्ना ने हिरांश के लिए क्या विशेष तैयारी की है? इस साल उन्होंने अपने तोते हिरांश की कलाई पर बांधने के लिए सोने की विशेष राखी तैयार कराई है। 4. स्वप्ना के बीमार होने पर तोता हिरांश क्या करता है? जब स्वप्ना बीमार पड़ती हैं, तो हिरांश दुखी होकर खाना-पीना छोड़ देता है। 5. स्वप्ना के पास वर्तमान में कौन-कौन से पालतू जीव हैं? वर्तमान में स्वप्ना के पास चार तोते और एक कुत्ता है, जबकि इससे पहले उनके पास चार खरगोश भी थे। प्रेरणा और सबक स्वप्ना की यह यात्रा दर्शाती है कि निस्वार्थ प्रेम और संवेदनशीलता से बेज़ुबान जीवों के साथ भी इंसान जैसा अटूट रिश्ता बनाया जा सकता है। • निस्वार्थ सेवा का भाव: किसी असहाय जीव को उसकी सबसे कमज़ोर अवस्था में संभालना सच्चे समर्पण का प्रतीक है। जब आप बदले की उम्मीद के बिना देखभाल करते हैं तो रिश्ता अटूट बनता है। • जीवों की स्वतंत्रता का सम्मान: प्रेम का अर्थ किसी को बांधकर रखना नहीं बल्कि उसे आज़ादी देना है। पक्षियों को पिंजरे से मुक्त रखकर प्यार देना ही सच्ची आत्मीयता है। • सहानुभूति और संवेदनशीलता: बेज़ुबान पक्षी भी मानवीय भावनाओं और इशारों को गहराई से समझते हैं। निरंतर संवाद और ध्यान देने से गहरा मानसिक जुड़ाव पैदा होता है। • शोक को सकारात्मकता में बदलना: पिछले पालतू पक्षी हीर को खोने के बाद स्वप्ना ने अपने प्रेम को हिरांश की देखभाल में मोड़ा। पुरानी यादों का सम्मान करते हुए नए रिश्तों को अपनाना जीवन में सकारात्मकता लाता है। https://trendkia.com/festivals/chhattisgarh-ke-ambikapur-men-anokhi-misala-swapna-6-sala-purane-rishte-ko-nibhate-hue-tote-hiransh-ko-bandhengi-sone-ki-rakhi-22976 TrendKia — Har trend, sabse pehle.