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  "type": "article",
  "title": "दीपावली से ठीक पहले धनतेरस पर कैसे करें भगवान कुबेर की आराधना, जानें संपूर्ण विधि और नियम",
  "summary": "कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर मां लक्ष्मी के साथ धन के अधिपति कुबेर देव की पूजा का विशेष विधान है। इस वर्ष 6 नवंबर को पड़ने वाले पर्व पर जानिए पूजन सामग्री, मंत्र और परंपरा से जुड़ी सभी जरूरी बातें।",
  "content": "कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली त्रयोदशी तिथि का हिंदू परंपरा में असाधारण महत्व माना गया है। दीपावली के पावन उत्सव से ठीक दो रोज पूर्व यह पर्व मनाया जाता है, जिसे आम बोलचाल में धनतेरस कहा जाता है। इस पावन अवसर पर केवल माता लक्ष्मी ही नहीं, बल्कि देवों के खजांची कुबेर देव और आरोग्य के प्रदाता भगवान धन्वंतरि की उपासना की भी गहरी परिपाटी रही है। इस वर्ष यह शुभ पर्व 6 नवंबर को आ रहा है। घरों में सुख, समृद्धि और वैभव के स्थायी वास की कामना लिए श्रद्धालु पूरे विधि-विधान के साथ इस दिन विशेष अनुष्ठान संपन्न करते हैं।\n\nघर की उत्तर दिशा में इस तरह तैयार करें पूजन चौकी\nकुबेर देव की साधना आरंभ करने से पहले प्रात:काल शुद्ध जल से स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करना आवश्यक है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार उत्तर दिशा धन और समृद्धि की मानी जाती है, इसलिए इसी दिशा में पूजा का स्थान सजाना चाहिए। लकड़ी की एक साफ चौकी रखकर उस पर लाल अथवा पीले रंग का स्वच्छ वस्त्र बिछाएं। इसके ऊपर भगवान कुबेर की सुंदर प्रतिमा, चित्र अथवा कुबेर यंत्र की विधिवत स्थापना करें। यदि किसी कारणवश प्रतिमा या यंत्र उपलब्ध न हो सके, तो घर की तिजोरी अथवा आभूषणों के डिब्बे को ही उनका प्रतीक मानकर पूजा में शामिल किया जा सकता है। उस स्थान पर रोली और सिंदूर की सहायता से मांगलिक स्वस्तिक चिन्ह बनाएं तथा पवित्र मौली रक्षासूत्र बांधें।\n\nगणेश वंदना और ध्यान मंत्र से करें अनुष्ठान की शुरुआत\nसनातन रीति के अनुसार किसी भी मांगलिक कर्मकांड का प्रारंभ प्रथम पूज्य भगवान गणेश के स्मरण और पूजन के साथ ही होता है। विघ्नहर्ता का विधिवत वंदन करने के उपरांत हाथ में ताजे पुष्प लेकर धनपति कुबेर का ध्यान करना चाहिए। ध्यान के दौरान उनके दिव्य स्वरूप का स्मरण करते हुए स्तुति की जाती है। उनके ध्यान हेतु गरुड़ रत्न के समान कांति वाले, निधियों के अधिपति, मुकुट से सुशोभित और हाथ में श्रेष्ठ गदा धारण करने वाले भगवान कुबेर के स्वरूप का मन में चिंतन किया जाता है।\n\nसमर्पण सामग्री, दीपदान और मंत्र जाप की प्रक्रिया\nकुबेर देव की प्रतिमा, स्थापित यंत्र, चांदी के सिक्के अथवा तिजोरी पर पवित्र जल का छिड़काव करने के बाद चंदन, कुमकुम, सिंदूर, अक्षत और सुगंधित फूल अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक ॐ श्रीं कुबेराय नमः मंत्र की कम से कम 11 अथवा 108 बार माला जपते हैं। नैवेद्य के रूप में विविध फल, मिष्ठान और पंचामृत का भोग लगाया जाता है। मान्यता के अनुसार इस पूजन में सफेद रंग की मिठाई का भोग अर्पित करना अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है। इसी अनुष्ठान के दौरान माता लक्ष्मी एवं भगवान धन्वंतरि की भी विधिवत अर्चना की जाती है।\n\nसप्त धान्य अर्पण और संध्या समय 13 दीपकों का नियम\nपूजा की शास्त्रीय विधि में सात प्रमुख अनाजों का समर्पण बेहद महत्वपूर्ण बताया गया है। इन सप्त धान्यों में गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर को शामिल किया जाता है। इन सभी धान्यों को धूप, दीप, अक्षत और पुष्पों के साथ देव प्रतिमा को अर्पित किया जाता है। इसके अतिरिक्त, धनतेरस के दिन प्रदोष काल यानी गोधूलि वेला में दीपदान का विशेष महात्म्य है। संध्या समय घर में जहां धन, आभूषण अथवा संपत्ति रखी जाती है, उस स्थान के निकट 13 दीपक प्रज्वलित किए जाते हैं। पूजन की समाप्ति पर श्रद्धा भाव से आरती उतारकर सभी में प्रसाद वितरित किया जाता है और बरकत बनाए रखने के लिए तिजोरी में सिद्ध यंत्र अथवा सिक्का स्थापित किया जाता है।\n\nधन और ऐश्वर्य के अधिपति का धार्मिक महत्व\nपौराणिक मान्यताओं में कुबेर देव को देवताओं के कोषाध्यक्ष का दर्जा प्राप्त है। वे समस्त सांसारिक संपदा, रत्न, वैभव और ऐश्वर्य के रक्षक तथा स्वामी माने गए हैं। धनतेरस के दिन लक्ष्मी पूजन के साथ उनके पूजन का मूल उद्देश्य यही है कि अर्जित धन का सदुपयोग हो और परिवार में आर्थिक स्थिरता सदैव बनी रहे। विधिवत पूजन से घर-परिवार में दरिद्रता का नाश होकर सुख और शांति का संचार होता है।\n\nइसका आप पर असर\nधनतेरस पर कुबेर पूजन की स्पष्ट विधि जानने से श्रद्धालुओं को पर्व की तैयारियों और धार्मिक अनुष्ठानों को बिना किसी संशय के संपन्न करने में मदद मिलेगी।\n\n• तैयारी का समय: इस वर्ष 6 नवंबर को धनतेरस होने के कारण श्रद्धालु पहले से ही आवश्यक पूजन सामग्री जुटा सकते हैं। इससे ऐन वक्त पर होने वाली भागदौड़ और असमंजस से बचा जा सकेगा।\n• घर की व्यवस्था: पूजा स्थल के लिए घर की उत्तर दिशा साफ करने और लाल या पीला वस्त्र व्यवस्थित करने का परामर्श दिया गया है। परिवार के सदस्य समय रहते चौकी और प्रतिमा की उपयुक्त व्यवस्था कर सकते हैं।\n• सामग्री जुटाना: विधि में सात प्रकार के अनाज और सफेद मिठाई की विशेष महत्ता बताई गई है। इससे खरीदार राशन की खरीदारी के दौरान गेहूं, जौ, चना, मूंग जैसी जरूरी चीजों को सूची में शामिल कर सकते हैं।\n• संध्या दीपदान: प्रदोष काल के दौरान धन रखने वाले स्थान पर 13 दीपक जलाने का नियम स्पष्ट किया गया है। इसके अनुसार लोग पहले से मिट्टी के दीये और तेल या घी का इंतजाम कर सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nधनतेरस पर कुबेर पूजन की परिपाटी सनातन मान्यताओं में धन संरक्षण और ऐश्वर्य के संतुलन से जुड़ी हुई है।\n\n• पौराणिक भूमिका: धार्मिक ग्रंथों में भगवान कुबेर को देवताओं का कोषाध्यक्ष और सभी निधियों का रक्षक माना गया है। लक्ष्मी जहां धन का आगमन दर्शाती हैं, वहीं कुबेर उस संपदा के संचय और संरक्षण के प्रतीक हैं।\n• तिथियों का संयोग: कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को दीपावली महापर्व का आरंभ माना जाता है। इसी दिन धन और आरोग्य दोनों के अधिष्ठाताओं की पूजा कर आगामी वर्ष के लिए संपन्नता की प्रार्थना की जाती है।\n• प्रदोष काल का विधान: संध्याकालीन गोधूलि वेला यानी प्रदोष काल को देवी-देवताओं की प्रसन्नता के लिए अत्यंत फलदायी समय माना गया है। इसी कारण प्रदोष काल में 13 दीपकों का प्रज्वलन कर अंधकार और दरिद्रता दूर करने की परंपरा चली आ रही है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. इस वर्ष धनतेरस का पर्व किस तारीख को मनाया जाएगा?\nइस साल धनतेरस का पावन पर्व 6 नवंबर को मनाया जाएगा।\n\n2. कुबेर देव की पूजा के लिए घर की कौन सी दिशा सबसे उत्तम मानी गई है?\nपूजन चौकी सजाने के लिए घर की उत्तर दिशा को सबसे शुभ और उपयुक्त माना गया है।\n\n3. यदि भगवान कुबेर की प्रतिमा उपलब्ध न हो तो पूजा किस प्रकार की जा सकती है?\nप्रतिमा न होने पर कुबेर यंत्र, चांदी के सिक्के, तिजोरी या आभूषण के बक्से पर स्वस्तिक बनाकर और मौली बांधकर पूजन किया जा सकता है।\n\n4. धनतेरस पर कुबेर देव के किस मंत्र का जाप करने का विधान है?\nइस दिन 'ॐ श्रीं कुबेराय नमः' मंत्र का कम से कम 11 अथवा 108 बार जाप करने का विधान बताया गया है।\n\n5. प्रदोष काल के दौरान कितने दीपक जलाने की परंपरा है?\nप्रदोष काल में धन रखने के स्थान के पास 13 दीपक प्रज्वलित करने का नियम है।\n\n6. पूजा में कौन-से सात अनाजों का भोग अर्पित किया जाता है?\nपूजा में गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर को सप्त धान्य के रूप में अर्पित किया जाता 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