गोवर्धन पूजा की सही तारीख को लेकर संशय हुआ दूर, जानें 10 नवंबर के तीनों शुभ मुहूर्त और पारंपरिक पूजन विधान कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि दो दिन पड़ने के कारण बने भ्रम के बीच उदया तिथि के आधार पर गोवर्धन पूजा 10 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन पूजा के लिए सुबह, दोपहर और शाम के तीन विशिष्ट मुहूर्त रहेंगे। दीपावली महोत्सव के ठीक बाद मनाए जाने वाले गोवर्धन पर्व को लेकर इस साल श्रद्धालुओं के बीच तारीख का संशय बना हुआ है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि दो अलग-अलग दिनों में व्याप्त होने की वजह से लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि पूजन 9 नवंबर को संपन्न किया जाए या 10 नवंबर को। पंचांग की गणनाओं के अनुसार उदया तिथि की मान्यता को प्राथमिकता देते हुए यह पावन पर्व 10 नवंबर 2026, दिन मंगलवार को ही श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। प्रतिपदा तिथि का समय और तारीख का निर्धारण सनातन धर्म की परंपराओं में गोवर्धन पूजा का अत्यंत विशिष्ट स्थान माना गया है। हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना और गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर उनका पूजन किया जाता है। पंचांगीय गणना के अनुसार इस वर्ष कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 32 मिनट से आरंभ होगी। यह तिथि अगले दिन यानी 10 नवंबर 2026 को दोपहर 2 बजकर 1 मिनट तक प्रभावी रहेगी। हिंदू धर्म शास्त्रों में सूर्योदय कालीन तिथि यानी उदया तिथि को ही त्योहार के निर्धारण के लिए मुख्य आधार माना जाता है, इसलिए गोवर्धन पूजा का महापर्व 10 नवंबर को ही संपन्न होगा। गोवर्धन पूजा के लिए दिनभर में तीन शुभ मुहूर्त श्रद्धालुओं की सुविधा और दिनचर्या को ध्यान में रखते हुए इस बार पूजन के लिए तीन अलग-अलग समय अत्यंत फलदायी माने गए हैं। भक्त अपनी सुविधानुसार इन मुहूर्तों में गोवर्धन देव की अर्चना कर सकते हैं • प्रातःकाल पूजा मुहूर्त: सुबह 6 बजकर 41 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 51 मिनट तक का समय पूजा के लिए अत्यंत अनुकूल रहेगा। • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर के समय पूजा करने वालों के लिए सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक का समय प्रशस्त है। • गोधूलि मुहूर्त: सांझ ढलने के दौरान शाम 5 बजकर 31 मिनट से शाम 5 बजकर 57 मिनट तक संध्याकालीन पूजन का उत्तम योग है। गोवर्धन पूजन की संपूर्ण और पारंपरिक विधि गोवर्धन पूजा के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर दैनिक नित्यकर्मों से निवृत्त होकर स्नान करना चाहिए और शुद्ध वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके उपरांत घर के खुले आंगन या स्वच्छ पूजा स्थल पर गाय के ताजे गोबर से प्रतीकात्मक गोवर्धन पर्वत की सुंदर आकृति तैयार की जाती है। तैयार की गई इस आकृति को रोली, अक्षत, ताजे पुष्पों और मिट्टी के प्रज्वलित दीपकों से सजाया जाता है। शुभ मुहूर्त के भीतर भगवान श्रीकृष्ण और अपने कुल देवता व इष्ट देव का स्मरण करते हुए विधिवत अर्चना आरंभ करें। इसके पश्चात धूप, दीप, फल, सुगंधित फूल, चंदन और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। गोवर्धन पर्व के दिन विभिन्न प्रकार के अनाजों और सब्जियों को मिलाकर बनाए गए अन्नकूट, विविध फल, पारंपरिक मिठाइयां और घर पर शुद्ध घी में बने स्वादिष्ट पकवानों का महाभोग लगाने का विशेष रिवाज है। सात परिक्रमा का नियम और नैवेद्य समर्पण गोवर्धन पूजन के विधान में निर्मित पर्वत की सात बार परिक्रमा करना अनिवार्य चरण माना गया है। इस दौरान भक्त अपने हाथ में पवित्र जल से भरा लोटा लेते हैं और जौ बोते हुए श्रद्धापूर्वक परिक्रमा पूर्ण करते हैं। इसके साथ ही गोवर्धन पर्वत की नाभि वाले मध्य स्थान पर जलता हुआ दीपक स्थापित किया जाता है। उस स्थान पर दूध, दही, गंगाजल, शहद और बताशे जैसी पावन सामग्रियां श्रद्धा भाव से अर्पित की जाती हैं। संपूर्ण पूजन और आरती के उपरांत यह प्रसाद परिवारजनों और उपस्थित श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है। गोवंश और पशुधन के सम्मान का विधान गोवर्धन पूजा का उत्सव केवल पर्वत पूजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन के सहयोगी गोवंश और पशुधन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी माध्यम है। इस दिन गाय और बैल का विशेष पूजन किया जाता है। गोमाता को रोली और चंदन का तिलक लगाया जाता है और फूलों की मालाओं से उनका श्रृंगार किया जाता है। इसके पश्चात गायों को ताजा गुड़ और हरा चारा खिलाकर भगवान श्रीकृष्ण से समस्त परिवार के आरोग्य, सुख और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है। इसका आप पर असर इस पंचांगीय गणना से 2026 में दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा और अन्नकूट की सही तारीख को लेकर भक्तों का भ्रम दूर होता है और वे सही समय पर पूजन संपन्न कर सकते हैं। • तिथि का स्पष्टीकरण: उदया तिथि के नियम के अनुसार गोवर्धन पूजा 10 नवंबर 2026, मंगलवार को संपन्न होगी। भक्त 9 नवंबर के बजाय 10 नवंबर को ही मुख्य पूजन और अन्नकूट उत्सव की तैयारी रखें। • पूजा का समय चयन: दिनभर में तीन शुभ मुहूर्त (सुबह 6:41 से 8:51, दोपहर 11:44 से 12:27 और शाम 5:31 से 5:57) निर्धारित किए गए हैं। श्रद्धालु अपनी दैनिक व्यस्तता और कामकाजी समय के अनुसार इनमें से किसी एक समय का चयन कर सकते हैं। • सामग्री और भोग की पूर्व तैयारी: पूजन के लिए गाय का गोबर, रोली, अक्षत, दीपक, जौ और अन्नकूट का भोग आवश्यक है। परिवार 10 नवंबर की सुबह से पहले ही इन सामग्रियों की व्यवस्था सुनिश्चित कर सकते हैं। • गोसेवा का अवसर: इस दिन गायों को गुड़ और हरा चारा खिलाने की विशेष परंपरा है। पशुपालक और सामान्य नागरिक स्थानीय गोशालाओं में जाकर चारा दान करने का समय तय कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ प्रतिपदा तिथि का आरंभ दोपहर में होने और दो दिनों तक फैले रहने के कारण इस वर्ष गोवर्धन पूजा की तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी थी। • तिथि का फैलाव: कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12:32 बजे शुरू होकर 10 नवंबर को दोपहर 2:01 बजे समाप्त हो रही है। तिथि मध्य-दिवस में शुरू होने के कारण दोनों दिनों पर आंशिक प्रभाव पड़ा। • उदया तिथि का नियम: सनातन धर्म में पर्व के निर्धारण हेतु सूर्योदय के समय उपस्थित तिथि यानी उदया तिथि को ही आधिकारिक माना जाता है। चूंकि 10 नवंबर के सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए इसी दिन पूजा का विधान तय हुआ। • पौराणिक पृष्ठभूमि: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठिका अंगुली पर उठाया था। इसी उपलक्ष्य में हर वर्ष कार्तिक प्रतिपदा पर गोवर्धन पर्वत और प्रकृति की पूजा की परंपरा निभाई जाती है। सवाल-जवाब 1. वर्ष 2026 में गोवर्धन पूजा किस तारीख को मनाई जाएगी? उदया तिथि की गणना के आधार पर गोवर्धन पूजा 10 नवंबर 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी। 2. कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ और समापन समय क्या है? प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 32 मिनट पर शुरू होगी और 10 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 1 मिनट पर समाप्त होगी। 3. 10 नवंबर 2026 को गोवर्धन पूजा के शुभ मुहूर्त कौन से हैं? पूजा के लिए तीन मुहूर्त हैं: प्रातःकाल 6:41 से 8:51 बजे तक, अभिजीत मुहूर्त 11:44 से 12:27 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 5:31 से 5:57 बजे तक। 4. गोवर्धन पूजा के दिन किस प्रकार की आकृति बनाई जाती है? इस दिन घर के आंगन या पूजा स्थल पर गाय के गोबर से प्रतीकात्मक गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है। 5. गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा कितनी बार करने का नियम है? गोवर्धन पूजा के दौरान हाथ में जल का लोटा लेकर जौ बोते हुए पर्वत की सात बार परिक्रमा करने का विधान है। 6. इस दिन गायों की पूजा कैसे की जाती है? गायों को तिलक लगाकर फूलों से सजाया जाता है और उन्हें गुड़ तथा हरा चारा खिलाकर परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है। https://trendkia.com/festivals/govardhan-puja-ki-sahi-tarikha-ko-lekara-snshaya-hua-dura-janen-10-november-ke-tinon-shubha-muhurta-aura-parnparika-pujana-vidhana-56708 TrendKia — Har trend, sabse pehle.