# हैदराबाद में भव्य गणेश विसर्जन से ठीक पहले बालापुर के 21 किलो लड्डू की खुली बोली पर टिकीं देश भर की निगाहें

> हैदराबाद के प्रसिद्ध बालापुर गणेश पंडाल में अनंत चतुर्दशी पर 21 किलो के प्रख्यात लड्डू का महाऑक्शन आयोजित होने जा रहा है, जहाँ 35 लाख रुपये के पिछले सर्वोच्च आंकड़े के ध्वस्त होने के कयास लगाए जा रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** त्योहार · **Published:** 2026-09-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/festivals/hyderabad-men-bhavya-ganesha-visarjana-se-thika-pahale-balapur-ke-21-kilo-laddu-ki-khuli-boli-para-tikin-desha-bhara-ki-nigahen-32143 · **Language:** Hindi
**Tags:** बालापुर गणेश लड्डू, हैदराबाद गणेश विसर्जन, अनंत चतुर्दशी 2026, गणेश उत्सव नीलामी, हुसैन सागर विसर्जन

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर बालापुर गणेश पंडाल का 21 किलोग्राम का प्रसिद्ध महाप्रसाद एक बार फिर देश भर में चर्चा का केंद्र बन गया है। केंद्रीय विसर्जन शोभायात्रा के मुख्य हुसैन सागर मार्ग पर रवाना होने से ठीक पहले इस पवित्र लड्डू की सार्वजनिक नीलामी आयोजित की जाती है। इस वर्ष 25 सितंबर 2026 को शुक्रवार के दिन होने वाली इस खुली बोली में हिस्सा लेने के लिए स्थानीय व्यवसायियों, राजनीतिक हस्तियों और श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। सभी लोग उत्सुकता से यह देखने का इंतजार कर रहे हैं कि क्या इस बार का सर्वोच्च आंकड़ा पिछले साल बने 35 लाख रुपये के सर्वकालिक रिकॉर्ड को पार कर पाएगा।

## 35 लाख रुपये का पिछला रिकॉर्ड और इस बार की उम्मीदें
बीते वर्ष 2025 में करमनघाट के निवासी लिंगाला दशरथ गौड़ ने 35 लाख रुपये की रिकॉर्ड बोली लगाकर इस पवित्र प्रसाद को अपने नाम किया था। चांदी के भव्य थाल में रखे जाने वाले इस 21 किलो के लड्डू की हर साल होने वाली नीलामी में भाग लेने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। शुक्रवार सुबह जैसे ही नीलामी प्रक्रिया संपन्न होगी, उसके तुरंत बाद हुसैन सागर झील की ओर जाने वाली शहर की विशालकाय गणेश विसर्जन यात्रा औपचारिक रूप से आगे बढ़ेगी। यही कारण है कि सुबह-सवेरे लगने वाली इस बोली के नए आंकड़ों पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी रहती हैं।

## 1994 में 450 रुपये से शुरू हुआ था यह ऐतिहासिक सफर
बालापुर गणेश उत्सव समिति ने सार्वजनिक रूप से इस लड्डू की नीलामी की परंपरा वर्ष 1994 में आरंभ की थी। उस समय गांव के ही एक स्थानीय कृषक कोलनू मोहन रेड्डी ने महज 450 रुपये की बोली देकर इस लड्डू को खरीदा था। जनश्रुति और जन-आस्था के अनुसार, इस प्रसाद को घर लाने के पश्चात उनके परिवार में अपार सुख-समृद्धि आई और उनकी कृषि उपज में कई गुना वृद्धि हुई। इसी अटूट विश्वास के चलते यह आयोजन जन-मानस में आस्था का एक बड़ा केंद्र बन गया। नीलामी जीतने वाले विजेता अक्सर इस प्रसाद के कुछ अंश अपने खेतों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में छिड़कते हैं तथा शेष हिस्सा अपने रिश्तेदारों एवं मित्रगणों में बांटते हैं।

## बीते वर्षों में बोलियों का निरंतर बढ़ता ग्राफ
शुरुआती वर्षों में सैकड़ों रुपये से शुरू हुई यह ऐतिहासिक नीलामी धीरे-धीरे लाखों रुपये का आंकड़ा पार करने लगी और हाल के वर्षों में इसने नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

- **2021:** रमेश यादव तथा एम. शशांक रेड्डी ने संयुक्त रूप से 18.90 लाख रुपये में खरीदा।
- **2022:** वी. लक्ष्मण रेड्डी ने 24.60 लाख रुपये की उच्चतम बोली लगाई।
- **2023:** डी. दयानंद रेड्डी ने 27.00 लाख रुपये में इसे हासिल किया।
- **2024:** कोलनू शंकर रेड्डी ने 30.01 लाख रुपये का आंकड़ा छुआ।
- **2025:** लिंगाला दशरथ गौड़ ने 35.00 लाख रुपये की रिकॉर्ड राशि जमा की।

## गाँव के सामाजिक विकास में होता है राशि का उपयोग
बालापुर लड्डू की इस खुली नीलामी से प्राप्त होने वाला शत-प्रतिशत धन गाँव के कल्याण और स्थानीय सुविधाओं को सुधारने में खर्च किया जाता है। समिति इस धनराशि का प्रयोग बालापुर गाँव की सड़कों के निर्माण, पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था, प्राथमिक विद्यालयों के विकास और स्थानीय ऐतिहासिक मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए करती है। धार्मिक आस्था और जन-कल्याण के इस अनोखे मेल के कारण ही हर साल 25 सितंबर की सुबह होने वाली इस नीलामी का हर कोई बेसब्री से इंतजार करता है।

## इसका आप पर असर
बालापुर गणेश लड्डू की नीलामी धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीण विकास का एक बड़ा उदाहरण प्रस्तुत करती है।

- **भारत भर में:** सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में सामाजिक कल्याण के समावेश की एक प्रेरणादायी मिसाल मिलती है। देश भर के उत्सव आयोजक इस मॉडल से सीख लेकर अपने धार्मिक कार्यक्रमों का फंड जन-सुविधाओं में लगा सकते हैं।
- **हैदराबाद और तेलंगाना में:** नीलामी से एकत्र होने वाली पूरी राशि से बालापुर गाँव में सड़कों, पेयजल, स्कूलों और मंदिरों का सुधार किया जाएगा। स्थानीय निवासियों को सीधे तौर पर बेहतर नागरिक बुनियादी ढांचा और सार्वजनिक सुविधाएं प्राप्त होंगी।

## ऐसा क्यों हुआ
बालापुर लड्डू नीलामी का इतिहास जन-आस्था, व्यक्तिगत समृद्धि की कहानियों और गाँव के विकास मॉडल से जुड़ा हुआ है।

- **प्रथम सफलता और जन-विश्वास:** वर्ष 1994 में पहली बार 450 रुपये में लड्डू खरीदने वाले किसान कोलनू Mohan Reddy की कृषि और परिवार में भारी समृद्धि देखी गई थी। इसी घटना ने लोगों के मन में विश्वास जगाया कि यह प्रसाद व्यवसाय और खेती में सफलता लाता है।
- **गाँव के विकास का मॉडल:** उत्सव समिति ने नीलामी की पूरी राशि को गाँव की सड़कों, पेयजल, स्कूल और मंदिरों के जीर्णोद्धार में लगाने की नीति बनाई। इस पारदर्शी विकास व्यवस्था ने हर साल कारोबारियों और दानदाताओं को बड़ी से बड़ी बोली लगाने के लिए प्रेरित किया।

## सवाल-जवाब

### 1. बालापुर गणेश लड्डू की नीलामी किस दिन आयोजित होगी?
यह नीलामी अनंत चतुर्दशी के अवसर पर शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 की सुबह विसर्जन यात्रा शुरू होने से ठीक पहले आयोजित होगी।

### 2. बालापुर के लड्डू की सबसे उच्चतम बोली का रिकॉर्ड कितना है?
सबसे उच्चतम बोली का रिकॉर्ड 35 लाख रुपये है, जो वर्ष 2025 में लिंगाला दशरथ गौड़ द्वारा लगाया गया था।

### 3. इस नीलामी की शुरुआत कब हुई थी और पहला लड्डू कितने में बिका था?
नीलामी की शुरुआत 1994 में हुई थी और पहला 21 किलो का लड्डू स्थानीय किसान कोलनू मोहन रेड्डी ने 450 रुपये में खरीदा था।

### 4. नीलामी से मिलने वाले धन का उपयोग कहाँ किया जाता है?
नीलामी से प्राप्त पूरी राशि बालापुर गाँव की सड़कों, पेयजल आपूर्ति, स्थानीय स्कूलों और मंदिरों के सुधार में खर्च की जाती है।

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