# मिथिलांचल में 23 अगस्त से शुरू होगा भद्र रवि व्रत, जानें नमक त्याग और सूर्य उपासना के पीछे का सेहत का रहस्य

> मिथिलांचल का प्रसिद्ध भद्र रवि व्रत 23 अगस्त 2026 से शुरू होकर 13 सितंबर तक चलेगा। भाद्रपद माह की उमस में स्वास्थ्य रक्षा और सूर्य देव की कृपा के लिए महिलाएं बिना नमक का उपवास रखती हैं।

**Type:** article · **Category:** त्योहार · **Published:** 2026-08-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/festivals/mithilanchal-men-23-agasta-se-shuru-hoga-bhadr-ravi-vrat-janen-namaka-tyaga-aura-surya-upasana-ke-pichhe-ka-sehata-ka-rahasya-15138 · **Language:** Hindi
**Tags:** भद्र रवि व्रत, अनुन रवि व्रत, मिथिलांचल, दरभंगा, सूर्य उपासना, भाद्रपद माह

मिथिलांचल में आस्था और सेहत के अनूठे संगम के रूप में मनाया जाने वाला भद्र रवि व्रत इस साल 23 अगस्त 2026 से शुरू होने जा रहा है। इसे क्षेत्र में अनुन रवि व्रत के नाम से भी जाना जाता है। भाद्रपद महीने के पहले रविवार से शुरू होने वाला यह पावन अनुष्ठान 13 सितंबर 2026 को संपन्न होगा। इस व्रत की कुल समय सीमा भाद्र माह की संक्रांति की स्थिति के आधार पर तय की जाती है, जिसके अनुसार रविवार के व्रत रखे जाते हैं।

## नमक त्याग के पीछे छिपा स्वास्थ्य का विज्ञान
इस धार्मिक अनुष्ठान के पीछे गहरी वैज्ञानिक सोच भी समाहित है। कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर और कुलानुशासक डॉ. कुणाल कुमार झा ने इस व्रत के वैज्ञानिक पहलू पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भाद्रपद के महीने में भीषण गर्मी और उमस का माहौल रहता है, जिससे शरीर में रक्तचाप बढ़ने की आशंका काफी अधिक हो जाती है। इसी मौसमी जोखिम को ध्यान में रखते हुए हमारे पूर्वजों ने इस दौरान भोजन में नमक का पूरी तरह त्याग करने का नियम बनाया था।

## पूजा की विधि और धार्मिक मान्यताएं
व्रत रखने वाली महिलाएं पूरे दिन निर्जला या बिना नमक के उपवास रखती हैं। दिन भर भगवान सूर्य देव की विधि-विधान से उपासना की जाती है। शाम को सूर्यास्त के पश्चात ही व्रती महिलाएं फलाहार ग्रहण करती हैं। मिथिलांचल की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस कठोर नियम का पालन करने से परिवार में सुख और समृद्धि का वास होता है, साथ ही परिजनों का स्वास्थ्य उत्तम बना रहता है।

## परंपरा और कल्याण का अनूठा संगम
23 अगस्त से 13 सितंबर तक चलने वाला यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पारंपरिक जीवनशैली और स्वास्थ्य सुरक्षा की मिसाल है। दरभंगा सहित संपूर्ण मिथिलांचल की महिलाएं इस पावन अवसर को लेकर काफी उत्साहित हैं और नियमपूर्वक सूर्य देव की आराधना की तैयारियों में जुट गई हैं।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** मौसम परिवर्तन के समय खान-पान में नमक और आहार का ध्यान रखकर मौसमी बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।
- **बिहार/मिथिलांचल में:** 23 अगस्त से 13 सितंबर के दौरान व्रती महिलाएं धार्मिक नियमों के साथ-साथ उमस भरे मौसम में अपने रक्तचाप और सेहत का ध्यान रख सकती हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. भद्र रवि व्रत 2026 कब से कब तक चलेगा?
यह व्रत 23 अगस्त 2026, रविवार से शुरू होकर 13 सितंबर 2026 को संपन्न होगा।

### 2. भद्र रवि व्रत को और किस नाम से जाना जाता है?
मिथिलांचल में इस व्रत को अनुन रवि व्रत के नाम से भी जाना जाता है।

### 3. भद्र रवि व्रत में नमक का त्याग क्यों किया जाता है?
भाद्रपद महीने की भीषण गर्मी और उमस में रक्तचाप बढ़ने का खतरा रहता है, इसलिए स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए नमक का त्याग किया जाता है।

### 4. भद्र रवि व्रत के दौरान पूजा और फलाहार का क्या नियम है?
दिन भर बिना नमक के व्रत रखकर भगवान सूर्य देव की पूजा की जाती है और सूर्यास्त के बाद फलाहार लिया जाता है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._