नागपंचमी पर उज्जैन में श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट खुले, 24 घंटे के दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ महाकालेश्वर मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट नागपंचमी पर रात 12 बजे खोल दिए गए। वर्ष में केवल एक बार 24 घंटे के लिए खुलने वाले इस प्राचीन मंदिर में दुर्लभ प्रतिमा के दर्शन के लिए भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। श्रावण मास की शुक्ल पक्ष पंचमी के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित प्रसिद्ध श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। महाकालेश्वर मंदिर परिसर के तीसरे शिखर तल पर स्थित यह अत्यंत पवित्र धाम वर्ष भर बंद रहता है और केवल नागपंचमी के दिन 24 घंटे की अवधि के लिए इसके पट खोले जाते हैं। मध्यरात्रि ठीक 12 बजे पूरे विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ मंदिर के द्वार खोले गए, जिसके तुरंत बाद से ही भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन पाने के लिए देशभर से आए भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। 11वीं शताब्दी की दुर्लभ प्रतिमा और पौराणिक मान्यताएं श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर में स्थापित प्रतिमा स्थापत्य कला और धार्मिक दृष्टि से पूरी तरह अद्वितीय है। यहां 11वीं शताब्दी की एक अति दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है, जिसमें भगवान शिव, माता पार्वती और प्रथम पूज्य गणेश जी एक साथ दस मुख वाले सर्पराज की शय्या पर विराजमान हैं। पूरी दुनिया में केवल उज्जैन के इसी मंदिर में भगवान भोलेनाथ का ऐसा दुर्लभ स्वरूप देखने को मिलता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सर्पराज तक्षक ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने तक्षक नाग को अमरत्व का वरदान दिया। इसके पश्चात तक्षक राजा ने महाकाल वन में निवास करना आरंभ कर दिया। उन्होंने प्रार्थना की थी कि उनके एकांतवास में कोई बाधा न पहुंचे। इसी प्राचीन परंपरा का सम्मान करते हुए इस मंदिर के कपाट वर्ष में केवल एक बार नागपंचमी पर ही खोले जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस पावन अवसर पर भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन करने से व्यक्ति को सभी प्रकार के सर्पदोष और कालसर्प दोष से मुक्ति मिल जाती है। त्रिकाल पूजा अनुष्ठान की समय सारणी नागपंचमी के पावन पर्व पर मंदिर में विशेष त्रिकाल पूजा की परंपरा निभाई जा रही है। प्रथम पूजा 16 अगस्त की मध्यरात्रि 12 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही संपन्न हुई, जिसमें महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरी महाराज ने विशेष पूजन-अर्चन कर महाआरती की। इसके बाद द्वितीय पूजा 17 अगस्त को दोपहर 12 बजे अखाड़े के संतों द्वारा संपन्न की जाएगी। वहीं तृतीय एवं अंतिम संध्या पूजा महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल की संध्या आरती के तुरंत पश्चात होगी, जिसमें महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी एवं पुरोहित भगवान नागचंद्रेश्वर का विशेष अभिषेक और पूजन करेंगे। व्यापक सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की निगरानी नागपंचमी पर उमड़ने वाली विशाल भीड़ को देखते हुए उज्जैन प्रशासन और पुलिस विभाग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। लगभग 2,400 पुलिसकर्मियों को 36 घंटे की निरंतर ड्यूटी पर तैनात किया गया है। पूरे मंदिर क्षेत्र, प्रवेश एवं निकास मार्गों और प्रमुख चौराहों पर नजर रखने के लिए 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। कंट्रोल रूम के माध्यम से हर गतिविधि पर सतत निगरानी रखी जा रही है ताकि दर्शन करने आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल मिल सके। श्रद्धालुओं के लिए निर्धारित प्रवेश और निकास मार्ग भीड़ के सुचारू प्रबंधन के लिए प्रशासन ने दर्शनार्थियों के लिए अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए हैं • सामान्य दर्शनार्थी मार्ग: सामान्य दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु कर्कराज पार्किंग से प्रवेश करेंगे। इसके बाद भील समाज धर्मशाला, गोंड मोहल्ला, चारधाम, हरसिद्धि चौराहा और बड़ा गणेश होते हुए गेट नंबर 4 से मंदिर परिसर में पहुंचेंगे। विश्रामधाम के रास्ते नागचंद्रेश्वर भगवान के दर्शन कर प्रीपेड बूथ के रास्ते बाहर निकलेंगे और 24 खंबा रोड होते हुए पुनः कर्कराज पार्किंग पहुंचेंगे। • शीघ्र दर्शन मार्ग: शीघ्र दर्शन की रसीद लेने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश हरसिद्धि पाल से रखा गया है। यह मार्ग बड़ा गणेश होते हुए गेट नंबर 5 से विश्रामधाम पहुंचेगा, जहां से दर्शन के बाद श्रद्धालु प्रीपेड बूथ और 24 खंबा रोड होकर वापस हरसिद्धि पाल जा सकेंगे। • भगवान महाकाल सामान्य दर्शन मार्ग: जो भक्त केवल भगवान महाकालेश्वर के सामान्य दर्शन करना चाहते हैं, वे त्रिवेणी संग्रहालय प्रवेश द्वार से प्रवेश करेंगे। वहां से नंदी द्वार, मानसरोवर फैसिलिटी, गणेश मंडपम और कार्तिक मंडपम होते हुए दर्शन करेंगे और एंबुलेंस गेट से निकलकर पिनाकी द्वार से बाहर जाएंगे। इसका आप पर असर • भारत भर के श्रद्धालुओं के लिए: वर्ष में केवल एक बार मिलने वाले इस दुर्लभ दर्शन के लिए उज्जैन पहुँचने वाले भक्तों को निर्धारित प्रवेश मार्गों और समय सारणी का ध्यान रखना अनिवार्य है। • उज्जैन नगर में: सुरक्षा के लिए 2,400 पुलिसकर्मियों की तैनाती और रूट डायवर्जन के कारण मंदिर क्षेत्र तथा आसपास के मार्गों पर यातायात नियंत्रण प्रभावी रहेगा। सवाल-जवाब 1. श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर वर्ष में कितने दिन खुलता है? श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर वर्ष में केवल एक दिन, नागपंचमी के अवसर पर 24 घंटे के लिए खुलता है। 2. नागचंद्रेश्वर मंदिर की प्रतिमा की क्या खासियत है? यहाँ 11वीं शताब्दी की दुर्लभ प्रतिमा है जिसमें भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश दस मुख वाले सर्प की शय्या पर विराजमान हैं। 3. मंदिर के कपाट खुलने का समय और तारीख क्या है? कपाट 16 अगस्त की मध्यरात्रि 12 बजे खोले गए, जो 17 अगस्त की रात 12 बजे तक खुले रहेंगे। 4. सामान्य दर्शनार्थियों के लिए प्रवेश मार्ग क्या है? सामान्य दर्शनार्थी कर्कराज पार्किंग से प्रवेश कर चारधाम, हरसिद्धि चौराहा और बड़ा गणेश होते हुए गेट नंबर 4 से प्रवेश करेंगे। https://trendkia.com/festivals/nag-panchami-para-ujjain-men-shri-nagchandreshwar-temple-ke-pata-khule-24-ghnte-ke-darshana-ke-lie-umari-shraddhaluon-ki-bhari-bhi-17669 TrendKia — Har trend, sabse pehle.