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  "type": "article",
  "title": "अक्टूबर में गुरु प्रदोष व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्त तय, शिवलिंग पर 5 विशेष चीजें अर्पित करने का विधान",
  "summary": "आश्विन कृष्ण त्रयोदशी पर 8 अक्टूबर को गुरु प्रदोष का उपवास रखा जाएगा। शाम को पूजा के लिए 5 बजकर 59 मिनट से 8 बजकर 27 मिनट तक का समय रहेगा।",
  "content": "सनातन परंपरा में देवों के देव महादेव और माता पार्वती की कृपा पाने के लिए प्रदोष व्रत का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। पंचांग के अनुसार प्रत्येक महीने के दोनों पक्षों, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को यह उपवास रखा जाता है। सप्ताह के जिस वार को त्रयोदशी तिथि पड़ती है, उसी वार के नाम पर इस व्रत का नामकरण होता है। इस क्रम में अक्टूबर महीने का पहला प्रदोष व्रत 8 अक्टूबर, गुरुवार के दिन रखा जाएगा। गुरुवार के संयोग के कारण इसे गुरु प्रदोष या बृहस्पति प्रदोष कहा जाता है। मान्यता है कि इस पावन अवसर पर भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत उपासना करने से जीवन की समस्त बाधाएं समाप्त होती हैं और मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं।\n\nगुरु प्रदोष 2026: तिथि विस्तार और सायंकालीन पूजा मुहूर्त\nपंचांग गणना के अनुसार आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 7 अक्टूबर को रात 11 बजकर 16 मिनट पर होगी। यह त्रयोदशी तिथि अगले दिन यानी 8 अक्टूबर को रात 10 बजकर 15 मिनट पर समाप्त होगी। प्रदोष काल की पूजा सूर्यास्त के समय सायंकाल में की जाती है, इसलिए उदयातिथि और प्रदोष काल के संयोग के चलते 8 अक्टूबर को ही यह व्रत मान्य रहेगा। इस दिन गुरु प्रदोष की मुख्य पूजा का शुभ मुहूर्त शाम को 5 बजकर 59 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। श्रद्धालुओं को इसी समयावधि के भीतर शिव परिवार की पूजा-अर्चना संपन्न करने का विधान बताया गया है।\n\nशिवलिंग पर अर्पित की जाने वाली 5 प्रमुख सामग्रियां\nगुरु प्रदोष के पावन अवसर पर शिवलिंग का विशेष अभिषेक और पूजन करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पांच विशेष वस्तुएं अर्पित करने से महादेव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और साधक की मनोकामनाएं पूरी करते हैं\n\n• बेलपत्र का अर्पण: भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र को अत्यंत प्रिय माना गया है। इस दिन शिवलिंग पर श्रद्धापूर्वक बेलपत्र चढ़ाने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं।\n• आठ स्थानों पर पीला चंदन: गुरु प्रदोष के दिन शिवलिंग पर आठ अलग-अलग स्थानों पर पीला चंदन लगाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि पीला चंदन अर्पित करने से भोलेनाथ प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।\n• शहद से लेपन: पूजन के दौरान शिवलिंग पर शहद जरूर चढ़ाना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि महादेव को शहद अर्पित करने से साधक को अपने जीवन में भाग्य का पूरा सहयोग प्राप्त होता है।\n• कच्चे दूध से अभिषेक: इस दिन शिवलिंग का कच्चे दूध से अभिषेक करने की परंपरा है। ऐसा करने से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।\n• पंचामृत से स्नान: प्रदोष काल में शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है। पंचामृत को दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल के पावन मिश्रण से तैयार किया जाता है।\n\nगुरु प्रदोष व्रत का धार्मिक व ज्योतिषीय महत्व\nजब भी त्रयोदशी तिथि गुरुवार के दिन पड़ती है, तो उसे गुरु प्रदोष अथवा बृहस्पति प्रदोष कहा जाता है। ज्योतिष और धर्मशास्त्रों में बृहस्पति ग्रह को ज्ञान, विद्या, धर्म, उच्च शिक्षा, धन-संपत्ति, विवाह, संतान, शिक्षक, ज्येष्ठ भ्राता, पिता और दान-पुण्य का मुख्य कारक माना गया है। यही कारण है कि गुरु प्रदोष का व्रत रखने और शिव उपासना करने से इन सभी क्षेत्रों में विशेष उन्नति प्राप्त होती है। यह उपवास विशेष रूप से विद्यार्थियों, ज्ञान के साधकों और आध्यात्मिक साधना में लगे लोगों के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।\n\nइसका आप पर असर\nगुरु प्रदोष व्रत के निर्धारित मुहूर्त और पूजा विधान से श्रद्धालुओं को सही समय पर उपासना संपन्न करने में मदद मिलेगी।\n\n• पूजा का समय: शाम की पूजा 5 बजकर 59 मिनट से 8 बजकर 27 मिनट के बीच होगी। श्रद्धालुओं को इसी समय के दौरान शिवलिंग का अभिषेक और आरती पूरी करनी चाहिए।\n• व्रत का दिन: त्रयोदशी तिथि का उपवास 8 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। व्रत रखने वाले साधक सायंकाल पूजा के उपरांत ही पारण अथवा फलाहार की योजना बनाएं।\n• तैयारी का नियम: पूजा के लिए कच्चा दूध, बेलपत्र, शहद, पीला चंदन और पंचामृत पहले से जुटा लें। शिवलिंग पर आठ स्थानों पर पीला चंदन लगाने का विधान अवश्य ध्यान में रखें।\n• विद्यार्थियों के लिए लाभ: यह व्रत ज्ञान और शिक्षा में प्रगति के लिए श्रेष्ठ माना गया है। पढ़ाई या करियर की तैयारी कर रहे युवा इसे अध्ययन में एकाग्रता के संकल्प के साथ रख सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nसप्ताह के गुरुवार के दिन त्रयोदशी तिथि का संयोग बनने के कारण यह विशेष व्रत गुरु प्रदोष के रूप में मनाया जा रहा है।\n\n• तिथि का संयोग: आश्विन कृष्ण त्रयोदशी तिथि 7 अक्टूबर की रात 11 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर 8 अक्टूबर की रात 10 बजकर 15 मिनट तक व्याप्त रहेगी। प्रदोष काल शाम को मिलने के कारण गुरुवार को ही पूजा निर्धारित हुई।\n• वार का प्रभाव: गुरुवार का दिन देवगुरु बृहस्पति से जुड़ा माना जाता है। जब इस दिन शिव आराधना का त्रयोदशी योग बनता है, तो इसे बृहस्पति अथवा गुरु प्रदोष कहा जाता है।\n• धार्मिक परंपरा: हिंदू पंचांग में हर महीने के दोनों पक्षों में त्रयोदशी को प्रदोष व्रत रखने का विधान सदियों से चला आ रहा है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त आराधना के लिए समर्पित रहता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अक्टूबर 2026 में गुरु प्रदोष का व्रत किस तारीख को रखा जाएगा?\nयह व्रत 8 अक्टूबर, गुरुवार के दिन रखा जाएगा।\n\n2. गुरु प्रदोष की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?\nशाम की पूजा का शुभ मुहूर्त 5 बजकर 59 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 27 मिनट तक रहेगा।\n\n3. आश्विन कृष्ण त्रयोदशी तिथि कब से कब तक रहेगी?\nत्रयोदशी तिथि 7 अक्टूबर को रात 11 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर 8 अक्टूबर को रात 10 बजकर 15 मिनट तक रहेगी।\n\n4. गुरु प्रदोष के दिन शिवलिंग पर कौन सी 5 चीजें अर्पित करनी चाहिए?\nइस दिन शिवलिंग पर बेलपत्र, पीला चंदन, शहद, कच्चा दूध और पंचामृत चढ़ाने का विधान है।\n\n5. शिवलिंग पर पीला चंदन किस प्रकार लगाना चाहिए?\nधार्मिक मान्यता के अनुसार गुरु प्रदोष पर शिवलिंग पर आठ स्थानों पर पीला चंदन लगाया जाता है।\n\n6. गुरु प्रदोष व्रत किन लोगों के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है?\nयह व्रत विशेष रूप से विद्यार्थियों, ज्ञान के साधकों और आध्यात्मिक उन्नति चाहने वालों के लिए श्रेष्ठ माना गया है।",
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  "category": "त्योहार",
  "publishedAt": "2026-10-07",
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    "गुरु प्रदोष",
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    "शिवलिंग पूजा",
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    "पूजा मुहूर्त"
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