# पर्यावरण सुरक्षा के साथ बप्पा का स्वागत, गणेश चतुर्थी पर दिल्ली के इन प्रमुख बाजारों से खरीदें मिट्टी की ईको फ्रेंडली मूर्तियां

> दिल्ली के प्रमुख बाजारों में गणेश चतुर्थी को लेकर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। इस वर्ष पर्यावरण-अनुकूल शाडू मिट्टी से बनी बप्पा की सुंदर मूर्तियों की भारी मांग देखी जा रही है।

**Type:** article · **Category:** त्योहार · **Published:** 2026-09-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/festivals/paryavarana-suraksha-ke-satha-bappa-ka-svagata-ganesh-chaturthi-para-delhi-ke-ina-pramukha-bajaron-se-khariden-mitti-ki-iko-phrend-31840 · **Language:** Hindi
**Tags:** गणेश चतुर्थी 2026, ईको-फ्रेंडली गणपति, दिल्ली बाजार, शाडू मिट्टी की मूर्तियां, गणपति स्थापना

गणेश उत्सव के आगमन के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की प्रमुख सड़कें और व्यापारिक केंद्र बप्पा की भव्य मूर्तियों से सज चुके हैं। श्रद्धालुओं में भगवान गणेश की स्थापना को लेकर जबर्दस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। इस वर्ष उत्सव की सबसे बड़ी खासियत पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता है। बड़ी संख्या में लोग प्लास्टर ऑफ पेरिस के बजाय मिट्टी से बनी ईको-फ्रेंडली प्रतिमाओं को तरजीह दे रहे हैं। शाडू मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से संवारी गई ये मूर्तियां न केवल देखने में बेहद मनमोहक हैं, बल्कि जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने में भी मददगार साबित हो रही हैं। पूर्वी दिल्ली की तंग गलियों से लेकर द्वारका के नए उपनगरों और मध्य दिल्ली के हस्तशिल्प केंद्रों तक, हर तरफ बप्पा के खरीदारों का तांता लगा हुआ है।

## पूर्वी दिल्ली में दुर्गापुरी से शाहदरा तक बप्पा के बाज़ार
पूर्वी दिल्ली के इलाकों में गणेश चतुर्थी की रौनक देखते ही बन रही है। दुर्गापुरी, गोकुलपुरी और शाहदरा के स्थानीय बाजारों में छोटी से लेकर विशालकाय प्रतिमाओं के दर्जनों स्टॉल लगाए गए हैं। यहां के दुकानदारों का कहना है कि घर-परिवार में बप्पा की स्थापना करने वाले लोग ऐसे विकल्पों की तलाश में हैं जिन्हें उत्सव समाप्ति के बाद गमले या छोटे बर्तन में आसानी से विसर्जित किया जा सके। परिवारों के बीच खासतौर पर छोटी और मध्यम आकार की मूर्तियों की भारी मांग देखी जा रही है, जिससे पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक आस्था का एक सुंदर संतुलन बन रहा है।

## द्वारका सेक्टर-3 और राजापुरी रोड पर खरीदारी के प्रमुख ठिकाने
पश्चिमी दिल्ली के प्रमुख रिहाइशी इलाके द्वारका में भी गणेश मूर्तियों का व्यापार तेजी पकड़ चुका है। विशेष रूप से द्वारका सेक्टर-3 स्थित मेन राजापुरी रोड और विश्वास पार्क एक्सटेंशन में मूर्तियों की विविध श्रृंखला उपलब्ध कराई गई है। यहां स्थित 'श्री गणेश मूर्ति आर्ट' पर ईको-फ्रेंडली गणपति की कई खूबसूरत किस्में मौजूद हैं। ऑनलाइन बिजनेस लिस्टिंग में भी इस जगह को ईको-फ्रेंडली गणपति मूर्तियों के प्रमुख केंद्र के रूप में दर्ज किया गया है। बहुमंजिला इमारतों और सीमित स्थान वाले घरों में रहने वाले श्रद्धालुओं के लिए यहां विशेष रूप से आकर्षक छोटी और मध्यम साइज की शाडू मिट्टी की प्रतिमाएं तैयार की गई हैं।

## वेस्ट पंजाबी बाग स्थित गनेशालय में शाडू मिट्टी की आकर्षक कलाकारी
वेस्ट दिल्ली के भगवान दास नगर, मेन रोहतक रोड स्थित 'गनेशालय' इस बार पर्यावरण प्रेमियों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है। यह केंद्र खास तौर पर शुद्ध शाडू मिट्टी से निर्मित ईको-फ्रेंडली प्रतिमाओं के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। यहां पारंपरिक और आधुनिक डिजाइनों का अनोखा संगम देखने को मिलता है। मूर्तिकारों ने श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखते हुए बप्पा के विभिन्न रूपों को बेहद बारीकी से तराशा है। इन प्रतिमाओं में प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया गया है, जो विसर्जन के दौरान पानी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते।

## करोल बाग और बाबा खड़क सिंह मार्ग का हस्तशिल्प बाजार
मध्य दिल्ली के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र करोल बाग में भी गणपति स्थापना की तैयारियां चरम पर हैं। करोल बाग के गुरुद्वारा रोड और बीडनपुरा इलाके में श्रद्धालुओं के लिए ईको-फ्रेंडली मूर्तियों की विस्तृत रेंज उपलब्ध है। करोल बाग हमेशा से दिल्ली का मुख्य खरीदारी केंद्र रहा है, जहां त्योहारों के मौसम में ग्राहकों की भारी आवाजाही रहती है। वहीं दूसरी ओर, सेंट्रल दिल्ली के बाबा खड़क सिंह मार्ग स्थित एम्पोरियम एरिया में भी पारंपरिक हस्तशिल्प से तैयार प्रतिमाएं उपलब्ध कराई गई हैं। राज्य स्तरीय एम्पोरियम और हस्तशिल्प दुकानों में आने वाले कला प्रेमी श्रद्धालु यहां से पर्यावरण-अनुकूल मूर्तियों की खरीदारी कर रहे हैं। इस प्रकार पूरी दिल्ली में आस्था और प्रकृति की सुरक्षा का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।

## इसका आप पर असर
गणेश चतुर्थी पर ईको-फ्रेंडली मूर्तियों की बढ़ती मांग से पर्यावरण और स्थानीय कारीगरों दोनों को बड़ा फायदा मिल रहा है।

- **दिल्ली में:** स्थानीय निवासियों के लिए घर में ही बाल्टी या गमले में बप्पा का विसर्जन करना आसान हो गया है। इससे यमुना नदी में प्रदूषण का स्तर कम होगा और सार्वजनिक विसर्जन स्थलों पर भीड़-भाड़ से राहत मिलेगी।
- **भारत में:** देश भर के प्रमुख शहरों में प्लास्टर ऑफ पेरिस के स्थान पर प्राकृतिक मिट्टी के उपयोग को बढ़ावा मिल रहा है। इससे नदियों और तालाबों के पारिस्थितिकी तंत्र को जहरीले रसायनों और रंगों से सुरक्षा मिलती है।
- **स्थानीय मूर्तिकारों के लिए:** पारंपरिक शाडू मिट्टी का उपयोग करने वाले स्थानीय कारीगरों की आय और मांग में वृद्धि हुई है। त्योहारों के मौसम में हस्तशिल्प उद्योग को प्रत्यक्ष वित्तीय प्रोत्साहन मिल रहा है।
- **अपार्टमेंट निवासियों के लिए:** छोटे और मध्यम आकार की मूर्तियों की उपलब्धता से कम जगह वाले घरों में भी बप्पा की स्थापना संभव हो पाई है। विसर्जन के बाद बची मिट्टी का उपयोग घर के पौधों में खाद के रूप में किया जा सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
दिल्ली के विभिन्न बाजारों में ईको-फ्रेंडली मूर्तियों की मांग और उपलब्धता बढ़ने के पीछे पर्यावरणीय चिंताएं और श्रद्धालुओं की बदलती सोच मुख्य कारण हैं। पारंपरिक विसर्जन विधियों से जल स्रोतों पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभावों के कारण यह बदलाव देखने को मिल रहा है।

- **पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता:** प्लास्टर ऑफ पेरिस और रासायनिक रंगों से जलस्रोतों को होने वाले नुकसान के प्रति नागरिक अधिक जागरूक हुए हैं। इसी वजह से लोग शाडू मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी मूर्तियों को पहली पसंद बना रहे हैं।
- **शहरी जीवनशैली और सीमित स्थान:** फ्लैटों और छोटे घरों में रहने वाले परिवारों के लिए बड़ी मूर्तियों का विसर्जन चुनौतीपूर्ण होता था। छोटी और मध्यम आकार की मिट्टी की मूर्तियां घर पर ही गमले या बाल्टी में आसानी से घुल जाती हैं।
- **बाजार में आसान पहुंच:** दिल्ली के ईस्ट, वेस्ट, द्वारका और करोल बाग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में मूर्तिकारों और विक्रेताओं ने शाडू मिट्टी की मूर्तियों की विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध कराई है। इससे ग्राहकों को आसानी से विकल्प मिल जाते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. दिल्ली में ईको-फ्रेंडली गणपति मूर्तियां किन मुख्य बाजारों में मिल रही हैं?
दिल्ली में दुर्गापुरी, गोकुलपुरी, शाहदरा, द्वारका सेक्टर-3 (राजापुरी रोड), वेस्ट पंजाबी बाग (गनेशालय), करोल बाग (गुरुद्वारा रोड) और बाबा खड़क सिंह मार्ग पर ईको-फ्रेंडली मूर्तियां मिल रही हैं।

### 2. ईको-फ्रेंडली गणपति प्रतिमाएं किस मिट्टी से बनाई जाती हैं?
ये मूर्तियां मुख्य रूप से शुद्ध शाडू मिट्टी और प्राकृतिक मिट्टी से बनाई जाती हैं, जिन पर पर्यावरण-अनुकूल रंगों का इस्तेमाल होता है।

### 3. घरों के लिए किस आकार की गणपति मूर्तियों की मांग अधिक है?
सीमित जगह और आसान विसर्जन को ध्यान में रखते हुए परिवारों के बीच छोटी और मध्यम आकार की मूर्तियों की मांग सबसे ज्यादा है।

### 4. वेस्ट पंजाबी बाग में शाडू मिट्टी की मूर्तियों के लिए कौन सा केंद्र प्रसिद्ध है?
वेस्ट पंजाबी बाग के भगवान दास नगर, मेन रोहतक रोड स्थित 'गनेशालय' शाडू मिट्टी से बनी ईको-फ्रेंडली मूर्तियों के लिए जाना जाता है।

### 5. घर पर ईको-फ्रेंडली मूर्तियों के विसर्जन का क्या फायदा है?
मिट्टी की मूर्तियां पानी में आसानी से घुल जाती हैं, जिससे घर पर ही गमले या बाल्टी में विसर्जन संभव होता है और नदियों में जल प्रदूषण नहीं फैलता।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._