# राजस्थान के पुष्कर मेले में इस बार बकरियां भी दिखाएंगी सुंदरी प्रतियोगिता का जलवा, 10 नवंबर से होगी शुरुआत

> अजमेर के पुष्कर मेले में 10 नवंबर से पहली बार बकरी सुंदरी प्रतियोगिता आयोजित होगी, जिसमें सोजत और सिरोही नस्ल की बकरियां हिस्सा लेंगी।

**Type:** article · **Category:** त्योहार · **Published:** 2026-11-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/festivals/rajasthan-ke-pushkar-mele-men-isa-bara-bakariyan-bhi-dikhaengi-sundari-pratiyogita-ka-jalava-10-navnbara-se-hogi-shuruata-56974 · **Language:** Hindi
**Tags:** पुष्कर मेला, बकरी सुंदरी प्रतियोगिता, अजमेर समाचार, सोजत बकरी, सिरोही बकरी, राजस्थान पशुपालन

अंतरराष्ट्रीय पुष्कर मेले का आयोजन इस वर्ष 10 नवंबर से अजमेर जिले के पुष्कर क्षेत्र में शुरू होने जा रहा है। पारंपरिक रूप से ऊंटों और घोड़ों के लिए पहचाने जाने वाले इस सांस्कृतिक और व्यापारिक मेले में इस बार बकरियां भी अपनी सुंदरता और शारीरिक बनावट का जलवा बिखेरती नजर आएंगी। पशुपालकों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और स्थानीय नस्लों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस मेले में बकरी सुंदरी प्रतियोगिता का विशेष आयोजन किया जा रहा है, जिससे पुष्कर मेले में एक नया आकर्षण जुड़ेगा।

## पुष्कर सुंदरी का खिताब और चयन के मानदंड
इस प्रतियोगिता का मुख्य आकर्षण 'पुष्कर सुंदरी' का खिताब रहेगा, जो सबसे सुंदर और शारीरिक रूप से सुगठित बकरी को प्रदान किया जाएगा। प्रतियोगिता के दौरान बकरियों के चयन के लिए उनके रंग-रूप, शारीरिक संरचना, कद-काठी और समग्र आकर्षण को मानक बनाया गया है। इसमें विशेष रूप से राजस्थान की दो प्रसिद्ध नस्लों, सिरोही और सोजत, की बकरियां हिस्सा लेंगी। इस मंच के माध्यम से स्थानीय पशुपालक अपनी बकरियों की विशेषताओं और उनकी नस्ल की गुणवत्ता को देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और खरीदारों के सामने प्रस्तुत कर सकेंगे।

## परंपरा की वापसी और प्रमुख नस्लों का महत्व
पशुपालन विभाग के अधिकारी डॉ. नवीन परिहार ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पुष्कर मेले में बकरियों की सौंदर्य प्रतियोगिताएं बहुत पहले आयोजित की जाती थीं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों के दौरान यह परंपरा बंद हो गई थी, जिसे अब दोबारा शुरू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अजमेर और नागौर जिले मुख्य रूप से सिरोही नस्ल की बकरियों के संरक्षण व पालन के लिए जाने जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ पाली, सिरोही और भीलवाड़ा जैसे जिलों के ग्रामीण इलाकों में सोजत और सिरोही दोनों ही नस्लों के पशुपालक बड़ी संख्या में मौजूद हैं।

## ग्रामीण रोजगार और आय में वृद्धि की उम्मीद
डॉ. नवीन परिहार के अनुसार इन प्रतियोगिताओं के आयोजन से ग्रामीण पशुपालकों में बेहतर नस्ल संवर्धन के प्रति रुचि और प्रतिस्पर्धात्मक भावना जागृत होगी। जब पशुपालक अपनी बकरियों की अच्छी नस्लों का प्रदर्शन करेंगे, तो इससे उन्हें बाजार में बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी। यह पहल न केवल पशुपालकों का उत्साह बढ़ाएगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका, रोजगार और आय के नए अवसरों को सृजित करने में भी मददगार साबित होगी।

## नागौरी बैल और बछड़ों के लिए भी रहेंगी विशेष स्पर्धाएं
पुष्कर मेले में केवल ऊंट, घोड़े और बकरियां ही ध्यान का केंद्र नहीं रहेंगी, बल्कि नागौरी बैलों की जोड़ियों और बछड़ों की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी। इन प्रतियोगिताओं को पशुओं की उम्र और शारीरिक विकास के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें अदंत (दूध के दांत वाले बछड़े), चार दांत और छह दांत की श्रेणियों में मुकाबले आयोजित किए जाएंगे। इस प्रकार का विभाजन पशुपालकों को अपने पशुओं की सही उम्र और क्षमता के अनुसार प्रतिस्पर्धा में उतारने का अवसर प्रदान करता है।

## इसका आप पर असर
पुष्कर मेले में बकरियों और नागौरी बैलों की इन विशेष प्रतियोगिताओं से पशुपालकों की व्यावसायिक पहुंच और आय पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

- **राजस्थान में:** अजमेर, नागौर, पाली, सिरोही और भीलवाड़ा के पशुपालकों को अपनी उच्च गुणवत्ता वाली सिरोही और सोजत बकरियों के बेहतर दाम मिलेंगे। मेले के माध्यम से पशुपालक नए खरीदारों से सीधे संपर्क बना सकेंगे जिससे मध्यस्थों पर निर्भरता कम होगी।
- **व्यावसायिक अवसर:** पशु सौंदर्य प्रतियोगिताओं में विजेता बनने से पशुओं का बाजार मूल्य बढ़ जाता है। इससे ग्रामीण पशुपालकों को उच्च नस्ल संवर्धन और बेहतर देखभाल के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
- **पर्यटन विकास:** नई प्रतियोगिताओं के जुड़ने से अंतरराष्ट्रीय और घरेलू पर्यटकों की रुचि मेले में बढ़ेगी। इससे स्थानीय हस्तशिल्प, परिवहन और होटल व्यवसाय को अतिरिक्त आर्थिक लाभ पहुंचेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
पुष्कर पशु मेले में बकरियों की सुंदरी प्रतियोगिता को फिर से शुरू करने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण और उद्देश्य शामिल हैं।

- **नस्ल प्रोत्साहन:** राजस्थान की प्रसिद्ध सिरोही और सोजत नस्ल की बकरियों के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देना मुख्य कारण है।
- **परंपरा की पुनर्बहाली:** बकरियों की प्रतियोगिताएं अतीत में मेले का हिस्सा हुआ करती थीं, जिन्हें लंबे अंतराल के बाद सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए पुनर्जीवित किया गया है।
- **ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती:** पशुपालकों में प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करके उन्हें व्यावसायिक स्तर पर पशुपालन अपनाने के लिए प्रेरित करना प्रशासन का उद्देश्य है।

## सवाल-जवाब

### 1. पुष्कर मेले की शुरुआत किस तारीख से हो रही है?
अंतरराष्ट्रीय पुष्कर मेले की शुरुआत 10 नवंबर से होने जा रही है।

### 2. इस बार मेले में बकरियों के लिए कौन सी खास प्रतियोगिता होगी?
मेले में बकरियों के लिए 'बकरी सुंदरी प्रतियोगिता' आयोजित की जाएगी जिसमें विजेता बकरी को 'पुष्कर सुंदरी' का खिताब मिलेगा।

### 3. प्रतियोगिता में मुख्य रूप से किन नस्लों की बकरियां भाग लेंगी?
इस प्रतियोगिता में मुख्य रूप से राजस्थान की सिरोही और सोजत नस्ल की बकरियां भाग लेंगी।

### 4. नागौरी बैलों और बछड़ों की प्रतियोगिताएं किन श्रेणियों में होंगी?
नागौरी बैलों और बछड़ों की प्रतियोगिताएं अदंत (दूध के दांत), चार दांत और छह दांत की श्रेणियों में आयोजित होंगी।

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