रक्षाबंधन और चंद्रग्रहण का दुर्लभ संयोग, अयोध्या के ज्योतिषी से जानिए सूतक काल और नियम 28 अगस्त को पूर्णिमा तिथि पर रक्षाबंधन और चंद्रग्रहण का संयोग बन रहा है, हालांकि भारत में ग्रहण दिखाई न देने के कारण सूतक काल मान्य नहीं होगा। सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि को विशेष पावन माना जाता है, और इस बार 28 अगस्त को रक्षाबंधन के पावन पर्व के साथ ही चंद्रग्रहण का भी संयोग बन रहा है। एक ही दिन पर्व और ग्रहण का यह दुर्लभ घटनाक्रम श्रद्धालुओं के मन में राखी बांधने के शुभ समय को लेकर कई संशय पैदा कर रहा है। हालांकि, ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार भारत में इस चंद्रग्रहण का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा, जिससे रक्षाबंधन का त्योहार बिना किसी विघ्न के पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया जा सकेगा। चंद्रग्रहण की अवधि और समय सारणी अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम के अनुसार, 28 अगस्त को लगने वाला यह चंद्रग्रहण कुल 5 घंटे 39 मिनट की लंबी अवधि तक रहेगा। भारतीय समयानुसार यह ग्रहण सुबह 6:53 बजे से प्रारंभ होकर दोपहर 12:31 बजे तक प्रभावी रहेगा। समय की दृष्टि से यह एक लंबा ग्रहण काल है, लेकिन इसका दृश्य क्षेत्र मुख्य रूप से एशिया के कुछ अन्य हिस्सों तक ही सीमित रहेगा। भारत में सूतक काल मान्य क्यों नहीं है? धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल केवल वहीं प्रभावी माना जाता है जहां ग्रहण नग्न आंखों से दिखाई देता है। पंडित कल्कि राम का स्पष्ट कहना है कि यह चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। भारत में अदृश्य रहने के कारण यहां इसका कोई सूतक काल मान्य नहीं होगा और न ही इसका कोई धार्मिक दोष लगेगा। इसलिए बहनें बिना किसी हिचकिचाहट के अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांध सकती हैं। धार्मिक आस्था रखने वालों के लिए विशेष सलाह जो श्रद्धालु धार्मिक दृष्टि से अधिक सतर्कता बरतना चाहते हैं या ग्रहण काल का नियमों से पालन करना पसंद करते हैं, उनके लिए भी सहज रास्ता बताया गया है। पंडित कल्कि राम के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति ग्रहण को देव उपासना और शुद्धि से जोड़कर देखता है, तो वह दोपहर 12:31 बजे ग्रहण का मोक्ष होने के बाद स्नान ध्यान करके पूजा-पाठ कर सकता है। इसके पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण कर रक्षाबंधन का पर्व संपन्न किया जा सकता है। ग्रहण काल में बरती जाने वाली पारंपरिक सावधानियां यद्यपि भारत में सूतक का विचार नहीं है, फिर भी पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण की अवधि के दौरान कुछ विशेष नियमों का ध्यान रखा जाता है। इस दौरान मंदिर के पूजा स्थल को स्पर्श करने से परहेज करने, भोजन न करने, सोने से बचने और घर के वातावरण में शांति बनाए रखने की सलाह दी जाती है। इस समय में अपने इष्ट देव के मंत्रों का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। भोजन की शुद्धि और रक्षाबंधन का उत्सव यदि ग्रहण शुरू होने से पहले ही घर में भोजन पकाया जा चुका है, तो पारंपरिक रीति से उसे ढककर उसमें तुलसी दल डाल देने चाहिए ताकि वह शुद्ध बना रहे। 28 अगस्त का यह दिन पूर्णिमा, चंद्रग्रहण और रक्षाबंधन के त्रिवेणी संयोग के कारण अत्यंत फलदायी है। श्रद्धालुओं के लिए मुख्य निष्कर्ष यही है कि भारत में दृश्यता न होने के कारण रक्षाबंधन पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा और बहन-भाई का यह पावन पर्व निर्विघ्न संपन्न होगा। इसका आप पर असर • भारत भर में: 28 अगस्त को चंद्रग्रहण भारत में अदृश्य रहने के कारण सूतक काल लागू नहीं होगा, जिससे रक्षाबंधन का त्योहार सामान्य समय पर धूमधाम से मनाया जा सकता है। • श्रद्धालुओं के लिए: जो लोग धार्मिक नियम का पालन करना चाहते हैं, वे दोपहर 12:31 बजे ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके राखी बांधने का अनुष्ठान कर सकते हैं। सवाल-जवाब 1. 28 अगस्त को चंद्रग्रहण का समय क्या है? 28 अगस्त को चंद्रग्रहण सुबह 6:53 बजे से शुरू होकर दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा, जिसकी कुल अवधि 5 घंटे 39 मिनट है। 2. क्या रक्षाबंधन पर भारत में सूतक काल मान्य होगा? नहीं, यह चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल और इसका कोई धार्मिक दोष मान्य नहीं होगा। 3. क्या बहनें ग्रहण काल में राखी बांध सकती हैं? हां, भारत में ग्रहण अदृश्य होने के कारण बहनें सामान्य रूप से अपने भाइयों को राखी बांध सकती हैं। 4. ग्रहण समाप्त होने के बाद धार्मिक नियम क्या हैं? विशेष धार्मिक आस्था रखने वाले लोग दोपहर 12:31 बजे ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके और स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा कर सकते हैं। 5. ग्रहण काल में घर के बने भोजन की रक्षा कैसे करें? यदि भोजन पहले से बना हो तो उसे ढककर रखें और उसमें तुलसी के पत्ते डाल दें। https://trendkia.com/festivals/rakshabndhana-aura-chndragrahana-ka-durlabha-snyoga-ayodhya-ke-jyotishi-se-janie-sutaka-kala-aura-niyama-17213 TrendKia — Har trend, sabse pehle.