सावन शुक्ल चतुर्थी पर भगवान गणेश की उपासना का पावन संयोग, जानिए व्रत की सही तिथि और पूजा के शुभ मुहूर्त सावन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर दूर्वा गणेश चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जाएगा। जानिए 16 अगस्त 2026 को पूजा के सर्वोत्तम मुहूर्त, दूर्वा अर्पण की पौराणिक कथा और बच्चों की बुद्धि वृद्धि के लिए विशेष उपाय। पवित्र सावन माह में भगवान शिव की आराधना के साथ-साथ उनके पुत्र भगवान श्री गणेश की पूजा का भी अत्यंत विशेष और फलदायी महत्व स्वीकार किया गया है। सावन महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाली चतुर्थी तिथि को सनातन परंपरा में दूर्वा गणेश चतुर्थी के पावन नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस पावन तिथि पर विघ्नहर्ता भगवान गणपति की विधि-विधान से उपासना करने और उन्हें दूर्वा अर्पित करने से साधक के जीवन में आ रही सभी बाधाएं, संकट और कष्ट स्वतः दूर हो जाते हैं। द्रिक पंचांग की गणनाओं के आधार पर वर्ष 2026 में सावन की दूर्वा गणेश चतुर्थी की तिथि, पूजा के सर्वोत्तम समय और दिनभर रहने वाले शुभ मुहूर्त की विस्तृत जानकारी श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत उपयोगी है। चतुर्थी तिथि का प्रारंभ, समापन और व्रत की तिथि वैदिक पंचांग के अनुसार सावन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का शुभारंभ 15 अगस्त 2026 को सायंकाल 5 बजकर 28 मिनट पर होने जा रहा है। इस तिथि का विस्तार अगले दिन यानी 16 अगस्त 2026 को सायंकाल 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। शास्त्रों के नियम अनुसार जिस तिथि में सूर्योदय होता है, उसी उदया तिथि को व्रत और पूजा-अनुष्ठान के लिए मान्यता दी जाती है। इस शास्त्रीय सिद्धांत के आधार पर दूर्वा गणेश चतुर्थी का पावन व्रत और पूजन 16 अगस्त 2026 को ही संपन्न किया जाएगा। गणेश पूजा का विशेष मुहूर्त और 16 अगस्त के अन्य शुभ मुहूर्त दूर्वा गणेश चतुर्थी के दिन भगवान श्री गणेश की आराधना के लिए एक विशेष और बेहद शुभ समय अवधि प्राप्त हो रही है। 16 अगस्त 2026 को प्रातः 11 बजकर 06 मिनट से दोपहर 1 बजकर 44 मिनट तक गणेश पूजा का मुख्य शुभ मुहूर्त रहेगा। इस अवधि में श्रद्धालुओं को पूजन कार्य संपन्न करने के लिए लगभग 2 घंटे 38 मिनट की सुअवधि मिलेगी। इस पावन समय में भक्तगण गणेश जी की प्रतिमा अथवा चित्र के समक्ष बैठकर दूर्वा, सिंदूर, मोदक और लड्डू अर्पित करके मनोवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त 16 अगस्त के दिन विभिन्न आध्यात्मिक कार्यों के लिए निम्नलिखित शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:50 बजे से प्रातः 05:35 बजे तक • प्रातः सन्ध्या: प्रातः 05:12 बजे से प्रातः 06:20 बजे तक • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:17 बजे से दोपहर 01:08 बजे तक • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:50 बजे से दोपहर 03:41 बजे तक • गोधूलि मुहूर्त: सायंकाल 07:06 बजे से सायंकाल 07:28 बजे तक • सायाह्न सन्ध्या: सायंकाल 07:06 बजे से रात्रि 08:13 बजे तक • अमृत काल: रात्रि 09:44 बजे से रात्रि 11:22 बजे तक • सर्वार्थ सिद्धि योग: 16 अगस्त की सुबह 06:20 बजे से लेकर 17 अगस्त की सुबह 03:50 बजे तक चतुर्थी तिथि का धार्मिक महात्म्य और दूर्वा अर्पण की पौराणिक कथा शिवमहापुराण में इस बात का स्पष्ट वर्णन मिलता है कि चतुर्थी तिथि पर भगवान श्री गणेश की विधिवत और श्रद्धापूर्वक की गई पूजा से व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और कल्याण का आगमन होता है। जो भी भक्त निष्कपट भाव से गणपति महाराज की आराधना करता है, उसे सभी प्रकार की सिद्धियों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करने की परंपरा के पीछे एक अत्यंत प्राचीन और रोचक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। प्राचीन काल में अनलासुर नामक एक भयंकर दैत्य का आतंक समस्त लोक में व्याप्त हो गया था। वह ऋषि-मुनियों और निर्दोष प्राणियों को जीवित निगल लेता था। उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान श्री गणेश ने अनलासुर का संहार करने हेतु उसे स्वयं निगल लिया। दैत्य को निगलने के बाद भगवान गणेश के पेट में अत्यंत तीव्र जलन और संताप उत्पन्न हो गया। देवताओं और ऋषियों द्वारा किए गए कई प्रकार के उपचारों के बाद भी उनकी यह पेट की जलन शांत नहीं हुई। अंततः कश्यप ऋषि ने दूर्वा की 21 गांठें बनाकर भगवान श्री गणेश को खाने के लिए दीं। दूर्वा का सेवन करते ही गणपति जी के पेट की दाह और जलन पूरी तरह शांत हो गई। इसी प्रसंग के बाद से विघ्नहर्ता को दूर्वा अर्पित करने की परंपरा का आरंभ हुआ और मान्यता बनी कि दूर्वा चढ़ाने से भगवान गणेश शीघ्र प्रसन्न होते हैं। बच्चों की बुद्धि और एकाग्रता के लिए विशेष पूजन उपाय दूर्वा गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर घर के बच्चों से भगवान गणेश का पूजन करवाना विशेष रूप से श्रेयस्कर माना गया है। यदि बच्चे स्वयं श्रद्धाभाव से पूजा में भाग लें, तो उनका बौद्धिक विकास तेजी से होता है। इस दिन बच्चों से भगवान गणेश को 11 गांठ दूर्वा समर्पित करवाएं, प्रतिमा पर सिंदूर का तिलक लगाएं और मोदक या लड्डू का भोग अर्पित कराएं। तत्पश्चात बच्चों को भगवान गणेश के इस पावन मंत्र का 11 बार स्पष्ट उच्चारण के साथ जाप करने के लिए प्रेरित करें "त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे बुद्धिप्रदीपाय सुराधिपाय। अनित्याय सत्याय च नित्यबुद्धि नित्यं निरीहाय॥" सनातन मान्यताओं के अनुसार इस सरल और सटीक विधि से पूजन कराने से बच्चों की स्मरण शक्ति सुदृढ़ होती है, विद्या अध्ययन में आ रही रुकावटें दूर होती हैं तथा उनकी बुद्धि, विवेक और मानसिक एकाग्रता में अभूतपूर्व वृद्धि होती है। इसका आप पर असर पाठकों के लिए महत्व: • पूजा का सही समय: 16 अगस्त 2026 को सुबह 11:06 बजे से दोपहर 1:44 बजे तक गणेश पूजा का सबसे फलदायी मुहूर्त रहेगा, जिससे श्रद्धालु समय पर अपनी विधिवत आराधना संपन्न कर सकते हैं। • बच्चों की पढ़ाई में लाभ: इस दिन बच्चों से दूर्वा और लड्डू अर्पित करवाकर 11 बार विशेष मंत्र का जाप कराने से उनकी स्मरण शक्ति, विवेक और एकाग्रता में वृद्धि होती है। सवाल-जवाब 1. दूर्वा गणेश चतुर्थी 2026 की सही तिथि क्या है? उदया तिथि की मान्यता के अनुसार दूर्वा गणेश चतुर्थी का व्रत और पूजन 16 अगस्त 2026 को किया जाएगा। 2. चतुर्थी तिथि कब शुरू और समाप्त होगी? सावन शुक्ल चतुर्थी तिथि 15 अगस्त 2026 को शाम 5:28 बजे शुरू होगी और 16 अगस्त 2026 को शाम 4:52 बजे समाप्त होगी। 3. 16 अगस्त को गणेश पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त कौन सा है? भगवान गणेश की पूजा के लिए सुबह 11:06 बजे से दोपहर 1:44 बजे तक का समय अति शुभ है, जिसकी कुल अवधि 2 घंटे 38 मिनट है। 4. गणेश जी को दूर्वा क्यों चढ़ाई जाती है? दैत्य अनलासुर को निगलने के बाद गणेश जी के पेट की जलन को शांत करने के लिए कश्यप ऋषि ने उन्हें 21 गांठें दूर्वा की दी थीं, तभी से दूर्वा अर्पित करने की परंपरा है। 5. बच्चों से इस दिन कौन सा उपाय करवाना चाहिए? बच्चों से गणेश जी को 11 गांठ दूर्वा, सिंदूर और लड्डू अर्पित कराकर 'त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे...' मंत्र का 11 बार जाप कराना शुभ माना जाता है। https://trendkia.com/festivals/savana-shukla-chaturthi-para-bhagavana-ganesha-ki-upasana-ka-pavana-snyoga-janie-vrata-ki-sahi-tithi-aura-puja-ke-shubha-muhurta-16389 TrendKia — 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