शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को, इस दिन धरती पर विचरण करती हैं मां लक्ष्मी और बरसाती हैं विशेष कृपा इस वर्ष 25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस रात्रि देवी लक्ष्मी धरती का भ्रमण करती हैं और जागने वालों पर अपनी कृपा बरसाती हैं। वर्ष 2026 में शरद पूर्णिमा का पावन पर्व आगामी 25 अक्टूबर को श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। इस खास तिथि को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है, जिनमें रास पूर्णिमा और कोजागरा प्रमुख हैं। खास तौर पर मिथिलांचल क्षेत्र में इस अवसर पर मनाए जाने वाले कोजागरा उत्सव का सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से बड़ा महत्व माना गया है। विशेष रूप से नवविवाहित जोड़ों के लिए यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस मौके पर उनके परिवार और रिश्तेदारों के बीच भव्य उत्सव और भोज का आयोजन किया जाता है। परंपरा के अनुसार, ससुराल पक्ष की ओर से वर-वधू को नए वस्त्र और आभूषण भेंट किए जाते हैं, जबकि आसपास के लोगों को मखाने और पान वितरित करने की प्रथा भी निभाई जाती है। इसके साथ ही इस दिन कोजागरी लक्ष्मी पूजा का भी विधान है, जो बंगाल और मिथिलांचल के इलाकों में बहुत धूमधाम से संपन्न की जाती है और सीधे तौर पर धन की देवी से जुड़ी होती है। कोजागरा पर्व की पौराणिक मान्यता और महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की इस रात को मां लक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर सवार होकर पृथ्वी लोक का भ्रमण करने के लिए निकलती हैं। ऐसी मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस पूरी रात्रि जागकर देवी की आराधना में लीन रहते हैं, उनके घर-परिवार पर सदैव मां लक्ष्मी की असीम अनुकंपा बनी रहती है और उनके भंडार हमेशा भरे रहते हैं। आपको बता दें कि कोजागरी शब्द का शाब्दिक अर्थ ही इस सवाल से जुड़ा है कि कौन जाग रहा है। कथाओं के अनुसार, देवी लक्ष्मी स्वयं यह देखने के लिए धरती पर आती हैं कि रात के समय उनकी स्तुति और जागरण के लिए कौन जाग रहा है। ऐसे में जो लोग इस रात विधि-विधान से जागरण करते हैं और विशेष अनुष्ठान करते हैं, उन्हें माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में कभी भी आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ता है। माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए जरूर करें ये विशेष उपाय शरद पूर्णिमा की इस महानिशा में देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के कई सरल और प्रभावी उपाय धार्मिक ग्रंथों में बताए गए हैं, जिन्हें अपनाने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। • मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं: इस पावन तिथि पर अपने घर के मुख्य द्वार को पूरी तरह स्वच्छ रखना चाहिए। शाम के समय चौखट पर सुंदर रंगोली सजाएं या फिर हल्दी और रोली की सहायता से शुभ स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। इसके अलावा प्रवेश द्वार पर शुद्ध घी का एक दीपक जरूर प्रज्वलित करें। • कनकधारा स्तोत्र का पाठ: कोजागरा यानी शरद पूर्णिमा की इस खास रात को कनकधारा स्तोत्र या फिर लक्ष्मी सूक्त का पाठ करना बेहद फलदायी माना जाता है। इस उपाय को करने से माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर में स्थायी समृद्धि का आगमन होता है। • रात्रि जागरण और मंत्र जाप: इस दिन पूरी रात जागकर जागरण करना चाहिए और माता के चमत्कारी मंत्रों का निरंतर जाप करना चाहिए। कोजागरा की इस पवित्र रात्रि में ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले महालक्ष्मी नमः मंत्र का कम से कम 108 बार जाप अवश्य करना चाहिए। • विष्णु जी और मां लक्ष्मी की पूजा: शरद पूर्णिमा के अवसर पर भगवान विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी की संयुक्त रूप से पूजा-अर्चना करें। इस दौरान देवी को कमल का पुष्प, कौड़ियां, मखाने और कमलगट्टे अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है। इसका आप पर असर शरद पूर्णिमा के इस पर्व पर धार्मिक अनुष्ठानों और रात्रि जागरण से जुड़े कार्यों का सीधा असर लोगों की मानसिक शांति और पारिवारिक आयोजनों पर पड़ता है। • भारत में: देशभर के विभिन्न राज्यों में श्रद्धालु इस रात को विशेष अनुष्ठानों और जागरण के साथ मनाते हैं जिससे सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण होता है। • मिथिलांचल में: इस क्षेत्र के नवविवाहित जोड़ों के परिवारों को पारंपरिक उपहारों और भोज के आयोजनों के कारण विशेष सामाजिक सहभागिता और आर्थिक गतिविधियों का अनुभव होता है। ऐसा क्यों हुआ शरद पूर्णिमा से जुड़े अनुष्ठानों और मान्यताओं का आधार प्राचीन पौराणिक कथाएं और लोक परंपराएं हैं जो सदियों से चली आ रही हैं। • धार्मिक परंपराएं: प्राचीन ग्रंथों के अनुसार इस विशेष तिथि पर चंद्रमा अपनी संपूर्ण कलाओं के साथ होता है और रात में जागने से विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। • क्षेत्रीय संस्कृति: मिथिलांचल और बंगाल में कोजागरी पर्व को फसल कटाई के मौसम और धन की देवी की आराधना के साथ जोड़कर देखने की प्राचीन लोक मान्यता है। सवाल-जवाब 1. शरद पूर्णिमा 2026 में किस दिन मनाई जाएगी? शरद पूर्णिमा का पर्व इस वर्ष 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा। 2. कोजागरा के दिन मुख्य रूप से किसकी पूजा की जाती है? इस दिन मुख्य रूप से माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। 3. मिथिलांचल में कोजागरा का क्या विशेष महत्व है? मिथिलांचल में इस दिन नवविवाहितों के लिए भोज का आयोजन होता है और ससुराल पक्ष से नए कपड़े व गहने उपहार में दिए जाते हैं। 4. कोजागरी की रात कौन सा मंत्र जपना चाहिए? इस रात को ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले महालक्ष्मी नमः मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना चाहिए। https://trendkia.com/festivals/sharad-purnima-25-october-ko-is-din-dharti-par-vicharan-karti-hain-maa-lakshmi-51375 TrendKia — Har trend, sabse pehle.