# शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी और चंद्रदेव की आराधना की पूरी तैयारी, पूजा सामग्री की सूची और शुभ नियम जानें

> 25 अक्टूबर को आश्विन शुक्ल पक्ष की शरद पूर्णिमा पर अमृतमयी चांदनी और देवी लक्ष्मी के आगमन की विशेष मान्यता है, जिसके लिए जरूरी पूजन सामग्री और विधि जानना बेहद जरूरी है।

**Type:** article · **Category:** त्योहार · **Published:** 2026-10-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/festivals/sharad-purnima-para-man-lakshmi-aura-chandra-dev-ki-aradhana-ki-puri-taiyari-puja-samagri-ki-suchi-aura-shubha-niyama-janen-50778 · **Language:** Hindi
**Tags:** शरद पूर्णिमा, लक्ष्मी पूजा, चंद्रदेव, पूजन सामग्री, आश्विन पूर्णिमा, कनकधारा स्तोत्र

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला पावन पर्व शरद पूर्णिमा इस वर्ष 25 अक्टूबर दिन रविवार को पूरे देश में श्रद्धाभाव से मनाया जाएगा। सनातन परंपरा में इस तिथि को आत्मिक और भौतिक दोनों दृष्टिकोणों से अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है। इस पावन अवसर पर मुख्य रूप से धन-ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी मां लक्ष्मी और शीतलता के प्रतीक चंद्रदेव की संयुक्त पूजा का विधान है। धार्मिक ग्रंथों और लोक मान्यताओं के अनुसार, पूरे वर्ष में केवल इसी रात चंद्रमा अपनी समस्त सोलह कलाओं से युक्त होकर पृथ्वी पर अमृतमयी किरणों की वर्षा करते हैं। यही कारण है कि श्रद्धालु इस रात्रि को खुले आसमान में चांदनी के नीचे विशेष खीर रखते हैं और देवी-देवताओं का आह्वान करते हैं। पूजा की पूर्व तैयारी समय पर पूरी कर लेने से अंतिम पलों में बाजार की भागदौड़ और महंगे सामान की समस्या से बचा जा सकता है।

## पूजन थाली के लिए अनिवार्य सामग्रियों की सूची
शरद पूर्णिमा के दिन पूजा प्रारंभ करने से पहले सभी पारंपरिक पूजन सामग्रियों को एकत्रित कर लेना चाहिए ताकि अनुष्ठान निर्विघ्न संपन्न हो सके। इस पावन पूजन में निम्नलिखित वस्तुएं मुख्य रूप से सम्मिलित की जाती हैं

- भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की सुंदर प्रतिमा अथवा चित्रपट
- चंद्रदेव को अर्घ्य देने के लिए शुद्ध जल से भरा हुआ पात्र
- पूजा के तिलक और संकल्प के लिए रोली, कुमकुम और अखंडित अक्षत (साबुत चावल)
- गाय के दूध, चावल, शर्करा (चीनी) और सूखे मेवों के संयोग से तैयार की गई खीर
- पूजा की थाली, बैठने के लिए पवित्र आसन और तांबे, पीतल अथवा चांदी से निर्मित शुद्ध कलश
- पारिवारिक व क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार पूजन के लिए आवश्यक तुलसी दल
- जरूरतमंदों के कल्याण और दान हेतु अन्न, वस्त्र अथवा नकद दक्षिणा

## नारद पुराण का संदर्भ और विशेष आध्यात्मिक अनुष्ठान
नारद पुराण में शरद पूर्णिमा की रात्रि का अत्यंत रोचक और महिमामयी वर्णन मिलता है। इस ग्रंथ के अनुसार, इस विशिष्ट रात्रि में माता महालक्ष्मी स्वयं पृथ्वी लोक पर विचरण करती हैं और यह देखती हैं कि कौन से घरों में स्वच्छता, शांति और भक्ति का वास है। देवी के आगमन की इस पावन बेला में श्वेत वस्त्र धारण करके भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी का षोडशोपचार पूजन करना अत्यंत फलदायी माना गया है। साधकों के लिए इस दिन कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना और कमलगट्टे की माला से ‘ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करना जीवन में धन, वैभव और समृद्धि के द्वार खोलता है। रात्रि वेला में केसर मिश्रित खीर तैयार करके चंद्रमा के पूर्ण प्रकाश में रखी जाती है, जिसे अगले दिन या मध्यरात्रि में प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

## शरद पूर्णिमा पूजन की चरणबद्ध विधि और परंपरा
इस पावन पर्व की शुरुआत प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त अथवा सूर्योदय के समय शुद्ध जल से स्नान करके की जाती है। स्नान उपरांत स्वच्छ या श्वेत वस्त्र धारण करें और घर के पूजा स्थल को भली-भांति साफ एवं पवित्र करें। दिनभर सात्विक भाव रखते हुए संध्याकाल में देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की वैदिक अथवा पौराणिक रीति से धूप, दीप, गंध और पुष्पों द्वारा विधिवत अर्चना करें। जब आकाश में पूर्ण चंद्रदेव का उदय हो, तब जल से भरे लोटे से चंद्रमा को अर्घ्य समर्पित करें और परिवार के मानसिक व शारीरिक सुख की प्रार्थना करें। इसके पश्चात अत्यंत स्वच्छता से बनी खीर को खुले आंगन अथवा छत पर ऐसे स्थान पर रखें जहां चंद्रमा की किरणें सीधी पड़ती हों। अंत में कुल परंपरा अनुसार ईश्वर को भोग अर्पित करें, जरूरतमंदों को दान दें और स्वयं प्रसाद ग्रहण करके व्रत पूर्ण करें।

## इसका आप पर असर
शरद पूर्णिमा पर किए जाने वाले धार्मिक और स्वास्थ्य संबंधी उपायों का आम श्रद्धालुओं के दैनिक जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

- **समय और खर्च की बचत:** पूजा सामग्री को 25 अक्टूबर से पहले ही खरीद लेने से अंतिम समय पर दुकानों में होने वाली अतिरिक्त भीड़ और त्योहार के दिन होने वाली महंगाई से आसानी से बचा जा सकता है। इससे घरेलू बजट संतुलित रहता है और पूजा की कोई आवश्यक सामग्री छूटने का जोखिम नहीं रहता।
- **स्वास्थ्य पर प्रभाव:** शरद पूर्णिमा की रात्रि में चांदनी के नीचे रखी खीर को ग्रहण करने की परंपरा औषधीय मानी जाती है। पित्त दोष शांत करने और शरीर में शीतलता लाने के उद्देश्य से इस अमृतमयी खीर को अगली सुबह या आधी रात को प्रसाद रूप में अवश्य खाना चाहिए।
- **दान और सामाजिक सरोकार:** इस दिन जरूरतमंदों के लिए अनाज, वस्त्र अथवा आर्थिक दक्षिणा का प्रबंध करने से समाज के कमजोर वर्गों को सीधा संबल मिलता है। हर परिवार अपनी क्षमता के अनुसार सामर्थ्यवान दान का संकल्प ले सकता है।
- **आध्यात्मिक और मानसिक शांति:** मंत्र जप और चंद्रदेव को अर्घ्य देने से मानसिक तनाव कम होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। एकाग्रचित्त होकर 108 बार महालक्ष्मी मंत्र का जाप करने से पारिवारिक कलह से राहत मिलती है।

## ऐसा क्यों हुआ
शरद पूर्णिमा का धार्मिक और खगोलीय महत्व आश्विन पूर्णिमा की विशिष्ट स्थिति और प्राचीन आध्यात्मिक मान्यताओं के कारण स्थापित हुआ है।

- **खगोलीय और मौसमी बदलाव:** आश्विन शुक्ल पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पृथ्वी के सर्वाधिक निकटतम बिंदुओं में से एक पर रहता है और अपनी पूर्ण 16 कलाओं में दृश्यमान होता है। वर्षा ऋतु के समापन और शरद ऋतु के आगमन के इस संधि काल में रात की किरणें अत्यंत शांत और शीतल मानी जाती हैं।
- **नारद पुराण की मान्यता:** प्राचीन ग्रंथ नारद पुराण के अनुसार इसी विशिष्ट रात्रि को धन की देवी माता लक्ष्मी वैकुंठ से उतरकर पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। जो श्रद्धालु इस रात जागकर भक्ति और स्वच्छता के साथ आराधना करते हैं, उनके घरों में देवी का स्थायी वास माना जाता है।
- **अमृत वर्षा की ऐतिहासिक परंपरा:** लोक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की मध्यरात्रि में चंद्र किरणों से अमृत तत्व बरसता है, जिसे खाद्य पदार्थों में समाहित करने के लिए खुले आसमान के नीचे दूध-चावल की खीर रखने का नियम सदियों से चला आ रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. शरद पूर्णिमा किस तारीख और दिन को मनाई जाएगी?
यह पर्व 25 अक्टूबर दिन रविवार को आश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाएगा।

### 2. शरद पूर्णिमा पर किन देवी-देवताओं की पूजा का विधान है?
इस पावन दिन पर मुख्य रूप से माता महालक्ष्मी, भगवान विष्णु और चंद्रदेव की पूजा की जाती है।

### 3. चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने का क्या कारण है?
मान्यता है कि इस रात चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होकर अमृत बरसाता है, जिससे खीर स्वास्थ्यवर्धक और कल्याणकारी प्रसाद बन जाती है।

### 4. नारद पुराण के अनुसार इस दिन कौन सा मंत्र जाप फलदायी माना गया है?
नारद पुराण के अनुसार कनकधारा स्तोत्र के पाठ के साथ ‘ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करना श्रेष्ठ माना गया है।

### 5. शरद पूर्णिमा की पूजा सामग्री में क्या-क्या मुख्य चीजें शामिल हैं?
पूजा में विष्णु-लक्ष्मी की प्रतिमा, कलश, अर्घ्य पात्र, रोली, अक्षत, खीर, आसन और दान के लिए अन्न व वस्त्र शामिल हैं।

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