शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी पर मां महागौरी और तुलसी पूजा का विशेष महत्व, जानें शुभ मुहूर्त और स्वास्थ्य लाभ नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की आराधना के साथ तुलसी पूजन की परंपरा है। जानिए अष्टमी तिथि का सटीक मुहूर्त, ज्योतिषीय प्रभाव और तुलसी के अद्भुत आयुर्वेदिक गुण। नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप देवी महागौरी का विधि-विधान से पूजन किया जाता है। सनातन परंपरा में महागौरी को पवित्रता, आत्मिक शांति और निर्मलता की अधिष्ठात्री माना गया है। महाअष्टमी के पावन अवसर पर मां महागौरी के साथ-साथ तुलसी के पौधे की आराधना का भी विशेष महत्व होता है। श्रद्धालु इस दिन उपवास रखकर अपने परिवार के कल्याण, सुख-समृद्धि और आरोग्य की मंगल कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशिष्ट पूजन पद्धति से न केवल आध्यात्मिक बल मिलता है बल्कि स्वास्थ्य संबंधी अनेक लाभ भी प्राप्त होते हैं। महाअष्टमी की तिथि, मुहूर्त और पूजन का सही समय आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का प्रारंभ 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 28 मिनट पर हो रहा है। वहीं इस तिथि का समापन 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर होगा। शास्त्रों के अनुसार उदया तिथि की मान्यता को देखते हुए महाअष्टमी का मुख्य व्रत और पूजन 19 अक्टूबर दिन सोमवार को किया जाएगा। इस शुभ अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा घरों और मंदिरों में कन्या पूजन का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर भोजन कराया जाता है और उनका आशीर्वाद लिया जाता है। तंत्र साधना, मंत्र सिद्धि और कुलदेवी पूजन की परंपरा का पालन करने वाले साधक 18 अक्टूबर की रात्रि में ही अष्टमी तिथि का पूजन संपन्न करेंगे। रात्रि काल में की जाने वाली इस विशेष पूजा में देवी के गूढ़ मंत्रों का जाप किया जाता है। इस प्रकार अलग-अलग मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार भक्तगण अपनी आस्था के अनुरूप महाअष्टमी की पूजा अर्चना करते हैं। ज्योतिषीय दृष्टि और तुलसी पूजन का आध्यात्मिक संबंध ज्योतिष शास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार मां महागौरी का व्रत और पूजन करने से जातक की जन्म कुंडली में मौजूद ग्रह दोषों का शमन होता है। विशेष रूप से छाया ग्रह राहु के नकारात्मक और अशुभ प्रभावों में कमी आती है। इसके साथ ही, जीवन में भौतिक सुख, सौंदर्य और समृद्धि के कारक ग्रह शुक्र का शुभ प्रभाव बढ़ता है। देवी की कृपा से पारिवारिक जीवन में सौहार्द और संतुलन स्थापित होता है। महाअष्टमी पर मां महागौरी के साथ तुलसी जी की पूजा का भी विधान है। तुलसी को शास्त्रों में माता लक्ष्मी का ही स्वरूप माना गया है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन तुलसी के पौधे के समीप दीप प्रज्वलित करने और जल अर्पित करने से घर में माता लक्ष्मी का स्थायी वास होता है। तुलसी जी की नियमित सेवा और मां महागौरी की भक्ति से मन में शुद्धता, समरसता और अपार श्रद्धा का संचार होता है। आयुर्वेद में तुलसी का स्थान और इसके औषधीय नाम तुलसी का महत्व केवल धार्मिक मान्यताओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद में भी इसे सर्वोच्च स्थान दिया गया है। आयुर्वेद शास्त्र में तुलसी को सुरसा, विष्णुप्रिया और तुवरी जैसे विभिन्न नामों से संबोधित किया गया है। आधुनिक वैज्ञानिक अध्ययनों में भी तुलसी की पत्तियों में पाए जाने वाले प्राकृतिक तत्वों और जैव-सक्रिय यौगिकों के स्वास्थ्यवर्धक गुणों की पुष्टि की गई है। स्वास्थ्य लाभ: इम्युनिटी, तनाव और हृदय सुरक्षा पारंपरिक रूप से तुलसी की पत्तियों का सेवन सामान्य सर्दी, जुकाम, खांसी और गले की खराश में राहत प्रदान करने के लिए किया जाता है। तुलसी एक बेहतरीन प्राकृतिक इम्युनिटी बूस्टर के रूप में काम करती है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर वायरल, बैक्टीरियल और फंगल संक्रमणों से बचाव करने में मदद करती है। मानसिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से तुलसी में एडेप्टोजेनिक गुण पाए जाते हैं। ये गुण शरीर में तनाव पैदा करने वाले हार्मोन के स्तर को नियंत्रित करते हैं, जिससे मन शांत रहता है और मानसिक तनाव दूर होता है। इसके अलावा, तुलसी का सेवन रक्त को शुद्ध करने, कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखने और हृदय की समग्र कार्यप्रणाली में सुधार लाने में सहायक माना गया है। पाचन क्रिया को सुचारू बनाने में भी तुलसी का प्रयोग पारंपरिक औषधियों में किया जाता है। उपयोग संबंधी सावधानियां और डॉक्टरी सलाह तुलसी के औषधीय गुणों का लाभ उठाते समय कुछ महत्वपूर्ण सावधानियों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में इसका औषधीय उपयोग करने से पहले किसी पंजीकृत आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को गंभीर श्वसन संक्रमण, सांस लेने में तकलीफ या लंबे समय से गैस और अपच की समस्या हो, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहकर योग्य डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं, नियमित रूप से एलोपैथिक दवाएं लेने वाले रोगियों और किसी पुरानी बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को तुलसी का औषधीय रूप में सेवन करने से पहले विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए और डॉक्टरी मार्गदर्शन के बिना इसका सेवन नहीं करना चाहिए। इसका आप पर असर महाअष्टमी पर मां महागौरी और तुलसी की विधिवत पूजा से आध्यात्मिक शांति मिलने के साथ-साथ मौसमी बीमारियों से बचाव की जानकारी मिलती है। • शुभ मुहूर्त का ध्यान: 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट से पहले मुख्य अष्टमी पूजन और कन्या पूजन संपन्न करें। इससे तिथियों के फेर से बचा जा सकेगा और शास्त्रोक्त लाभ मिलेगा। • ग्रह शांति और समृद्धि: अष्टमी व्रत से राहु का दुष्प्रभाव कम होता है और शुक्र का फल बेहतर होता है। यह पारिवारिक जीवन में तनाव घटाकर सुख-शांति बढ़ाने में मदद करता है। • इम्युनिटी और स्वास्थ्य: बदलते मौसम में तुलसी का सही उपयोग सर्दी-जुकाम और इंफेक्शन से बचाव में कारगर है। घरेलू नुस्खों के सही तरीके जानने से स्वास्थ्य बेहतर रहता है। • चिकित्सकीय सावधानी: गंभीर बीमारियों या गर्भावस्था में तुलसी का औषधीय सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। अंधाधुंध घरेलू उपायों से बचकर सुरक्षित रहें। ऐसा क्यों हुआ शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि को मां महागौरी की पूजा और तुलसी पूजन का विशेष योग श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक और शारीरिक दोनों रूप से समृद्ध करता है। • पौराणिक और ज्योतिषीय मान्यता: महागौरी को शुद्धता का प्रतीक माना जाता है और तुलसी माता लक्ष्मी का स्वरूप हैं। दोनों की संयुक्त पूजा से गृह क्लेश और राहु-शुक्र से जुड़े ग्रह दोष दूर होते हैं। • उदया तिथि का नियम: आश्विन अष्टमी 18 अक्टूबर की सुबह 8 बजकर 28 मिनट से शुरू होकर 19 अक्टूबर सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक है, इसलिए उदया तिथि के अनुसार 19 अक्टूबर को मुख्य पूजा मान्य है। • औषधीय उपयोगिता: आयुर्वेद में तुलसी को सुरसा और विष्णुप्रिया कहा गया है। इसके एडेप्टोजेनिक और एंटी-माइक्रोबियल गुण तनाव घटाने और इम्युनिटी बढ़ाने में प्रामाणिक माने गए हैं। सवाल-जवाब 1. नवरात्रि की महाअष्टमी तिथि कब शुरू और समाप्त होगी? आश्विन मास की अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 28 मिनट पर शुरू होगी और 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर समाप्त होगी। 2. उदया तिथि के अनुसार महाअष्टमी की पूजा किस दिन की जाएगी? उदया तिथि के आधार पर महाअष्टमी की मुख्य पूजा 19 अक्टूबर दिन सोमवार को की जाएगी। 3. 18 अक्टूबर की रात को कौन लोग अष्टमी पूजन करेंगे? जो लोग कुलदेवी पूजन, तंत्र-मंत्र साधना या निशा काल की पूजा करते हैं, वे 18 अक्टूबर की रात को अष्टमी तिथि का पूजन करेंगे। 4. मां महागौरी की पूजा से किन ग्रहों का दोष दूर होता है? मां महागौरी का पूजन करने से राहु के अशुभ प्रभाव में कमी आती है और शुक्र ग्रह का शुभ फल प्राप्त होता है। 5. आयुर्वेद में तुलसी को किन-किन नामों से जाना जाता है? आयुर्वेद में तुलसी को सुरसा, विष्णुप्रिया और तुवरी जैसे नामों से जाना जाता है। 6. तुलसी का सेवन करते समय किन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए? गर्भवती महिलाओं, नियमित दवाएं लेने वाले रोगियों और गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना औषधीय प्रयोग नहीं करना चाहिए। https://trendkia.com/festivals/sharadiya-navaratri-ki-mahaashtami-para-man-mahagauri-aura-tulsi-puja-ka-vishesha-mahatva-janen-shubha-muhurta-aura-svasthya-labha-49049 TrendKia — Har trend, sabse pehle.