शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन, जानिए मां कालरात्रि के दिव्य स्वरूप और पूजन के नियम शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। इस दिन विधि-विधान से आराधना करने और मंत्र जाप करने से साधक को सभी प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है। पवित्र शारदीय नवरात्रि के दौरान सप्तमी तिथि का विशेष महत्व होता है क्योंकि इस पावन दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप के रूप में पूजी जाने वाली मां कालरात्रि की आराधना की जाती है। यद्यपि इस देवी का रूप बहुत उग्र और विकराल प्रतीत होता है, लेकिन वह सदैव अपने भक्तों का कल्याण करने वाली और उन्हें अभय प्रदान करने वाली मानी गई हैं। उनकी विधिवत उपासना करने से साधक के भीतर का भय पूरी तरह समाप्त हो जाता है, आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि होती है और कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना करने की आंतरिक शक्ति प्राप्त होती है। चूंकि वह अपने मानने वालों को हमेशा शुभ परिणाम देती हैं, इसलिए उन्हें शुभंकरी के नाम से भी संबोधित किया जाता है। पूजा की तिथि और समय आने वाले शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन 17 अक्टूबर, शनिवार को पड़ रहा है। इस विशिष्ट दिन पर मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह देवी जीवन में आने वाली तमाम बाधाओं और भय को दूर करने में पूरी तरह समर्थ हैं। मां कालरात्रि का स्वरूप और विशेषताएं इस देवी का शारीरिक स्वरूप बेहद प्रभावशाली और आक्रामक दिखाई देता है। उनका वर्ण घने अंधकार के समान पूर्णतः काला है। उनके बाल हमेशा खुले और बिखरे हुए रहते हैं। उनके गले में बिजली के समान तीव्र चमक वाली माला सुशोभित होती है और उनके कुल तीन नेत्र हैं जो ब्रह्मांड पर नजर रखते हैं। ऐसी मान्यता है कि माता की हर एक सांस से अग्नि की भयंकर लपटें बाहर निकलती हैं। उनका मुख्य वाहन गर्दभ यानी गधा है। उनके कुल चार हाथ हैं, जिनमें से दो हाथ हमेशा अभय और वर मुद्रा में रहते हैं, जबकि शेष दो हाथों में वे घातक अस्त्र धारण करती हैं। उनके इस रूप को मुख्य रूप से समस्त दुष्ट शक्तियों और नकारात्मक प्रभावों का विनाश करने वाला माना गया है। आराधना के प्रमुख मंत्र सप्तमी तिथि के पावन अवसर पर मां कालरात्रि की पूजा करते समय उनके बीज मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है। उनका मुख्य मंत्र ॐ कालरात्र्यै नमः है। इसके अलावा उनका विशेष उपासना मंत्र इस प्रकार है एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥ वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥ चरणबद्ध पूजा विधि • स्नान और तैयारी: सप्तमी तिथि के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए और फिर साफ-सुथरे वस्त्र धारण करने चाहिए। • स्थान की शुद्धि: इसके बाद अपने पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करके वहां पवित्र गंगाजल छिड़कना चाहिए। फिर मां कालरात्रि की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करके दीपक प्रज्वलित करना चाहिए। • सामग्री अर्पण: देवी को रोली, कुमकुम, अक्षत और ताजे फूल श्रद्धा के साथ अर्पित करने चाहिए। इसके बाद धूप और दीप दिखाकर माता के पवित्र मंत्र का उच्च स्वर में जाप करना चाहिए। • प्रसाद का भोग: मां कालरात्रि को मुख्य रूप से गुड़ या फिर गुड़ से तैयार किसी भी मिठाई का भोग लगाने की प्राचीन परंपरा चली आ रही है। • पाठ और जाप: इस विशेष दिन पर दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ करना भी बहुत लाभकारी माना जाता है। • माला का प्रयोग: पूजा के दौरान अपनी निजी श्रद्धा के अनुसार लाल चंदन या फिर रुद्राक्ष की माला का उपयोग करके मंत्रों का जाप करना चाहिए। • आरती और कामना: अंत में पूरी श्रद्धा के साथ मां कालरात्रि की आरती करनी चाहिए और अपने पूरे परिवार की सुख-समृद्धि तथा कल्याण के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। सवाल-जवाब 1. शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन कब है? शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन 17 अक्टूबर, शनिवार को है। 2. सातवें दिन किसकी पूजा की जाती है? नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। 3. मां कालरात्रि का वाहन क्या है? मां कालरात्रि का वाहन गर्दभ यानी गधा है। 4. मां कालरात्रि को किस चीज का भोग लगाया जाता है? मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी मिठाई का भोग लगाने की परंपरा है। 5. मां कालरात्रि का मुख्य मंत्र क्या है? मां कालरात्रि का मुख्य मंत्र ॐ कालरात्र्यै नमः है। https://trendkia.com/festivals/shardiya-navratri-ka-satwan-din-janiye-maa-kalratri-ke-divya-swaroop-aur-pujan-ke-niyam-48240 TrendKia — Har trend, sabse pehle.