# शीतला सातम की पूर्व संध्या पर क्यों नहीं जलता चूल्हा, जानिए रांधण छठ की तिथि, शुभ समय और पूजन विधि

> गुजरात में माता शीतला को समर्पित रांधण छठ का पर्व 2 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा, जिसके अगले दिन चूल्हा न जलाने की परंपरा के चलते इसी दिन सारा भोजन तैयार किया जाता है।

**Type:** article · **Category:** त्योहार · **Published:** 2026-09-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/festivals/sheetla-satam-ki-purva-sndhya-para-kyon-nahin-jalata-chulha-janie-randhan-chhath-ki-tithi-shubha-samaya-aura-pujana-vidhi-25960 · **Language:** Hindi
**Tags:** रांधण छठ 2026, शीतला सातम, शीतला माता पूजा, गुजरात त्यौहार, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त

भारतीय लोक परंपराओं और गुजरात की जीवंत संस्कृति में रांधण छठ पर्व का एक अत्यंत विशेष स्थान है। यह त्यौहार मुख्य रूप से आरोग्य और आरोग्यता की देवी माता शीतला की कृपा प्राप्त करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं अपने परिवार के सदस्यों की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख समृद्धि की कामना के साथ व्रत और पूजन करती हैं। रांधण छठ के ठीक अगले दिन शीतला सातम का पर्व पड़ता है, जिस दिन घर की रसोई में अग्नि प्रज्वलित करना या चूल्हा जलाना पूरी तरह वर्जित माना जाता है। इसी कारण रांधण छठ के दिन ही अगले दिन के लिए सारा भोजन पहले से तैयार कर लिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता शीतला का पूजन करने से घर में मौसमी बीमारियों, चेचक और अन्य शारीरिक कष्टों से बचाव होता है।

## षष्ठी तिथि का समय और हलषष्ठी का संयोग
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार इस वर्ष रांधण छठ का पर्व बुधवार, 2 सितंबर 2026 को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इसके अगले दिन यानी गुरुवार, 3 सितंबर 2026 को शीतला सातम का त्यौहार संपन्न होगा। पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि 2 सितंबर को प्रातः 6 बजकर 12 मिनट से प्रारंभ हो जाएगी। यह तिथि अगले दिन 3 सितंबर को तड़के 4 बजकर 25 मिनट तक प्रभावी रहेगी। धार्मिक दृष्टि से इस दिन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि 2 सितंबर को ही हलषष्ठी का पावन पर्व भी मनाया जा रहा है, जिससे इस तिथि का फल कई गुना अधिक फलदायी हो जाता है।

## रांधण छठ 2026 के सभी शुभ मुहूर्त
रांधण छठ के दिन पूजा अनुष्ठान और पकवान बनाने के लिए शास्त्रों में कई शुभ समय बताए गए हैं। श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार इन मुहूर्तों में पूजन कार्य संपन्न कर सकते हैं

- **ब्रह्म मुहूर्त:** प्रातः 4 बजकर 29 मिनट से सुबह 5 बजकर 14 मिनट तक
- **प्रातः सन्ध्या:** प्रातः 4 बजकर 51 मिनट से सुबह 5 बजकर 59 मिनट तक
- **अभिजित मुहूर्त:** दोपहर 11 बजकर 55 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक
- **विजय मुहूर्त:** दोपहर 2 बजकर 28 मिनट से दोपहर 3 बजकर 19 मिनट तक
- **गोधूलि मुहूर्त:** सायंकाल 6 बजकर 43 मिनट से शाम 7 बजकर 05 मिनट तक
- **सायाह्न सन्ध्या:** सायंकाल 6 बजकर 43 मिनट से रात्रि 7 बजकर 50 मिनट तक
- **अमृत काल:** रात्रि 7 बजकर 42 मिनट से रात 9 बजकर 15 मिनट तक

## माता शीतला की सरल पूजन विधि
रांधण छठ के दिन सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर दैनिक क्रियाओं से निवृत्त हों और स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के ईशान कोण या पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें। वहां एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर माता शीतला की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। देवी के समक्ष दीप प्रज्वलित करें और उन्हें पवित्र जल, ताजे पुष्प, हल्दी, रोली तथा अक्षत श्रद्धापूर्वक अर्पित करें। इसके बाद हाथ जोड़कर माता से परिवार के सभी सदस्यों को निरोगी रखने और शांति प्रदान करने की प्रार्थना करें। इस अवसर पर शीतला माता चालीसा या शीतला स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

## ठंडे भोजन के भोग का नियम और चूल्हा विश्राम की परंपरा
इस त्यौहार की सबसे मुख्य विशेषता भोजन पकाने का अनूठा नियम है। रांधण छठ पर माता शीतला के भोग के लिए विशेष व्यंजन बनाए जाते हैं जिन्हें अगले दिन शीतला सातम पर भी ग्रहण किया जाता है। अर्पित किए जाने वाले व्यंजनों में मुख्य रूप से दही भात, पूड़ी, मिठाइयां और विभिन्न नमकीन पकवान शामिल होते हैं। गुजराती परंपरा में इस दिन ढोकला, थेपला और ढेबरा जैसे स्वादिष्ट व्यंजन प्रमुखता से पकाए जाते हैं। सारा भोजन तैयार हो जाने के बाद रसोई की सफाई की जाती है और चूल्हे का पूजन कर उसे विश्राम दिया जाता है। अगले दिन शीतला सातम पर कोई नया भोजन नहीं पकाया जाता और पूरा परिवार पूर्व निर्मित ठंडे भोजन का ही सेवन करता है।

## पूजन उपरांत जल छिड़काव का धार्मिक महत्व
पूजा की सभी प्रक्रियाएं पूर्ण हो जाने के बाद माता शीतला को अर्पित किए गए जल को एक पात्र में एकत्र कर लिया जाता है। इस जल को आचमनी या पुष्प की सहायता से पूरे घर के कमरों, प्रवेश द्वार और परिवार के सदस्यों पर छिड़कने का नियम है। सनातन परंपरा में यह विश्वास है कि इस पवित्र जल के छिड़काव से घर के भीतर व्याप्त नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है, वास्तु दोष दूर होते हैं और वातावरण में सकारात्मकता व आरोग्य का संचार होता है।

## इसका आप पर असर
रांधण छठ और शीतला सातम के त्यौहार से श्रद्धालुओं के दैनिक खानपान और पूजा अनुष्ठानों के नियम प्रभावित होते हैं।

- **पूरे भारत में:** जो श्रद्धालु शीतला माता का व्रत और पूजा करते हैं, उन्हें 2 सितंबर को ही अगले दिन के सारे पकवान बनाकर रख लेने होंगे। 3 सितंबर को चूल्हा न जलाकर केवल बासी और ठंडा भोजन ही ग्रहण किया जाता है।
- **गुजरात में:** गुजराती परिवारों में थेपला, ढोकला और ढेबरा जैसे पारंपरिक व्यंजन एक दिन पहले तैयार किए जाते हैं। 2 सितंबर को रसोई की पूरी सफाई करके चूल्हे को विश्राम देने की पुरानी परंपरा निभाई जाती है।

## सवाल-जवाब

### 1. रांधण छठ 2026 की सही तिथि क्या है?
रांधण छठ का पर्व बुधवार, 2 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा।

### 2. शीतला सातम किस दिन मनाई जाएगी?
शीतला सातम का व्रत और पूजन गुरुवार, 3 सितंबर 2026 को होगा।

### 3. रांधण छठ पर चूल्हा जलाने के बाद क्यों बंद कर दिया जाता है?
शीतला सातम पर चूल्हा जलाना अशुभ माना जाता है, इसलिए रांधण छठ के दिन ही पूरा भोजन पकाकर चूल्हे की सफाई कर दी जाती है।

### 4. रांधण छठ के दिन पूजा के लिए सबसे शुभ मुहूर्त कौन से हैं?
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:29 से 5:14 बजे तक, अभिजित मुहूर्त 11:55 से 12:46 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6:43 से 7:05 बजे तक रहेगा।

### 5. शीतला माता को भोग में कौन से व्यंजन चढ़ाए जाते हैं?
माता शीतला को दही भात, पूड़ी, मिठाई के अलावा ढोकला, थेपला और ढेबरा जैसे पारंपरिक ठंडे व्यंजनों का भोग लगाया जाता है।

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