संतान की दीर्घायु का महापर्व जीवित्पुत्रिका: पहली बार उपवास रख रही माताओं के लिए संपूर्ण विधि और नियम आश्विन माह में संतान के कल्याण और लंबी उम्र के लिए रखा जाने वाला जितिया पर्व 2026 में 2 से 4 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। नए व्रतियों के लिए नहाय-खाय से लेकर निर्जला उपवास और पारण के जरूरी नियमों का पूरा विवरण यहाँ उपलब्ध है। संतान की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना के साथ रखा जाने वाला जीवित्पुत्रिका व्रत हिंदू धर्म के सबसे कठिन अनुष्ठानों में गिना जाता है। लोक परंपरा में इसे जीउतिया या जितिया के नाम से जाना जाता है। इस पावन अवसर पर माताएं अपनी संतानों के मंगल के लिए पूरे चौबीस घंटे से अधिक समय तक अन्न और जल के बिना निर्जला तप करती हैं। यह धार्मिक अनुष्ठान मुख्य तौर पर उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के साथ-साथ पड़ोसी देश नेपाल के मधेश इलाके में अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। हर साल आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को यह निर्जला उपवास संपन्न होता है। जो माताएं इस वर्ष पहली बार इस कठिन साधना का संकल्प ले रही हैं, उनके लिए इससे जुड़े पारंपरिक नियमों और तिथियों की पूरी जानकारी होना अनिवार्य है। वर्ष 2026 में जितिया की महत्वपूर्ण तिथियां और समय वैदिक पंचांग के आकलन के अनुसार आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 3 अक्टूबर 2026 को सुबह 7 बजकर 59 मिनट पर होगी। यह पावन अष्टमी तिथि अगले दिन यानी 4 अक्टूबर 2026 को सुबह 5 बजकर 51 मिनट पर समाप्त होगी। तिथियों की गणना के आधार पर जितिया का मुख्य निर्जला व्रत 3 अक्टूबर 2026, शनिवार के दिन रखा जाएगा। पंचांग के नियमों के तहत पूरे दिन और रात का यह निर्जला उपवास सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले दिन सूर्योदय तथा शुभ मुहूर्त तक चलता है। तीन दिनों के अनुष्ठान का क्रमवार नियम जितिया का महापर्व कुल तीन दिनों की आध्यात्मिक प्रक्रिया में पूरा होता है। इसमें पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन मुख्य निर्जला उपवास और तीसरे दिन पारण की विधि की जाती है। • पहला दिन नहाय-खाय: वर्ष 2026 में नहाय-खाय का विधान 2 अक्टूबर, शुक्रवार को किया जाएगा। इस दिन उपवास रखने वाली महिलाएं सुबह पवित्र नदियों या घर पर गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करती हैं और शुद्ध वस्त्र धारण करती हैं। इसके बाद केवल एक समय पूरी तरह सात्विक भोजन पकाया और ग्रहण किया जाता है। परंपरा के तहत इस दिन नोनी का साग, मडुआ के आटे की रोटियां तथा कद्दू या लौकी की सब्जी मुख्य भोजन के रूप में खाई जाती है। • दूसरा दिन मुख्य निर्जला व्रत: नहाय-खाय के अगले दिन 3 अक्टूबर, शनिवार को मुख्य व्रत रखा जाता है। इस दिन महिलाएं न तो एक दाना अन्न खाती हैं और न ही पानी की एक बूंद पीती हैं। इस साधना की शुरुआत के लिए माताएं सूर्योदय से पहले यानी तड़के 3 बजे के आसपास जागती हैं। भोर के समय वे मीठा भोजन या दही-चूड़ा खाकर उपवास का संकल्प लेती हैं जिसे ओठगन कहा जाता है। इसके पश्चात जैसे ही सूर्योदय होता है, कठोर निर्जला व्रत का समय प्रारंभ हो जाता है जो पूरी रात चलता है। • तीसरा दिन पारण और समापन: जितिया के तीसरे दिन यानी 4 अक्टूबर को उपवास का समापन होता है। सुबह स्नान करने के बाद विधिवत पूजन किया जाता है और सूर्य देव को जल का अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद शुभ मुहूर्त में ही पारण किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि बिना शुभ मुहूर्त के पारण करने से अनुष्ठान का पूर्ण पुण्य नहीं मिलता। पारण की थाली में भी मडुआ की रोटी और नोनी का साग शामिल करने का विशेष रिवाज है, तथा इस दिन भी भोजन पूरी तरह सात्विक ही रहता है। नए व्रतियों के लिए जरूरी सावधानियां और परंपराएं पहली बार यह उपवास रखने वाली माताओं को पूरे तीन दिनों तक शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर शुद्धता बनाए रखनी चाहिए। पूरे परिवार में स्वच्छता और पवित्रता का वातावरण अनिवार्य है। निर्जला व्रत के चौबीस घंटों में जल और अन्न दोनों का पूर्ण त्याग किया जाता है। इस अवधि में मन में किसी के प्रति द्वेष, क्रोध या बुरे विचार नहीं आने चाहिए और न ही किसी को कटु वचन कहना चाहिए। नहाय-खाय के दिन से लेकर पारण पूरा होने तक सात्विक जीवनशैली और ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है। जितिया की पूजा के समय भगवान जीऊतवाहन की आराधना के साथ-साथ चील और सियारिन की पौराणिक कथा का श्रवण जरूर करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस कथा को सुने बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है। इसका आप पर असर संतान की मंगलकामना के लिए रखे जाने वाले इस कठिन पर्व के नियमों और समय को समझकर माताएं समय पर अपनी धार्मिक तैयारियां पूरी कर सकती हैं। • भारत में: जितिया व्रत की तिथियां तय होने से देश भर में रहने वाली माताएं अपनी खरीदारी और धार्मिक अनुष्ठान की योजना पहले से बना सकेंगी। व्रत से जुड़ी जरूरी सामग्री जैसे मडुआ का आटा और नोनी का साग समय रहते जुटाया जा सकता है। • बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में: इन राज्यों में जितिया का व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व है, जिससे बाजारों में विशेष पूजन सामग्रियों की मांग बढ़ेगी। परिवारों में 2 अक्टूबर से 4 अक्टूबर के बीच पारंपरिक पकवानों और अनुष्ठानों की विशेष चहल-पहल रहेगी। • नए व्रतियों के लिए: पहली बार उपवास रख रही माताओं को भोर के खानपान और पारण के सटीक नियमों की स्पष्ट समझ मिलेगी। इससे वे बिना किसी असमंजस के 3 अक्टूबर को 24 घंटे का निर्जला संकल्प पूरा कर सकेंगी। • स्वास्थ्य संबंधी तैयारी: निर्जला उपवास के कारण महिलाओं को 2 अक्टूबर को नहाय-खाय के दिन पौष्टिक भोजन लेकर खुद को शारीरिक रूप से तैयार करने में मदद मिलेगी। भोर में 3 बजे के भोजन का समय पता होने से कमजोरी से बचाव संभव होगा। ऐसा क्यों हुआ आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का प्रारंभ होने और सूर्योदयकालीन मुहूर्त के संयोग से जितिया व्रत का निर्धारण किया जाता है। • पंचांग की गणना: वैदिक पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर 2026 को सुबह 7 बजकर 59 मिनट पर शुरू हो रही है। यही तिथि 4 अक्टूबर की सुबह 5 बजकर 51 मिनट तक प्रभावी रहेगी। • सूर्योदय और उदया तिथि का संयोग: हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार अष्टमी तिथि का मुख्य उपवास 3 अक्टूबर को शनिवार के दिन रखा जाता है। इसी दिन शाम और रात को जीवित्पुत्रिका की पूजा का सबसे उपयुक्त संयोग बनता है। • तीन चरणों की लोक परंपरा: यह पर्व केवल एक दिन का न होकर नहाय-खाय, उपवास और पारण के तीन दिवसीय वैदिक चक्र से संचालित होता है। इसी कारण तिथियों की निरंतरता के आधार पर 2 अक्टूबर से इसका अनुष्ठान प्रारंभ होता है। सवाल-जवाब 1. वर्ष 2026 में जितिया का मुख्य निर्जला व्रत किस तारीख को रखा जाएगा? जितिया का मुख्य निर्जला व्रत 3 अक्टूबर 2026, शनिवार के दिन रखा जाएगा। 2. आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि कब से कब तक रहेगी? अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगी और 4 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 51 मिनट पर समाप्त होगी। 3. जितिया का नहाय-खाय किस दिन पड़ेगा और इसमें क्या खाया जाता है? नहाय-खाय 2 अक्टूबर, शुक्रवार को पड़ेगा और इस दिन सात्विक आहार के रूप में मडुआ की रोटी, नोनी का साग और कद्दू या लौकी की सब्जी खाई जाती है। 4. व्रत के दिन सूर्योदय से पहले भोजन का क्या नियम है? व्रत वाले दिन 3 अक्टूबर की भोर में सुबह लगभग 3 बजे उठकर मीठा भोजन या दही-चूड़ा ग्रहण किया जाता है, जिसके बाद निर्जला व्रत शुरू होता है। 5. जितिया व्रत में पूजा के दौरान किसकी कथा सुनना अनिवार्य माना जाता है? इस दिन भगवान जीऊतवाहन के साथ-साथ चील और सियारिन की पौराणिक कथा सुनना अनिवार्य माना जाता है। 6. जितिया का पारण किस दिन और कैसे किया जाता है? जितिया का पारण 4 अक्टूबर को सूर्य देव को अर्घ्य देने और शुभ मुहूर्त के अनुसार मडुआ की रोटी तथा नोनी का साग खाकर किया जाता है। https://trendkia.com/festivals/sntana-ki-dirghayu-ka-mahaparva-jivitputrika-pahali-bara-upavasa-rakha-rahi-mataon-ke-lie-snpurna-vidhi-aura-niyama-40515 TrendKia — Har trend, sabse pehle.