# पश्चिम बंगाल दुर्गा पूजा 2026: षष्ठी से विजयादशमी तक की तिथियां, मुहूर्त और विसर्जन की पूरी जानकारी

> वर्ष 2026 में दुर्गा पूजा का प्रमुख उत्सव 16 अक्टूबर को षष्ठी से शुरू होकर 21 अक्टूबर को विजयादशमी और प्रतिमा विसर्जन के साथ संपन्न होगा। जानिए महासप्तमी, महाअष्टमी और महानवमी की सही तिथियां।

**Type:** article · **Category:** त्योहार · **Published:** 2026-10-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/festivals/west-bengal-durga-puja-2026-sasthi-se-vijaya-dashami-taka-ki-tithiyan-muhurta-aura-visarjana-ki-puri-janakari-42085 · **Language:** Hindi
**Tags:** दुर्गा पूजा 2026, पश्चिम बंगाल दुर्गा पूजा, शारदीय नवरात्रि, विजयादशमी 2026, महाअष्टमी 2026, सिंदूर खेला, कोलकाता दुर्गा पूजा

शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर समूचे भारत में मां भगवती के नौ स्वरूपों की उपासना की जाती है। इसी कालखंड के दौरान पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में दुर्गा पूजा का विराट और अत्यंत भव्य उत्सव आयोजित किया जाता है। बंगाली परंपरा के अनुसार यह महापर्व मूल रूप से षष्ठी तिथि से प्रारंभ होकर विजयादशमी तक श्रद्धा और उल्लास के साथ चलता है। इस अवधि में महासप्तमी, महाअष्टमी और महानवमी के विशिष्ट अनुष्ठानों के उपरांत दशमी के दिन देवी दुर्गा को भावभीनी विदाई दी जाती है। वर्ष 2026 के पंचांग के अनुसार षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी और विसर्जन की तिथियों का निर्धारण पंचांग गणनाओं के आधार पर सामने आ चुका है।

## षष्ठी तिथि, कल्पारंभ और अकाल बोधन की शुरुआत
दुर्गा पूजा के पूरे अनुष्ठान में षष्ठी तिथि का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना गया है, क्योंकि इसी दिन से मुख्य पूजा का संकल्प और उत्सव का श्रीगणेश होता है। वर्ष 2026 में षष्ठी तिथि 16 अक्टूबर को मान्य होगी। समय गणना के अनुसार षष्ठी तिथि का आरंभ 16 अक्टूबर की सुबह 3 बजकर 25 मिनट पर होगा, जबकि इसका समापन 17 अक्टूबर की सुबह 5 बजकर 54 मिनट पर होगा। इसी पावन दिन कल्पारंभ और अकाल बोधन की पारंपरिक विधियों के साथ बंगाल में दुर्गा पूजा का विधिवत शुभारंभ किया जाएगा। द्रिक पंचांग की गणनाओं के आधार पर 17 अक्टूबर को भी षष्ठी तिथि की मान्यता बनी रहेगी।

## स्थानीय पंचांग और सूर्योदय के आधार पर तिथियों की गणना
धार्मिक परंपराओं और शास्त्रीय नियमों के अनुसार दुर्गा पूजा से जुड़े सभी पर्व स्थानीय सूर्योदय और क्षेत्रीय पंचांग की गणनाओं के आधार पर तय किए जाते हैं। यही वजह है कि भौगोलिक अंतर और सूर्योदय के भिन्न समय के चलते विभिन्न क्षेत्रों और राज्यों में पूजा की तारीखों में थोड़ा बदलाव दिखाई दे सकता है। पश्चिम बंगाल के संदर्भ में कोलकाता के स्थानीय सूर्योदय और वहां की पंचांग परंपरा के अनुरूप ही इन सभी निर्धारित तिथियों पर दुर्गा पूजा के समस्त वैदिक व तांत्रिक अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे।

## महासप्तमी और नवपत्रिका पूजा 2026
षष्ठी के बाद सप्तमी तिथि का आगमन होता है, जिसे महासप्तमी के रूप में मनाया जाता है। पंचांग के मुताबिक सप्तमी तिथि की शुरुआत 17 अक्टूबर की सुबह 5 बजकर 54 मिनट से होगी और यह 18 अक्टूबर की सुबह 8 बजकर 27 मिनट तक प्रभावी रहेगी। उदयातिथि और शास्त्रीय मान के अनुसार महासप्तमी का पर्व 18 अक्टूबर को मनाया जाएगा। दुर्गा पूजा की परंपरा में इस दिन नवपत्रिका प्रवेश और नवपत्रिका पूजा का विशेष विधान है, जिसे देवी के नौ प्राकृतिक रूपों के प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठापित किया जाता है।

## महाअष्टमी और महानवमी की तिथियां
दुर्गा पूजा उत्सव का सबसे मुख्य और भक्तिमय केंद्र महाअष्टमी और महानवमी की तिथियां होती हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में महाअष्टमी 19 अक्टूबर को श्रद्धापूर्वक मनाई जाएगी। इस दिन संधि पूजा और देवी के महागौरी स्वरूप की विशेष आराधना की जाती है। इसके ठीक अगले दिन यानी 20 अक्टूबर को महानवमी का पावन पर्व रहेगा। इन दोनों महत्वपूर्ण तिथियों पर पंडालों और घरों में मां दुर्गा की विशिष्ट पूजा-अर्चना, पुष्पांजलि और महाभोग अर्पण के अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं।

## विजयादशमी, सिंदूर खेला और प्रतिमा विसर्जन
त्योहार के समापन के संदर्भ में अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराओं में तिथियों का अंतर देखने को मिलता है। उत्तर भारत के अधिकांश भागों में 20 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा, जबकि पश्चिम बंगाल में विजयादशमी का पावन उत्सव 21 अक्टूबर को आयोजित होगा। इसी दिन दुर्गा पूजा का औपचारिक समापन होता है और मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाओं का विसर्जन नदियों और जलाशयों में किया जाता है। इस विदाई के मौके पर सिंदूर खेला की सुप्रसिद्ध पारंपरिक रस्म निभाई जाती है, जिसमें सुहागिन महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सौभाग्य की कामना करती हैं। इसके बाद ढाक की गूंज, ढोल-नगाड़ों और भक्तिमय वातावरण के बीच मां दुर्गे को अगले वर्ष पुनः पधारने की प्रार्थना के साथ विदाई दी जाती है।

## इसका आप पर असर
दुर्गा पूजा 2026 की तिथियों के स्पष्ट होने से श्रद्धालुओं और आयोजकों को अपनी पूजा तैयारियों और यात्रा योजनाओं को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।

- **भारत में:** देशभर के श्रद्धालु जो नवरात्रि और दशहरा मनाते हैं, वे अपनी छुट्टियों और पारिवारिक कार्यक्रमों को 16 से 21 अक्टूबर के मध्य पहले से निर्धारित कर सकते हैं। इससे रेल और हवाई टिकटों की अग्रिम बुकिंग समय पर करने में सुविधा होगी।
- **पश्चिम बंगाल में:** कोलकाता और बंगाल भर की पूजा कमेटियां पंडाल निर्माण और मूर्तिकारों के अनुबंध तय तिथियों के अनुसार समयबद्ध कर सकेंगी। साथ ही स्थानीय निवासी 21 अक्टूबर को होने वाले सिंदूर खेला और विसर्जन के लिए अपनी तैयारियां व्यवस्थित रख सकते हैं।
- **यात्रा और बाजार:** त्योहार के इस सप्ताह में बाजारों में खरीदारी और पर्यटन में भारी वृद्धि दर्ज की जाएगी। समय रहते तिथियों की जानकारी मिलने से स्थानीय व्यापारियों को स्टॉक और सामग्री प्रबंधन में आसानी होगी।
- **पारिवारिक अनुष्ठान:** षष्ठी से लेकर दशमी तक के पारिवारिक व्रत और नवपत्रिका पूजा के संकल्प स्थानीय पंचांग के अनुरूप सही समय पर पूरे किए जा सकेंगे। श्रद्धालु बिना किसी असमंजस के 19 अक्टूबर को अष्टमी और 20 अक्टूबर को नवमी की पूजा संपन्न कर पाएंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
हिंदू पंचांग में त्योहारों की तिथियां चंद्र गति, तिथि प्रवेश काल और स्थानीय सूर्योदय पर आधारित होती हैं, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर तिथियों के निर्धारण में अंतर आता है।

- **तिथि का प्रवेश और समय:** षष्ठी तिथि 16 अक्टूबर की भोर में 3 बजकर 25 मिनट पर आरंभ हो रही है, जिससे इस दिन कल्पारंभ और अकाल बोधन के शास्त्रीय नियम पूरे होते हैं। चूंकि तिथि 17 अक्टूबर की सुबह तक रहती है, इसलिए दोनों दिन इसका प्रभाव मान्य माना गया है।
- **स्थानीय सूर्योदय की भूमिका:** हिंदू धर्मशास्त्रों में अधिकांश व्रत और उत्सव उदयातिथि यानी सूर्योदय के समय उपस्थित तिथि के आधार पर मनाए जाते हैं। कोलकाता और उत्तर भारत के विभिन्न शहरों में सूर्योदय के समय में अंतर होने के कारण तिथियों के पालन में क्षेत्रीय अंतर देखा जाता है।
- **दशहरा और विजयादशमी में भिन्नता:** उत्तर भारत में अपराह्र व्यापिनी दशमी तिथि को रावण दहन और दशहरा मनाया जाता है, जिससे वहां 20 अक्टूबर को दशहरा पड़ रहा है। दूसरी ओर, बंगाल में विसर्जन और सिंदूर खेला का विधान दशमी के उदयाकाल और विशिष्ट नियमों के अनुसार 21 अक्टूबर को संपन्न होगा।

## सवाल-जवाब

### 1. वर्ष 2026 में दुर्गा पूजा की शुरुआत किस दिन होगी?
दुर्गा पूजा की शुरुआत 16 अक्टूबर 2026 को षष्ठी तिथि के साथ कल्पारंभ और अकाल बोधन से होगी।

### 2. षष्ठी तिथि का समय कब से कब तक रहेगा?
षष्ठी तिथि 16 अक्टूबर की सुबह 3 बजकर 25 मिनट से शुरू होकर 17 अक्टूबर की सुबह 5 बजकर 54 मिनट तक रहेगी।

### 3. दुर्गा पूजा 2026 में महासप्तमी कब मनाई जाएगी?
महासप्तमी का पर्व 18 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा, जिस दिन नवपत्रिका पूजा की परंपरा होती है।

### 4. महाअष्टमी और महानवमी की तारीखें क्या हैं?
द्रिक पंचांग के अनुसार महाअष्टमी 19 अक्टूबर 2026 को और महानवमी 20 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी।

### 5. बंगाल में विजयादशमी और प्रतिमा विसर्जन किस दिन होगा?
पश्चिम बंगाल में विजयादशमी और मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन 21 अक्टूबर 2026 को संपन्न होगा।

### 6. उत्तर भारत के दशहरे और बंगाल की विजयादशमी में क्या अंतर है?
उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा, जबकि बंगाल में विजयादशमी 21 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

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