आगरा में अलीगढ़ के मशहूर बरुलों की धूम, सर्दियों के मौसम में गर्मागर्म स्वाद के दीवाने हुए लोग आगरा में सर्दियों की शुरुआत के साथ ही अलीगढ़ के प्रसिद्ध आलू के बरुलों की मांग काफी बढ़ गई है। बोदला-बिचपुरी रोड पर लगने वाली इस स्टॉल पर लोग कुरकुरे बरुलों और खास हरी चटनी का लुत्फ उठाने के लिए भारी संख्या में पहुंच रहे हैं। उत्तर प्रदेश का आगरा अपने लजीज व्यंजनों और खास खानपान के लिए दुनियाभर में अपनी एक अलग पहचान रखता है। यहां जैसे ही मौसम में बदलाव आता है, लोगों की खान-पान की पसंद और जायके भी उसी के मुताबिक बदल जाते हैं। अब जब सर्दियों ने अपनी दस्तक दे दी है, तो शहर में अलीगढ़ के मशहूर आलू के बरुलों की मांग में भारी इजाफा देखने को मिल रहा है। हालांकि आलू के बरुले मूल रूप से अलीगढ़ की खास पहचान माने जाते हैं, लेकिन इनका बेहतरीन स्वाद चखने के लिए अब आगरा के स्थानीय लोगों को अलीगढ़ की यात्रा करने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है। कलवारी चौराहे पर सजती है खास स्टॉल शहर के बोदला-बिचपुरी रोड पर स्थित कलवारी चौराहे के पास अलीगढ़ वालों के मशहूर बरुले के नाम से एक विशेष स्टॉल लगाई जाती है। जैसे ही शाम ढलती है, यहां गर्मागर्म और कुरकुरे आलू के बरुले खाने के शौकीन लोगों की भीड़ जुटने लगती है। इन कुरकुरे बरुलों के साथ परोसी जाने वाली खास हरी चटनी इनके स्वाद को और अधिक लजीज और लाजवाब बना देती है, जिसे खाने के लिए दूर-दूर से लोग खिंचे चले आते हैं। बरुले तैयार करने की खास विधि और सामग्री दुकानदार ने इस लजीज व्यंजन को बनाने की प्रक्रिया साझा करते हुए बताया कि इन्हें तैयार करने के लिए खासतौर पर छोटे आकार के आलुओं का इस्तेमाल किया जाता है। इन आलुओं पर बेसन, अरारोट और मैदा समेत कई अन्य चीजों का एक विशेष मिश्रण तैयार करके लगाया जाता है। इसके बाद इन्हें शुद्ध सरसों के तेल में अच्छी तरह से पकाया जाता है ताकि इनका असली और सौंधा स्वाद बाहर आ सके। वहीं इनका असली जायका इनके साथ मिलने वाली स्पेशल हरी चटनी से आता है। दुकानदार ने जानकारी दी कि धनिया, पालक और घर के करीब 15 तरह के चुनिंदा मसालों को मिलाकर यह खास चटनी तैयार की जाती है। यही मुख्य वजह है कि सर्दियों के इस ठंडे मौसम में लोग बार-बार इस दुकान पर इसका स्वाद लेने के लिए पहुंचते हैं। धीमी आंच पर कुरकुरे किए जाते हैं बरुले बोदला-बिचपुरी रोड स्थित कलवारी चौराहे के पास लगने वाली इस बरुले की स्टॉल पर शाम के समय स्वाद के दीवानों का तांता लग जाता है। यहां के दुकानदार संटू सेन ने विस्तार से बताया कि बरुले बनाने के लिए वह विशेष रूप से किर्री यानी बहुत छोटे आकार के आलुओं का प्रयोग करते हैं। प्रक्रिया की शुरुआत में बेसन, अरारोट और मैदा को मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट तैयार किया जाता है। इसके बाद इस पेस्ट में आलुओं को डालकर अच्छी तरह से मिलाया जाता है ताकि कोटिंग बेहतरीन हो सके। फिर शुद्ध सरसों के तेल में धीमी आंच पर लगभग 15 मिनट तक इन्हें पकाया जाता है, जिससे बरुले बाहर से एकदम कुरकुरे और अंदर से बेहद नरम बनकर तैयार होते हैं। संटू सेन ने यह भी बताया कि ग्राहकों को ये बरुले हमेशा ताजी हरी चटनी के साथ परोसे जाते हैं। यहां इनकी कीमतें बेहद किफायती हैं, जहां हाफ प्लेट 20 रुपये और फुल प्लेट 40 रुपये में आसानी से मिल जाती है। स्वाद के दीवानों की लगती है लंबी कतार इस स्टॉल पर स्वाद का आनंद लेने पहुंचे एक नियमित ग्राहक गोविन्द सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह यहां रोजाना बरुले खाने के लिए आते हैं। उन्होंने कहा कि यहां मिलने वाले बरुलों का जायका उन्हें इतना अधिक पसंद है कि वह चाहकर भी खुद को यहां आने से रोक नहीं पाते हैं और खासतौर पर इसके साथ मिलने वाली तीखी हरी चटनी उन्हें अपनी ओर खींच लाती है। वहीं एक अन्य ग्राहक जीशान ने बताया कि यहां के बरुले बेहद लजीज और स्वादिष्ट होते हैं, और यही मुख्य कारण है कि वह इन्हें खाने के लिए यहां तक आते हैं। जीशान ने यह भी साझा किया कि वह विशेष रूप से मिडाकुर से बरुले खाने के लिए आए हैं और उनके कुछ दोस्त किसी दूसरी जगह पर मौजूद हैं, इसलिए वह उनके लिए भी पैक कराकर अपने साथ बरुले ले जा रहे हैं। इसका आप पर असर आगरा में सर्दियों के दौरान स्ट्रीट फूड प्रेमियों के बजट और खान-पान की आदतों पर इसका सीधा असर पड़ता है। • भारत में: उत्तर प्रदेश के पारंपरिक स्ट्रीट फूड्स की मांग सर्दियों में बढ़ जाती है, जिससे स्थानीय छोटे दुकानदारों का कारोबार तेज होता है। • आगरा में: बोदला-बिचपुरी रोड के आसपास शाम के समय स्थानीय लोगों और आसपास के इलाकों से आने वाले शौकीनों को किफायती दामों पर गर्मागर्म नाश्ता मिल जाता है। • दाम और बजट: हाफ प्लेट 20 रुपये और फुल प्लेट 40 रुपये होने के कारण यह आम आदमी और छात्रों की जेब पर बिल्कुल भारी नहीं पड़ता है। • खान-पान का विकल्प: ठंड के मौसम में ताजी हरी चटनी और मसालों से तैयार यह व्यंजन लोगों को एक किफायती और गर्म विकल्प प्रदान करता है। ऐसा क्यों हुआ सर्दियों के मौसम में इस खास स्ट्रीट फूड की मांग बढ़ने के पीछे स्थानीय खान-पान की आदतें और मौसम का मिजाज मुख्य वजह हैं। • मौसम का बदलाव: तापमान कम होते ही लोगों की पसंद ठंडी चीजों से बदलकर गर्म और मसालेदार तली हुई चीजों की ओर आकर्षित हो जाती है। • खास सामग्री की उपलब्धता: छोटे आकार के किर्री आलू और पारंपरिक मसालों का सही मिश्रण इस व्यंजन को बाहर से कुरकुरे और अंदर से नरम बनाता है। • लोकप्रियता और परंपरा: अलीगढ़ की प्रसिद्ध रेसिपी का आगरा के स्थानीय बाजारों में आसानी से उपलब्ध होना खाद्य प्रेमियों को आकर्षित करता है। • ताजी चटनी का संयोजन: धनिया, पालक और 15 घरेलू मसालों से बनी ताजी हरी चटनी इसके स्वाद को ऐसा विशिष्ट बनाती है जिसके ग्राहक बार-बार लौटकर आते हैं। सवाल-जवाब 1. आगरा में अलीगढ़ के मशहूर बरुले कहां मिलते हैं? यह स्टॉल शहर के बोदला-बिचपुरी रोड स्थित कलवारी चौराहे के पास लगाई जाती है। 2. बरुले बनाने के लिए किस प्रकार के आलू का उपयोग किया जाता है? बरुले तैयार करने के लिए खासतौर पर किर्री यानी बहुत छोटे आकार के आलुओं का इस्तेमाल किया जाता है। 3. बरुले की कीमत क्या है? यहाँ हाफ प्लेट 20 रुपये और फुल प्लेट 40 रुपये में मिलती है। 4. बरुलों के साथ कौन सी चटनी परोसी जाती है? इसके साथ धनिया, पालक और लगभग 15 घरेलू मसालों से तैयार खास हरी चटनी परोसी जाती है। 5. बरुलों को किस तेल में पकाया जाता है? बरुलों को शुद्ध सरसों के तेल में धीमी आंच पर लगभग 15 मिनट तक पकाया जाता है। https://trendkia.com/food/agra-mein-aligarh-ke-mashhur-barulon-ki-dhoom-sardiyon-ke-mausam-mein-garmagarm-swad-ke-diwane-huye-log-58051 TrendKia — Har trend, sabse pehle.