# आम की गुठली को कचरा समझकर मत फेंकिए, राजस्थान में इसी से बनती है यह पारंपरिक देसी सब्जी

> गर्मियों में आम खाने के बाद लोग जिस गुठली को बेकार समझकर फेंक देते हैं, राजस्थान के भीलवाड़ा जैसे इलाकों में उसी की सफेद गिरी से एक स्वादिष्ट और पौष्टिक सब्जी तैयार की जाती है, जो बाजरे की रोटी के साथ खूब पसंद की जाती है।

**Category:** खानपान · **Published:** 2026-06-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/food/ama-ki-guthali-ko-kachara-samajhakara-mata-phenkie-rajasthan-men-isi-se-banati-h-245

आम को यूं ही फलों का राजा नहीं कहा जाता। गर्मी आते ही यह लगभग हर घर की पसंद बन जाता है — कोई इसे सीधे काटकर खाता है तो कोई जूस और मैंगो शेक का मजा लेता है। लेकिन इस मीठे फल के साथ एक आदत भी जुड़ी है, जिस पर शायद ही कभी किसी का ध्यान जाता है। गूदा खत्म होते ही बची हुई गुठली सीधे कूड़ेदान में चली जाती है। हकीकत यह है कि इसी फेंकी जाने वाली गुठली के भीतर एक ऐसी चीज छिपी होती है, जिससे राजस्थान के गांवों में सालों से एक खास सब्जी बनाई जाती रही है।

## भीलवाड़ा की रसोई से निकली एक भूली-बिसरी रेसिपी
राजस्थान के भीलवाड़ा समेत कई ग्रामीण क्षेत्रों में आम की गुठली से बनने वाली यह पारंपरिक सब्जी आज भी काफी लोकप्रिय है, और अब इसका अनोखा स्वाद शहरी रसोई तक भी पहुंचने लगा है। भीलवाड़ा की गृहणी कृष्णा कुमारी इस रेसिपी के पीछे का राज खोलती हैं। उनके मुताबिक, गर्मी के सीजन में बाजार आम से भरे रहते हैं और लोग जमकर इसका लुत्फ उठाते हैं, पर असली काम की चीज गुठली के अंदर होती है।

वह बताती हैं कि गुठली के भीतर मौजूद सफेद गिरी ही इस सब्जी की जान है। सबसे पहले गुठली को बड़ी सावधानी से तोड़कर उसके अंदर की यह सफेद गिरी निकाल ली जाती है। इसके बाद इसे या तो छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है, या फिर पीसकर पानी से अच्छी तरह धोया जाता है। गिरी में थोड़ा कड़वापन होता है, इसलिए कई लोग इसे हल्का उबालकर इस्तेमाल करते हैं, जिससे स्वाद और भी बेहतर हो जाता है। खास बात यह है कि यह सब्जी बनाना जितना आसान है, उतनी ही लंबे समय तक टिकती भी है।

## तड़का, मसाले और धीमी आंच — ऐसे तैयार होती है सब्जी
इसे बनाने का तरीका बेहद सीधा-सादा है। सबसे पहले कढ़ाई में तेल गर्म किया जाता है और जब तेल अच्छी तरह गर्म हो जाए तो उसमें जीरा, राई और हींग का जोरदार तड़का लगाया जाता है। इसके बाद बारीक कटा प्याज, लहसुन और हरी मिर्च डालकर इन्हें सुनहरा होने तक भूना जाता है।

अब बारी आती है मसालों की — हल्दी, धनिया, लाल मिर्च और स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है। जब मसाले पककर तेल छोड़ने लगें, तब इसमें आम की गिरी के तैयार टुकड़े डालकर कुछ देर अच्छे से भूना जाता है। फिर जरूरत के हिसाब से थोड़ा पानी डालकर सब्जी को ढककर धीमी आंच पर पकने दिया जाता है। स्वाद को और चटपटा बनाने के लिए कुछ लोग इसमें दही या अमचूर भी डालते हैं, जिससे इसका जायका दोगुना हो जाता है।

## सेहत का खजाना और बाजरे की रोटी का साथी
यह सब्जी सिर्फ स्वाद में ही नहीं, बल्कि सेहत और पोषण के लिहाज से भी भरपूर मानी जाती है। ग्रामीण इलाकों में लोग इसे सादी रोटी, बाजरे की रोटी या ज्वार की रोटी के साथ बड़े चाव से खाते हैं। इसका स्वाद आम या किसी भी आम सब्जी से बिल्कुल अलग और इतना खास होता है कि एक बार खाने के बाद देर तक जुबान पर बना रहता है।

इस रेसिपी की एक और खूबी इसका समझदारी भरा अंदाज है। आम की गुठली को इस तरह काम में लेना खाद्य अपशिष्ट यानी Food Waste को कम करने का बेहतरीन तरीका है। इससे एक तरफ नई और लजीज डिश तैयार होती है, तो दूसरी तरफ मौजूद संसाधनों का सही इस्तेमाल भी हो जाता है। तो इस बार जब घर आम लाएं, तो गुठली फेंकने से पहले एक बार यह देसी सब्जी बनाकर जरूर आजमाएं।

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