आंध्र प्रदेश की पारंपरिक डिब्बा रोटी बनाने का नायाब तरीका, कड़ाही और स्टील के गिलास से तैयार होगा कुरकुरा नाश्ता दक्षिण भारतीय व्यंजन डिब्बा रोटी को बिना आटा गूंथे सिर्फ इडली या डोसे के गाढ़े बैटर से कड़ाही में तैयार किया जाता है। बीच में पानी से भरा स्टील का गिलास रखकर पकाने की यह खास तकनीक बाहर से कुरकुरी और अंदर से स्पंजी रोटी बनाती है। दक्षिण भारत के पारंपरिक खानपान में कई ऐसे व्यंजन शामिल हैं जो सामान्य रसोई सामग्री से बनते हैं लेकिन उन्हें तैयार करने की तकनीक बेहद अनूठी होती है। आंध्र प्रदेश में लोकप्रिय डिब्बा रोटी इसी परंपरा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसे तैयार करने के लिए न तो गेहूं का सूखा आटा गूंथना पड़ता है और न ही चकले-बेलन पर बेलने का झंझट उठाना पड़ता है। यह खास व्यंजन पूरी तरह से इडली अथवा डोसे के गाढ़े खमीरयुक्त बैटर से पकाया जाता है। धीमी आंच पर सिकने के बाद इसका बाहरी आवरण बेहद कुरकुरा और सुनहरा हो जाता है, जबकि भीतर से इसका टेक्सचर एकदम जालीदार, स्पंजी और मुलायम बना रहता है। डिब्बा रोटी की खासियत और बनावट का अनूठा संतुलन डिब्बा रोटी की बनावट आम डोसे या पारंपरिक उत्तपम से काफी जुदा होती है। डोसा जहां बहुत पतला और क्रिस्पी होता है, वहीं उत्तपम ऊपर से नरम और सब्जियों से भरा रहता है। इसके विपरीत, डिब्बा रोटी को एक मोटी परत के रूप में सेका जाता है। कड़ाही में पर्याप्त तेल में पकने की वजह से इसका निचला और बाहरी हिस्सा कड़क और खस्ता बन जाता है, जबकि अंदरूनी हिस्सा भाप और धीमी आंच पर पककर पूरी तरह सॉफ्ट रहता है। जब भी घर में पहले से तैयार इडली या डोसे का बैटर बच जाए, तब शाम की चाय के साथ या सुबह के नाश्ते में यह रेसिपी एक नया और स्वादिष्ट विकल्प साबित होती है। आवश्यक सामग्री इस व्यंजन को तैयार करने के लिए बहुत कम और बुनियादी सामग्रियों की आवश्यकता होती है • इडली या डोसा बैटर: दो कप अच्छी तरह से फेंटा हुआ गाढ़ा बैटर, जिसमें स्वादानुसार नमक पहले से मिला होना चाहिए। • कुकिंग ऑयल: तीन से चार बड़े चम्मच तेल, जो रोटी को कुरकुरा तलने और सेकने के काम आता है। • साबुत जीरा: एक छोटा चम्मच जीरा, जो ऊपर से स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए छिड़का जाता है। • पानी: स्टील के गिलास में भरने के लिए आवश्यकतानुसार साफ पानी। कड़ाही में डिब्बा रोटी पकाने की पूरी विधि इस रोटी को पकाने के लिए सबसे पहले एक मोटे और भारी तले वाली कड़ाही का चुनाव करना चाहिए ताकि बैटर नीचे से जले नहीं। कड़ाही को मध्यम आंच पर गैस पर रखें और उसमें दो से तीन बड़े चम्मच तेल डालकर गर्म करें। जब तेल पर्याप्त गर्म हो जाए, तब गैस की आंच को एकदम धीमा कर दें। अब कड़ाही के बीचों-बीच दो कप गाढ़ा बैटर सावधानी से उंडेलें। इसे डोसे की तरह चम्मच से चारों तरफ फैलाना नहीं है, बल्कि कड़ाही में एक समान मोटी परत के रूप में स्थिर रहने देना है। इसके तुरंत बाद एक छोटा स्टील का गिलास लें और उसमें लगभग आधा या जरूरत के मुताबिक पानी भर लें। इस पानी से भरे गिलास को बैटर के बिल्कुल केंद्र में सीधा खड़ा कर दें। इसके उपरांत बैटर की ऊपरी सतह पर एक छोटा चम्मच साबुत जीरा एकसमान रूप से छिड़क दें। अब कड़ाही को एक उपयुक्त ढक्कन से अच्छी तरह ढक दें और धीमी आंच पर लगभग आठ से दस मिनट तक भाप में पकने दें। पलटने की तकनीक और परोसने का तरीका लगभग आठ से दस मिनट के बाद जब नीचे की सतह पूरी तरह से सुनहरी और कुरकुरी नजर आने लगे तथा ऊपर का बैटर भी गीला न रहकर जम जाए, तब सावधानीपूर्वक ढक्कन हटाएं। चूंकि अंदर रखा स्टील का गिलास काफी गर्म हो जाता है, इसलिए चिमटे या कपड़े की सहायता से उसे धीरे से बाहर निकाल लें। अब एक चौड़े पलटे की मदद से रोटी को धीरे से उलट दें ताकि दूसरी तरफ का हिस्सा भी अच्छी तरह सिक सके। पलटने के दौरान विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए, क्योंकि मोटी होने के कारण रोटी के बीच से टूटने का अंदेशा रहता है। दूसरी तरफ से भी रोटी को लगभग दो से तीन मिनट तक धीमी आंच पर सेकें। यदि अधिक कुरकुरापन पसंद हो, तो इस दौरान कड़ाही के किनारों पर थोड़ा सा अतिरिक्त तेल डाला जा सकता है। दोनों सतहों से पूरी तरह पक जाने के बाद डिब्बा रोटी को थाली में निकाल लें। इसे ताजी पिसी हुई नारियल की चटनी, भुनी हुई मूंगफली की चटनी, गरमा-गरम सांभर या किसी तीखी लाल चटनी के साथ गर्मागर्म परोसा जाता है। पानी से भरा गिलास रखने का वैज्ञानिक आधार कड़ाही के बीच में पानी से भरा स्टील का गिलास रखने की यह तकनीक केवल देखने में अलग नहीं लगती, बल्कि इसका पकाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान है। बैटर की परत बहुत मोटी होने के कारण अक्सर बीच का हिस्सा कच्चा रह जाने का खतरा रहता है। जब बीच में पानी भरा गर्म गिलास रखा जाता है, तो वह कड़ाही के मध्य भाग में ताप का सही वितरण करता है और वहां एक रिंग जैसी जगह बना देता है। इस खाली जगह की वजह से पूरी रोटी अंदर तक समान रूप से पक जाती है और इसका अनोखा स्वरूप भी उभर कर आता है। इसका आप पर असर बचे हुए इडली या डोसा बैटर से बिना अतिरिक्त मेहनत के नया और पौष्टिक नाश्ता तैयार किया जा सकता है। • रसोई में सुविधा: आटा गूंथने और बेलने की जरूरत न होने से सुबह के समय मेहनत और समय दोनों की बचत होती है। बचे हुए घोल का सदुपयोग करके कुछ ही मिनटों में गरमा-गरम व्यंजन परोसा जा सकता है। • स्वाद और विविधता: रोजमर्रा के साधारण नाश्ते जैसे पोहा या उपमा से अलग हटकर यह परिवार को बिल्कुल नया स्वाद देता है। बाहर से बेहद खस्ता और अंदर से स्पंजी होने के कारण यह सभी आयु वर्ग के लोगों को पसंद आता है। • कम सामग्री में तैयारी: इसके लिए बाजार से कोई विशेष सामग्री लाने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। रसोई में सामान्य रूप से उपलब्ध तेल, जीरा और चटनी के साथ ही यह संपूर्ण नाश्ता बन जाता है। • सुरक्षित कुकिंग सलाह: कड़ाही के बीच में रखा स्टील का गिलास भाप और आंच से अत्यधिक गर्म हो जाता है। रोटी को पलटते समय गिलास को कपड़े या चिमटे से ही निकालें ताकि हाथ जलने का जोखिम न रहे। ऐसा क्यों हुआ आंध्र प्रदेश की डिब्बा रोटी को कड़ाही में बीच में पानी से भरा गिलास रखकर पकाने के पीछे खास पाक कला तकनीक काम करती है। यह तरीका बैटर की मोटी परत को भीतर तक एकसमान पकाने के लिए अपनाया जाता है। • ताप का समान वितरण: कड़ाही में जब बैटर को बहुत मोटा डाला जाता है, तो सीधी आंच से निचला हिस्सा जल्दी जलने लगता है जबकि बीच का हिस्सा कच्चा रह जाता है। बीच में रखा धातु का गिलास गर्मी को बीच के हिस्से तक पहुंचाता है जिससे पूरी रोटी भीतर तक ठीक से सिकती है। • गिलास में पानी का संतुलन: खाली गिलास बैटर के दबाव या खदकने से कड़ाही में तिरछा होकर गिर सकता है। उसमें थोड़ा पानी भरने से वजन बढ़ जाता है और वह बैटर के मध्य में मजबूती से सीधा टिका रहता है। • भाप और तेल का दोहरा प्रभाव: कड़ाही को ढक्कन से ढकने पर बैटर के भीतर की नमी से भाप बनती है जो ऊपरी परत को स्पंजी बनाती है। वहीं कड़ाही के तले में मौजूद भरपूर तेल नीचे की बाहरी सतह को कुरकुरा और खस्ता बनाता है। सवाल-जवाब 1. डिब्बा रोटी बनाने के लिए किस प्रकार का बैटर उपयुक्त रहता है? इसके लिए सामान्य इडली या डोसे का गाढ़ा और अच्छी तरह फेंटा हुआ खमीरयुक्त बैटर सबसे अच्छा माना जाता है। 2. कड़ाही के बीच में पानी से भरा गिलास क्यों रखा जाता है? यह तकनीक गर्मी को समान रूप से फैलाकर मोटी रोटी को अंदर तक पकाने में मदद करती है और बीच का हिस्सा कच्चा नहीं रहता। 3. डिब्बा रोटी को पकने में कुल कितना समय लगता है? इसे धीमी आंच पर ढककर एक तरफ से लगभग आठ से दस मिनट और पलटने के बाद दूसरी तरफ से दो से तीन मिनट पकाया जाता है। 4. इस व्यंजन को किन चीजों के साथ परोसा जा सकता है? इसे नारियल की चटनी, मूंगफली की चटनी, गरमा-गरम सांभर या किसी भी तीखी लाल चटनी के साथ परोसा जाता है। https://trendkia.com/food/andhra-pradesh-ki-parnparika-dibba-roti-banane-ka-nayaba-tarika-karahi-aura-stila-ke-gilasa-se-taiyara-hoga-kurakura-nashta-34725 TrendKia — Har trend, sabse pehle.