अप्पे पैन में तैयार करें पौष्टिक मूंग दाल बाटी, स्वाद और सेहत दोनों में लाजवाब पारंपरिक बाटी को हेल्दी ट्विस्ट देते हुए मूंग दाल और गेहूं के आटे से अप्पे पैन में स्वादिष्ट व प्रोटीन युक्त बाटी तैयार की जा सकती है। पारंपरिक भारतीय व्यंजनों में दाल बाटी का अपना एक खास स्थान है, लेकिन अगर आप नियमित खान-पान में पोषण का स्तर बढ़ाना चाहते हैं तो मूंग दाल की बाटी एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। पीली मूंग दाल प्रोटीन का समृद्ध स्रोत मानी जाती है, जिससे यह व्यंजन न केवल खाने में बेहद स्वादिष्ट लगता है बल्कि शरीर के पोषण संतुलन को भी बेहतर बनाता है। सामान्य तौर पर बाटी बनाने के लिए पारंपरिक कंडे या भारी ओवन की जरूरत समझी जाती है, परंतु इस पौष्टिक बाटी को रसोई में मौजूद साधारण अप्पे पैन की मदद से बेहद कम समय और आसानी से तैयार किया जा सकता है। जरूरी सामग्री का माप इस हाई प्रोटीन बाटी को तैयार करने के लिए रसोई के बुनियादी मसालों और सामग्रियों की आवश्यकता होती है। मुख्य सामग्री के तौर पर एक कप पीली मूंग दाल (भिगोई हुई) और एक कप गेहूं का आटा लिया जाता है। इसके साथ ही दो बड़े चम्मच घी, एक छोटा चम्मच अजवाइन, एक चुटकी हींग, दो बारीक कटी हुई हरी मिर्च और दो बड़े चम्मच बारीक कटा हुआ हरा धनिया शामिल करें। सूखे मसालों में आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, एक छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, एक छोटा चम्मच धनिया पाउडर, आधा छोटा चम्मच जीरा पाउडर, स्वादानुसार नमक और आवश्यकतानुसार पानी की जरूरत होती है। दाल भिगोने और पीसने की तैयारी बाटी बनाने की प्रक्रिया की शुरुआत दाल को सही तरीके से तैयार करने से होती है। सबसे पहले एक कप पीली मूंग दाल को साफ पानी में करीब सात से आठ घंटे के लिए भिगोकर रख देना चाहिए। निर्धारित समय पूरा होने के बाद दाल से अतिरिक्त पानी पूरी तरह निकाल लें। इसके बाद भीगी हुई दाल को मिक्सर जार में डालकर पीसें। दाल को पीसते वक्त यह विशेष ध्यान रखना जरूरी है कि पेस्ट एकदम महीन न बने, बल्कि उसे दरदरा ही रखा जाए। दाल का यह दरदरापन तैयार होने वाली बाटी को एक बेहतरीन और कुरकुरा टेक्सचर प्रदान करता है। मसाले मिलाना और आटा तैयार करना दरदरी पिसी हुई मूंग दाल को एक बड़े बर्तन में निकालें। अब इसमें गेहूं का आटा, दो बड़े चम्मच घी, एक छोटा चम्मच अजवाइन, एक चुटकी हींग, दो बारीक कटी हरी मिर्च और कटा हुआ हरा धनिया डालें। इसके बाद हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, जीरा पाउडर और स्वादानुसार नमक मिलाएं। सभी सामग्रियों को अच्छी तरह मिलाते हुए जरूरत के अनुसार थोड़ा पानी डालकर नरम आटा गूंथ लें। आटा तैयार होने के बाद उसे ढककर लगभग दस मिनट के लिए सेट होने के लिए छोड़ दें, ताकि सभी मसाले और सामग्री आपस में अच्छी तरह रच-बस जाएं। अप्पे पैन में बाटी सेकने का तरीका जब आटा दस मिनट में सेट हो जाए, तो उससे मध्यम आकार की लोइयां तोड़ लें। प्रत्येक लोई को पहले बेल लें और फिर उसे रोल करते हुए गोल बाटी का आकार दें। इसके बाद गैस पर अप्पे पैन चढ़ाएं और उसके हर सांचे में थोड़ा घी लगाएं। तैयार की गई बाटी को सांचों में रखें और गैस की आंच को मध्यम रखें। बाटी को धीमी और मध्यम आंच पर पलट-पलट कर चारों तरफ से तब तक सेकें जब तक कि वह बाहर से सुनहरी और अंदर तक अच्छी तरह पक न जाए। धीमी आंच पर पकाने से बाटी भीतर तक कच्ची नहीं रहती। सुनहरी और कुरकुरी सिक जाने के बाद इस गरमा-गरम मूंग दाल बाटी को बैंगन के भर्ता के साथ परोसें। इसका आप पर असर यह आसान रेसिपी दैनिक खान-पान में बिना किसी जटिल उपकरण के उच्च प्रोटीन शामिल करने की सुविधा देती है। • खान-पान में पोषण: आहार में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने के लिए मूंग दाल की बाटी एक सीधा और प्रभावी विकल्प है। दाल को आटे के साथ मिलाकर पकाने से भोजन का पोषण स्तर तुरंत बेहतर होता है। • रसोई में समय और बचत: ओवन या तंदूर के बिना साधारण अप्पे पैन में बाटी बनाना ईंधन और समय दोनों बचाता है। केवल मध्यम आंच और थोड़े से घी में इसे रोजमर्रा के नाश्ते या दोपहर के भोजन में पकाया जा सकता है। • पाचन में आसानी: अजवाइन, हींग और जीरा जैसे पाचक तत्वों के इस्तेमाल से यह भारी नहीं लगती। पेट से संबंधित दिक्कतों से बचने के साथ-साथ यह दिनभर ऊर्जा बनाए रखने में मददगार है। • बजट में देसी भोजन: रसोई में मौजूद दाल, गेहूं के आटे और नियमित मसालों से इसे तैयार किया जा सकता है। बाहर से महंगे रेडीमेड खाद्य पदार्थ खरीदने के बजाय यह घर पर बना सुरक्षित और किफायती भोजन है। ऐसा क्यों हुआ पारंपरिक दाल बाटी को स्वास्थ्य और सुविधा के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से यह रेसिपी अपनाई जाती है। • प्रोटीन की कमी पूरी करना: शाकाहारी आहार में प्रोटीन के स्तर को बढ़ाने के लिए मूंग दाल का उपयोग सबसे सुलभ माना जाता है। इसे सीधे आटे और बाटी का हिस्सा बनाने से अलग से दाल खाने की निर्भरता के बिना भी पोषण मिल जाता है। • पारंपरिक झंझट से बचाव: पारंपरिक बाटी को कंडे या बड़े तंदूर में घंटों पकाने की आवश्यकता होती थी जो शहरी घरों में मुमकिन नहीं है। अप्पे पैन का गोलाकार सांचा बाटी को समान रूप से चारों ओर से बिना ओवन के सेकने की व्यावहारिक सुविधा देता है। • टेक्सचर और स्वाद का तालमेल: दाल को दरदरा पीसकर मिलाने से बाटी अंदर से भुरभुरी और बाहर से खस्ता बनती है। मसालों का संतुलित मेल इसे साधारण बाटी से अधिक स्वादिष्ट बनाता है। सवाल-जवाब 1. मूंग दाल को पीसने से पहले कितने समय तक भिगोना चाहिए? मूंग दाल को पानी में लगभग सात से आठ घंटे तक भिगोकर रखना चाहिए। 2. मूंग दाल को पीसते समय क्या सावधानी रखनी चाहिए? दाल को मिक्सर में दरदरा ही पीसना चाहिए ताकि बाटी का टेक्सचर अच्छा बने। 3. आटा गूंथने के बाद उसे कितनी देर सेट होने देना चाहिए? नरम आटा तैयार करने के बाद उसे करीब दस मिनट तक सेट होने के लिए रखना चाहिए। 4. बाटी को किस बर्तन और आंच पर पकाया जाता है? बाटी को अप्पे पैन में थोड़ा घी डालकर गैस की मध्यम आंच पर पकाया जाता है। 5. तैयार मूंग दाल बाटी को किसके साथ परोसने की सलाह दी गई है? इस बाटी को गरमा-गरम बैंगन के भर्ता के साथ खाने की सलाह दी गई है। https://trendkia.com/food/appe-paina-men-taiyara-karen-paushtika-moong-dal-bati-svada-aura-sehata-donon-men-lajavaba-47781 TrendKia — Har trend, sabse pehle.