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  "type": "article",
  "title": "आटे-गुड़ से बनने वाली इस मिठाई के बिना अधूरी है मिथिला में दुल्हन की अगवानी",
  "summary": "मधुबनी सहित पूरे मिथिलांचल में शादी के बाद नई दुल्हन के स्वागत में आटे और गुड़ से बनी खास मिठाई गुना मुना तैयार की जाती है, जिसे 15 से 20 दिनों तक आसानी से सुरक्षित रखा जा सकता है।",
  "content": "बिहार के मधुबनी जिले समेत पूरे मिथिलांचल में शादी-ब्याह के मौके पर एक खास मिठाई तैयार होती है, जिसका नाम है गुना मुना। यह सिर्फ एक पकवान नहीं, बल्कि नई दुल्हन के स्वागत से जुड़ी एक पुरानी रस्म का हिस्सा है। आटे और गुड़ से बनने वाली यह मिठाई स्वाद में जितनी लाजवाब होती है, उतनी ही खास वजहों से मिथिला की संस्कृति में इसकी जगह बनी हुई है।\n\nमिथिलांचल के खान-पान में गुना मुना की जगह\nमिथिलांचल अपनी समृद्ध संस्कृति और पारंपरिक पकवानों के लिए जाना जाता है। यहां हर त्योहार, हर मांगलिक मौके और हर पारिवारिक समारोह के लिए अलग-अलग तरह के खास व्यंजन बनाने की परंपरा रही है। गुना मुना भी इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में से एक है, जिसे मुख्य रूप से शादी-ब्याह के अवसर पर तैयार किया जाता है। इसे बनाना आसान नहीं है, थोड़ी मेहनत और समय लगता है, लेकिन मिथिला की रसोई में इसके बिना नई दुल्हन के स्वागत की रस्म पूरी नहीं मानी जाती। इस मिठाई की सबसे बड़ी खूबी यह है कि एक बार बनाने के बाद इसे 15 से 20 दिनों तक बड़ी आसानी से सुरक्षित रखा जा सकता है। यह जल्दी खराब नहीं होती और लंबे समय तक अपना स्वाद बनाए रखती है, इसलिए ज्यादातर घरों में इसे पहले से ही बनाकर रख लिया जाता है।\n\nनई दुल्हन के स्वागत की रस्म से गहरा नाता\nवैसे तो गुना मुना सामान्य दिनों में भी बनाया जाता है, लेकिन इसका असली महत्व तब सामने आता है जब शादी के बाद नई दुल्हन पहली बार अपने ससुराल पहुंचती है। आमतौर पर दुल्हन के घर आने से एक दिन पहले परिवार की महिलाएं मिलकर इसे तैयार करती हैं। जैसे ही रिश्तेदार, पड़ोसी और गांव के लोग नई दुल्हन को देखने घर पहुंचते हैं, उन्हें बाजार की मिठाई की जगह यही गुना मुना परोसा जाता है। स्थानीय महिलाएं ऋतु और पुष्पा बताती हैं कि यह सिर्फ खाने-पीने की चीज नहीं, बल्कि मिथिला की पारंपरिक मेहमाननवाजी और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है, जिसे आज भी कई परिवार पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाते हैं।\n\nकैसे तैयार होता है गुना मुना\nमैथिली भाषा में गुना मुना को 'अईभफर' के नाम से भी जाना जाता है। इसे बनाने के लिए गेहूं का आटा, गुड़, पानी, सौंफ और थोड़ा-सा मोयन इस्तेमाल होता है। सबसे पहले तेल या रिफाइंड को गर्म करके आटे में मोयन मिलाया जाता है, इसके बाद गुड़ के पानी की मदद से आटे को अच्छी तरह गूंथा जाता है। आटा तैयार हो जाने के बाद उसे कुछ देर ढककर रख दिया जाता है, ताकि वह सही तरीके से सेट हो सके। इसके बाद आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाई जाती हैं और हाथों से उन्हें बेलन जैसी लंबी और थोड़ी मोटी शक्ल दी जाती है। तैयार लोइयों को धीमी आंच पर रिफाइंड तेल या घी में तब तक तला जाता है, जब तक वे सुनहरी न हो जाएं। चूंकि गुना मुना आकार में थोड़ा मोटा होता है, इसलिए इसे अच्छी तरह पकाने के लिए धीमी आंच पर ही तलना जरूरी होता है। सही तरीके से बनने पर यह कई दिनों तक बिना खराब हुए सुरक्षित रहता है।\n\nसीमित साधनों से निकली परंपरा, आज भी जिंदा\nजब नई दुल्हन ससुराल पहुंचती है और लोग उसे देखने आते हैं, तब उन्हें गुना मुना खिलाकर मुंह मीठा कराया जाता है और साथ ही दुल्हन को आशीर्वाद भी दिया जाता है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि पुराने समय में आर्थिक साधन सीमित होने की वजह से लोग महंगी मिठाइयों की जगह आटे और गुड़ से बनने वाला यही पारंपरिक व्यंजन तैयार करते थे। समय बदला, लोगों की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हुई और बाजार में तरह-तरह की मिठाइयां भी आ गईं, लेकिन गुना मुना बनाने की परंपरा आज भी कायम है। अब यह सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक रस्म बन चुका है। देश हो या विदेश, जहां भी मैथिली भाषी परिवार रहते हैं, वे शादी-ब्याह और शुभ मौकों पर इस परंपरा को निभाते हुए गुना मुना जरूर बनाते हैं। यही वजह है कि यह पारंपरिक मिठाई आज भी मिथिलांचल की सांस्कृतिक पहचान और उसकी खान-पान की विरासत को जिंदा रखे हुए है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह परंपरा देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद क्षेत्रीय विवाह रीति-रिवाजों और खान-पान की विविधता को सामने लाती है, जो पारंपरिक भारतीय संस्कृति में दिलचस्पी रखने वालों के लिए जानने लायक है।\n• मधुबनी और मिथिलांचल में: यहां रहने वाले परिवारों के लिए यह जानकारी काम की है कि शादी से एक दिन पहले गुना मुना बनाकर रखा जा सकता है, जो 15 से 20 दिनों तक सुरक्षित रहता है और मेहमानों के स्वागत में इस्तेमाल किया जा सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. गुना मुना क्या है?\nयह मिथिलांचल की एक पारंपरिक मिठाई है जो गेहूं के आटे और गुड़ से बनाई जाती है और खासतौर पर शादी में नई दुल्हन के स्वागत के लिए तैयार की जाती है।\n\n2. गुना मुना को मैथिली भाषा में क्या कहा जाता है?\nमैथिली भाषा में इसे 'अईभफर' भी कहा जाता है।\n\n3. गुना मुना कितने दिनों तक खराब नहीं होता?\nसही तरीके से बनाने के बाद इसे 15 से 20 दिनों तक आसानी से सुरक्षित रखा जा सकता है।\n\n4. गुना मुना किन चीजों से बनाया जाता है?\nइसे गेहूं का आटा, गुड़, पानी, सौंफ और थोड़े मोयन से तैयार किया जाता है।\n\n5. गुना मुना कब परोसा जाता है?\nजब नई दुल्हन पहली बार ससुराल आती है और रिश्तेदार, पड़ोसी व गांव के लोग उसे देखने आते हैं, तब मिठाई की जगह गुना मुना परोसा जाता है।\n\n6. पहले लोग गुना मुना ही क्यों बनाते थे?\nबुजुर्गों के मुताबिक पहले आर्थिक साधन सीमित होने के कारण लोग महंगी मिठाइयों की जगह आटे और गुड़ से बनने वाला यही पारंपरिक व्यंजन तैयार करते थे।",
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  "category": "खानपान",
  "publishedAt": "2026-07-03",
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    "गुना मुना",
    "मिथिला की परंपरा",
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    "मैथिली मिठाई",
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    "बिहार की संस्कृति"
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