बागेश्वर की टंगड़िया स्वीट्स पर जम रही भीड़, जानिए क्यों खास है बाबा बागनाथ धाम की यह जलेबी पहाड़ी मौसम में बारिश की ठंडक के बीच बागेश्वर के बाजार में गरमागरम जलेबी की मांग बढ़ गई है, जहां पुराने समय से चली आ रही मिठास की परंपरा आज भी बरकरार है। उत्तराखंड की हसीन पहाड़ियों के बीच बसे बागेश्वर शहर में बारिश की फुहारों और ठंडी हवाओं के साथ ही गरमागरम मिठाइयों का स्वाद लोगों को अपनी ओर खींचने लगता है। बागेश्वर की पहचान सिर्फ खूबसूरत पर्वतीय नजारों, पवित्र सरयू नदी के तट और प्रसिद्ध बाबा बागनाथ धाम मंदिर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहां के पारंपरिक खान-पान का भी अपना एक विशेष महत्व है। स्थानीय बाजार में मिलने वाली गरमागरम और कुरकुरी जलेबी लंबे समय से यहां के निवासियों, आसपास के ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोगों और दूर-दराज से पहुंचने वाले पर्यटकों की पहली पसंद बनी हुई है। ठंडे मौसम में गर्म चाय के साथ चाशनी में डूबी ताजी जलेबी का स्वाद यहां के अनुभव को और भी यादगार बना देता है। ऐतिहासिक व्यापार और जलेबी का पुराना नाता बागेश्वर में जलेबी की लोकप्रियता का इतिहास काफी पुराना है और इसका सीधा संबंध यहां के ऐतिहासिक व्यापारिक माहौल से रहा है। स्थानीय जानकार सुनीता टम्टा बताती हैं कि पुराने समय में बागेश्वर एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र हुआ करता था, जहां दूर-दराज के क्षेत्रों और अन्य राज्यों से व्यापारी खरीदारी और कारोबार के सिलसिले में आया करते थे। जब व्यापारी बाजार में अपना काम पूरा कर लेते थे, तो लौटते समय अपने परिवारों और बच्चों के लिए बागेश्वर से जलेबी तथा अन्य पारंपरिक मिठाइयां खरीदकर ले जाना पसंद करते थे। समय बीतने के साथ यह आदत एक पक्की परंपरा बन गई, जो आज भी स्थानीय लोगों और बाहर से आने वाले लोगों के बीच पूरी तरह जीवित है। टंगड़िया स्वीट्स की मांग के अनुसार ताज़ी जलेबी बागेश्वर के मुख्य बाजार में स्थित टंगड़िया स्वीट्स की जलेबी का स्वाद स्थानीय स्तर पर बेहद प्रसिद्ध माना जाता है। इस दुकान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां ग्राहकों की मांग और जरूरत के अनुसार तुरंत ताजी जलेबी तैयार करके दी जाती है। जब ग्राहक ऑर्डर देते हैं, तब गरम तेल में बैटर डालकर जलेबी को कुरकुरा होने तक तला जाता है और फिर उसे तुरंत मीठी चाशनी में डुबोया जाता है। इस वजह से लोगों को हमेशा गरमागरम, क्रिस्पी और सही मिठास वाली जलेबी खाने का मौका मिलता है। बाजार में खरीदारी करने पहुंचे लोग इस ताजे स्वाद का लुत्फ उठाने के लिए दुकान पर रुकना पसंद करते हैं। पहाड़ी संस्कृति में रिश्तों की मिठास और सौगात पहाड़ी क्षेत्रों में सामाजिक संबंधों और आवभगत में मिठाइयों की बेहद अहम भूमिका मानी जाती है। उत्तराखंड के ग्रामीण और पर्वतीय इलाकों में जब भी कोई व्यक्ति अपने रिश्तेदारों, दोस्तों या परिचितों के घर मिलने जाता है, तो खाली हाथ न जाकर मिठाई साथ ले जाने का रिवाज है। बागेश्वर बाजार से गुजरने वाले लोग अक्सर अपने साथ ताजी जलेबी के डिब्बे पैक करवाते हैं। माना जाता है कि अपनों के घर मिठाई ले जाने की यह पुरानी परंपरा आपसी रिश्तों में मिठास बनाए रखने का काम करती है। यही वजह है कि त्योहारों, सामान्य दिनों और पारिवारिक दौरों के समय जलेबी की बिक्री काफी तेज बनी रहती है। बारिश का मौसम, गर्म चाय और बाज़ार की रौनक पहाड़ों में जब बारिश का मौसम शुरू होता है, तो पूरा इलाका ठंडक और खुशनुमा माहौल से भर जाता है। ऐसे मौसम में बागेश्वर के बाजार की रौनक देखने लायक होती है। सुबह के नाश्ते के रूप में हो या फिर ढलती शाम के स्नेक्स में, लोग गरमागरम जलेबी और चुस्कीदार चाय का संयोजन बेहद पसंद करते हैं। पास के गांवों से अपनी दैनिक खरीदारी के लिए बागेश्वर आने वाले लोग बाजार का चक्कर लगाने के दौरान जलेबी खाना नहीं भूलते। कुरकुरापन, चाशनी का संतुलित स्वाद और गरमागरम परोसे जाने की खूबी ही बागेश्वर की जलेबी को हर मौसम में खास बनाए रखती है। इसका आप पर असर पर्यटकों और खाद्य प्रेमियों के लिए: बागेश्वर यात्रा के दौरान बाबा बागनाथ धाम के दर्शन के साथ-साथ स्थानीय बाजार की प्रसिद्ध ताजी जलेबी का स्वाद लेने का अवसर मिलता है। उत्तराखंड में: पहाड़ी क्षेत्रों में रिश्तेदारों के घर मिठाई ले जाने की पारंपरिक परंपरा स्थानीय मिठाई विक्रेताओं और बाजार की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देती है। सवाल-जवाब 1. बागेश्वर में कौन सी मिठाई दुकान जलेबी के लिए खास मानी जाती है? बागेश्वर बाजार में टंगड़िया स्वीट्स ग्राहकों की मांग के अनुसार ताजी और गरमागरम जलेबी तैयार करने के लिए विशेष रूप से जानी जाती है। 2. बागेश्वर में जलेबी ले जाने की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि क्या है? स्थानीय जानकार सुनीता टम्टा के अनुसार, पुराने समय में बागेश्वर आने वाले व्यापारी काम खत्म करके लौटते वक्त अपने परिवारों के लिए यहां से जलेबी खरीदकर ले जाते थे। 3. उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में मिठाई ले जाने का क्या महत्व है? पहाड़ों में रिश्तेदारों या परिचितों के घर जाते समय मिठाई साथ ले जाना सामाजिक सौहार्द और रिश्तों में मिठास बनाए रखने की परंपरा का हिस्सा है। 4. बागेश्वर की जलेबी किस मौसम में सबसे ज्यादा पसंद की जाती है? बारिश और ठंड के मौसम में चाय के साथ गरमागरम और कुरकुरी जलेबी खाने का चलन सबसे ज्यादा देखा जाता है। https://trendkia.com/food/bageshwar-ki-tangriya-sweets-para-jama-rahi-bhira-janie-kyon-khasa-hai-baba-bagnath-dham-ki-yaha-jalebi-21686 TrendKia — Har trend, sabse pehle.