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  "type": "article",
  "title": "बरसात में सिर्फ कुछ हफ्तों का मेहमान है यह जंगली देसी सब्जी, कड़वाहट में करेले को भी पीछे छोड़ देता है मुरेला",
  "summary": "बारिश के मौसम में जंगलों और झाड़ियों में अपने आप उगने वाला मुरेला साल में सिर्फ एक बार और बमुश्किल महीनेभर के लिए बाजार में आता है, और इसके औषधीय गुण इसे बेहद खास बना देते हैं।",
  "content": "जैसे ही मानसून दस्तक देता है, सब्जी मंडियों की रंगत बदल जाती है। साल के बाकी महीनों में जो सब्जियां कहीं नजर नहीं आतीं, वे अचानक ठेलों पर सजने लगती हैं। ऐसी ही एक देसी और मौसमी सब्जी है मुरेला, जिसे आम बोलचाल में लोग करेले का छोटा भाई कह देते हैं। दिलचस्प बात यह है कि आकार में छोटा होने के बावजूद कड़वाहट के मामले में यह करेले को भी पीछे छोड़ देता है।\n\nसाल में सिर्फ एक मौसम, वह भी चंद दिनों के लिए\nमुरेला कोई ऐसी सब्जी नहीं जो आपको सालभर मिल जाए। यह सिर्फ बरसात के दौरान बाजार में उतरता है और इसकी मौजूदगी इतनी कम होती है कि कई लोग तो इसका नाम तक नहीं जानते। सब्जी व्यापारियों के मुताबिक यह पूरी तरह प्राकृतिक रूप से, बिना किसी खेती के, बारिश के मौसम में जंगलों और झाड़ियों में अपने आप उग आता है। यही वजह है कि इसकी उपलब्धता बेहद सीमित रहती है।\n\nव्यापारी बताते हैं कि मुरेला का सीजन ककोड़ा सब्जी के आसपास ही शुरू होता है, लेकिन यह उससे भी कम समय तक टिकता है। साल में यह बस एक ही बार आता है और बमुश्किल महीनेभर बाजार में रहता है। यही कमी इसकी मांग को और बढ़ा देती है। कीमत की बात करें तो यह आमतौर पर 50 से 80 रुपये प्रति किलो के बीच बिकता है।\n\nबनाने का तरीका करेले जैसा, स्वाद उससे भी तीखा\nमुरेला को पकाने का तरीका लगभग करेले जैसा ही होता है, लेकिन स्वाद में यह करेले से भी ज्यादा कड़वा निकलता है। आकार भले छोटा हो, इसके गुण इसे बाकी सब्जियों से अलग खड़ा कर देते हैं। स्थानीय लोग इसे शुरुआती बरसात की सबसे उपयोगी देसी सब्जियों में गिनते हैं।\n\nएक सब्जी, औषधि जैसे फायदे\nग्रामीण इलाकों में मुरेला को महज सब्जी नहीं, बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर भोजन माना जाता है। असल में यह एक तरह की वनस्पति जड़ी-बूटी की तरह काम करता है। इसमें विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं, जो शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं।\n\nमाना जाता है कि यह देसी सब्जी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है, पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है और मौसमी संक्रमणों से बचाव में सहायक होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मुरेला का नियमित और संतुलित सेवन ताप-ज्वर जैसे मौसमी बुखारों से बचाने में मददगार साबित हो सकता है। इसके साथ ही इसे आंखों की सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है।\n\nयही कारण है कि गांव-देहात में लोग आज भी इसे औषधीय भोजन के तौर पर अहमियत देते हैं। भले ही यह सब्जी जुबान पर कड़वी लगे, लेकिन इसके सेहत से जुड़े फायदे इसे बरसात के मौसम की सबसे खास देसी सब्जियों की कतार में ला खड़ा करते हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• खरीदारों के लिए: अगर आप मानसून में सस्ती और सेहतमंद देसी सब्जी चाहते हैं तो मुरेला 50 से 80 रुपये प्रति किलो में मिल जाता है, पर यह बमुश्किल महीनेभर मिलता है इसलिए मौका जल्दी पकड़ें।\n• सेहत के लिहाज से: रोग प्रतिरोधक क्षमता, पाचन और मौसमी बुखार व आंखों की सेहत के लिए लाभकारी माना जाने वाला यह विकल्प बारिश के मौसम की थाली में जोड़ा जा सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मुरेला सब्जी क्या है?\nयह बरसात में जंगलों और झाड़ियों में अपने आप उगने वाली एक देसी सब्जी है, जिसे लोग करेले का छोटा भाई कहते हैं और जो करेले से भी ज्यादा कड़वी होती है।\n\n2. मुरेला कब और कितने दिनों तक बाजार में मिलता है?\nयह साल में सिर्फ एक बार बरसात के मौसम में आता है और बमुश्किल महीनेभर तक बाजार में उपलब्ध रहता है।\n\n3. मुरेला की कीमत कितनी होती है?\nयह आमतौर पर 50 से 80 रुपये प्रति किलो के बीच बिकता है।\n\n4. मुरेला खाने के क्या फायदे हैं?\nइसमें विटामिन और मिनरल्स भरपूर होते हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, पाचन मजबूत करने, मौसमी बुखारों से बचाव और आंखों की सेहत में मददगार माने जाते हैं।",
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  "category": "खानपान",
  "publishedAt": "2026-06-16",
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    "मुरेला",
    "देसी सब्जी",
    "बरसात की सब्जी",
    "मौसमी सब्जी",
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    "ककोड़ा",
    "सेहत के फायदे"
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  "site": "TrendKia"
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