# भीलवाड़ा की दुर्गा देवी से सीखें पर्युषण पर्व के लिए कच्चे केले की स्वादिष्ट पाव भाजी बनाने की आसान विधि

> पर्युषण पर्व के दौरान जमीकंद और आलू के परहेज को ध्यान में रखते हुए कच्चे केले से स्वादिष्ट पाव भाजी तैयार की जा सकती है। भीलवाड़ा की दुर्गा देवी द्वारा बताई गई इस रेसिपी से व्रत के नियमों का पालन भी होगा और स्वाद भी बना रहेगा।

**Type:** article · **Category:** खानपान · **Published:** 2026-09-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/food/bhilwara-ki-durga-devi-se-sikhen-paryushan-parva-ke-lie-kachche-kele-ki-svadishta-pava-bhaji-banane-ki-asana-vidhi-31493 · **Language:** Hindi
**Tags:** पर्युषण पर्व, कच्चे केले की पाव भाजी, जैन रेसिपी, भीलवाड़ा, बिना आलू की पाव भाजी, व्रत का खाना

जैन समाज में पर्युषण पर्व का अत्यंत पावन महत्व होता है, जिसके दौरान श्रद्धालु आत्मशुद्धि के साथ-साथ अत्यंत संयमित और अनुशासित खान-पान के नियमों का पालन करते हैं। इन दिनों में भूमि के नीचे उगने वाली सब्जियों यानी जमीकंद जैसे आलू, प्याज, लहसुन और अदरक का सेवन पूरी तरह से वर्जित रहता है। ऐसे में रोजमर्रा के पसंदीदा और चटपटे व्यंजनों के शौकीनों के लिए खाने के विकल्प थोड़े सीमित हो जाते हैं। हालांकि, यदि आप इस पर्व के दौरान भी पाव भाजी जैसी लोकप्रिय डिश का स्वाद लेना चाहते हैं, तो कच्चे केले से बनी भाजी एक बेहद शानदार और पौष्टिक विकल्प साबित हो सकती है। राजस्थान के भीलवाड़ा की रहने वाली दुर्गा देवी के अनुसार, सही मसालों और पारंपरिक तरीकों का उपयोग करके तैयार की गई कच्चे केले की पाव भाजी का स्वाद साधारण आलू वाली भाजी से भी अधिक स्वादिष्ट लगता है।

## पर्युषण के नियमों और स्वाद का अनोखा संगम
पर्युषण पर्व के दौरान खान-पान को लेकर विशेष सतर्कता बरती जाती है। जैन मान्यताओं के अनुसार, जमीकंद की सब्जियों में जीवों की उत्पत्ति और संचय माना जाता है, इसलिए उनका त्याग किया जाता है। आमतौर पर पाव भाजी का मुख्य आधार उबला हुआ आलू होता है, लेकिन कच्चे केले का उपयोग करके इसका एक शुद्ध और स्वादिष्ट विकल्प तैयार किया जा सकता है। कच्चा केला पकने के बाद उबले हुए आलू जैसा ही गाढ़ापन और मुलायम बनावट प्रदान करता है। इससे भाजी का स्वाद और रंगत बिल्कुल प्रामाणिक बनी रहती है, और पर्व के धार्मिक नियमों का उल्लंघन भी नहीं होता। यही कारण है कि यह डिश पर्युषण के दिनों में जैन परिवारों के बीच काफी पसंद की जा रही है।

## कच्चे केले की भाजी बनाने की आवश्यक सामग्री और तैयारी
कच्चे केले की स्वादिष्ट भाजी तैयार करने के लिए सबसे पहले ताजे और अच्छी गुणवत्ता वाले कच्चे केले लें। दुर्गा देवी ने बताया कि इस डिश को बनाने की शुरुआत केलों की सही तैयारी से होती है। सबसे पहले कच्चे केलों को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें ताकि उनकी बाहरी सतह की गंदगी पूरी तरह साफ हो जाए। इसके बाद केलों को कुकर या किसी बर्तन में पानी डालकर तब तक उबालें जब तक कि वे अंदर से पूरी तरह नरम न हो जाएं। जब केले उबलकर ठंडे हो जाएं, तो सावधानीपूर्वक उनके छिलके उतार लें। छिलके हटाने के बाद केलों को किसी मैशर या हाथों की मदद से पूरी तरह से मैश कर लें ताकि उसमें कोई गांठ न रहे।

## तड़का लगाने और भाजी पकाने की चरणबद्ध प्रक्रिया
केले मैश हो जाने के बाद एक कड़ाही में थोड़ा देसी घी गर्म करें। जब घी हल्का गर्म हो जाए, तो उसमें जीरा डालकर तड़का लगाएं। जैसे ही जीरा चटकने लगे, उसमें मैश किया हुआ कच्चा केला डालें और मध्यम आंच पर अच्छी तरह मिलाएं। इसके बाद स्वाद और पर्युषण के नियमों के अनुसार स्वीकृति वाले मसाले शामिल करें। इसमें सेंधा नमक, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर और धनिया पाउडर जैसे बुनियादी मसाले डाले जाते हैं। ध्यान रहे कि इस दौरान उन मसालों, हरी मिर्च, प्याज या लहसुन का बिल्कुल भी प्रयोग न करें जो आपके परिवार या समुदाय में पर्युषण के दौरान वर्जित माने जाते हैं।

सभी मसालों को केले के मिश्रण में अच्छी तरह मिलाते हुए कुछ मिनट तक भूनें ताकि मसालों की खुशबू भाजी में रच-बस जाए। भाजी की कंसिस्टेंसी को अपनी पसंद के अनुसार समायोजित करने के लिए उसमें थोड़ा-थोड़ा करके गर्म पानी मिलाएं। यदि आप गाढ़ी भाजी पसंद करते हैं तो कम पानी डालें और यदि नरम व बहने वाली कंसिस्टेंसी चाहते हैं तो थोड़ा अधिक पानी मिलाकर कुछ देर धीमी आंच पर पकने दें। भाजी के पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद उसके ऊपर थोड़ा और शुद्ध देसी घी डालें, जिससे इसका स्वाद और सुगंध कई गुना बढ़ जाती है।

## पाव का सही चयन और परोसने का तरीका
तैयार गर्मागर्म भाजी को परोसने के लिए पाव का चयन भी पर्युषण के नियमों के अनुरूप ही किया जाना चाहिए। बाजार में मिलने वाले सामान्य पाव में कई बार ऐसे तत्वों का इस्तेमाल होता है जो व्रत के दौरान स्वीकृत नहीं होते। इसलिए पर्युषण के दौरान मान्य विशेष आटे से बने पाव या घर पर तैयार किए गए उपयुक्त विकल्पों का उपयोग किया जा सकता है। इन पावों को भी थोड़े से शुद्ध देसी घी में तवे पर हल्का सेक लें और गर्मागर्म भाजी के साथ परोसें। इस तरह से तैयार की गई पाव भाजी न केवल देखने में आकर्षक लगती है बल्कि खाने में भी बेहद लजीज होती है।

## पोषक तत्वों से भरपूर और पाचन के लिए लाभदायक
स्वादिष्ट होने के साथ-साथ कच्चा केला सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें प्रचुर मात्रा में डाइटरी फाइबर, पोटैशियम और कई अन्य आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं। फाइबर की उच्च मात्रा के कारण इसे खाने के बाद लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है, जो व्रत और संयम के दिनों में ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है। हालांकि, अलग-अलग जैन समुदायों और परिवारों में पर्युषण के नियम भिन्न हो सकते हैं। इसलिए किसी भी नई सामग्री का उपयोग करने से पहले अपने परिवार के बुजुर्गों या समुदाय के मान्य नियमों का ध्यान अवश्य रखें और उसी अनुसार सामग्री में बदलाव करें।

## इसका आप पर असर
पर्युषण पर्व के दौरान जैन समुदाय के लिए भोजन के सीमित विकल्पों के बीच यह रेसिपी व्रत के नियमों का सख्ती से पालन करते हुए रोजमर्रा के खान-पान में स्वाद बनाए रखने का एक आसान और पौष्टिक जरिया प्रदान करती है।

- **भारत भर में:** पर्युषण के दौरान व्रत रखने वाले श्रद्धालु आलू और जमीकंद का विकल्प चुनकर अपनी पसंदीदा पाव भाजी का आनंद ले सकते हैं। इससे धार्मिक नियमों का पूरी तरह पालन होता है और पर्व के दौरान खान-पान में नयापन आता है।
- **भीलवाड़ा में:** स्थानीय निवासियों को पारंपरिक स्वाद के साथ व्रत के अनुकूल व्यंजन बनाने का एक नया तरीका मिला है। भीलवाड़ा के जैन परिवारों में इस आसान रेसिपी को अपनाकर पर्व के दौरान रसोई प्रबंधन को सरल बनाया जा सकता है।
- **स्वास्थ्य पर असर:** कच्चे केले में प्रचुर मात्रा में डाइटरी फाइबर और पोटैशियम पाया जाता है जो पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है। व्रत के दौरान इसका सेवन करने से पेट लंबे समय तक भरा महसूस होता है और ऊर्जा का स्तर बना रहता है।
- **रसोई में समय की बचत:** यह डिश साधारण सामग्री से बहुत कम समय में तैयार की जा सकती है। इससे पर्युषण के दौरान जटिल व्यंजन बनाने के बजाय कम समय में सेहतमंद भोजन तैयार करना आसान हो जाता है।

## ऐसा क्यों हुआ
पर्युषण पर्व के दौरान जैन धर्म में अहिंसा के सिद्धांत के तहत भूमिगत सब्जियों यानी जमीकंद का त्याग किया जाता है, जिसके कारण पारंपरिक आलू आधारित व्यंजनों के विकल्प तलाशने की आवश्यकता पैदा होती है।

- **धार्मिक नियम और अहिंसा सिद्धांत:** जैन मान्यताओं के अनुसार जमीन के नीचे उगने वाली कंदमूल सब्जियों में अनंत सूक्ष्म जीवों का वास होता है। इनकी कटाई से जीवों को नुकसान पहुंचता है, इसलिए पर्युषण के दिनों में आलू, प्याज और लहसुन का प्रयोग पूरी तरह वर्जित होता है।
- **टेक्सचर और स्टार्च की समानता:** कच्चा केला पकने और उबलने के बाद आलू जैसा ही स्टार्चयुक्त और गाढ़ा टेक्सचर देता है। इस गुण के कारण यह पाव भाजी जैसी ग्रेवी वाली डिश का मुख्य आधार बनने के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प साबित होता है।
- **पोषण और ऊर्जा की आवश्यकता:** पर्युषण के दौरान सीमित आहार लेने के कारण ऐसे खाद्य पदार्थों की जरूरत होती है जो पचने में आसान हों और लंबे समय तक ऊर्जा दें। कच्चा केला फाइबर और पोटैशियम से भरपूर होने के कारण इस आवश्यकता को पूरा करता है।

## सवाल-जवाब

### 1. पर्युषण पर्व के दौरान आलू की जगह कच्चे केले का उपयोग क्यों किया जाता है?
पर्युषण के दौरान जैन धर्म के नियमों के तहत जमीकंद यानी जमीन के नीचे उगने वाली सब्जियों का त्याग किया जाता है, और कच्चा केला उबलने के बाद आलू जैसी ही गाढ़ी बनावट प्रदान करता है।

### 2. कच्चे केले की पाव भाजी बनाने के लिए किन मुख्य मसालों का प्रयोग किया जाता है?
इसे बनाने के लिए जीरा, सेंधा नमक, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर और धनिया पाउडर को देसी घी के तड़के के साथ इस्तेमाल किया जाता है।

### 3. पर्युषण में पाव भाजी के साथ किस प्रकार के पाव का सेवन करना चाहिए?
पर्व के नियमों के अनुसार स्वीकृति वाले विशेष आटे से बने पाव या घर पर तैयार किए गए नियमानुकूल विकल्पों का ही सेवन करना चाहिए।

### 4. क्या पर्युषण के दौरान भाजी में प्याज या लहसुन डाला जा सकता है?
नहीं, पर्युषण के दौरान प्याज, लहसुन और अन्य जमीकंद सब्जियों का सेवन पूरी तरह से वर्जित रहता है।

### 5. सेहत के लिहाज से कच्चे केले की पाव भाजी क्यों फायदेमंद मानी जाती है?
कच्चा केला प्रचुर मात्रा में फाइबर और पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा महसूस होता है और ऊर्जा बनी रहती है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._