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  "type": "article",
  "title": "विधानसभा से न्यू सचिवालय की सड़क बनी मांसाहार का ठिकाना, मटन प्रेमियों की जुटती है भारी भीड़",
  "summary": "राजधानी में सचिवालय मार्ग के किनारे लगभग 50 ठेलों पर देसी और चंपारण मटन की महक बिखरती है, जहां कामकाजी दिनों में लोग किफायती भोजन के लिए पहुंचते हैं।",
  "content": "राजधानी के प्रशासनिक गलियारे में इन दिनों दोपहर के समय एक अलग ही तरह की रौनक देखने को मिलती है। बिहार विधानसभा से न्यू सचिवालय के बीच गुजरने वाली सड़क के किनारे लगभग 200 से 300 मीटर की दूरी में मांसाहारी व्यंजनों की एक अनूठी मंडी तैयार हो चुकी है। मटन के शौकीनों के लिए यह जगह किसी पसंदीदा ठिकाने से कम नहीं है, जहां महंगे होटलों और चमचमाते डाइनिंग हॉल के बजाय खुले आसमान के नीचे सड़क किनारे ही गरमागरम स्वाद परोसा जाता है। जैसे ही कोई इस रास्ते पर कदम रखता है, एक दुकान से दूसरी दुकान तक लगातार तैरती मसालों और मटन की महक लोगों को अपनी ओर खींच लेती है।\n\nफुटपाथ पर सजी करीब 50 दुकानें\nइस पूरे मार्ग पर लगभग 50 के आसपास छोटी दुकानें और ठेले कतार में लगे रहते हैं। यहां न तो कोई बड़ा ढाबा नजर आता है और न ही किसी भव्य रेस्टोरेंट का बोर्ड लगा है। फुटपाथ पर साधारण ठेले लगे हैं, जिनके बगल में कुछ प्लास्टिक की कुर्सियां और मेजें बिछा दी गई हैं। दोपहर का समय होते ही आसपास के लोग अपनी गाड़ियां सड़क किनारे खड़ी करते हैं, कुर्सियों पर बैठते हैं और गरमागरम मटन के साथ रोटी या चावल का आनंद लेने लगते हैं। इस बाजार को चलाने वालों में विविधता भी दिखती है, जहां कई स्टॉलों को महिलाएं संभालती हैं तो कई जगहों पर बुजुर्ग कारीगर अपने पारंपरिक सलीके से ग्राहकों को भोजन परोसते मिलते हैं।\n\nदेसी से लेकर चंपारण तक के जायके\nइस सड़क पर खानपान के शौकीनों को कई तरह की शैलियों का स्वाद मिलता है। कुछ ठेलों पर पारंपरिक देसी तरीके से पका हुआ मटन मिलता है, जबकि कई दुकानों पर चंपारण शैली के खास मसालों और हांडी वाले जायके की पेशकश की जाती है। इन तमाम दुकानों के बीच बंगाली दादा होटल नाम की दुकान काफी चर्चा में रहती है। इस खास दुकान पर अक्सर अन्य ठेलों के मुकाबले अधिक भीड़ देखी जाती है और वहां रखी कुर्सियां हमेशा ग्राहकों से भरी रहती हैं। इसके बावजूद बाकी ठेलों पर भी ग्राहकों की कमी नहीं रहती, क्योंकि हर दुकान के पास अपने नियमित खाने वाले मौजूद हैं।\n\nचिकन, मछली और 100 रुपये में पेटभर भोजन\nमांसाहारी भोजन की तलाश में आने वाले लोगों के लिए यहां केवल मटन तक ही सीमित विकल्प नहीं हैं। कई दुकानों के मेनू में चिकन और तली या तरीदार मछली भी उपलब्ध कराई जाती है। ग्राहक अपनी सुविधा और पसंद के हिसाब से चावल अथवा रोटी चुन सकते हैं, जिसके साथ ताजी कटी प्याज और सलाद भी दिया जाता है। कीमतों की दृष्टि से हर विक्रेता का दर तय करने का पैमाना थोड़ा भिन्न हो सकता है, परंतु आमतौर पर लगभग 100 रुपये के बजट में एक व्यक्ति के लिए भरपेट भोजन का प्रबंध हो जाता है। कम खर्च में जायकेदार मांसाहार का शौक पूरा करने वालों के लिए यह इलाका काफी मुफीद साबित हो रहा है।\n\nकामकाजी दिनों और दोपहर में पहुंचना सही\nइस पूरे बाजार की हलचल सप्ताह के हर दिन एक समान नहीं रहती। इलाका बड़े सरकारी कार्यालयों के ठीक पास स्थित है, इसलिए सामान्य कामकाजी दिनों में दोपहर के वक्त सरकारी कर्मचारियों और आगंतुकों की भारी उपस्थिति देखने को मिलती है। इसके विपरीत, धार्मिक आस्था के चलते मंगलवार और गुरुवार को मांसाहार खाने वालों की संख्या में कमी आ जाती है, जिससे इन दिनों बहुत कम दुकानें लगती हैं। रविवार को भी अधिकांश विक्रेता अपनी दुकानें बंद रखते हैं और इक्का-दुक्का ठेले ही नजर आते हैं। ठीक वैसे ही जैसे चाट या गोलगप्पे के ठेले एक के बाद एक कतार में दिखते हैं, उसी तर्ज पर मटन के ठेलों की यह श्रृंखला भी कामकाजी दिनों की दोपहर में ही अपने पूरे शबाब पर होती है।\n\nइसका आप पर असर\nसचिवालय मार्ग पर लगने वाला यह किफायती भोजन बाजार कर्मचारियों और यात्रियों के लिए कम खर्च में भरपेट मांसाहारी भोजन का आसान विकल्प उपलब्ध कराता है।\n\n• पटना में: स्थानीय दफ्तरों के कर्मचारी और आने-जाने वाले लोग मात्र 100 रुपये में दोपहर का ताजा खाना प्राप्त कर सकते हैं। इससे उन्हें महंगे होटलों में जाए बिना अपने बजट में नियमित भोजन की सुविधा मिलती है।\n• मांसाहार प्रेमियों के लिए: एक ही छोटे से दायरे में देसी, चंपारण, चिकन और मछली के कई विकल्प एक साथ उपलब्ध रहते हैं। खाने के शौकीन बिना लंबी दूरी तय किए अपनी पसंद का स्वाद चुन सकते हैं।\n• समय और दिन का चयन: मंगलवार, गुरुवार और रविवार को अधिकांश दुकानें बंद रहने के कारण कामकाजी दिनों में जाना ही बेहतर होता है। गलत दिन पहुंचने पर ग्राहकों को खाली हाथ लौटना पड़ सकता है।\n• छोटे दुकानदारों के लिए: बिना किसी बड़े रेस्टोरेंट ढांचे के लगभग 50 परिवारों को नियमित रोजगार और आजीविका का साधन मिलता है। इससे महिला विक्रेताओं और बुजुर्गों को भी सड़क किनारे आर्थिक संबल प्राप्त हो रहा है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nबिहार विधानसभा और न्यू सचिवालय के बीच यह फूड हब अचानक नहीं बना, बल्कि आसपास मौजूद सरकारी दफ्तरों की मांग और किफायती भोजन की जरूरत ने इसे खड़ा किया है।\n\n• सरकारी दफ्तरों का जमावड़ा: इस मार्ग के दोनों ओर सचिवालय और कई प्रमुख कार्यालय स्थित हैं जहां हजारों कर्मचारी काम करते हैं। दोपहर के भोजनावकाश में इन कर्मियों को नजदीक ही त्वरित और गर्म भोजन की दरकार होती है।\n• सस्ते भोजन की निरंतर मांग: बड़े होटलों में रोजाना दोपहर का खाना खाना हर कामकाजी व्यक्ति के बजट में नहीं बैठता। लगभग 100 रुपये की सस्ती दर ने यहां ग्राहकों का एक पक्का आधार तैयार कर दिया।\n• धार्मिक और साप्ताहिक दिनचर्या: मंगलवार और गुरुवार को मांसाहार से परहेज तथा रविवार को सरकारी अवकाश होने के कारण यह बाजार केवल कामकाजी दिनों पर ही अधिक सक्रिय रहता है। ग्राहकों की मौजूदगी के अनुसार ही दुकानदारों ने अपनी दिनचर्या निर्धारित कर ली है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यह मटन और चिकन बाजार किस स्थान पर लगता है?\nयह बाजार बिहार विधानसभा से लेकर न्यू सचिवालय के बीच सड़क किनारे फुटपाथ पर 200 से 300 मीटर के दायरे में लगता है।\n\n2. इस इलाके में लगभग कितनी दुकानें संचालित होती हैं?\nइस छोटे से हिस्से में करीब 50 के आसपास ठेले और छोटी दुकानें लगती हैं।\n\n3. यहां भोजन की सामान्य कीमत कितनी है?\nआमतौर पर लगभग 100 रुपये में एक व्यक्ति के लिए भरपेट भोजन उपलब्ध हो जाता है।\n\n4. मटन के अलावा यहां और क्या खाने को मिलता है?\nमटन के साथ-साथ कई ठेलों पर चिकन और मछली भी चावल, रोटी व सलाद के साथ परोसी जाती है।\n\n5. कौन सी दुकान यहां सबसे ज्यादा चर्चा में रहती है?\nदुकानों में बंगाली दादा होटल काफी लोकप्रिय है, जहां अक्सर अन्य दुकानों से ज्यादा भीड़ देखी जाती है।\n\n6. सप्ताह के किन दिनों में यहां दुकानें कम लगती हैं या बंद रहती हैं?\nमंगलवार और गुरुवार को मांसाहार खाने वाले कम होने से कम दुकानें लगती हैं, जबकि रविवार को अधिकांश दुकानें बंद रहती हैं।",
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  "category": "खानपान",
  "publishedAt": "2026-09-24",
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