बिना चीनी और गुड़ के बनाएं प्रोटीन से भरपूर हरी मूंग के पौष्टिक लड्डू फिटनेस और स्वाद का संतुलन साधने के लिए हरी मूंग दाल, सूखे मेवे और बीजों से तैयार करें यह पौष्टिक लड्डू, जिसमें मिठास खजूर और किशमिश से आती है। अक्सर भोजन के उपरांत कुछ मीठा चखने की इच्छा हर किसी की होती है, किंतु स्वास्थ्य और फिटनेस को लेकर सतर्क रहने वाले व्यक्ति चीनी की अधिकता के भय से मिठाइयों से दूरी बना लेते हैं। यदि आप भी नियमित वर्कआउट करते हैं अथवा अपनी डाइट में पौष्टिकता को प्राथमिकता देते हैं, तो हरी मूंग दाल और सूखे मेवों से तैयार लड्डू एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरते हैं। इस पारंपरिक मिष्ठान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें न तो रिफाइंड चीनी की एक भी बूंद का इस्तेमाल होता है और न ही गुड़ की चाशनी डाली जाती है। प्राकृतिक मिठास के लिए इसमें खजूर और किशमिश का संतुलन रखा जाता है, जबकि मूंग दाल, मेवे और बीज मिलकर इसे ऊर्जा और पोषण का भंडार बना देते हैं। तैयारी के लिए जरूरी सामग्री और उनका सटीक नाप इस स्वादिष्ट और सेहतमंद रेसिपी को घर पर आजमाने के लिए सबसे पहले सभी आवश्यक सामग्रियों को सही मात्रा में एकत्र कर लें। इन लड्डुओं को तैयार करने के लिए एक कप भीगी हुई हरी मूंग दाल की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही सूखे मेवों में एक चौथाई कप बादाम, एक चौथाई कप काजू, एक चौथाई कप अखरोट और दो बड़े चम्मच पिस्ता शामिल करें। बीजों के समृद्ध मिश्रण के लिए दो बड़े चम्मच कद्दू के बीज, दो बड़े चम्मच सूरजमुखी के बीज, एक बड़ा चम्मच चिया सीड्स और एक बड़ा चम्मच भुनी हुई अलसी की जरूरत पड़ेगी। मिठास और सुगंध प्रदान करने के लिए आठ से दस कटे हुए बिना बीज वाले खजूर, एक चौथाई कप किशमिश तथा आधा छोटा चम्मच कुटी हुई इलायची का पाउडर रखें। पूरी सामग्री को भूनने और आपस में बांधने के लिए दो बड़े चम्मच शुद्ध देसी घी की दरकार होगी। दाल की सिकाई और दरदरा पीसने की विधि लड्डू बनाने की शुरुआत हरी मूंग दाल की सही तैयारी से होती है। भीगी हुई दाल से सारा अतिरिक्त पानी पूरी तरह छानकर अलग कर लें। इसके बाद दाल को किसी स्वच्छ सूती कपड़े पर करीब पंद्रह से बीस मिनट के लिए फैलाकर छोड़ दें, जिससे उसकी बाहरी नमी पूरी तरह सूख जाए। जब दाल सूख जाए, तब एक भारी तले की कड़ाही या पैन को धीमी आंच पर चढ़ाएं। बिना घी का इस्तेमाल किए सूखी दाल को कड़ाही में डालें और लगातार चमचे से चलाते हुए भूनें। आंच को धीमा रखना अत्यंत आवश्यक है ताकि दाल अंदर तक सिके और कड़वी न हो। जब दाल का रंग हल्का सुनहरा पड़ने लगे और उससे एक सोंधी खुशबू आने लगे, तब गैस को बंद कर दें। भुनी हुई दाल को किसी चौड़े बर्तन में निकालकर पूरी तरह ठंडा कर लें। इसके पश्चात इसे मिक्सी के जार में डालें और दरदरा पीस लें, ध्यान रखें कि इसका बिल्कुल महीन आटा न बने। मेवे, बीज और प्राकृतिक मिठास की तैयारी दाल पीसने के उपरांत उसी पैन को दोबारा धीमी आंच पर रखें। अब इसमें बादाम, काजू, अखरोट, पिस्ता, कद्दू के बीज, सूरजमुखी के बीज और अलसी को एक साथ डालकर सूखा भून लें। इन सामग्रियों को लगातार चलाते रहें जिससे मेवे और बीज समान रूप से हल्के सुनहरे हो जाएं और जलने न पाएं। जैसे ही इनमें से हल्की खुशबू उठने लगे, तुरंत आंच बंद करें और मिश्रण को ठंडा होने दें। ठंडा होने के बाद मेवों को चाकू की सहायता से दरदरा काट लें। इसके बाद उसी कड़ाही में दो बड़े चम्मच देसी घी डालकर गर्म करें। घी पिघलते ही इसमें बारीक कटे हुए खजूर और किशमिश डालें। इन्हें धीमी आंच पर दो से तीन मिनट तक लगातार चलाते हुए पकाएं। पकाने से खजूर और किशमिश पूरी तरह नरम हो जाते हैं, जो आगे चलकर लड्डुओं को आपस में बांधने का मुख्य आधार बनते हैं। मिश्रण को मिलाना और लड्डू बांधने का तरीका जब खजूर और किशमिश का पेस्ट कड़ाही में अच्छे से नरम हो जाए, तब इसमें पहले से दरदरी पिसी हुई मूंग दाल, कटे हुए मेवे, भुने हुए बीज, चिया सीड्स और इलायची पाउडर मिला दें। चम्मच की सहायता से सभी सामग्रियों को आपस में तब तक मिलाएं जब तक कि खजूर का गीलापन पूरी दाल और मेवों में समान रूप से समाहित न हो जाए। इसके बाद गैस को बंद कर दें और इस मिश्रण को कड़ाही से उतारकर हल्का ठंडा होने के लिए छोड़ दें। जब मिश्रण इतना गुनगुना रह जाए कि उसे हाथों से छुआ जा सके, तब हथेलियों पर हल्का सा देसी घी लगाएं। थोड़ा-थोड़ा मिश्रण हाथ में लेकर दबाते हुए मनचाहे आकार के गोल लड्डू तैयार कर लें। लड्डुओं को पंखे की हवा में पूरी तरह ठंडा होने दें और उसके बाद ही किसी साफ एयरटाइट डिब्बे में भरकर रखें। स्वाद और मिठास के विकल्प इन लड्डुओं को नाश्ते में दूध के साथ लिया जा सकता है अथवा शाम की हल्की भूख के समय एक पौष्टिक नाश्ते के रूप में खाया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति बिल्कुल फीके लड्डू पसंद करता है अथवा खजूर और किशमिश का भी सेवन नहीं करना चाहता, तो वह इन दोनों चीजों को सामग्री से हटा सकता है। हालांकि, ऐसा करने पर लड्डुओं में किसी भी तरह की मिठास नहीं रहेगी। इसके अलावा, खजूर की अनुपस्थिति में दाल और सूखे मेवों के सूखे मिश्रण को लड्डू का आकार देने के लिए थोड़ी अधिक मात्रा में देसी घी मिलाने की आवश्यकता पड़ सकती है। यह पौष्टिक लड्डू न केवल शरीर को भरपूर ऊर्जा देते हैं बल्कि जिम जाने वालों और फिटनेस प्रेमियों के लिए एक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प भी साबित होते हैं। इसका आप पर असर यह घरेलू नुस्खा उन सभी लोगों के लिए उपयोगी है जो बिना चीनी और कृत्रिम मिठास के सेहतमंद नाश्ता तलाश रहे हैं। • दैनिक खानपान: रिफाइंड चीनी और गुड़ से परहेज करने वाले लोग भोजन के बाद बेझिझक इस मीठे का आनंद ले सकते हैं। इससे बिना कैलोरी बढ़ाए मीठा खाने की तलब शांत होती है। • फिटनेस और वर्कआउट: जिम जाने वाले युवाओं को मूंग दाल, सूखे मेवों और बीजों से प्राकृतिक प्रोटीन और ऊर्जा मिलती है। इसे वर्कआउट से पहले या बाद में हल्के स्नैक के रूप में आसानी से खाया जा सकता है। • किचन बजट: बाजार की महंगी प्रोटीन बार और डिब्बाबंद मिठाइयों की तुलना में यह घर पर काफी किफायती पड़ता है। साधारण दाल और नियमित मेवों से इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है। • भंडारण और सुविधा: एक बार बनाकर एयरटाइट डिब्बे में रखने पर यह कई दिनों तक खराब नहीं होता है। कामकाजी लोग और छात्र इसे यात्रा या दफ्तर में स्नैक के रूप में साथ रख सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और प्रसंस्कृत चीनी के दुष्प्रभावों के कारण लोग पारंपरिक मिठाइयों के पौष्टिक विकल्पों की खोज कर रहे हैं। • रिफाइंड चीनी से बचाव: रिफाइंड चीनी और अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों के सेवन से वजन और सुस्ती बढ़ने की चिंता रहती है। इसी कारण खजूर और किशमिश जैसी प्राकृतिक चीजों से मिठास तैयार करने की प्रवृत्ति बढ़ी है। • पौष्टिक तत्वों की आवश्यकता: हरी मूंग दाल प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है, जबकि विभिन्न बीज और मेवे आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करते हैं। इन सभी को मिलाकर एक ऐसा स्नैक तैयार होता है जो केवल स्वाद ही नहीं बल्कि पोषण भी देता है। • तैयारी की सरलता: चाशनी बनाने की झंझट और सख्त तापमान नियंत्रण के बिना यह लड्डू आसानी से बंध जाते हैं। खजूर की चिपचिपाहट और हल्का घी सामग्री को बिना किसी रसायन के स्वाभाविक रूप से जोड़ते हैं। सवाल-जवाब 1. क्या इन लड्डुओं में चीनी या गुड़ का उपयोग किया जाता है? नहीं, इस रेसिपी में रिफाइंड चीनी या गुड़ का बिल्कुल प्रयोग नहीं होता, बल्कि मिठास खजूर और किशमिश से आती है। 2. मूंग दाल को भूनने से पहले सुखाना क्यों जरूरी है? भीगी दाल की नमी सुखाने से वह कड़ाही में चिपकती नहीं है और समान रूप से भूनकर कुरकुरी व सोंधी बनती है। 3. क्या बिना खजूर और किशमिश के भी यह लड्डू बन सकते हैं? हां, इन्हें छोड़ा जा सकता है, किंतु तब लड्डू बिल्कुल फीके बनेंगे और मिश्रण बांधने के लिए अतिरिक्त देसी घी की जरूरत होगी। 4. तैयार लड्डुओं को कितने दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है? पूरी तरह ठंडा होने के बाद इन्हें किसी साफ एयरटाइट कंटेनर में रखकर कई दिनों तक सामान्य तापमान पर इस्तेमाल किया जा सकता है। https://trendkia.com/food/bina-cheeni-aur-gud-ke-banayein-protein-se-bharpoor-hari-moong-ke-paushtik-laddu-39243 TrendKia — Har trend, sabse pehle.