बिना लिसलिसेपन के तैयार करें ढाबा स्टाइल कुरकुरी सूखी अरबी, जानें छीलने से लेकर फ्राई करने के खास टिप्स अरबी की सूखी सब्जी बनाते समय अक्सर चिपचिपापन स्वाद बिगाड़ देता है। उबालने के बाद ठंडा करने, शैलो फ्राई और अमचूर के सही इस्तेमाल से यह बिल्कुल खिली-खिली और क्रिस्पी बनती है। भारतीय खानपान में सूखी और चटपटी सब्जियों का एक अलग ही महत्व है, और जब बात पूरी या पराठों के साथ परोसी जाने वाली खास थाली की आती है, तो अरबी की सूखी मसाला सब्जी हमेशा पहली पसंद मानी जाती है। गरमा-गरम रोटियों और पराठों के साथ इसका तीखा और कुरकुरा स्वाद बेहद लाजवाब लगता है। इसके बावजूद, बहुत से घरों में लोग इसे पकाने से कतराते हैं क्योंकि पकाने के दौरान अरबी में मौजूद प्राकृतिक लिसलिसापन अक्सर पूरी सब्जी को चिपचिपा बना देता है। सही तकनीक न अपनाने की वजह से यह कड़ाही में चिपकने लगती है और मनचाहा कुरकुरापन नहीं मिल पाता। अगर सही रसोई तकनीकों और खास स्टेप्स का पालन किया जाए, तो साधारण सी दिखने वाली इस सब्जी को भी रेस्टोरेंट और ढाबों की तरह बेहद कुरकुरा और खिला-खिला बनाया जा सकता है। उबालने के बाद ठंडा करना है चिपचिपापन रोकने का पहला नियम अरबी की सब्जी को लिसलिसेपन से बचाने की सबसे पहली और बुनियादी शुरुआत पकाने की पूर्व तैयारी से ही हो जाती है। जब भी आप बाजार से अरबी लाएं, तो सबसे पहले उस पर लगी मिट्टी को अच्छी तरह पानी से धोकर साफ करें और फिर कुकर या बर्तन में उबाल लें। अधिकांश लोग यहीं पर एक बड़ी चूक कर बैठते हैं कि वे उबलते ही तुरंत गर्म अरबी को छीलने और काटने लगते हैं। गर्म अवस्था में अरबी का प्राकृतिक चिपचिपापन चरम पर होता है और चाकू लगाते ही वह हाथों और चॉपिंग बोर्ड पर बुरी तरह चिपकने लगती है। उबालने के बाद अरबी को पंखे की हवा में या सामान्य कमरे के तापमान पर पूरी तरह ठंडा होने दें। जब अरबी पूरी तरह ठंडी और सूखी हो जाती है, तो उसका चिपचिपापन भीतर ही बंध जाता है। इसके बाद उसका छिलका बिना किसी परेशानी के बेहद आसानी से उतर जाता है और अरबी की बाहरी सतह पूरी तरह सूखी रहती है, जिससे टुकड़े काटते समय चाकू पर कोई लिसलिसापन नहीं रहता। शैलो फ्राई करके बनाएं सुनहरी और क्रंची बाहरी परत ढाबा स्टाइल बनावट हासिल करने के लिए दूसरा सबसे महत्वपूर्ण कदम है अरबी को मसालों में डालने से पहले अच्छी तरह भूनना। उबली और ठंडी की हुई अरबी को छीलने के बाद अपनी पसंद के अनुसार गोल या लंबे स्लाइस में काट लें। इसके बाद सीधे कड़ाही में मसाले डालकर पकाने के बजाय शैलो फ्राई का तरीका अपनाएं। एक भारी तले की कड़ाही या पैन में दो से तीन चम्मच तेल गरम करें। तेल जब मध्यम गरम हो जाए, तो उसमें कटे हुए अरबी के टुकड़ों को डालें। इन्हें मध्यम आंच पर उलट-पुलट करते हुए तब तक शैलो फ्राई करें जब तक कि टुकड़ों के ऊपर एक सुनहरी, कुरकुरी और मजबूत परत न जम जाए। पहले से इस तरह भून लेने का दोहरा फायदा होता है, एक तो अरबी के भीतर का सारा बचा हुआ चिपचिपापन पूरी तरह जलकर खत्म हो जाता है, और दूसरा यह कि जब बाद में इसमें मसाले मिलाए जाते हैं तो वे इस कुरकुरी परत पर बहुत ही शानदार तरीके से चिपकते हैं। अजवाइन, हींग और अमचूर का सही संतुलन अरबी की सूखी सब्जी का असली स्वाद उसके तड़के और खटास के मेल पर निर्भर करता है। जब अरबी के टुकड़े कुरकुरे हो जाएं, तो उसमें अजवाइन और हींग का तड़का देना बेहद जरूरी माना जाता है। अरबी स्वभाव से थोड़ी भारी और बादी मानी जाती है, इसलिए अजवाइन न केवल इसके स्वाद को कई गुना बढ़ा देती है, बल्कि यह पेट के भारीपन को दूर कर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में भी अहम भूमिका निभाती है। हींग का तीखापन इसके फ्लेवर को पूरी तरह निखार देता है। तड़के के बाद इसमें हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और थोड़ा सा गरम मसाला मिलाया जाता है। इस पूरी रेसिपी का सबसे महत्वपूर्ण तत्व है खटाई। सब्जी में अमचूर पाउडर या ताजे नींबू के रस का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। खट्टापन एक ऐसा प्राकृतिक घटक है जो अरबी के किसी भी प्रकार के बचे-खुचे चिपचिपेपन को पूरी तरह काट देता है। अमचूर और मसालों को डालकर धीमी आंच पर दो से तीन मिनट भूनने से सारा स्वाद अंदर तक रम जाता है। गरमा-गरम पराठों के साथ परोसें सूखी अजवाइन मसाला अरबी इस पूरी विधि को एक सटीक रेसिपी के रूप में घर पर तैयार करना बेहद आसान है। सबसे पहले उबली और पूरी तरह ठंडी की हुई अरबी के छिलके उतारकर उसे गोल या लंबे टुकड़ों में काट कर रख लें। एक पैन में दो से तीन चम्मच तेल या देसी घी गरम करें और उसमें चुटकी भर हींग और अजवाइन का तड़का लगाएं। जैसे ही अजवाइन चटकने लगे, पैन में कटे हुए अरबी के टुकड़े डालें और मध्यम आंच पर तब तक भूनें जब तक वे बाहर से सुनहरे और क्रिस्पी न हो जाएं। अरबी के क्रिस्पी होते ही आंच धीमी करें और उसमें हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, स्वादानुसार नमक और अमचूर पाउडर डालें। हल्के हाथों से चमचे को चलाते हुए मसालों को अच्छी तरह मिलाएं ताकि हर टुकड़े पर मसालों की एक समान कोटिंग चढ़ जाए। धीमी आंच पर दो से तीन मिनट भूनने के बाद गैस बंद कर दें और ऊपर से बारीक कटी हरी धनिया की पत्तियां बुरक दें। यह खिली-खिली, चटपटी और कुरकुरी सूखी अरबी बनकर तैयार है, जिसे नाश्ते या दोपहर के भोजन में गरमा-गरम पराठों और पूरी के साथ परोसने पर हर कोई बेहद चाव से खाता है। इसका आप पर असर अरबी बनाते समय चिपचिपेपन और लिसलिसेपन की समस्या से परेशान लोगों के लिए यह कुकिंग गाइड बेहद आसान और आजमाया हुआ समाधान प्रस्तुत करती है। • तैयारी का तरीका: उबालने के बाद अरबी को तुरंत छीलने और काटने की जल्दबाजी न करें। इसे पूरी तरह ठंडा होने दें ताकि उसका लिसलिसापन सूख जाए और वह कड़ाही में चिपके बिना आसानी से कटे। • फ्राई करने की तकनीक: मसालों में डालने से पहले दो से तीन चम्मच तेल में शैलो फ्राई करना जरूरी है। इससे अरबी के बाहरी हिस्से पर सुनहरी कुरकुरी परत जमती है और भीतर का चिपचिपापन हमेशा के लिए खत्म हो जाता है। • पाचन और स्वास्थ्य: अरबी भारी होती है, इसलिए इसमें अजवाइन और हींग का तड़का लगाना स्वास्थ्य के लिहाज से जरूरी है। यह पेट के भारीपन को रोककर भोजन को सुपाच्य बनाता है। • खटास का प्रभाव: सब्जी में अमचूर पाउडर या नींबू का रस डालने से बचा हुआ चिपचिपापन रासायनिक रूप से खत्म होता है। इससे सब्जी बेहद खिली-खिली और चटपटी बनती है। ऐसा क्यों हुआ अरबी में स्वाभाविक रूप से पाए जाने वाले स्टार्च और म्यूसिलेज की वजह से इसे पकाते समय चिपचिपापन पैदा होता है। गलत तापमान और जल्दबाजी में पकाने से यह लिसलिसापन पूरी सब्जी को खराब कर देता है। • प्राकृतिक म्यूसिलेज का असर: अरबी के अंदर चिपचिपा द्रव्य होता है जो गर्मी और पानी के संपर्क में आने पर सक्रिय हो जाता है। गर्म अवस्था में इसे छीलने या काटने से यह गाढ़ा तरल बाहर निकलकर फैलने लगता है। • कमरे के तापमान पर ठंडा न करना: उबालने के तुरंत बाद काम शुरू करने से स्टार्च को जमने का समय नहीं मिलता। जब इसे ठंडा किया जाता है तो स्टार्च सिकुड़कर स्थिर हो जाता है जिससे चिपचिपापन रुक जाता है। • सीधे मसालों के साथ पकाना: अगर अरबी को पहले तेल में शैलो फ्राई करके सील न किया जाए, तो वह कड़ाही की तली में चिपक जाती है। तेल की गर्मी से बाहरी परत सूखकर सख्त हो जाती है और लिसलिसापन खत्म होता है। • खट्टे तत्वों की कमी: खटाई जैसे अमचूर या नींबू का रस न डालने से चिपचिपापन बना रहता है। अम्लीय तत्व लिसलिसे स्टार्च के बंधनों को तोड़कर सब्जी को पूरी तरह सूखा और खिला-खिला बनाते हैं। सवाल-जवाब 1. अरबी को काटते या छीलते समय चिपचिपापन क्यों होता है? अरबी में प्राकृतिक रूप से लिसलिसा म्यूसिलेज और स्टार्च होता है, जो उबालने के बाद गर्म रहने पर बाहर निकलने लगता है। 2. अरबी के चिपचिपेपन को रोकने के लिए सबसे पहला कदम क्या है? उबालने के बाद अरबी को पूरी तरह ठंडा होने दें, क्योंकि ठंडी होने पर इसका छिलका आसानी से उतरता है और लिसलिसापन नहीं फैलता। 3. अरबी को कुरकुरा बनाने के लिए कड़ाही में कितना तेल इस्तेमाल करना चाहिए? कटी हुई अरबी को शैलो फ्राई करने के लिए कड़ाही या पैन में दो से तीन चम्मच तेल या घी का इस्तेमाल करना चाहिए। 4. अरबी की सब्जी में अजवाइन डालना क्यों जरूरी माना जाता है? अजवाइन अरबी के स्वाद को बढ़ाने के साथ-साथ उसके भारीपन को दूर करती है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाती है। 5. सब्जी का लिसलिसापन पूरी तरह खत्म करने के लिए कौन सा खट्टा मसाला डालना चाहिए? सब्जी में अमचूर पाउडर यानी ड्राई मैंगो पाउडर या थोड़ा सा नींबू का रस डालने से बचा हुआ चिपचिपापन पूरी तरह खत्म हो जाता है। https://trendkia.com/food/bina-lisalisepana-ke-taiyara-karen-dhaba-staila-kurakuri-sukhi-arbi-janen-chhilane-se-lekara-phrai-karane-ke-khasa-tipsa-54855 TrendKia — Har trend, sabse pehle.