# बिना प्याज और टमाटर के मिनटों में बनाएं राजस्थानी मूंग दाल मंगोड़ी, यह है बनाने का सबसे आसान तरीका

> बिना प्याज और टमाटर के भी बेहद स्वादिष्ट मारवाड़ी मूंग दाल मंगोड़ी की सब्जी तैयार की जा सकती है। केवल दो चम्मच दही और बुनियादी मसालों से बनने वाली इस पारंपरिक डिश की पूरी रेसिपी यहाँ समझें।

**Type:** article · **Category:** खानपान · **Published:** 2026-09-11 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/food/bina-pyaja-aura-tamatara-ke-minaton-men-banaen-rajasthan-i-munga-dala-mangodi-yaha-hai-banane-ka-sabase-asana-tarika-31128 · **Language:** Hindi
**Tags:** मूंग दाल मंगोड़ी, मंगोड़ी की सब्जी, राजस्थानी रेसिपी, मारवाड़ी खाना, दही मंगोड़ी, बिना प्याज टमाटर रेसिपी

पारंपरिक राजस्थानी और मारवाड़ी रसोई की सबसे बड़ी खूबी यही मानी जाती है कि वहां सीमित और साधारण सामग्री से भी बेहद जायकेदार भोजन तैयार कर लिया जाता है। सूखे मेवे, दालों की बड़ियां और घर पर मौजूद बुनियादी मसालों का तालमेल इस खानपान को खास बनाता है। इसी परंपरा का एक बेहतरीन उदाहरण है दही वाली मूंग दाल मंगोड़ी की रसेदार सब्जी। अगर घर में हरी सब्जियां, प्याज या टमाटर उपलब्ध न हों, तब भी यह डिश स्वाद में किसी दावत से कम नहीं लगती।

इस रेसिपी में ग्रेवी को गाढ़ा और स्वादिष्ट बनाने के लिए प्याज या टमाटर की प्यूरी की बिल्कुल आवश्यकता नहीं पड़ती। सिर्फ दो बड़े चम्मच फेंटी हुई दही और सौंफ-धनिया जैसे महकते मसालों के मिश्रण से गाढ़ी और लाजवाब तरी बनकर तैयार हो जाती है। इसे आप दोपहर या रात के खाने में गरमा-गरम रोटियों, कुरकुरे पराठों या फिर सादे उबले चावल के साथ परोस सकते हैं।

## सब्जी बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
इस स्वादिष्ट सब्जी को तैयार करने के लिए आपको रसोई में आसानी से मिलने वाली निम्नलिखित चीजों की जरूरत होगी

- **मूंग दाल मंगोड़ी:** 1 कप
- **ताजा दही:** 2 बड़े चम्मच (अच्छी तरह फेंटा हुआ)
- **सरसों का तेल:** 2 बड़े चम्मच
- **जीरा:** आधा छोटा चम्मच
- **हींग:** 1 चुटकी
- **हल्दी पाउडर:** आधा छोटा चम्मच
- **धनिया पाउडर:** 1 छोटा चम्मच
- **लाल मिर्च पाउडर:** आधा छोटा चम्मच
- **सौंफ पाउडर:** आधा छोटा चम्मच
- **नमक:** स्वादानुसार
- **पानी:** 1 से डेढ़ कप (आवश्यकतानुसार गर्म पानी)
- **हरा धनिया:** बारीक कटा हुआ, सजावट के लिए

## स्टेप-बाय-स्टेप पकाने की पूरी विधि
**पहला चरण: मंगोड़ी को सुनहरा भूनें**एक कड़ाही अथवा गहरे पैन में थोड़ा सरसों का तेल डालकर मध्यम आंच पर गर्म करें। जब तेल अच्छे से गर्म हो जाए, तब इसमें मूंग दाल की मंगोड़ियां डालें। इन्हें धीमी से मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए तब तक भूनें जब तक इनका रंग हल्का सुनहरा भूरा न हो जाए। ध्यान रखें कि आंच कभी भी बहुत तेज न करें, वरना मंगोड़ी ऊपर से जल जाएगी और भीतर से कच्ची रह जाएगी। भुनने के बाद इन्हें एक प्लेट में निकाल कर अलग रख लें।

**दूसरा चरण: तड़का और मसालों का छौंक**उसी पैन में आवश्यकतानुसार बचा हुआ सरसों का तेल गर्म करें। तेल में जीरा और हींग का तड़का लगाएं। जैसे ही जीरा चटकने लगे, तुरंत आंच धीमी कर दें और उसमें हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर तथा सौंफ पाउडर डालें। सौंफ का पाउडर इस सब्जी को खास मारवाड़ी खुशबू और स्वाद देता है।

**तीसरा चरण: दही का सही इस्तेमाल**मसाले जलने से पहले ही आंच को बिल्कुल धीमा कर लें। अब फेंटे हुए दो चम्मच दही को धीरे-धीरे कड़ाही में डालें। दही डालते समय कड़छी को लगातार चलाते रहना बहुत जरूरी है, ताकि तेज तापमान से दही फटने न पाए। इसे कुछ सेकंड तक लगातार चलाएं जब तक कि मसालों से तेल अलग होता न दिखे।

**चौथा चरण: पानी और नमक का संतुलन**अब भुनी हुई मंगोड़ी को मसालेदार ग्रेवी में डाल दें और अच्छी तरह मिला लें। इसके बाद इसमें 1 से डेढ़ कप पानी डालें और स्वादानुसार नमक मिलाएं। सभी चीजों को एक बार चलाकर कड़ाही को ढक दें।

**पांचवां चरण: धीमी आंच पर पकाना**सब्जी को लगभग 10 से 15 मिनट तक मध्यम से धीमी आंच पर पकने दें। मंगोड़ी जब पानी सोखकर बिल्कुल नरम हो जाए और तरी आपकी पसंद के अनुसार गाढ़ी हो जाए, तब गैस बंद कर दें। यदि पकने के दौरान तरी ज्यादा सूख जाए, तो थोड़ा गर्म पानी मिलाया जा सकता है। अंत में बारीक कटी हरी धनिया पत्ती डालकर गरमा-गरम परोसें।

## इसका आप पर असर
यह पारंपरिक रेसिपी घरेलू बजट संभालने और समय बचाने में बेहद मददगार साबित होती है।

- **रसोई बजट के लिए:** जब बाजार में टमाटर और प्याज के दाम अधिक हों, तब यह बिना टमाटर वाली रेसिपी बेहतरीन विकल्प बनती है। इसमें लगने वाली बुनियादी सामग्री हर घर की रसोई में पहले से मौजूद रहती है।
- **समय की बचत:** ग्रेवी के लिए मसाला पीसने या प्याज-टमाटर काटने में समय बर्बाद नहीं होता। यह सब्जी मात्र 15 से 20 मिनट के भीतर पूरी तरह बनकर तैयार हो जाती है।
- **आपातकालीन भोजन विकल्प:** यदि घर में अचानक ताजी हरी सब्जियां खत्म हो जाएं, तब डिब्बे में रखी सूखी मंगोड़ी से पौष्टिक खाना बनाया जा सकता है। दाल से बनी होने के कारण यह प्रोटीन से भरपूर संतुलित आहार प्रदान करती है।

## ऐसा क्यों हुआ
राजस्थानी खानपान में मंगोड़ी और दही की यह सब्जी भौगोलिक परिस्थितियों और पारंपरिक संरक्षण पद्धतियों के कारण लोकप्रिय हुई।

- **भौगोलिक परिस्थितियां:** राजस्थान के रेगिस्तानी और सूखे इलाकों में ताजी हरी सब्जियों की उपलब्धता हमेशा सीमित रही है। इस कारण दालों से बड़ियां बनाकर उन्हें पूरे साल के लिए सुखाकर संग्रहित करने का रिवाज शुरू हुआ।
- **बिना टमाटर-प्याज की ग्रेवी:** पारंपरिक मारवाड़ी रसोई में खटास और ग्रेवी का आधार बनाने के लिए दही अथवा छाछ का उपयोग किया जाता रहा है। यह तकनीक बिना टमाटर के भी सब्जी को बेहतरीन स्वाद और गाढ़ापन प्रदान करती है।
- **मसालों का संरक्षण:** हींग, जीरा और सौंफ का उपयोग न केवल स्वाद बढ़ाता है बल्कि पाचन क्रिया को भी दुरुस्त रखता है। दाल की बड़ियों को पचाने में सौंफ और हींग बेहद असरदार मानी जाती हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. दही डालते समय ग्रेवी फट क्यों जाती है और इससे कैसे बचें?
तेज आंच पर दही डालने से वह फट सकती है। आंच बिल्कुल धीमी रखें और अच्छी तरह फेंटे हुए दही को डालते समय कड़छी से लगातार चलाते रहें।

### 2. मंगोड़ी को भूनते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
मंगोड़ी को हमेशा धीमी या मध्यम आंच पर ही हल्का सुनहरा होने तक भूनें। तेज आंच पर भूनने से यह ऊपर से जल जाएगी और अंदर से कड़ी रह जाएगी।

### 3. सब्जी को पकने में कितना समय लगता है?
मंगोड़ी को ग्रेवी में पानी के साथ धीमी आंच पर 10 से 15 मिनट तक पकाया जाता है जब तक कि वह पूरी तरह नरम न हो जाए।

### 4. क्या इस रेसिपी में टमाटर या प्याज का इस्तेमाल जरूरी है?
बिल्कुल नहीं, यह पारंपरिक रेसिपी बिना किसी प्याज या टमाटर के सिर्फ दही और बुनियादी मसालों के साथ ही सबसे स्वादिष्ट बनती है।

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