# बिना प्याज-लहसुन के सिर्फ 5 मिनट में बनाएं मधुबनी की खास चना दाल-इमली चटनी

> सर्दियों के मौसम में पराठे और पूरी का स्वाद बढ़ाने के लिए मधुबनी की पारंपरिक चना दाल और इमली की तीखी-खट्टी चटनी बेहद कम सामग्री में झटपट तैयार हो जाती है।

**Type:** article · **Category:** खानपान · **Published:** 2026-11-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/food/bina-pyaja-lahasuna-ke-sirpha-5-minata-men-banaen-madhubani-ki-khasa-chana-dala-imali-chatani-54909 · **Language:** Hindi
**Tags:** मधुबनी चटनी, चना दाल रेसिपी, इमली की चटनी, बिहारी व्यंजन, बिना प्याज लहसुन, चटनी रेसिपी

भोजन की थाली में अगर एक स्वादिष्ट और तीखी चटनी शामिल हो जाए, तो साधारण खाने का स्वाद भी दोगुना हो जाता है। बिहार के मधुबनी क्षेत्र में चना दाल और इमली के अनोखे मेल से एक बेहद जायकेदार चटनी तैयार की जाती है, जो अपने खास खट्टेपन और सौंधे स्वाद के लिए जानी जाती है। इस रेसिपी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें प्याज और लहसुन का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया जाता। केवल 5 मिनट में बनकर तैयार होने वाली यह डिश उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो खट्टा और चटपटा खाना पसंद करते हैं।

## स्वाद का जादू और जरूरी सामग्री
घर आए मेहमानों को परोसने के लिए यह चटनी एक नया और लाजवाब विकल्प साबित होती है। इसे एक बार चखने के बाद लोग इसका स्वाद भूल नहीं पाते और अक्सर इसकी रेसिपी पूछने लगते हैं। चटनी बनाने की सूची बेहद छोटी है और इसमें रसोई में नियमित इस्तेमाल होने वाली चीजें ही लगती हैं। इसे बनाने के लिए मुख्य रूप से इमली और चना दाल की आवश्यकता होती है। इनके अलावा तड़के और फ्लेवर के लिए साबुत जीरा, सूखी लाल मिर्च, स्वादानुसार नमक और अंत में मिलाने के लिए कच्चा सरसों का तेल चाहिए होता है।

## बनाने की आसान और पारंपरिक विधि
मधुबनी की रहने वाली अलका इस पारंपरिक चटनी को तैयार करने का सटीक तरीका साझा करती हैं। सबसे पहले चना दाल को अच्छी तरह साफ कर लें। इसके बाद बिना तेल डाले सूखे तवे पर दाल को धीमी आंच पर तब तक भूनें जब तक कि उसमें से सोंधी खुशबू न आने लगे। दूसरी तरफ इमली को कुछ देर के लिए हल्के गर्म पानी में भिगोकर रख दें ताकि उसका गूदा और पानी आसानी से अलग हो सके। इसके बाद तवे पर जीरा और सूखी लाल मिर्च को भी सूखा ही रोस्ट कर लें।

जब यह सारी सामग्री भुन जाए, तो इन्हें पीसने की तैयारी करें। भुनी हुई चना दाल, भीगी हुई इमली का पानी, भुना जीरा और सूखी लाल मिर्च को मिक्सी के जार में या पारंपरिक सिलबट्टे पर डालें। इसमें स्वादानुसार नमक मिलाएं और थोड़ा पानी डालते हुए महीन पीस लें। जब चटनी अच्छी तरह पिस जाए, तो इसे एक खुले बर्तन में निकाल लें। अब इसमें ऊपर से थोड़ा सा कच्चा तेल डालकर अच्छी तरह मिला दें। कच्चा तेल मिलते ही चटनी का पारंपरिक तीखापन और सौंधापन पूरी तरह निखर कर सामने आ जाता है।

## सर्दियों के खानपान और स्टोरेज के टिप्स
ठंड का मौसम शुरू होते ही इस तरह की चटनियों की मांग घरों में काफी बढ़ जाती है। इसे आप सुबह के नाश्ते में गरमा-गरम पराठे या पूरी के साथ परोस सकते हैं, अथवा दोपहर के भोजन में दाल-चावल के साथ भी इसका आनंद लिया जा सकता है। क्योंकि इस रेसिपी में प्याज और लहसुन का प्रयोग नहीं होता, इसलिए यह जल्दी खराब नहीं होती। सामान्य तापमान पर इसे दो दिनों तक आसानी से खाया जा सकता है। वहीं यदि इसे किसी साफ डिब्बे में बंद करके फ्रिज में रख दिया जाए, तो यह पूरे एक सप्ताह तक एकदम ताजी और खाने योग्य बनी रहती है।

## इसका आप पर असर
रसोई में बिना प्याज और लहसुन के एक बेहद किफायती और झटपट बनने वाली साइड डिश तैयार करने में यह नुस्खा मदद करता है।

- **समय और मेहनत की बचत:** केवल 5 मिनट में तवे पर भूनकर यह चटनी तैयार की जा सकती है। इससे कामकाजी लोगों और सुबह की जल्दीबाजी में नाश्ता बनाने वालों का काफी समय बचता है।
- **किफायती घरेलू सामग्री:** इसमें किसी विदेशी या महंगे मसाले की जरूरत नहीं पड़ती है। रसोई में पहले से मौजूद दाल, जीरा, मिर्च और इमली से ही यह शानदार स्वाद दे देती है।
- **लंबा शेल्फ लाइफ:** बिना प्याज होने के कारण यह जल्दी खट्टी होकर खराब नहीं होती है। आप इसे फ्रिज में रखकर पूरे एक हफ्ते तक विभिन्न भोजन के साथ इस्तेमाल कर सकते हैं।
- **मौसम के अनुकूल खानपान:** सर्दियों में पराठे और पूरी के साथ यह एक बढ़िया विकल्प बनती है। ठंड के दिनों में तला-भुना नाश्ता करने वालों को यह एक नया चटपटा स्वाद देती है।

## ऐसा क्यों हुआ
पारंपरिक बिहारी खानपान में बिना प्याज और लहसुन के लंबे समय तक चलने वाले और सौंधे स्वाद वाले व्यंजनों की पुरानी परंपरा रही है, जिससे यह रेसिपी विकसित हुई।

- **सौंधेपन के लिए ड्राई रोस्टिंग:** चना दाल को बिना तेल के तवे पर भूनने से उसमें मौजूद नमी खत्म हो जाती है और एक खास सौंधी खुशबू पैदा होती है। यह प्रक्रिया चटनी को पानीदार होने से बचाती है और दानेदार गाढ़ापन देती है।
- **इमली का प्राकृतिक प्रिजर्वेटिव गुण:** इमली की उच्च अम्लता और प्याज-लहसुन की अनुपस्थिति सूक्ष्मजीवों के विकास को धीमा कर देती है। यही वजह है कि यह चटनी बिना किसी केमिकल के फ्रिज में एक हफ्ते तक सुरक्षित रहती है।
- **कच्चे तेल का पारंपरिक संयोजन:** उत्तर भारतीय और विशेष रूप से बिहारी व्यंजनों में पिसी हुई चटनी में ऊपर से कच्चा सरसों का तेल मिलाना एक प्रामाणिक शैली है। यह तेल मसालों के तीखेपन को संतुलित करते हुए चटनी को खास तीखा फ्लेवर देता है।

## सवाल-जवाब

### 1. मधुबनी की इस खास चटनी को बनाने में कितना समय लगता है?
इस चटनी को तैयार करने में केवल 5 मिनट का समय लगता है।

### 2. इस रेसिपी में किन-किन मुख्य सामग्रियों की आवश्यकता होती है?
इसके लिए चना दाल, इमली, जीरा, सूखी लाल मिर्च, नमक और कच्चे तेल की आवश्यकता होती है।

### 3. क्या इस चटनी में प्याज या लहसुन का इस्तेमाल किया जाता है?
नहीं, यह रेसिपी पूरी तरह से प्याज और लहसुन के बिना बनाई जाती है।

### 4. चना दाल को पीसने से पहले कैसे तैयार किया जाता है?
चना दाल को साफ करके बिना तेल के तवे पर सौंधी खुशबू आने तक सूखा भुना जाता है।

### 5. इस चटनी को कितने दिनों तक सुरक्षित रखकर खाया जा सकता है?
यह सामान्य रूप से दो दिनों तक और फ्रिज में रखने पर पूरे एक सप्ताह तक सुरक्षित रहती है।

### 6. सर्दियों में इसे किन व्यंजनों के साथ परोसा जा सकता है?
इसे ठंड के दिनों में पराठे, पूरी अथवा दाल-चावल के साथ परोसा जा सकता है।

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