बिना तेल के तंदूर में सिकने वाला मशरूम टिक्का बना शास्त्रीपुरम के लोगों की पहली पसंद शास्त्रीपुरम के आंगन रेस्टोरेंट में तेल के बिना तंदूर में सेंककर तैयार होने वाला मशरूम टिक्का खाने के शौकीनों को खूब लुभा रहा है। पर्यटन नगरी में ताजमहल के दीदार के साथ ही पारंपरिक जायके का स्वाद चखने की परंपरा सदियों पुरानी है, लेकिन अब स्थानीय खान-पान के बाजार में नए प्रयोग भी लोगों को खूब आकर्षित कर रहे हैं। शास्त्रीपुरम क्षेत्र में इन दिनों एक खास व्यंजन की जबरदस्त मांग देखी जा रही है। आमतौर पर तले हुए स्नैक्स के मुकाबले लोग यहां बिना तेल के तैयार होने वाले मशरूम टिक्के का स्वाद लेने पहुंच रहे हैं। कड़ाही के तेल से दूर तंदूर की आंच पर सिकने की वजह से यह व्यंजन उन लोगों के बीच भी काफी लोकप्रिय हो रहा है जो स्वाद के साथ हल्का और सुपाच्य भोजन तलाशते हैं। तैयार करने की अनूठी विधि और मसालों का तालमेल शास्त्रीपुरम स्थित आंगन रेस्टोरेंट के संचालक संतोष कुमार बघेल बताते हैं कि उनके प्रतिष्ठान में यह डिश सबसे ज्यादा बिकने वाले व्यंजनों की सूची में शीर्ष पर है। इसे बनाने की प्रक्रिया काफी व्यवस्थित है। सबसे पहले ताजे मशरूम को पानी में अच्छी तरह उबाला जाता है ताकि उसकी कोमलता बनी रहे। इसके बाद उबले हुए मशरूम पर विशेष मसालों का लेप चढ़ाया जाता है। मसालों में अच्छी तरह लपेटने के बाद इसे सीधे तंदूर की सिखों पर रखकर सेंका जाता है। पूरी प्रक्रिया के दौरान कहीं भी कुकिंग ऑयल या तेल का इस्तेमाल नहीं किया जाता। तंदूर की आंच में सिकने के बाद जब यह पूरी तरह पक जाता है, तब इसे तीखी हरी चटनी के साथ ग्राहकों की मेज पर परोसा जाता है। धुएं की खुशबू और सेहत का ख्याल संतोष कुमार बघेल के अनुसार इस मशरूम टिक्के की सबसे बड़ी खूबी इसका निर्माण का तरीका ही है। जब मसालों से लिपटे मशरूम तंदूर की गर्म मिट्टी और कोयले की आंच के संपर्क में आते हैं, तो उनमें एक खास तरह की प्राकृतिक महक और सौंधापन समा जाता है। जो ग्राहक ज्यादा चिकनाई या भारी खान-पान से परहेज करना चाहते हैं, वे इसे एक बेहतरीन और हल्के विकल्प के रूप में अपना रहे हैं। पारंपरिक तंदूरी शैली में भुने जाने के कारण इसका स्वाद गहरा होता है और मसालों का असर सीधे मशरूम के भीतर तक महसूस होता है। पारिवारिक पसंद और प्लेटों की दर सूची प्रतिष्ठान पर पहुंचने वाले भोजन प्रेमी नियमित रूप से इस व्यंजन की फरमाइश करते हैं। शाम के समय जब लोग अपने परिजनों के साथ बाहर खाने निकलते हैं, तो मेज पर मशरूम टिक्का का ऑर्डर प्रमुखता से शामिल रहता है। पुदीने और धनिए से बनी हरी चटनी के साथ इसका तालमेल ग्राहकों को इतना भाता है कि कई लोग एक बार खाने के बाद दोबारा भी ऑर्डर मंगाते हैं। कीमत की बात करें तो आंगन रेस्टोरेंट में इसे दो पैमानों पर पेश किया गया है। हाफ प्लेट की दर 160 रुपये तय की गई है, जिसमें ग्राहकों को 8 पीस दिए जाते हैं। वहीं बड़े समूह या परिवार के लिए फुल प्लेट का विकल्प है, जिसकी कीमत 250 रुपये रखी गई है और इसमें कुल 16 पीस मशरूम टिक्का परोसे जाते हैं। तंदूर से निकलने वाली लाजवाब खुशबू और संतुलित स्वाद ने शास्त्रीपुरम के इस ठिकाने को शहर के खाने के शौकीनों का पसंदीदा केंद्र बना दिया है। इसका आप पर असर शास्त्रीपुरम में बिना तेल के तंदूरी मशरूम टिक्के का बढ़ता चलन बाहर का खाना पसंद करने वाले स्थानीय निवासियों को एक हल्का और किफायती विकल्प उपलब्ध कराता है। • आगरा में: शास्त्रीपुरम और आसपास के निवासियों को चिकनाई मुक्त शाम के नाश्ते का नया ठिकाना मिल गया है। परिवार के साथ बाहर खाने वाले लोग बिना तले स्नैक्स का आनंद उठा सकते हैं। • कीमत और बजट पर: आधी प्लेट 160 रुपये में 8 पीस और पूरी प्लेट 250 रुपये में 16 पीस रखी गई है। किफायती दर होने से छात्रों और परिवारों के बजट पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता। • खान-पान की आदतों में: भारी तली-भुनी चाट या पकौड़ों के स्थान पर लोग उबले और भुने मशरूम को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह आदत बाहर भोजन करते समय भी गरिष्ठ खाने से बचने में मदद करती है। • रेस्टोरेंट विकल्पों में: पारंपरिक मिठाइयों और स्नैक्स के अलावा अब आधुनिक तंदूरी शाकाहारी व्यंजनों की मांग बढ़ रही है। इससे स्थानीय ढाबों और रेस्टोरेंट्स को स्वास्थ्यवर्धक मेन्यू बनाने की प्रेरणा मिलती है। ऐसा क्यों हुआ शास्त्रीपुरम के आंगन रेस्टोरेंट में मशरूम टिक्के की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे इसकी पारंपरिक तंदूरी शैली और बिना तेल की तैयारी मुख्य वजह है। • बिना तेल पकाने की तकनीक: कड़ाही में तलने के बजाय मशरूम को सीधे तंदूर की आंच पर सेका जाता है। इस विधि से व्यंजन में अतिरिक्त चिकनाई नहीं आती और भोजन हल्का बना रहता है। • उबालने और मसालों का तरीका: मशरूम को पहले पानी में उबाला जाता है और फिर विशेष मसालों के मिश्रण में डुबोया जाता है। इससे मसाले भीतर तक समा जाते हैं और तंदूर में सिकने पर सौंधी महक पैदा होती है। • हल्के स्नैक्स की मांग: शाम के समय बाहर खाने निकलने वाले परिवार और ग्राहक भारी तले व्यंजनों से परहेज करने लगे हैं। हरी चटनी के साथ परोसा जाने वाला यह सूखा स्नैक स्वाद और संतुलन दोनों प्रदान करता है। सवाल-जवाब 1. मशरूम टिक्का किस इलाके में सबसे ज्यादा पसंद किया जा रहा है? यह व्यंजन आगरा के शास्त्रीपुरम इलाके में स्थित आंगन रेस्टोरेंट में ग्राहकों द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है। 2. इस मशरूम टिक्के को बनाने में किस खास विधि का उपयोग होता है? मशरूम को पहले उबाला जाता है, फिर खास मसालों में लपेटकर बिना तेल के तंदूर में सेका जाता है। 3. आंगन रेस्टोरेंट के संचालक कौन हैं? इस रेस्टोरेंट का संचालन संतोष कुमार बघेल कर रहे हैं। 4. हाफ प्लेट मशरूम टिक्के की कीमत और मात्रा कितनी है? हाफ प्लेट की कीमत 160 रुपये है, जिसमें 8 पीस मशरूम टिक्का परोसे जाते हैं। 5. फुल प्लेट मशरूम टिक्का कितने रुपये का मिलता है? फुल प्लेट 250 रुपये में उपलब्ध है, जिसमें कुल 16 पीस दिए जाते हैं। 6. इस टिक्के को किसके साथ परोसा जाता है? तंदूर में तैयार होने के बाद इसे ताजी हरी चटनी के साथ परोसा जाता है। https://trendkia.com/food/bina-tela-ke-tndura-men-sikane-vala-masharuma-tikka-bana-shastripuram-ke-logon-ki-pahali-pasnda-34675 TrendKia — Har trend, sabse pehle.