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  "type": "article",
  "title": "ब्रिक्स के भव्य रात्रिभोज में परोसे गए भारतीय व्यंजन, जानें घर पर तैयार करने का तरीका",
  "summary": "ब्रिक्स सम्मेलन के विशेष गाला डिनर में खांडवी, पनीर लबाबदार, गुच्छी मार्मिक और मिलेट पुलाव जैसे लजीज पकवान परोसे गए। इन पारंपरिक और पौष्टिक भारतीय व्यंजनों को घर पर आसानी से बनाने की पूरी विधि यहां समझें।",
  "content": "अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय खानपान अपनी विविधता और समृद्ध परंपरा के कारण हमेशा चर्चा का केंद्र बनता है। ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान आयोजित विशेष गाला डिनर में पारंपरिक और स्थानीय स्वादों का बेहतरीन संगम देखने को मिला। इस भव्य रात्रिभोज के मेन्यू में गुजरात के प्रसिद्ध नाश्ते से लेकर उत्तर भारत की मखमली ग्रेवी और पौष्टिक मोटे अनाज यानी मिलेट्स से बने व्यंजनों को जगह दी गई। थाली में खांडवी, पनीर लबाबदार, गुच्छी मार्मिक, मिलेट पुलाव, मशरूम गलोटी और कुरकुरी जलेबी जैसे चुनिंदा पकवान शामिल थे। इन खास व्यंजनों की अपनी एक अनूठी तासीर और पकाने की विशेष शैली है। यदि आप भी अंतरराष्ट्रीय मेहमानों को परोसे गए इन लजीज स्वादों को अपने घर की रसोई में चखना चाहते हैं, तो इनकी आसान पाक विधि को चरणबद्ध तरीके से समझ सकते हैं।\n\nगुजराती स्वाद से भरपूर खांडवी\nखांडवी पश्चिमी भारत का एक बेहद लोकप्रिय और हल्का स्नैक है, जो बेसन से तैयार किया जाता है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले बेसन और ताजे दही को तय मात्रा में पानी के साथ मिलाकर एक चिकना और गांठ रहित पतला घोल तैयार किया जाता है। इस घोल में स्वादानुसार नमक और रंगत के लिए थोड़ी हल्दी मिलाई जाती है। इसके बाद इस मिश्रण को धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए पकाया जाता है। करछुल को बिना रोके चलाना जरूरी होता है ताकि तली में गुठलियां न पड़ें। जब यह मिश्रण अच्छी तरह गाढ़ा हो जाए और फैलाने योग्य बन जाए, तब गैस बंद कर दी जाती है। अब किसी चिकनी थाली या समतल प्लेट के पिछले हिस्से पर इस गर्म पेस्ट की पतली परत एकसार फैला दी जाती है। कुछ मिनट ठंडा होने के बाद इसे लंबी पट्टियों में काटकर रोल का आकार दे दिया जाता है। अंत में गरम तेल में राई, हरी मिर्च, करी पत्ता और सफेद तिल का तड़का लगाकर खांडवी के ऊपर डाला जाता है।\n\nउत्तर भारतीय जायके की पहचान पनीर लबाबदार\nपनीर लबाबदार अपनी क्रीमी और मखमली ग्रेवी के लिए जाना जाता है। इसे तैयार करने के लिए सबसे पहले ताजे पनीर के चौकोर टुकड़ों को तवे पर हल्का सा भूनकर अलग रख लिया जाता है। इसके बाद एक पैन में तेल अथवा देसी घी गरम करके उसमें बारीक कटे प्याज, अदरक, लहसुन और लाल टमाटर को नरम होने तक पकाया जाता है। जब यह मसाला भुन जाए, तो ठंडा करके मिक्सी में पीसकर एक चिकनी प्यूरी तैयार कर ली जाती है। अब उसी पैन में प्यूरी को वापस डालकर हल्दी, धनिया, लाल मिर्च और गरम मसाले के साथ भूना जाता है। मसाले से तेल अलग होने पर इसमें थोड़ी ताजी क्रीम या मलाई मिलाई जाती है, जिससे ग्रेवी में रिच टेक्सचर आता है। आखिर में हल्के भुने पनीर के टुकड़े ग्रेवी में डाले जाते हैं और धीमी आंच पर कुछ मिनट पकाया जाता है। चूल्हा बंद करने से पहले ऊपर से हाथों से मसलकर कसूरी मेथी डालने से इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है।\n\nहिमालयी जंगली मशरूम से तैयार गुच्छी मार्मिक\nगुच्छी दरअसल हिमालय के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाला दुर्लभ जंगली मशरूम है, जिसे अपने खास मिट्टी जैसे स्वाद और औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। गुच्छी मार्मिक बनाने के लिए सबसे पहले सूखे हुए गुच्छी मशरूम को गुनगुने पानी में कई बार अच्छी तरह धोकर साफ किया जाता है ताकि भीतर की मिट्टी पूरी तरह निकल जाए। इसके बाद इसे कुछ देर पानी में भिगोकर रखा जाता है। जब मशरूम नरम हो जाएं, तब एक भारी तले वाले बर्तन में प्याज, अदरक, लहसुन का पेस्ट और संतुलित खड़े मसालों को अच्छी तरह भूना जाता है। भुने हुए मसाले में साफ की गई गुच्छी मिलाई जाती है और आवश्यकतानुसार पानी डालकर ढक्कन लगा दिया जाता है। इसे धीमी आंच पर धीरे-धीरे पकाया जाता है ताकि मशरूम पूरी तरह गलकर नरम हो जाए और मसालों का गहरा स्वाद उसके रेशों में समा जाए।\n\nपौष्टिक और संतुलित मिलेट पुलाव\nमोटे अनाज को आधुनिक खानपान में मुख्यधारा का हिस्सा बनाने के क्रम में मिलेट पुलाव एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है। इसे बनाने के लिए अपनी पसंद के किसी भी मिलेट को साफ पानी से दो से तीन बार धोकर कुछ देर के लिए भिगो दिया जाता है। एक कड़ाही या पुलाव के बर्तन में देसी घी गरम करके उसमें जीरा, तेजपत्ता और दालचीनी जैसे साबुत खड़े मसाले तड़काए जाते हैं। इसके तुरंत बाद गाजर, मटर, बीन्स जैसी मौसमी सब्जियां डालकर मध्यम आंच पर हल्की भून ली जाती हैं। जब सब्जियां आधी पक जाएं, तब भीगा हुआ मिलेट और नाप के अनुसार पानी डालकर बर्तन को ढक दिया जाता है। धीमी आंच पर पानी सूखने और मिलेट के दाने खिलने तक इसे दम पर पकाया जाता है। पकने के बाद ताजे हरे धनिए की पत्तियों से सजाकर इसे गरमा-गरम परोसा जाता है।\n\nमुलायम मशरूम गलोटी कबाब\nमुगलई अंदाज के कबाबों में शाकाहारी प्रयोग के तौर पर मशरूम गलोटी बेहद मशहूर है, जो मुंह में रखते ही घुल जाता है। इसे तैयार करने के लिए मशरूम को बहुत बारीक काट लिया जाता है या फिर दरदरा पीस लिया जाता है। इसके बाद बाइंडिंग के लिए उबली हुई दाल अथवा अन्य सुपाच्य सामग्री को मशरूम के साथ मिलाया जाता है। इस मिश्रण में पिसा हुआ अदरक, लहसुन, भुने मसालों का पाउडर और नमक डालकर अच्छी तरह गूंथ लिया जाता है। तैयार मिश्रण से हथेलियों पर छोटी-छोटी चपटी टिक्कियां बनाई जाती हैं। अब एक चौड़े तवे पर बहुत कम तेल या घी लगाकर इन टिक्कियों को रखा जाता है। धीमी और मध्यम आंच पर उलट-पुलट कर दोनों तरफ से गहरा सुनहरा और कुरकुरा होने तक इन्हें सेंका जाता है।\n\nपारंपरिक मिठास के साथ कुरकुरी जलेबी\nभारतीय दावत का समापन बिना पारंपरिक मीठे के अधूरा माना जाता है, और इसके लिए गरमा-गरम जलेबी को चुना गया। जलेबी बनाने के लिए मैदे में पानी मिलाकर एक गाढ़ा लेकिन आसानी से बहने वाला घोल तैयार किया जाता है। घोल को कुछ समय के लिए ढककर रख दिया जाता है ताकि उसमें हल्का खमीर उठ सके। इसके बाद मिश्रण को एक महीन सूती कपड़े में छेद करके या फिर आधुनिक पाइपिंग बैग में भर लिया जाता है। कड़ाही में तेल गरम करके कपड़े या बैग को गोल-गोल घुमाते हुए जलेबी के छल्ले सीधे तेल में गिराए जाते हैं। इन्हें मध्यम आंच पर सुनहरा और पूरी तरह कुरकुरा होने तक तला जाता है। तेल से निकालते ही तुरंत इन्हें पहले से तैयार की गई एक तार की चाशनी में डुबो दिया जाता है। कुछ सेकंड चाशनी सोखने के बाद जलेबियों को बाहर निकालकर प्लेट में परोसा जाता है।\n\nइसका आप पर असर\nअंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारतीय पकवानों की मौजूदगी से पारंपरिक और मोटे अनाज वाले व्यंजनों के प्रति घरेलू स्तर पर जागरूकता बढ़ती है।\n\n• खानपान के शौकीनों के लिए: आप इन शाही व्यंजनों को आम घरेलू सामग्रियों की मदद से अपनी रसोई में तैयार कर सकते हैं। आसान विधियों को अपनाकर परिवार और मेहमानों को फाइव-स्टार स्तर का स्वाद परोसा जा सकता है।\n• सेहत के स्तर पर: मिलेट्स और मशरूम जैसे विकल्पों को नियमित थाली में शामिल करने से पोषण की मात्रा बढ़ती है। यह खानपान कम तेल और स्वास्थ्यवर्धक सामग्री के संतुलन को बढ़ावा देता है।\n• स्थानीय सामग्रियों की मांग: गुच्छी जैसे दुर्लभ पहाड़ी उत्पादों और मिलेट्स को वैश्विक मंच मिलने से किसानों को सीधा संबल मिलता है। इससे क्षेत्रीय उपज की घरेलू बाजारों में उपलब्धता और मांग में सुधार देखने को मिलता है।\n• पारंपरिक तकनीकों का प्रसार: खांडवी और जलेबी जैसी डिशेज से नई पीढ़ी को पारंपरिक खाना पकाने के तौर-तरीकों की सीख मिलती है। सही माप और तापमान का अभ्यास करके कोई भी इन्हें घर पर आसानी से बना सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nब्रिक्स गाला डिनर के मेन्यू को भारत की समृद्ध भौगोलिक विविधता और पारंपरिक पाक शैलियों के प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था।\n\n• सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन: अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आयोजित भोज का उद्देश्य देश के अलग-अलग कोनों के प्रसिद्ध स्वादों को एक साथ प्रस्तुत करना होता है। इसमें पश्चिम की खांडवी से लेकर उत्तर भारत के शाही पनीर और अवधी कबाब को जगह दी गई।\n• मिलेट्स और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा: भारत मोटे अनाज और पारंपरिक प्राकृतिक उपज को वैश्विक खाद्य सुरक्षा और पोषण के रूप में आगे बढ़ा रहा है। मिलेट पुलाव और हिमालयी गुच्छी को मेन्यू में शामिल करना इसी रणनीति का प्रत्यक्ष उदाहरण है।\n• शाकाहारी विविधता का सम्मान: भारतीय शाकाहारी भोजन के विस्तृत फलक को वैश्विक अतिथियों के समक्ष प्रभावशाली रूप से पेश करने की योजना बनाई गई। विभिन्न दालों, सब्जियों, अनाजों और पनीर के सामंजस्य से एक संपूर्ण संतुलित भोजन तैयार हुआ।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ब्रिक्स गाला डिनर में कौन-कौन से व्यंजन शामिल किए गए थे?\nइस मेन्यू में खांडवी, पनीर लबाबदार, गुच्छी मार्मिक, मिलेट पुलाव, मशरूम गलोटी और जलेबी जैसे व्यंजन शामिल थे।\n\n2. खांडवी बनाने के लिए मुख्य सामग्री क्या होती है?\nखांडवी को मुख्य रूप से बेसन, दही और पानी के घोल में नमक व हल्दी मिलाकर धीमी आंच पर पकाकर बनाया जाता है।\n\n3. गुच्छी मार्मिक में इस्तेमाल होने वाली गुच्छी क्या है?\nगुच्छी एक दुर्लभ जंगली मशरूम है जो हिमालयी जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगता है और अपने अनूठे स्वाद के लिए जाना जाता है।\n\n4. मशरूम गलोटी कबाब का टेक्सचर कैसा होता है?\nमशरूम गलोटी कबाब बेहद मुलायम होते हैं और इन्हें बारीक मशरूम व उबली दाल के मिश्रण से तवे पर कम तेल में सेका जाता है।\n\n5. मिलेट पुलाव को कैसे तैयार किया जाता है?\nमिलेट को धोकर भिगोने के बाद घी, खड़े मसालों और मौसमी सब्जियों के साथ धीमी आंच पर ढककर पकाया जाता है।\n\n6. जलेबी को कुरकुरा और मीठा कैसे बनाया जाता है?\nमैदे के घोल को गर्म तेल में गोल छल्लों में कुरकुरा होने तक तला जाता है और फिर तुरंत चाशनी में डुबोया जाता है।",
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  "category": "खानपान",
  "publishedAt": "2026-09-19",
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