बुरहानपुर के बाजारों में पहुंचा शेरनी फल, चोली के दानों संग तैयार करें पारंपरिक खट्टी-मीठी सब्जी बरसात शुरू होते ही निमाड़ के बुरहानपुर में मौसमी शेरनी फल की मांग बढ़ गई है, जिसे चोली के दानों के साथ पकाकर पारंपरिक और टिकाऊ सब्जी बनाई जाती है। बरसात की शुरुआत होते ही निमाड़ अंचल के बुरहानपुर जिले में दैनिक खान-पान की रंगत पूरी तरह बदल जाती है। मानसूनी फुहारों के बीच स्थानीय मंडियों और हाट-बाजारों में कई दुर्लभ मौसमी खाद्य सामग्रियां दस्तक देने लगती हैं। इन्हीं खास चीजों में शेरनी फल शामिल है, जो इस इलाके की अनूठी पहचान माना जाता है। स्थानीय नागरिक इसे केवल ताजे मौसमी फल की तरह काटकर ही नहीं खाते, बल्कि घरों में इसकी विशेष पारंपरिक सब्जी भी तैयार की जाती है। अपने तीखे, खट्टे और हल्के मीठे जायके के लिए मशहूर यह व्यंजन निमाड़ी पाक शैली का एक प्रमुख हिस्सा है। चोली के दानों के साथ बेजोड़ मेल शेरनी फल की सब्जी की सबसे बड़ी खासियत इसका विशेष संयोजन है। इसे पकाने के लिए चोली के दानों का उपयोग मुख्य रूप से किया जाता है। फुला बाई के अनुसार, फल का प्राकृतिक खट्टा-मीठा स्वाद जब चोली के दानों के साथ घुलता है, तो यह व्यंजन को एक अलग ही गहराई और समृद्ध स्वाद देता है। इसी लजीज स्वाद की वजह से बारिश के दिनों में यह फल मंडियों में आते ही तुरंत बिक जाता है। घर के बड़े-बुजुर्गों से लेकर बच्चे तक इस व्यंजन को चाव से खाते हैं। इसके अलावा, इस सब्जी का एक व्यावहारिक गुण यह भी है कि तैयार होने के बाद इसे लगभग दो दिन तक सुरक्षित रखा जा सकता है, जिससे इसका स्वाद खराब नहीं होता। सब्जी के लिए जरूरी बुनियादी सामग्री इस देहाती और पारंपरिक व्यंजन को बनाने के लिए किसी जटिल मसाले की आवश्यकता नहीं पड़ती। रसोई में रोजाना काम आने वाली साधारण चीजों से ही इसे झटपट तैयार किया जा सकता है। इस विधि के लिए प्रमुख रूप से ताजे शेरनी फल, चोली के दाने, राई, जीरा, प्याज, अदरक-लहसुन का पेस्ट, स्वादानुसार नमक और खाना पकाने का तेल चाहिए होता है। बनाने की आसान और पारंपरिक विधि सब्जी पकाने की शुरुआत शेरनी फल को पानी से अच्छी तरह धोकर साफ करने और टुकड़ों में काटने से होती है। इसके बाद एक कड़ाही में तेल डालकर गर्म किया जाता है। गर्म तेल में राई और जीरे का छौंक लगाया जाता है। जब मसाले चटकने लगें, तब इसमें बारीक कटा प्याज शामिल किया जाता है। प्याज को हल्का भूनने के बाद अदरक-लहसुन का पेस्ट डालकर मसाले को अच्छी खुशबू आने तक पकाया जाता है। मसाला भुन जाने के बाद कड़ाही में चोली के दाने और कटे हुए शेरनी फल के टुकड़े डाले जाते हैं। इसके साथ ही आवश्यकतानुसार नमक मिलाकर सभी सामग्रियों को करछी से अच्छी तरह मिला दिया जाता है। धीमी आंच पर ढककर इसे तब तक पकने दिया जाता है जब तक कि फल के टुकड़े और चोली के दाने पूरी तरह नरम न हो जाएं। अच्छी तरह पकने के बाद तैयार सब्जी को गर्मागर्म परोसा जा सकता है। इसका आप पर असर इस मौसमी फल और पारंपरिक रेसिपी से स्थानीय लोगों की रसोई और खान-पान में सीधा बदलाव आता है। • बुरहानपुर में: स्थानीय बाजारों में बारिश के दौरान शेरनी फल की उपलब्धता बढ़ने से निमाड़ी परिवारों को मौसमी सब्जी का ताजा विकल्प मिलता है। इस फल की खरीदारी से स्थानीय उत्पाद बेचने वाले छोटे व्यापारियों और किसानों को भी आमदनी होती है। • भारत में: देश के अन्य हिस्सों के खान-पान प्रेमियों को क्षेत्रीय और पारंपरिक भारतीय पाक कला की समृद्ध विविधता को समझने का मौका मिलता है। कम खर्च में स्थानीय उपज से बनने वाले ऐसे पौष्टिक व्यंजन अन्य क्षेत्रों की घरेलू रसोई में भी विविधता लाते हैं। • घरेलू बचत: इस व्यंजन को बनाने के लिए केवल घर में मौजूद साधारण मसालों की आवश्यकता होती है। महंगी विदेशी सब्जियों के बजाय कम लागत में पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन तैयार किया जा सकता है। • शेल्फ लाइफ का फायदा: यह सब्जी पकने के बाद करीब दो दिन तक खराब नहीं होती। बारिश के मौसम में बार-बार खाना पकाने के झंझट से राहत चाहने वाले परिवारों के लिए यह सुविधाजनक साबित होती है। ऐसा क्यों हुआ बरसात के मौसम में निमाड़ के बुरहानपुर में शेरनी फल की सब्जी बनने के पीछे विशिष्ट मौसमी और स्थानीय परिस्थितियां हैं। • मौसमी उपलब्धता: बारिश शुरू होने पर ही शेरनी फल जंगलों और ग्रामीण इलाकों में प्राकृतिक रूप से पककर स्थानीय बाजारों में पहुंचता है। साल के अन्य महीनों में यह फल बाजार में उपलब्ध नहीं होता। • पारंपरिक पाक संस्कृति: निमाड़ अंचल में पीढ़ियों से मौसमी फल-सब्जियों और दालों के बीजों को मिलाकर पकाने का पुराना चलन रहा है। स्थानीय लोग इस खट्टे-मीठे स्वाद को अपनी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा मानते हैं। • लंबे समय तक टिकने की प्रकृति: इस सब्जी की संरचना ऐसी होती है कि यह बनने के बाद दो दिन तक खराब नहीं होती। इसी टिकाऊपन के कारण स्थानीय निवासी बारिश के मौसम में इसे खास प्राथमिकता देते हैं। सवाल-जवाब 1. शेरनी फल मुख्य रूप से किस मौसम में बाजार में आता है? शेरनी फल बारिश के मौसम में निमाड़ के बुरहानपुर की मंडियों में बिक्री के लिए उपलब्ध होता है। 2. शेरनी फल की सब्जी में मुख्य रूप से क्या मिलाया जाता है? इस सब्जी को खास तौर पर चोली के दानों और साधारण खड़े मसालों के साथ मिलाकर पकाया जाता है। 3. इस पारंपरिक सब्जी का स्वाद कैसा होता है? फल और चोली के दानों के मिश्रण की वजह से इस सब्जी का स्वाद हल्का खट्टा-मीठा होता है। 4. पकाने के बाद यह सब्जी कितने दिनों तक सुरक्षित रह सकती है? तैयार होने के बाद यह पारंपरिक सब्जी करीब दो दिन तक बिना खराब हुए रखी जा सकती है। https://trendkia.com/food/burhanpur-ke-bajaron-men-pahuncha-sherni-phala-choli-ke-danon-snga-taiyara-karen-parnparika-khatti-mithi-sabji-42159 TrendKia — Har trend, sabse pehle.