शाम की चाय के साथ परोसें कुरकुरा चना कोलीवाड़ा, घर पर आसानी से बनाएं यह स्ट्रीट स्टाइल स्नैक काबुली चने, बेसन और कॉर्नफ्लोर के चटपटे लेप से घर पर ही तैयार करें बेहद क्रिस्पी चना कोलीवाड़ा। तलते वक्त लहसुन और हरी मिर्च का तड़का इसके स्वाद को और भी लाजवाब बना देता है। दिन ढलते ही अक्सर गरमागरम चाय के साथ कुछ तीखा और कुरकुरा खाने की तलब होने लगती है। ऐसी स्थिति में किचन में मौजूद सफेद काबुली चने एक बेहतरीन नाश्ता तैयार करने के काम आ सकते हैं। लोग आमतौर पर इन चनों से सब्जी, चाट या सादा सलाद बनाना ही पसंद करते हैं, लेकिन अगर इन पर मसालों और आटे का एक खास लेप चढ़ाकर डीप फ्राई किया जाए, तो यह बाजार जैसा चटपटा चना कोलीवाड़ा बन जाता है। इस स्वादिष्ट नाश्ते को घर की रसोई में बहुत ही कम मशक्कत के साथ तैयार किया जा सकता है। इस व्यंजन की खासियत यह है कि इसमें उबले हुए चनों को तीखे मसालों, बेसन और कॉर्नफ्लोर के गाढ़े घोल में अच्छी तरह लपेटा जाता है। जब इन्हें खौलते तेल में तला जाता है, तो बाहरी परत बेहद खस्ता हो जाती है। ऊपर से तेल में तली हुई साबुत लहसुन की कलियां और कटी हुई हरी मिर्च मिलाकर जब इसे पेश किया जाता है, तो इसका जायका कई गुना बढ़ जाता है। चनों को सही तरीके से उबालने की प्रक्रिया इस व्यंजन को स्वादिष्ट बनाने का सबसे अहम चरण काबुली चनों की तैयारी से जुड़ा है। सबसे पहले चनों को साफ पानी से दो-तीन बार धो लें और फिर लगभग 6 से 8 घंटे अथवा पूरी रात के लिए पर्याप्त पानी में भिगोकर रख दें। जब चने अच्छी तरह फूल जाएं, तो उनका पुराना पानी फेंक दें और उन्हें प्रेशर कुकर में पलट दें। अब कुकर में थोड़ा ताजा पानी और अपनी पसंद के मुताबिक नमक डालकर ढक्कन बंद करें। गैस पर कुकर चढ़ाकर केवल 2 से 3 सीटी आने तक ही इन्हें पकाना चाहिए। ध्यान रखें कि चनों को सिर्फ इतना ही नरम करना है कि वे दब सकें, उन्हें पूरी तरह मैश या हलवा नहीं बनने देना है। यदि चने बहुत ज्यादा गल जाएंगे, तो कड़ाही में तलने के दौरान उनका रूप बिगड़ जाएगा और वे कुरकुरे होने के बजाय बिखरने लगेंगे। उबालने के फौरन बाद चनों को किसी छलनी में छान लें ताकि सारा पानी निकल जाए, फिर उन्हें पंखे के नीचे या खुली हवा में पूरी तरह ठंडा होने दें। मसालों का चटपटा मिश्रण तैयार करना अब एक बड़ा और गहरा कटोरा लें, जिसमें चनों को आसानी से मिलाया जा सके। इस कटोरे में सबसे पहले 20 मिलीलीटर सरसों का तेल डालें। सरसों के तेल में पारंपरिक खुशबू और तीखापन होता है, जो कोलीवाड़ा के स्वाद को निखारता है। इसके बाद तेल में एक तिहाई छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, आधा छोटा चम्मच धनिया पाउडर, आधा छोटा चम्मच जीरा पाउडर और 2 छोटे चम्मच तीखी लाल मिर्च का पाउडर मिलाएं। तीखेपन और ताजगी के लिए इस मिश्रण में 1 बड़ा चम्मच अदरक, लहसुन और हरी मिर्च का ताजा कुटा हुआ पेस्ट शामिल करें। साथ ही स्वाद के अनुसार नमक भी मिला लें। इन तमाम सामग्रियों को चम्मच से तब तक फेंटें जब तक कि तेल और पिसे हुए मसाले एकसार न दिखने लगें। मिर्च और नमक की मात्रा को हर कोई अपनी पसंद के हिसाब से घटा या बढ़ा सकता है। बेसन और कॉर्नफ्लोर का सटीक अनुपात मसालों के तैयार बेस में कुरकुरी बनावट देने के लिए 60 ग्राम कॉर्नफ्लोर और 30 ग्राम बेसन डालें। कॉर्नफ्लोर तलने के बाद बाहरी खोल को कड़क और कुरकुरा बनाता है, जबकि बेसन चनों के ऊपर मसालों की मजबूत पकड़ बनाए रखने में मदद करता है। अब इसमें बिल्कुल थोड़ा-थोड़ा करके पानी डालें और एक गाढ़ा, चिपचिपा घोल तैयार करें। यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि यह पेस्ट पतला या बहने वाला न बने। इसका उद्देश्य चनों के हर एक दाने पर एक मोटी और एकसमान परत चढ़ाना है। जब पेस्ट सही गाढ़ापन पकड़ ले, तब इसमें पूरी तरह ठंडे और सूखे हुए काबुली चने डाल दें। हाथों की सहायता से या चम्मच से चनों को हल्के हाथों से तब तक चलाएं जब तक कि हर चने पर मसालेदार कोटिंग बराबर रूप से न चढ़ जाए। अगर उबले चनों में जरा भी नमी या पानी बचा रह गया, तो यह लेप छूटकर अलग हो जाएगा, इसलिए चनों का सूखा होना अनिवार्य है। मध्यम आंच पर तलने का सही तरीका गैस पर एक गहरी कड़ाही चढ़ाएं और उसमें तलने के लिए पर्याप्त मात्रा में तेल गरम करें। जब तेल अच्छी तरह गरम हो जाए, तो मसाले में लिपटे चनों को थोड़े-थोड़े अंतराल पर कड़ाही में छोड़ें। एक साथ बहुत सारे चने तेल में उड़ेलने की गलती न करें, क्योंकि ऐसा करने से तेल का तापमान अचानक गिर जाता है और चने तेल सोखकर सौगी हो जाते हैं। चनों को मध्यम से तेज आंच पर तब तक तलें जब तक वे सुनहरे और बेहद क्रिस्पी न हो जाएं। चनों को कड़ाही में डालते ही तुरंत करछी या झारे से हिलाना शुरू न करें। पहले कुछ सेकंड तक कोटिंग को तेल की गरमाहट में जमने और सेट होने दें। इसके बाद ही हल्के हाथ से पलटते हुए सेकें, जिससे बाहरी आवरण टूटने से बच जाए। चनों के साथ ही छिलके वाली साबुत लहसुन की कलियां और साबुत हरी मिर्चें भी तेल में डालकर हल्की कुरकुरी होने तक तल लें और फिर उन्हें अलग प्लेट में निकाल लें। गरमागरम परोसने की विधि जब चने पूरी तरह से सुनहरे भूरे और खस्ता हो जाएं, तो झारे से अतिरिक्त तेल निथारते हुए उन्हें बाहर निकाल लें। इन्हें एक साफ टिशू पेपर या कटोरे में रखें। अंत में इनके ऊपर पहले से तली हुई लहसुन की कलियां और कटी हुई तली हरी मिर्चें सजाकर चाय के साथ तुरंत पेश करें। इसका आप पर असर इस आसान और किफायती रेसिपी से शाम के नाश्ते में घर के सामान्य सामान से रेस्टोरेंट जैसा कुरकुरा स्वाद पाया जा सकता है। • किफायत और स्वास्थ्य: बाहर के अस्वच्छ तेल में तले स्ट्रीट फूड के मुकाबले घर पर बने काबुली चने का यह स्नैक बेहद सस्ता और स्वच्छ विकल्प है। इसमें इस्तेमाल होने वाले बुनियादी मसाले और चने हर रसोई में आसानी से उपलब्ध रहते हैं। • समय की योजना: चनों को रात भर या 6 से 8 घंटे पहले भिगोकर रखने से शाम के समय केवल 15 से 20 मिनट में पूरा नाश्ता तैयार किया जा सकता है। यह कामकाजी लोगों के लिए समय बचाने वाला विकल्प साबित होता है। • स्वाद में विविधता: सामान्य उबले चने या छोले खाकर बोर हो चुके लोगों के लिए यह एक अनोखा और कुरकुरा विकल्प बन जाता है। इसे बच्चों और मेहमानों दोनों के सामने चाय के साथ तुरंत पेश किया जा सकता है। • कुकिंग कौशल में सुधार: तलने के सही तापमान और घोल के सटीक अनुपात को समझकर कोई भी घरेलू शेफ किसी भी स्नैक को बिना सौगी बनाए परफेक्ट क्रिस्पी बना सकता है। यह तकनीक अन्य पकोड़ों में भी काम आती है। ऐसा क्यों हुआ चना कोलीवाड़ा की बनावट और स्वाद को बनाए रखने के लिए चनों को उबालने और तलने की वैज्ञानिक पद्धति का पालन करना जरूरी होता है। • सीमित सीटी लगाने का कारण: चनों को केवल 2 से 3 सीटी तक इसलिए पकाया जाता है ताकि वे अंदर से नरम रहें लेकिन उनकी बाहरी बनावट साबुत रहे। अधिक उबलने पर तलते समय दाने फट जाते हैं और सारा मसाला तेल में बिखर जाता है। • आटे का सटीक अनुपात: 60 ग्राम कॉर्नफ्लोर और 30 ग्राम बेसन का मेल इसलिए जरूरी है क्योंकि कॉर्नफ्लोर कड़क क्रंच देता है और बेसन लेप को चने पर चिपकाए रखता है। किसी एक की कमी से कोटिंग या तो नरम पड़ जाती है या छूट जाती है। • पानी पूरी तरह निकालने की वजह: उबले चनों को तलने से पहले पूरी तरह सुखाना इसलिए जरूरी है क्योंकि अतिरिक्त नमी मसाले के लेप को ढीला कर देती है। सूखी सतह पर ही गाढ़ा घोल समान रूप से चिपक पाता है। सवाल-जवाब 1. चना कोलीवाड़ा के लिए चनों को कितनी देर भिगोना चाहिए? काबुली चनों को पकाने से पहले कम से कम 6 से 8 घंटे या पूरी रात पानी में भिगोकर रखना चाहिए। 2. चनों को कुकर में कितनी सीटी तक पकाना चाहिए? चनों को केवल 2 से 3 सीटी आने तक पकाना चाहिए ताकि वे नरम तो हों लेकिन पूरी तरह गलें नहीं। 3. कोटिंग के लिए कॉर्नफ्लोर और बेसन की क्या मात्रा चाहिए? कुरकुरी परत तैयार करने के लिए 60 ग्राम कॉर्नफ्लोर और 30 ग्राम बेसन का उपयोग किया जाता है। 4. मसाले के घोल में कौन सा तेल इस्तेमाल किया जाता है? मसाले का पेस्ट तैयार करने के लिए 20 मिलीलीटर सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जाता है। 5. तलते समय कोटिंग को टूटने से कैसे बचाएं? चनों को तेल में डालने के तुरंत बाद न चलाएं और कोटिंग को कुछ सेकंड जमने के बाद ही हल्के हाथ से पलटें। https://trendkia.com/food/chana-koliwada-recipe-ghara-para-asani-se-banaen-yaha-strita-staila-snaika-42448 TrendKia — Har trend, sabse pehle.