# छतरपुर के मूंग दाल लड्डू का है हर तरफ जलवा, जानिए परफेक्ट रेसिपी और सही माप

> मध्य प्रदेश के छतरपुर में मूंग दाल के स्वादिष्ट और सेहतमंद लड्डूओं की भारी डिमांड रहती है। बब्बी चौरसिया की बताई गई इस खास विधि से आप भी घर पर आसानी से बाजार जैसे लड्डू तैयार कर सकते हैं।

**Type:** article · **Category:** खानपान · **Published:** 2026-08-31 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/food/chhatarapura-ke-munga-dala-laddu-ka-hai-hara-tarapha-jalava-janie-paraphekta-resipi-aura-sahi-mapa-24948 · **Language:** Hindi
**Tags:** मूंग दाल लड्डू, छतरपुर रेसिपी, पारंपरिक मिठाई, जन्माष्टमी विशेष, स्वीट रेसिपी, देसी घी मिठाई

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में मूंग दाल से बनने वाले लड्डू अपनी खास पहचान रखते हैं और इन्हें स्थानीय स्तर पर बेहद पसंद किया जाता है। सभी प्रकार की मिठाइयों में इन्हें सबसे ज्यादा स्वादिष्ट और सेहत के लिहाज से फायदेमंद माना जाता है, यही वजह है कि इनकी मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है। इन पौष्टिक लड्डुओं को घर पर भी बहुत आसानी से तैयार किया जा सकता है। पिछले 20 सालों से हलवाई का काम कर रहे बब्बी चौरसिया बताते हैं कि इस मिठाई को बनाने के लिए मुख्य रूप से मूंग दाल, शुद्ध देसी घी, इलायची पाउडर, सूखे मेवे और चीनी की आवश्यकता होती है।

## लड्डू बनाने की पूरी प्रक्रिया
सबसे पहले मूंग दाल को साफ पानी से अच्छी तरह धोकर किसी साफ सूती कपड़े से पोंछ लें ताकि उसका सारा पानी सूख जाए और उसमें बिल्कुल भी नमी न रहे। इसके बाद एक कड़ाही में दाल को बिना किसी घी के धीमी आंच पर पांच से सात मिनट तक भूनें जब तक कि वह हल्की सुनहरी न हो जाए और उससे सोंधी खुशबू आने लगे। इस भुनी हुई दाल को प्लेट में निकालकर पूरी तरह ठंडा होने दें और उसके बाद मिक्सी में पीसकर सूजी की तरह हल्का दरदरा मिश्रण तैयार कर लें। अब कड़ाही में एक चम्मच देसी घी गर्म करके कटे हुए बादाम और काजू को हल्का सा फ्राई कर लें। इसके बाद पीसी हुई मूंग दाल को कड़ाही में बचे हुए घी में डालें और दो से तीन चम्मच घी और मिलाकर धीमी आंच पर दो से तीन मिनट तक और भूनें। अंत में इसमें इलायची पाउडर, तले हुए मेवे और बचा हुआ एक चम्मच घी मिला लें। जब यह मिश्रण हल्का गुनगुना रह जाए, तब हाथों से दबाव देते हुए इसके गोल और नरम लड्डू बांध लें।

## सामग्री का सही अनुपात और त्योहारों का महत्व
बब्बी चौरसिया का कहना है कि स्वादिष्ट लड्डू तैयार करने के लिए सामग्री का सही अनुपात होना बहुत जरूरी है। इस रेसिपी में चीनी की मात्रा का विशेष ध्यान रखना पड़ता है क्योंकि इसमें चीनी कम ही डाली जाती है। एक किलो मूंग दाल के लिए केवल 200 ग्राम चीनी का ही इस्तेमाल किया जाता है, और घी की मात्रा भी संतुलित रखी जाती है। अगर आप इसी माप और तरीके से इन्हें बनाते हैं, तो आपके मूंग दाल के मलाई लड्डू बेहद स्वादिष्ट बनेंगे। छतरपुर में जन्माष्टमी और हरतालिका तीज जैसे बड़े त्योहारों के दौरान यह मिठाई हर घर की शान होती है। लोग इसे सुबह के नाश्ते के रूप में भी बहुत चाव से खाते हैं। पारंपरिक रूप से बनने वाली इस मिठाई की बाजार में कीमत करीब 400 रुपये प्रति किलो है।

## इसका आप पर असर
घर पर पारंपरिक तरीके से मूंग दाल के लड्डू बनाने से आप बाजार की मिलावट से बचकर शुद्ध और पौष्टिक मिठाई का आनंद ले सकते हैं।

- **भारत में:** त्योहारों के सीजन में पारंपरिक मिठाइयां बनाने से खानपान की संस्कृति जीवित रहती है और स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं।
- **छतरपुर में:** स्थानीय निवासियों और मिठाई प्रेमियों को जन्माष्टमी तथा हरतालिका तीज के मौके पर बाजार में करीब 400 रुपये प्रति किलो मिलने वाली यह मिठाई घर पर किफायती दाम में तैयार करने का विकल्प मिलता है।

## सवाल-जवाब

### 1. मूंग दाल के लड्डू बनाने के लिए मुख्य सामग्री क्या चाहिए?
इसके लिए मूंग दाल, देसी घी, इलायची पाउडर, सूखे मेवे और चीनी की जरूरत होती है।

### 2. एक किलो मूंग दाल में कितनी चीनी डाली जाती है?
एक किलो मूंग दाल के मिश्रण में केवल 200 ग्राम चीनी डाली जाती है।

### 3. दिसंबर या सामान्य दिनों में बाजार में इसकी क्या कीमत होती है?
बाजार की मिठाई की दुकानों पर यह लड्डू करीब 400 रुपये प्रति किलो की कीमत पर मिलते हैं।

### 4. इसे किन प्रमुख त्योहारों पर मुख्य रूप से खाया जाता है?
छतरपुर में जन्माष्टमी और हरतालिका तीज के त्योहारों पर यह घर-घर में बनाए और खाए जाते हैं।

### 5. दाल को पीसने से पहले क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है?
धोने के बाद दाल को सूती कपड़े से सुखाया जाता है और फिर बिना घी के 5-7 मिनट तक ड्राई रोस्ट किया जाता है।

## प्रेरणा और सबक
हस्तनिर्मित मिठाइयों के पारंपरिक कारोबार से जुड़े बब्बी चौरसिया का अनुभव दिखाता है कि कैसे सालों की लगन और सही अनुपात की समझ से बेहतरीन उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।

- **कौशल और अनुभव:** पिछले 20 वर्षों के कड़े अभ्यास से यह साबित होता है कि किसी भी काम में निरंतरता और सही जानकारी ही सफलता की कुंजी है।
- **गुणवत्ता का ध्यान:** सामग्री का सही अनुपात और कम चीनी का इस्तेमाल यह सिखाता है कि स्वाद के साथ सेहत का ख्याल रखना कितना जरूरी है।
- **पारंपरिक ज्ञान:** स्थानीय व्यंजनों और पारंपरिक तरीकों को सहेजे रखना हमारी संस्कृति को मजबूत बनाता है।

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