छतरपुर के हलवाई ने बताया असली मथुरा पेड़ा बनाने का तरीका, 400 रुपये किलो बिकने वाली इस मिठाई का यह है सीक्रेट मध्य प्रदेश के छतरपुर में पारंपरिक विधि और धीमी आंच पर घंटों मावा भूनकर तैयार किया जाने वाला मथुरा पेड़ा 400 रुपये किलो बिकता है। हलवाई ने घर पर इसे तैयार करने की पूरी विधि साझा की है। मिठाई के शौकीनों के बीच मथुरा पेड़े की पहचान उसके खास सोंधे स्वाद और गहरे भूरे रंग की वजह से होती है। आमतौर पर बाजार में मिलने वाले सामान्य पेड़े हल्के रंग के होते हैं, लेकिन मथुरा शैली के पेड़े को तैयार करने की तकनीक बिल्कुल अलग होती है। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के लवकुश नगर में बब्बी रेस्टोरेंट चलाने वाले हलवाई जगपाल के अनुसार, इस पारंपरिक मिठाई की असली मिठास घंटों की मेहनत और धीमी आंच पर मावे की सही भुनाई पर निर्भर करती है। लकड़ी के चूल्हे और लोहे की कड़ाही में गाढ़ा होता है दूध इस पेड़े को तैयार करने की शुरुआत बिल्कुल बुनियादी तरीके से की जाती है। सबसे पहले ताजे दूध को लोहे की एक बड़ी कड़ाही में डाला जाता है। इसे पकाने के लिए मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ी की धीमी आग जलाई जाती है। दूध को कड़ाही में लगातार चलाना बेहद जरूरी होता है, ताकि वह पेंदे में जले नहीं और धीरे-धीरे गाढ़ा होकर खोवा यानी मावा बन जाए। इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है और लगातार निगरानी रखनी पड़ती है। मावा लाल होने तक भुनाई और सही मीठे का फॉर्मूला जब दूध पूरी तरह मावा बन जाता है, तब असली प्रक्रिया शुरू होती है। हलवाई जगपाल के मुताबिक, मावे को अलग से दूसरी कड़ाही में डालकर तब तक भूना जाता है जब तक कि उसका रंग गहरा लाल या भूरा न हो जाए। इस पेड़े का असली फॉर्मूला यही है कि इसमें मिठास सीमित रखी जाती है। एक किलो भुने हुए मावे में केवल 200 से 250 ग्राम शक्कर मिलाई जाती है। शक्कर की मात्रा कम रखने से मिठाई अत्यधिक मीठी नहीं लगती और मावे का प्राकृतिक स्वाद बना रहता है। घुटाई का देसी तरीका और इलायची की खुशबू मावे में चीनी और पिसी हुई छोटी इलायची का पाउडर मिलाने के बाद मिश्रण की घुटाई की जाती है। इसे अच्छी तरह एकसार करने के लिए पारंपरिक रूप से स्टील के लोटे का उपयोग किया जाता है। लोटे से दबा-दबाकर घोटने के बाद जब यह चिकना और मुलायम मिश्रण बन जाता है, तब हाथों से गोल-गोल छोटे पेड़े गढ़े जाते हैं। इलायची पाउडर की खुशबू इस पेड़े के स्वाद को और अधिक निखार देती है। बिना मिलावट का दावा और 400 रुपये प्रति किलो कीमत हलवाई जगपाल स्पष्ट करते हैं कि इस पेड़े को पूरी तरह देसी अंदाज में बिना किसी मिलावट के बनाया जाता है। शुद्ध दूध और घंटों की मेहनत की वजह से यह पेड़ा बब्बी रेस्टोरेंट में 400 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जाता है। मांग के अनुसार इसे खास आर्डर पर भी तैयार किया जाता है। स्वाद के कद्रदान इसकी शुद्धता और अनोखे जायके के कारण इसे ऊंची कीमत पर भी खुशी-खुशी खरीदते हैं। इसका आप पर असर पारंपरिक मिठाई बनाने की इस विधि से घर पर शुद्ध और कम चीनी वाली मिठाई तैयार करने में मदद मिलती है। • घर पर तैयारी: आप बाजार के मिलावटी खोवे के बजाय घर पर ताजे दूध से शुद्ध मावा बनाकर यह पेड़ा तैयार कर सकते हैं। इसके लिए बस धीमी आंच पर धैर्यपूर्वक दूध और मावे को भूनना होता है। • कम मिठास का विकल्प: इस रेसिपी में प्रति किलो मावा केवल 200 से 250 ग्राम चीनी का अनुपात रखा जाता है। ऐसे में अत्यधिक मीठे से परहेज करने वाले लोग भी इसका संतुलित स्वाद ले सकते हैं। • छतरपुर में खरीद: मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित लवकुश नगर के बब्बी रेस्टोरेंट से यह पेड़ा 400 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा जा सकता है। ग्राहक अपनी जरूरत के मुताबिक यहां आर्डर देकर भी ताजा पेड़ा बनवा सकते हैं। • शुद्धता की पहचान: असली मथुरा पेड़े का रंग कृत्रिम रंगों से नहीं बल्कि मावे की गहरी भुनाई से आता है। इस प्रक्रिया को समझकर उपभोक्ता मिलावटी मिठाइयों की आसानी से पहचान कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ मथुरा पेड़े का विशिष्ट रंग और सोंधा स्वाद सामान्य पेड़ों से बिल्कुल अलग प्रक्रिया अपनाने की वजह से बनता है। • मावे की अतिरिक्त भुनाई: साधारण पेड़े में खोवा बनते ही मिठाई तैयार कर ली जाती है, जबकि इसमें मावे को अलग से लाल होने तक घंटों भूना जाता है। यही गहरा भूना हुआ मावा पेड़े को इसका पारंपरिक रूप और सुगंध देता है। • धीमी आंच और पारंपरिक ईंधन: मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ी की हल्की आंच पर लोहे की कड़ाही में दूध पकाने से उसमें एक प्राकृतिक सोंधापन आ जाता है। तेज आंच के बजाय धीमी आंच दूध के प्राकृतिक तत्वों को धीरे-धीरे कैरेमलाइज करती है। • सीमित चीनी का इस्तेमाल: चीनी की अत्यधिक मात्रा मावे के असली स्वाद को दबा देती है, इसलिए कारीगर इसमें कम चीनी का उपयोग करते हैं। इससे पेड़े की बनावट और स्वाद दोनों संतुलित बने रहते हैं। सवाल-जवाब 1. मथुरा पेड़ा सामान्य पेड़े से अलग क्यों होता है? मथुरा पेड़े में मावे को अलग कड़ाही में घंटों लाल होने तक भूना जाता है, जिससे इसका रंग गहरा और स्वाद सोंधा हो जाता है। 2. एक किलो मावे में कितनी चीनी मिलानी चाहिए? इस रेसिपी के अनुसार एक किलो मावे में 200 से 250 ग्राम शक्कर मिलाना सही रहता है ताकि मिठास अत्यधिक न हो। 3. छतरपुर के बब्बी रेस्टोरेंट में यह पेड़ा किस भाव मिलता है? यह शुद्ध मथुरा पेड़ा बब्बी रेस्टोरेंट में 400 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिकता है। 4. पेड़े के मिश्रण को एकसार करने के लिए क्या तरीका अपनाया जाता है? मावे में शक्कर और इलायची मिलाने के बाद उसे स्टील के लोटे से अच्छी तरह घोटकर मुलायम किया जाता है। https://trendkia.com/food/chhatarpur-ke-halavai-ne-bataya-asali-mathura-peda-banane-ka-tarika-400-rupaye-kilo-bikane-vali-isa-mithai-ka-yaha-hai-sikreta-40969 TrendKia — Har trend, sabse pehle.