छतरपुर के हाट बाजारों में पहुंचा अनोखा खट्टू फल, सर्दी भर रहेगी इसकी चटनी और स्वाद की धूम मध्य प्रदेश के छतरपुर में ठंड के मौसम के साथ लाल रंग का खट्टू फल बाजार में बिकने लगा है, जिसकी तीखी-खट्टी चटनी लोग खूब पसंद करते हैं। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में सर्दी की दस्तक के साथ ही स्थानीय बाजारों में एक विशेष मौसमी फल की आमद शुरू हो गई है। स्थानीय बोलचाल में इसे खट्टू फल के नाम से पहचाना जाता है। सुर्ख लाल रंगत वाला यह फल अपने तेज खट्टे स्वाद के लिए जाना जाता है और ठंड के पूरे मौसम में इसकी भारी मांग बनी रहती है। लोग इसके छिलकों को सुखाकर भी इस्तेमाल करते हैं और इसकी स्वादिष्ट चटनी बनाकर बड़े चाव से खाते हैं। वर्तमान समय में बाजार में यह फल 80 रुपये प्रति किलोग्राम की दर पर उपलब्ध हो रहा है। स्थानीय पहचान और बोलचाल के नाम छतरपुर के पारंपरिक हाट बाजार में सब्जी का कारोबार करने वाले विक्रेता धनीराम इस फल के बारे में विस्तार से बताते हैं। उनके अनुसार, जिले में ठंड का दौर शुरू होते ही यह फल दुकानों और ठेलों पर दिखने लगता है। क्षेत्रीय लोग इसे केवल खट्टू फल ही नहीं, बल्कि अपनी स्थानीय बोली में छिटकना भेड़ा या चिकना भेड़ा के नाम से भी पुकारते हैं। इलाके में अलग-अलग जगहों पर इसके कई देशी नाम प्रचलित हैं, लेकिन इसके खास खट्टेपन की वजह से इसका सबसे चर्चित नाम खट्टू फल ही बन गया है। दिखने में स्ट्रॉबेरी जैसा, लेकिन खाने का तरीका बिल्कुल जुदा दुकानदार के अनुसार, पहली नजर में यह फल चटख लाल रंग की स्ट्रॉबेरी जैसा प्रतीत होता है। इसका खट्टा स्वाद भी काफी हद तक स्ट्रॉबेरी की याद दिलाता है, लेकिन इसे खाने और इस्तेमाल करने का सलीका बिल्कुल भिन्न है। इसे सामान्य फलों की तरह सीधे नहीं चबाया जाता, बल्कि सबसे पहले इसके बाहरी छिलके को सावधानी से उतारा जाता है। खाने में इसी छिलके का उपयोग किया जाता है, जबकि इसके भीतर मौजूद बीज को बिल्कुल नहीं खाया जाता। जो लोग अपने घर या बाड़ी में इसका पौधा तैयार करना चाहते हैं, वे इसके बीजों को संभालकर रख लेते हैं ताकि नया पेड़ उगाया जा सके। कवीट जैसी खटास और चटनी बनाने की पारंपरिक विधि ठंड के दिनों में भोजन के साथ तरह-तरह की देसी चटनियों का चलन बढ़ जाता है। इस मौसम में खट्टू फल की चटनी को ग्रामीण और कस्बाई थाली का मुख्य आकर्षण माना जाता है। इस चटनी का खट्टापन ठीक वैसा ही महसूस होता है जैसा कैथा यानी कवीट की चटनी में होता है। इसे बनाने की विधि भी बेहद सरल और पारंपरिक है। इसके लिए खट्टू फल के साथ हरी मिर्च, ताजा हरा धनिया और स्वादानुसार नमक मिलाकर सिलबट्टे पर महीन पीस लिया जाता है। सिलबट्टे पर पिसी यह खट्टी चटनी गरमा-गरम रोटी के साथ परोसी जाती है, जबकि कई लोग इसे बिना रोटी के केवल स्वाद के लिए भी खाते हैं। यह फल प्राकृतिक रूप से विटामिन सी का भी समृद्ध स्रोत माना जाता है। बाजार में आवक और कीमतों का गणित धनीराम बताते हैं कि इसका अपना एक पूर्ण पेड़ होता है और उनके निजी पेड़ पर इस मौसम के फल सबसे पहले पककर तैयार हो जाते हैं। स्थानीय बाजारों में अभी इस फल की आवक बिल्कुल शुरुआती दौर में है, जिस कारण इसका मौजूदा भाव 80 रुपये प्रति किलो पर चल रहा है। जैसे-जैसे ठंड गहरी होगी और आसपास के ग्रामीण इलाकों से इसकी आवक में तेजी आएगी, इसके दाम गिरकर 40 रुपये प्रति किलो तक आ जाएंगे। सर्दियों के अंत तक बाजार में इस अनोखे फल की निरंतर मांग बनी रहती है। इसका आप पर असर छतरपुर के स्थानीय बाजारों में खट्टू फल की उपलब्धता से उपभोक्ताओं और स्थानीय फल उत्पादकों पर सीधा असर पड़ता है। • छतरपुर में: स्थानीय निवासी सर्दी के शुरुआती दिनों में 80 रुपये प्रति किलो पर इस मौसमी फल को खरीदकर अपनी थाली में शामिल कर सकते हैं। जब बाजार में आवक बढ़ेगी, तब यह भाव घटकर 40 रुपये प्रति किलो होने से आम खरीदारों की जेब पर बोझ कम होगा। • घरेलू बागवानी: फल खाने के बाद इसके बीजों को सुरक्षित रखकर घर पर नया पौधा रोपा जा सकता है। इससे स्थानीय लोग भविष्य में अपने निजी उपयोग के लिए मुफ्त में फल प्राप्त कर सकते हैं। • खान-पान और सेहत: विटामिन सी से भरपूर होने के कारण सर्दियों के आहार में इसकी चटनी शामिल करना सेहत के लिए फायदेमंद है। हरी मिर्च और धनिया के साथ बनी इसकी ताजी चटनी भोजन का स्वाद बढ़ाने का किफायती देसी विकल्प देती है। ऐसा क्यों हुआ छतरपुर में खट्टू फल की आवक मौसमी प्राकृतिक चक्र और स्थानीय पेड़ों में फल पकने की समयसीमा से सीधे जुड़ी हुई है। • मौसम का प्रभाव: यह फल केवल ठंड के मौसम में ही परिपक्व होकर बाजार में आता है। तापमान गिरने के साथ ही इसके पेड़ों पर फल तैयार होते हैं और क्षेत्रीय हाटों में बिक्री शुरू होती है। • शुरुआती सीमित आवक: विक्रेता के अनुसार वर्तमान में कुछ ही पेड़ों से फल टूटकर बाजार आ रहे हैं। शुरुआती चरण में आपूर्ति कम होने के कारण इसका दाम 80 रुपये प्रति किलो पर खुला है। • आपूर्ति बढ़ने पर सस्ता होना: जैसे-जैसे आने वाले हफ्तों में बाकी पेड़ों पर भी फल पूरी तरह तैयार होंगे, बाजार में माल की मात्रा बढ़ जाएगी। आपूर्ति में भारी इजाफा होने के चलते इसका भाव घटकर 40 रुपये प्रति किलो तक आ जाएगा। सवाल-जवाब 1. खट्टू फल मध्य प्रदेश के किस जिले के बाजारों में मिल रहा है? यह मौसमी फल मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के हाट बाजारों में मिल रहा है। 2. क्षेत्रीय बोली में खट्टू फल को अन्य किन नामों से जाना जाता है? स्थानीय बोली में इसे छिटकना भेड़ा या चिकना भेड़ा के नाम से भी पुकारा जाता है। 3. वर्तमान में बाजार में खट्टू फल का क्या भाव है? फिलहाल बाजार में खट्टू फल 80 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बिक रहा है। 4. आवक बढ़ने पर इस फल के दाम कितने होने की उम्मीद है? बाजार में जब इसकी आवक बढ़ेगी, तब इसका भाव घटकर 40 रुपये प्रति किलोग्राम हो जाने की उम्मीद है। 5. खट्टू फल को किस तरह खाया जाता है? इसे छीलकर केवल इसके बाहरी छिलके को खाया जाता है, जबकि इसके अंदर मौजूद बीज को नहीं खाया जाता। 6. इस फल की चटनी का स्वाद किस फल से मिलता-जुलता है? इसकी चटनी का खट्टापन कवीट यानी कैथा की चटनी से मिलता-जुलता होता है। 7. खट्टू फल की चटनी तैयार करने के लिए किन चीजों की आवश्यकता होती है? इसकी चटनी बनाने के लिए खट्टू फल के साथ हरी मिर्च, हरा धनिया और नमक मिलाकर सिलबट्टे पर पीसा जाता है। 8. खट्टू फल में कौन सा प्रमुख विटामिन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है? यह खट्टा फल प्राकृतिक रूप से विटामिन सी से भरपूर होता है। https://trendkia.com/food/chhatarpur-ke-hata-bajaron-men-pahuncha-anokha-khattu-phala-sardi-bhara-rahegi-isaki-chatani-aura-svada-ki-dhuma-45535 TrendKia — Har trend, sabse pehle.