दहकते दीये के तड़के से तैयार होता है बुंदेलखंडी रायता, जानिए स्वाद और पाचन से भरपूर आसान तरीका बुंदेलखंड की पंगत और भंडारों में बनने वाला पारंपरिक रायता मट्ठे और गर्म दीये के स्मोकी छौंक से तैयार किया जाता है, जो पाचन के लिए भी गुणकारी माना जाता है। बुंदेलखंड के खानपान में मट्ठे से तैयार पारंपरिक रायते की अपनी एक अलग पहचान है। क्षेत्र में शादी-ब्याह की पंगत हो, मंदिर परिसर में आयोजित भंडारा या फिर घर आए मेहमानों का सत्कार, इस खास डिश के बिना भोजन की थाली अधूरी मानी जाती है। टेबल पर चाहे कितने भी महंगे पकवान या व्यंजन सजे हों, स्थानीय लोग इस देसी रायते के स्वाद को सबसे अधिक प्राथमिकता देते हैं। कम खर्च और बेहद कम समय में बन जाने के कारण यह हर रसोई में आसानी से तैयार हो जाता है। बुंदेलखंडी रायते की मुख्य सामग्री इस व्यंजन का मुख्य आधार ताजा छांछ यानी मठा है। कई परिवारों में इसे बिल्कुल सादा रखकर पिया जाता है, जबकि कई लोग इसके स्वाद और बनावट को बेहतर बनाने के लिए इसमें सब्जियां मिलाते हैं। उबली हुई लौकी के बारीक टुकड़े, उबला हुआ सफेद कद्दू या फिर बेसन की बूंदी मिलाकर इसे तैयार किया जाता है। इन सामग्रियों के जुड़ने से मट्ठे का गाढ़ापन और स्वाद दोनों काफी बढ़ जाते हैं। मिट्टी के दीये को दहकाने की खास परंपरा इस रेसिपी का सबसे अनोखा हिस्सा मिट्टी के दीये से लगाया जाने वाला छौंक है। इसके लिए एक स्वच्छ मिट्टी का दीपक लिया जाता है। चूल्हे की आग या दहकते अंगारों के बीच इस दीये को सीधे रख दिया जाता है। लगभग 10 से 15 मिनट तक आग में तपने के बाद जब दीपक लाल अंगारे जैसा गर्म हो जाता है, तब इसे चिमटे की मदद से बाहर निकाला जाता है। यही गर्म मिट्टी रायते को उसका खास सोंधापन देती है। मसालों का तड़का और छौंक लगाने की विधि आग से निकाले गए गर्म दीये के अंदर सीधे दो चम्मच तेल डाला जाता है। लगभग 10 से 15 सेकंड बाद जब तेल पूरी तरह गर्म हो जाए, तब उसमें आधा चम्मच जीरा, आधा चम्मच हल्दी, आधा चम्मच मेथी दाना और आधा चम्मच सरसों के दाने डाले जाते हैं। जैसे ही मसाले तेल में चटकने लगते हैं, उसमें थोड़ी सी हींग और मीठी नीम यानी कड़ी पत्ते की पत्तियां मिला दी जाती हैं। मट्ठे में डुबोकर परोसने का तरीका मसाला भुनते ही चिमटे से गर्म दीये को सावधानीपूर्वक उठाया जाता है और सीधे मट्ठे से भरे बर्तन के अंदर डाल दिया जाता है। दीये के संपर्क में आते ही छौंक की खुशबू मट्ठे में समा जाती है। इसके तुरंत बाद स्वादानुसार नमक और लाल मिर्च पाउडर मिलाया जाता है और करछुल से पूरे मिश्रण को अच्छी तरह चला दिया जाता है। अंत में बारीक कटी हरी धनिया पत्ती डालकर इसे कटोरी या गिलास में परोसा जाता है। पाचन और भोजन में इसका महत्व रोटी या पूड़ी के साथ यह रायता मुख्य भोजन का स्वाद दोगुना कर देता है। इसका सोंधा स्वाद इतना पसंद किया जाता है कि कई लोग इसे भोजन के साथ ही एक-एक गिलास भरकर पीना पसंद करते हैं। स्वादिष्ट होने के साथ-साथ छांछ, हींग, मेथी और जीरे का यह मेल पेट के पाचन तंत्र के लिए भी बेहद लाभकारी माना जाता है। इसका आप पर असर यह पारंपरिक व्यंजन कम लागत में दैनिक भोजन का स्वाद और पाचन सुधारने का एक व्यावहारिक घरेलू विकल्प देता है। • खानपान में बदलाव: मट्ठे में लौकी, कद्दू या बूंदी मिलाकर इसे घर पर 5 मिनट में तैयार किया जा सकता है। भारी और गरिष्ठ भोजन के बाद यह पेट को हल्का रखने में मदद करता है। • किचन बजट पर असर: महंगी सामग्रियों के बिना सिर्फ छांछ और बुनियादी मसालों से यह तैयार हो जाता है। इससे रोजमर्रा के भोजन में बिना अतिरिक्त खर्च के नया स्वाद जोड़ा जा सकता है। • पारंपरिक तकनीक: मिट्टी के दीये के उपयोग से बिना तंदूर के प्राकृतिक स्मोकी फ्लेवर हासिल किया जा सकता है। ग्रामीण और शहरी दोनों घरों में इसे आसानी से आजमाया जा सकता है। • पाचन स्वास्थ्य: हींग, जीरा और मेथी पेट की गैस और अपच को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं। गर्मियों और बदलते मौसम में यह आंतों की सेहत के लिए अनुकूल रहता है। ऐसा क्यों हुआ बुंदेलखंडी रायते का यह अनूठा रूप ग्रामीण भोजन परंपराओं और स्थानीय जलवायु की आवश्यकताओं के अनुसार विकसित हुआ है, जहां छांछ को पाचन और शीतलता का मुख्य साधन माना जाता है। • स्मोकी स्वाद की आवश्यकता: साधारण मट्ठे में सोंधापन लाने के लिए मिट्टी के दीये को अंगारों पर तपाकर सीधे बर्तन में डुबोया जाता है। इस प्रक्रिया से तेल और मसालों का धुआं सीधे छांछ में समाकर अनूठा स्वाद बनाता है। • स्थानीय उपलब्धता: बुंदेलखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में चूल्हे और मिट्टी के दीये आसानी से उपलब्ध रहते हैं। इसी वजह से रसोइयों ने जटिल बर्तनों के बजाय घरेलू साधनों से तड़का लगाने की यह विधि अपनाई। • सामूहिक आयोजनों की परंपरा: बड़े भंडारों और शादी की पंगतों में भारी मात्रा में जल्दी तैयार होने वाले सुपाच्य विकल्प की दरकार होती थी। कम समय और कम सामग्री में बनने के कारण यह हर सार्वजनिक भोज का स्थायी हिस्सा बन गया। सवाल-जवाब 1. बुंदेलखंडी रायते का मुख्य आधार क्या होता है? इस रायते को मुख्य रूप से छांछ यानी मट्ठे से तैयार किया जाता है। 2. रायते में कौन-कौन सी अतिरिक्त चीजें मिलाई जा सकती हैं? स्वाद और गाढ़ापन बढ़ाने के लिए इसमें उबली हुई लौकी, उबला सफेद कद्दू या बेसन की बूंदी मिलाई जाती है। 3. मिट्टी के दीये को कितनी देर तक आग में तपाया जाता है? दीये को चूल्हे के दहकते अंगारों में लगभग 10 से 15 मिनट तक लाल होने तक रखा जाता है। 4. दीये में छौंक लगाने के लिए कौन से मसाले डाले जाते हैं? दीये में तेल के साथ जीरा, हल्दी, मेथी, सरसों, हींग और कड़ी पत्ते डाले जाते हैं। 5. यह रायता किन पकवानों के साथ परोसा जाता है? इसे आमतौर पर रोटी या पूड़ी के साथ परोसा जाता है, या फिर सीधे गिलास में भरकर पिया जाता है। https://trendkia.com/food/dahakate-diye-ke-tarake-se-taiyara-hota-hai-bundelkhandi-rayata-janie-svada-aura-pachana-se-bharapura-asana-tarika-45998 TrendKia — Har trend, sabse pehle.