दाल पीठी से बदलें सर्दियों का स्वाद: जानिए बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश का यह पारंपरिक व्यंजन बनाने का आसान तरीका सर्दियों के दिनों में रोजमर्रा के खाने से अलग स्वाद चाहिए तो अरहर की दाल और गेहूं के आटे से बनी पारंपरिक दाल पीठी एक पौष्टिक और देसी विकल्प है। सर्दियों के दिनों में खानपान की आदतें स्वाभाविक रूप से बदलने लगती हैं। ठंडे मौसम में अक्सर ऐसे गर्मागर्म व्यंजनों की तलाश रहती है जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ देर तक पेट भरा रखने में भी मदद करें। अगर रोजाना की वही दाल, रोटी और सामान्य सब्जी खाकर बोरियत महसूस होने लगी है, तो बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की बेहद लोकप्रिय पारंपरिक रेसिपी दाल पीठी एक बेहतरीन बदलाव साबित हो सकती है। इसे घर पर बहुत ही सहजता से बनाया जा सकता है और इसके लिए रसोई में पहले से मौजूद सीमित चीजों की ही जरूरत पड़ती है। जरूरी सामग्री का सही नाप दाल पीठी तैयार करने के लिए बहुत जटिल मसालों की आवश्यकता नहीं होती। इसके लिए मुख्य रूप से एक कप अरहर की दाल और एक कप गेहूं का आटा चाहिए। तड़के और स्वाद के लिए एक प्याज, दो टमाटर, अदरक-लहसुन का पेस्ट और कटी हुई हरी मिर्च लें। सूखे मसालों और तड़के की सामग्री में जीरा, हींग, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, नमक और अजवाइन की आवश्यकता होगी। साथ ही आटा तैयार करने और तड़का लगाने के लिए शुद्ध देसी घी चाहिए। अंत में गार्निशिंग और ताजे स्वाद के लिए कटा हुआ हरा धनिया इस्तेमाल किया जा सकता है। आटे की लोई और पीठी तैयार करने का तरीका इस व्यंजन का पहला चरण गेहूं के आटे की पीठियां तैयार करना है। एक बड़े बर्तन में गेहूं का आटा निकालें और उसमें थोड़ा नमक, अजवाइन तथा आधा चम्मच देसी घी डाल लें। अब थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाते हुए आटा गूंथना शुरू करें। यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि आटा सामान्य रोटी के आटे की तुलना में थोड़ा सख्त गूंथा जाए। आटा तैयार होने के बाद उसकी छोटी लोइयां बनाएं और उन्हें बेलकर किसी गिलास या कटर की मदद से गोल आकार में काट लें। इसके बाद उन गोलियों को उंगलियों से किनारों पर मोड़ते और दबाते हुए छोटी कटोरी या फूल जैसी पारंपरिक आकृति दें। इसी विधि से सभी पीठियों को एक-एक कर तैयार करके अलग रख लें। अरहर की दाल पकाने की प्रक्रिया पीठियां बनाने के साथ ही अरहर की दाल पकाने की तैयारी करें। दाल को साफ पानी से अच्छी तरह धोकर प्रेशर कुकर में डालें। इसमें हल्दी, स्वादानुसार नमक और आवश्यकतानुसार पर्याप्त पानी डालकर आंच पर चढ़ाएं। यहां एक बात का विशेष ध्यान रखें कि दाल को पूरी तरह से नहीं गलाना है, बल्कि थोड़ा कसर बाकी रखते हुए ही पकाना है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि बाद में आटे की पीठियों को भी इसी दाल के अंदर डालकर दोबारा पकाया जाएगा। दाल में पीठियों को पकाने का चरण जब दाल आधी पक जाए, तो कुकर का ढक्कन खोलें और तैयार की गई आटे की पीठियों को धीरे-धीरे एक-एक करके दाल में डालें। पीठियों को डालते समय हल्के हाथों से करछी चलाएं, ताकि वे तली में न बैठें और आपस में चिपकने से बची रहें। अब इसे मध्यम आंच पर लगभग 12 से 15 मिनट तक पकने दें। जब पीठियां भीतर तक अच्छी तरह से पक जाएं और उनका कच्चापन समाप्त हो जाए, तब गैस बंद कर दें और बर्तन को ढककर रख दें। देसी घी का पारंपरिक तड़का और परोसने का अंदाज दाल पीठी का असली स्वाद उसके विशेष तड़के में छिपा होता है। इसके लिए एक अलग कड़ाही या पैन में देसी घी गर्म करें। घी पिघलने पर उसमें जीरा और हींग डालें। इसके बाद बारीक कटा हुआ प्याज, अदरक-लहसुन का पेस्ट और टमाटर डालकर भूनना शुरू करें। जब यह मिश्रण अच्छी तरह भुन जाए, तो इसमें लाल मिर्च और अन्य आवश्यक मसाले मिलाएं तथा तब तक चलाते रहें जब तक कि पूरे मसाले का रंग सुनहरा न हो जाए। इसके बाद इस तड़के में उबली हुई दाल और पकी हुई पीठियां डालकर अच्छी तरह मिला दें। अब गरमागरम दाल पीठी पूरी तरह तैयार है। इसे तीखी हरी मिर्च, ताजी मूली और पारंपरिक आम के अचार के साथ थाली में परोसें। सर्दियों की शाम के भोजन के लिए यह पौष्टिक और पारंपरिक देसी व्यंजन न केवल स्वाद बदलता है, बल्कि भोजन में एक अलग तरह की विविधता भी जोड़ता है। इसका आप पर असर सर्दियों में रोजमर्रा के साधारण खाने से हटकर घर पर आसानी से संतुलित और पौष्टिक भोजन तैयार किया जा सकता है। • किचन बजट पर असर: इसमें केवल सामान्य अरहर दाल और गेहूं के आटे जैसी बुनियादी रसोई सामग्री का उपयोग होता है। किसी महंगे फैंसी सामान की आवश्यकता न होने से यह बहुत किफायती विकल्प बनता है। • शाम के भोजन का समय: यह एक ही बर्तन में तैयार होने वाला संपूर्ण भोजन है जो अलग से रोटी-सब्जी बनाने का झंझट खत्म करता है। व्यस्त कामकाजी दिनों में इसे कम बर्तनों और कम मेहनत के साथ आसानी से पकाया जा सकता है। • पारंपरिक पोषण: दाल का प्रोटीन और गेहूं के आटे का फाइबर शरीर को पर्याप्त ऊर्जा और गर्माहट देता है। सर्दियों में यह भारी गरिष्ठ बाहर के खाने के मुकाबले पचने में हल्का और सेहतमंद रहता है। • स्वाद में विविधता: नियमित दाल-चावल या रोटी से हटकर एक नई क्षेत्रीय डिश का अनुभव मिलता है। बच्चे और बड़े दोनों ही इसके कटोरी जैसे आकार और चटपटे तड़के को पसंद करते हैं। ऐसा क्यों हुआ सर्दियों के महीनों में शरीर को गर्माहट और ऊर्जा देने वाले पौष्टिक व पेट भरने वाले पारंपरिक देसी व्यंजनों की मांग तेजी से बढ़ जाती है। • सर्दियों में पाचन और खानपान की जरूरत: ठंडे मौसम में ऊर्जा बनाए रखने के लिए लोग तृप्ति देने वाले गर्म और भारी भोजन की तलाश में रहते हैं। नियमित रोटी और दाल के विकल्प के रूप में पारंपरिक व्यंजन स्वाभाविक रूप से लोकप्रिय हो जाते हैं। • आटे और दाल का संयोजन: गेहूं के आटे को दाल के साथ पकाने की यह लोक परंपरा दोनों को एक साथ मिलाकर एक संपूर्ण भोजन तैयार करने की आवश्यकता से शुरू हुई थी। इससे कम साधनों और सीमित बर्तनों में भरपेट पोषण मिल जाता है। • तड़के की भूमिका: जीरा, हींग, अदरक और देसी घी के उपयोग से बनने वाला तड़का केवल स्वाद नहीं बढ़ाता बल्कि पाचन को भी आसान बनाता है। सर्दियों में यह शरीर को जरूरी गर्माहट और सुपाच्यता प्रदान करता है। सवाल-जवाब 1. दाल पीठी बनाने के लिए कौन सी दाल सबसे उपयुक्त है? इस रेसिपी को बनाने के लिए मुख्य रूप से एक कप अरहर की दाल का उपयोग किया जाता है। 2. दाल पीठी का आटा गूंथते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? आटे में नमक, अजवाइन और थोड़ा घी मिलाकर गूंथें और ध्यान रखें कि आटा सामान्य से थोड़ा सख्त होना चाहिए। 3. पीठियों को दाल में कितनी देर तक पकाना चाहिए? पीठियों को दाल में डालने के बाद मध्यम आंच पर लगभग 12 से 15 मिनट तक पकाया जाता है। 4. दाल पीठी को किस चीज के साथ परोसना सबसे अच्छा माना जाता है? इसे हरी मिर्च, ताजी कटी मूली और आम के पारंपरिक अचार के साथ गरमागरम परोसा जाता है। https://trendkia.com/food/dal-pithi-se-badalen-sardiyon-ka-svada-janie-bihar-aura-purvi-up-ka-yaha-parnparika-vynjana-banane-ka-asana-tarika-54496 TrendKia — Har trend, sabse pehle.