# दरभंगा के हायाघाट में देसी नॉनवेज का अनोखा ठिकाना, खस्सी और मुर्गे के साथ घोंघी भी परोसी जा रही

> दरभंगा के ग्रामीण इलाके विराम पट्टी में संजय कुमार सहनी की दुकान पर किफायती दामों में कई तरह के मांसाहारी व्यंजन मिल रहे हैं, जहां दूर-दूर से लोग स्वाद लेने पहुंच रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** खानपान · **Published:** 2026-09-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/food/darbhanga-ke-hayaghat-men-desi-nonaveja-ka-anokha-thikana-khassi-aura-murge-ke-satha-ghonghi-bhi-parosi-ja-rahi-37224 · **Language:** Hindi
**Tags:** दरभंगा, हायाघाट, विराम पट्टी, देसी नॉनवेज, संजय कुमार सहनी, बिहार स्ट्रीट फूड

बिहार के दरभंगा जिले में मांसाहारी व्यंजनों के शौकीनों के लिए ग्रामीण अंचल में एक खास ठिकाना चर्चा का विषय बना हुआ है। हायाघाट प्रखंड के विराम पट्टी इलाके में स्थित यह भोजनालय अपने पारंपरिक और अलग तरह के मांसाहारी व्यंजनों के लिए पहचाना जा रहा है। गांव के शांत माहौल में मौजूद होने के बाद भी यहां मिलने वाले खाने की विविधता और मुफीद कीमतें लोगों को अपनी ओर खींच रही हैं, जिसके चलते यह जगह खान-पान के प्रेमियों के बीच काफी तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

## परंपरागत व्यंजनों की विस्तृत फेहरिस्त
इस भोजनालय के संचालक संजय कुमार सहनी बीते कई वर्षों से यहां अपनी दुकान चला रहे हैं। वे बताते हैं कि उनकी थाली में केवल पारंपरिक मटन या चिकन तक ही चीजें सीमित नहीं हैं, बल्कि स्थानीय खान-पान से जुड़े अन्य व्यंजन भी शामिल किए गए हैं। मेन्यू में खस्सी का मीट, मुर्गा, पचौनी, मछली, घोंघी और अंडा नियमित तौर पर तैयार किया जाता है। दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले भोजन प्रेमी इन पारंपरिक स्वादों का आनंद लेने के लिए विशेष रूप से यहां पहुंचते हैं।

## किफायती दरें और तय रेट लिस्ट
विराम पट्टी के इस ठिकाने की सबसे बड़ी खासियत इसकी उचित और तय कीमतें हैं, जिससे हर वर्ग का व्यक्ति आसानी से इनका स्वाद ले सकता है। भोजनालय में खस्सी का मीट 100 रुपये में 100 ग्राम की दर से दिया जाता है। वहीं मुर्गा 50 रुपये में 100 ग्राम और पचौनी का दाम 50 रुपये निर्धारित है। इसके अतिरिक्त मछली 25 रुपये प्रति पीस, घोंघी 50 रुपये प्रति पीस और उबला या बना हुआ अंडा 20 रुपये प्रति पीस के हिसाब से ग्राहकों को परोसा जाता है। जेब पर भारी न पड़ने वाले ये दाम ही ग्राहकों की बढ़ती तादाद की मुख्य वजह हैं।

## दूर-दराज से पहुंचते हैं कद्रदान
संजय कुमार सहनी के अनुसार, उनके पास करीब 15 से 20 किलोमीटर की दूरी तय करके नियमित ग्राहक भोजन करने आते हैं। इसके अलावा इस मार्ग से सफर करने वाले राहगीर भी यहां गाड़ी रोककर इन देसी पकवानों का स्वाद चखना नहीं भूलते। देहाती परिवेश में स्थित होने के बावजूद इस बात पर विशेष जोर दिया जाता है कि परिसर में स्वच्छता बनी रहे और पकाने के दौरान स्वाद व शुद्धता से कोई समझौता न हो।

## शाम के समय उमड़ती है भारी भीड़
आसपास के स्थानीय निवासियों का मानना है कि दरभंगा शहर के बड़े होटलों में भी एक साथ मांसाहारी व्यंजनों की इतनी वैरायटी मिलना मुश्किल होता है, जितनी आसानी से विराम पट्टी की इस छोटी सी दुकान में मिल जाती है। दिन ढलने के बाद, खासकर शाम के वक्त यहां खाने वालों का तांता लग जाता है। यदि कोई दरभंगा क्षेत्र में मौजूद है और बिल्कुल देहाती शैली में विभिन्न मांसाहारी व्यंजनों का अनुभव करना चाहता है, तो हायाघाट के विराम पट्टी का रुख कर सकता है।

## इसका आप पर असर
दरभंगा और आसपास के भोजन प्रेमियों के लिए किफायती और प्रामाणिक देसी मांसाहारी भोजन का एक स्पष्ट विकल्प सामने आया है।

- **दरभंगा में:** स्थानीय निवासियों और यात्रियों को शहर से बाहर किफायती दामों पर पारंपरिक भोजन का विकल्प मिलता है। खस्सी 100 रुपये में 100 ग्राम और मुर्गा 50 रुपये में 100 ग्राम जैसी तय दरों पर उपलब्ध होने से ग्राहक कम खर्च में विभिन्न व्यंजनों का स्वाद ले सकते हैं।
- **आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में:** 15 से 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों के लिए यह एक नियमित खान-पान का केंद्र बन चुका है। शाम के समय आवागमन करने वाले राहगीर भी यहां रुककर स्वच्छ और ताजा भोजन प्राप्त कर सकते हैं।
- **खान-पान के शौकीनों के लिए:** शहरी होटलों से इतर यहां घोंघी और पचौनी जैसी दुर्लभ पारंपरिक चीजें आसानी से उपलब्ध हैं। शौकीन ग्राहक एक ही स्थान पर अलग-अलग देहाती स्वादों का अनुभव कर सकते हैं।
- **स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए:** ग्रामीण क्षेत्र में छोटे स्तर के खाद्य व्यवसाय को बाहरी ग्राहकों से बढ़ावा मिल रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और खान-पान पर्यटन को सहारा मिलता है।

## ऐसा क्यों हुआ
दरभंगा के हायाघाट अंतर्गत विराम पट्टी में इस भोजनालय की लोकप्रियता इसके अनूठे मेन्यू और सटीक कीमतों की वजह से तेजी से बढ़ी है।

- **मेन्यू में विविधता की उपलब्धता:** शहरी होटलों में आमतौर पर मटन और चिकन तक ही सीमित विकल्प मिलते हैं, जबकि यहां घोंघी, पचौनी और मछली भी तैयार की जाती है। इस दुर्लभ संयोजन के कारण अलग-अलग तरह के स्वाद पसंद करने वाले लोग यहां खींचे चले आते हैं।
- **किफायती मूल्य निर्धारण:** दुकान के संचालक संजय कुमार सहनी ने व्यंजनों की दरें काफी कम और पारदर्शी रखी हैं। मात्र 20 से 100 रुपये के दायरे में विभिन्न आइटम मिलने से यह हर वर्ग के लिए सुलभ हो जाता है।
- **स्वच्छता और परंपरागत स्वाद:** ग्रामीण अंचल में स्थित होने के बावजूद भोजन की तैयारी में साफ-सफाई और देसी स्वाद का ध्यान रखा जाता है। यही कारण है कि 15 से 20 किलोमीटर दूर से भी नियमित ग्राहक यहां आते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. दरभंगा में यह मांसाहारी भोजनालय किस स्थान पर स्थित है?
यह भोजनालय दरभंगा जिले के हायाघाट प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत विराम पट्टी में स्थित है।

### 2. इस दुकान के संचालक कौन हैं और वे कितने समय से इसे चला रहे हैं?
दुकान के संचालक संजय कुमार सहनी हैं और वे कई वर्षों से इस भोजनालय का संचालन कर रहे हैं।

### 3. यहां मेन्यू में कौन-कौन से मांसाहारी व्यंजन उपलब्ध हैं?
मेन्यू में खस्सी का मीट, मुर्गा, पचौनी, मछली, घोंघी और अंडा शामिल हैं।

### 4. खस्सी और मुर्गे के मीट की दरें क्या हैं?
खस्सी का मीट 100 रुपये में 100 ग्राम और मुर्गा 50 रुपये में 100 ग्राम की दर से मिलता है।

### 5. घोंघी, मछली और अंडे के क्या दाम तय किए गए हैं?
घोंघी 50 रुपये प्रति पीस, मछली 25 रुपये प्रति पीस और अंडा 20 रुपये प्रति पीस के हिसाब से उपलब्ध है।

### 6. ग्राहक कितनी दूरी से यहां भोजन करने आते हैं?
संजय कुमार सहनी के अनुसार, लगभग 15 से 20 किलोमीटर दूर से नियमित ग्राहक यहां स्वाद लेने पहुंचते हैं।

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