# देवघर का पारंपरिक देसी मोरब्बा, सर्दियों में घर पर ऐसे झटपट तैयार करें यह जायकेदार पकवान

> झारखंड के देवघर का पारंपरिक मोरब्बा आटा, दही और गुड़ से बनने वाला एक खास सर्दियों का पकवान है। इसे बिना पानी के केवल दही और आटे का घोल बनाकर तला जाता है और फिर गुड़ की चाशनी में डुबोकर तैयार किया जाता है।

**Type:** article · **Category:** खानपान · **Published:** 2026-11-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/food/deoghar-ka-parnparika-desi-morabba-sardiyon-mein-ghar-par-aise-jhapat-tai-karein-58062 · **Language:** Hindi
**Tags:** देवघर मोरब्बा, झारखंड रेसिपी, सर्दियों के पकवान, गुड़ की मिठाई, पारंपरिक व्यंजन

सर्दियों का मौसम दस्तक देते ही झारखंड के ग्रामीण और शहरी घरों में पारंपरिक व्यंजनों की खूशबू फैलने लगती है। इस ठंडे मौसम में खानपान की परंपराएं जीवित हो उठती हैं, और देवघर का देसी मोरब्बा इनमें एक अलग पहचान रखता है। यह किसी हलवाई की दुकान पर बिकने वाली आम मिठाई नहीं है, बल्कि घरेलू रसोई में आसानी से बनने वाला एक पारंपरिक व्यंजन है। इसे बनाने के लिए आपको बाजार से किसी महंगी सामग्री को लाने की जरूरत नहीं पड़ती है। रसोई में आसानी से मिलने वाले गेहूं का आटा, दही, गुड़ और थोड़ा सा घी ही इस लजीज व्यंजन को तैयार करने के लिए काफी है। इस पकवान की सबसे खास बात इसका अनोखा स्वाद है जो हल्का खट्टा और मीठा होता है, और एक बार चखने के बाद लंबे समय तक याद रहता है।

## अचानक आने वाले मेहमानों के लिए बेहतरीन विकल्प
कई बार घरों में बिन बुलाए मेहमान आ जाते हैं और उस वक्त समझ पाना मुश्किल होता है कि उन्हें क्या नया और पारंपरिक परोसा जाए। ऐसी स्थिति में देवघर का यह मोरब्बा एक शानदार और झटपट तैयार होने वाला विकल्प साबित होता है। इसे बनाने की प्रक्रिया इतनी सरल है कि कम समय में ही एक बेहतरीन मेहमाननवाजी का इंतजाम हो जाता है। इसमें लगने वाली सामग्री बेहद आम है, लेकिन इसका स्वाद और पारंपरिक जुड़ाव मेहमानों को जरूर पसंद आता है। आधुनिक समय की भागदौड़ भरी जिंदगी में यह पकवान पुरानी पारंपरिक खानपान शैली की याद ताजा कर देता है।

## मोरब्बा तैयार करने की आसान चरण-दर-चरण विधि
इस स्वादिष्ट व्यंजन को बनाने की शुरुआत सबसे पहले एक साफ बर्तन में आवश्यकतानुसार आटा लेने से होती है। अब इस आटे में धीरे-धीरे दही मिलाया जाता है और इसका एक गाढ़ा घोल तैयार किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में इस बात का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि बैटर तैयार करते वक्त पानी का बिल्कुल भी इस्तेमाल न किया जाए। केवल दही की मदद से ही इस मिश्रण को गूंथा या तैयार किया जाना चाहिए। घोल न तो बहुत ज्यादा पतला होना चाहिए और न ही अत्यधिक गाढ़ा होना चाहिए। इसकी बनावट को ऐसा रखना होता है कि हाथों की सहायता से इसके छोटे-छोटे गोल आकार आसानी से बनाए जा सकें।

बैटर तैयार होने के बाद चूल्हे पर एक कड़ाही चढ़ाई जाती है और उसमें जरूरत के मुताबिक घी या तेल डाला जाता है। जब तेल अच्छी तरह गर्म हो जाता है, तब तैयार किए गए मिश्रण को हाथों से छोटे-छोटे लड्डू के आकार में ढालकर धीरे-धीरे कड़ाही में छोड़ा जाता है। इन्हें मध्यम आंच पर सुनहरा भूरा होने तक अच्छी तरह से तला जाता है ताकि वे अंदर तक पूरी तरह पक जाएं। जब ये गोले सिककर तैयार हो जाते हैं, तो इन्हें कड़ाही से बाहर निकालकर एक तरफ रख दिया जाता है।

इसके बाद एक अलग बर्तन या कड़ाही में गुड़ को लेकर गर्म किया जाता है। जब गुड़ पूरी तरह से पिघलकर चाशनी का रूप ले लेता है, तब उसमें पहले से तले हुए गोलों को मिला दिया जाता है। इस मिश्रण को कुछ मिनटों तक लगातार चलाते रहना पड़ता है ताकि गुड़ की चाशनी हर एक गोले पर अच्छी तरह से लिपट जाए। इसके बाद यह जायकेदार देसी मोरब्बा बनकर बिल्कुल तैयार हो जाता है। इसे कुछ देर के लिए ठंडा होने के लिए छोड़ दिया जाता है और फिर अपने परिवार के सदस्यों या मेहमानों को परोसा जाता है।

## पारंपरिक रसोई की अनमोल विरासत
इस पारंपरिक व्यंजन का आकर्षण सिर्फ इसके अनोखे स्वाद तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसे बनाने की पूरी शैली भी अपने आप में अनोखी है। बेहद कम संसाधनों और सामग्री में तैयार होने वाला यह मोरब्बा हमें गांव-घर की पुरानी रसोइयों और पारंपरिक जीवनशैली की याद दिलाता है। इस पकवान को बनाकर दो से तीन दिनों तक सुरक्षित रखकर भी खाया जा सकता है, हालांकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने इसे किस तरह के वातावरण में और कैसे संग्रहीत किया है। सर्दियों के दिनों में शाम की चाय के साथ या फिर घर आने वाले अतिथियों को कुछ अलग और पारंपरिक खिलाने के लिए देवघर का यह मोरब्बा एक बेहतरीन विकल्प बन जाता है। इस बार सर्दियों के मौसम में बाजार की कृत्रिम मिठाइयों से तौबा करके आटा, दही और गुड़ के मेल से बनने वाले इस पारंपरिक और देसी पकवान का लुत्फ जरूर उठाएं।

## इसका आप पर असर
देवघर के इस पारंपरिक मोरब्बा को घर पर बनाने से सर्दियों में एक नया और पौष्टिक पकवान खाने को मिलता है, जो आपके खान-पान में विविधता लाता है।

- **सामग्री की बचत:** इस पकवान को तैयार करने के लिए बाजार से कोई महंगी सामग्री खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ती है क्योंकि आटा, दही और गुड़ हर घर में आसानी से उपलब्ध होते हैं।
- **समय की बचत:** अचानक आने वाले मेहमानों के लिए यह व्यंजन बहुत कम समय में झटपट तैयार किया जा सकता है, जिससे मेहमाननवाजी आसान हो जाती है।
- **पारंपरिक स्वाद:** यह पकवान आधुनिक और मिलावटी मिठाइयों से दूर, घर के बने शुद्ध और पारंपरिक स्वाद का अनुभव कराता है।
- **भंगुरता और शेल्फ लाइफ:** इसे बनाकर दो से तीन दिनों तक आसानी से खाया जा सकता है, हालांकि सही तरीके से भंडारण न करने पर इसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
- **स्वास्थ्य लाभ:** गुड़ और आटे से बना होने के कारण यह सर्दियों के मौसम में शरीर को ऊर्जा प्रदान करने में मदद करता है।

## ऐसा क्यों हुआ
पारंपरिक व्यंजनों और सर्दियों के खानपान की संस्कृति के कारण झारखंड के ग्रामीण अंचलों में ऐसे पकवानों को विशेष महत्व दिया जाता है। कम लागत और स्थानीय रूप से मिलने वाली सामग्रियों से स्वादिष्ट व्यंजन तैयार करने की यह पुरानी परंपरा आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय है।

- **स्थानीय सामग्री की उपलब्धता:** आटा, दही और गुड़ जैसी बुनियादी चीजें हर ग्रामीण और शहरी रसोई में आसानी से मिल जाती हैं, जिससे इस पकवान को बनाना बहुत सुगम हो जाता है।
- **सर्दियों की खानपान शैली:** ठंडे मौसम में शरीर को गर्म रखने और ऊर्जा देने वाले गुड़ और तली हुई चीजें खाने की पुरानी आदत इस रेसिपी का मुख्य आधार है।
- **त्वरित तैयारी की आवश्यकता:** कम समय में मेहमानों के सत्कार के लिए आसान और झटपट बनने वाले स्थानीय व्यंजनों की मांग हमेशा से बनी रही है।
- **पारंपरिक विरासत का संरक्षण:** पीढ़ियों से चली आ रही इन घरेलू विधियों को जीवंत रखने के लिए लोग आज भी इस तरह के पारंपरिक व्यंजनों को अपने घरों में बनाते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. देवघर का पारंपरिक मोरब्बा मुख्य रूप से किन सामग्रियों से बनता है?
इसे मुख्य रूप से गेहूं के आटे, ताजी दही, गुड़ और घी या तेल की मदद से तैयार किया जाता है।

### 2. क्या इस रेसिपी में पानी का इस्तेमाल किया जाता है?
नहीं, इस मोरब्बा का बैटर तैयार करने के लिए पानी का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं किया जाता, इसे सिर्फ दही से गूंथा जाता है।

### 3. तले हुए गोलों को किस चीज में डुबोया जाता है?
तले हुए गोलों को पिघले हुए गर्म गुड़ की चाशनी में अच्छी तरह से डुबोया और लपेटा जाता है।

### 4. इस पकवान को कितने दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है?
इस मोरब्बा को बनाकर दो से तीन दिनों तक रखकर खाया जा सकता है, हालांकि इसकी ताजगी भंडारण की स्थिति पर निर्भर करती है।

### 5. यह पकवान किस मौसम में खासतौर पर बनाया जाता है?
यह पारंपरिक पकवान मुख्य रूप से सर्दियों के मौसम में झारखंड के घरों में बनाया और खाया जाता है।

### 6. क्या यह मोरब्बा बाजार में आसानी से मिल जाता है?
नहीं, यह बाजार में मिलने वाली मिठाई नहीं है बल्कि झारखंड के घरों में आसानी से तैयार होने वाला पारंपरिक पकवान है।

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